सूची–I एवं सूची–II को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर चुनिए – सूची–I (A) गागरोण का युद्ध (B) सारंगपुर का युद्ध (C) सुमेल का युद्ध (D) साहेबा का युद्ध सूची–II (i) 1519 ई. (ii) 1544 ई. (iii) 1437 ई. (iv) 1541- 42 ई. कूट –
- (1)A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv)
- (2)A-(i), B-(iii), C-(ii), D-(iv)
- (3)A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i)
- (4)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), A-(i), B-(iii), C-(ii), D-(iv).
A-(i): गागरोण, 1519। राम वल्लभ सोमानी की हिस्ट्री ऑफ़ मेवाड़ (1976) गागरोण के युद्ध का वर्णन करती है, जिसमें मालवा का महमूद खिलजी द्वितीय राणा सांगा के राजपूतों द्वारा घायल कर बंदी बनाया गया। द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ़ द इंडियन पीपल, खंड VI (1960) इस पराजय और बंदी बनाए जाने को 1519 ई. में रखती है।
B-(iii): सारंगपुर, 1437। हरबिलास शारदा की महाराणा कुम्भा (द्वितीय संस्करण, 1932) के अनुसार कुम्भा और सुल्तान महमूद खिलजी की सेनाएँ 1437 ई. में सारंगपुर के निकट भिड़ीं, और सुल्तान की सेना बुरी तरह पराजित हुई।
C-(ii): सुमेल, 1544। जोधपुर ज़िला गज़ेटियर (1979) के अनुसार जैता और कूंपा के नेतृत्व में मारवाड़ की एक टुकड़ी 1544 में समेल में शेरशाह से लड़ी और पराजित हुई।
D-(iv): साहेबा, 1541-42। चूरू ज़िला गज़ेटियर (1970) के अनुसार जोधपुर के मालदेव ने 1541 में बीकानेर पर आक्रमण किया और जैतसिंह को मार डाला। जेम्स एम. हेस्टिंग्स (2002) साहेबा के युद्ध में राव जैतसी की मृत्यु को 1542 में रखते हैं।
चारों युग्मों वाला कूट विकल्प (2), A-(i), B-(iii), C-(ii), D-(iv) है।
याद रखने की बात: सारंगपुर 1437 (कुम्भा), गागरोण 1519 (सांगा), साहेबा 1541-42 (मालदेव बनाम बीकानेर), सुमेल 1544 (शेरशाह बनाम मारवाड़)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv) — यह कूट गागरोण (1519) और साहेबा (1541-42) सही देता है, पर बाकी दो को आपस में बदल देता है।
यह सारंगपुर को 1544 और सुमेल को 1437 देता है। शारदा सारंगपुर के निकट कुम्भा की विजय को 1437 ई. में रखते हैं, जबकि जोधपुर ज़िला गज़ेटियर समेल में शेरशाह के विरुद्ध लड़ाई को 1544 में रखता है।
- (3)A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i) — इसमें केवल सारंगपुर–1437 सही है। गागरोण को 1544, सुमेल को 1541-42 और साहेबा को 1519 दिया गया है।
1519 महमूद खिलजी द्वितीय पर सांगा की विजय का वर्ष है, जिसे सोमानी गागरोण का युद्ध कहते हैं। 1544 सुमेल का है, और 1541-42 साहेबा में बीकानेर के राव जैतसी के विरुद्ध मालदेव के युद्ध का।
- (4)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i) — यह कूट सारंगपुर (1437) और सुमेल (1544) सही देता है, पर गागरोण और साहेबा को आपस में बदल देता है।
यह गागरोण को 1541-42 और साहेबा को 1519 देता है। गागरोण का 1519 का युद्ध मालवा के विरुद्ध सांगा का था, जबकि 1541-42 बीकानेर पर मालदेव के आक्रमण और साहेबा में जैतसी की मृत्यु के लिए दी गई अवधि है।
अवधारणा
इनमें से दो युद्ध मेवाड़ और मालवा सल्तनत के लंबे संघर्ष के हैं। शारदा सारंगपुर के निकट 1437 में महमूद खिलजी पर कुम्भा की विजय का वर्णन करते हैं; सुल्तान भागकर माण्डू गया और बाद में बंदी बनाकर चित्तौड़ लाया गया।
अस्सी से अधिक वर्ष बाद सांगा महमूद खिलजी द्वितीय से लड़े। द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ़ द इंडियन पीपल के अनुसार सांगा ने मेदिनी राय को, जिनके अनुयायियों ने मालवा के प्रशासन पर नियंत्रण कर लिया था, गागरोण सहित कई परगने दिए थे।
सोमानी के अनुसार सुल्तान ने मेदिनी राय की शक्ति पर अंकुश लगाने के लिए गागरोण पर चढ़ाई की; सुल्तान घायल हुआ, बंदी बना और सांगा के तंबू में उसकी सेवा-शुश्रूषा की गई।
बाकी दो युद्ध मालदेव के समय के मारवाड़ के हैं। चूरू ज़िला गज़ेटियर के अनुसार उन्होंने 1541 में बीकानेर पर आक्रमण किया, जैतसिंह को मार डाला और उसका लगभग आधा क्षेत्र अपने राज्य में मिला लिया; तब कल्याणसिंह के भाई भीमराज ने शेरशाह से सहायता माँगी।
शेरशाह ने मारवाड़ पर चढ़ाई की। जोधपुर ज़िला गज़ेटियर के अनुसार जाली पत्रों से अपने सामंतों पर संदेह होने के बाद मालदेव लौट गए, और जैता और कूंपा 1544 में समेल में लड़ते रहे।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत के अंतर्गत "प्रमुख राजवंशों के महत्वपूर्ण शासकों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ–गुहिल, प्रतिहार, चौहान, परमार, राठौड़, सिसोदिया और कच्छावा।" सूचीबद्ध है।
कुम्भा और सांगा मेवाड़ के सिसोदिया शासक थे; मालदेव मारवाड़ के राठौड़ शासक थे, और जैतसी बीकानेर के राठौड़ राज्य के शासक थे।
ये युद्ध भारत का इतिहास शीर्षक के "मुगलकाल : राजनीतिक चुनौतियाँ एवं सुलह–अफगान, राजपूत, दक्कनी राज्य और मराठा।" से भी जुड़ते हैं। अफगान सम्राट शेरशाह सूरी समेल में मारवाड़ की सेना से लड़ा था।
गागरोण स्वयं एक से अधिक बार हाथ बदलता रहा। रीमा हूजा की ए हिस्ट्री ऑफ़ राजस्थान के अनुसार मालवा के हुशंगशाह ने इसे 1423 में लिया और महमूद खिलजी ने 1444 में इसे खींचियों से छीना।
मुख्य तथ्य
- हरबिलास शारदा: कुम्भा और महमूद खिलजी की सेनाएँ 1437 ई. में सारंगपुर के निकट भिड़ीं, और सुल्तान की सेना पराजित हुई।
- द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ़ द इंडियन पीपल, खंड VI: 1519 ई. में सांगा ने मालवा के महमूद द्वितीय को पराजित कर बंदी बनाया।
- चूरू ज़िला गज़ेटियर (1970): 1541 में जोधपुर के मालदेव ने बीकानेर पर आक्रमण किया, जैतसिंह को मार डाला और उसका लगभग आधा क्षेत्र मिला लिया।
- जेम्स एम. हेस्टिंग्स (2002) साहेबा के युद्ध में राव जैतसी की मृत्यु को 1542 ई. में रखते हैं।
- जोधपुर ज़िला गज़ेटियर (1979): जैता और कूंपा 1544 में समेल में शेरशाह से लड़े; राजपूत सामंत मारे गए और मारवाड़ की सेना पराजित हुई।
कूट: A-(i), B-(iii), C-(ii), D-(iv), विकल्प (2)। स्रोत: शारदा; सोमानी; द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ़ द इंडियन पीपल, खंड VI; चूरू (1970) और जोधपुर (1979) ज़िला गज़ेटियर; हेस्टिंग्स (2002)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- मेवाड़–मालवा के दोनों युद्धों को आपस में मिला देना। सारंगपुर (1437) महमूद खिलजी के विरुद्ध कुम्भा का था; गागरोण (1519) महमूद खिलजी द्वितीय के विरुद्ध सांगा का।
- साहेबा को सुमेल के बाद रख देना। बीकानेर पर मालदेव का आक्रमण 1541-42 में हुआ, और बीकानेर की शेरशाह से सहायता की माँग 1544 की समेल की लड़ाई से पहले हुई।
- गागरोण की हर तिथि को 1519 का युद्ध मान लेना। हूजा के अनुसार गागरोण 1423 में हुशंगशाह ने और 1444 में महमूद खिलजी ने लिया।
कोई प्रश्न युद्धों को वर्षों से सुमेलित करवा सकता है, जैसा यहाँ है, या उन्हें लड़ने वाले शासकों से।
कोई प्रश्न युद्धों की सूची देकर उनका कालक्रम भी पूछ सकता है, या किसी युद्ध का नाम देकर पूछ सकता है कि मेवाड़ या मारवाड़ के किस शासक ने उसे लड़ा।
संबंधित PYQ
मारवाड़ के राव चूण्डा के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प का चयन कीजिए : A. राव चूण्डा को मण्डोर दहेज में प्राप्त हुआ । B. राव चूण्डा की मृत्यु के तुरंत पश्चात् राव रणमल राजगद्दी पर आसीन हुआ ।
- (1) केवल A सत्य है ।
- (2) केवल B सत्य है ।
- (3) A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4) A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर(1)
मारवाड़ का वही राठौड़ वंश, पहले के समय का: वह प्रश्न पूछता है कि क्या राव चूण्डा को मण्डोर दहेज में प्राप्त हुआ और क्या राव चूण्डा की मृत्यु के तुरंत पश्चात् राव रणमल राजगद्दी पर आसीन हुआ (RPSC की कुंजी: विकल्प (1), केवल A सत्य है)। यह प्रश्न युद्धों की तिथियाँ पूछता है, जिनमें से दो मालदेव के शासनकाल के हैं।
निम्न में से कौन सा राजस्थान का दुर्ग गिरि दुर्ग नहीं है ?
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उत्तर(1)
वही स्थान, अलग दृष्टि: वह प्रश्न पूछता है कि गागरोण, जालौर, चित्तौड़गढ़ और सिवाणा में से कौन सा दुर्ग गिरि दुर्ग नहीं है (RPSC की कुंजी: विकल्प (1), गागरोण का दुर्ग)। यह प्रश्न गागरोण के युद्ध की तिथि पूछता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मेवाड़ के किस शासक ने 1519 में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय को पराजित कर बंदी बनाया?
- (a)राणा कुम्भा
- (b)राणा सांगा
- (c)राणा मोकल
- (d)राणा रायमल
उत्तर(2) — द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ़ द इंडियन पीपल (खंड VI) 1519 में राणा सांगा द्वारा मालवा के महमूद द्वितीय की पराजय और सुल्तान के बंदी बनाए जाने को दर्ज करती है।राणा कुम्भा (1) 1437 में सारंगपुर के निकट महमूद खिलजी से लड़े थे। राणा मोकल (3) कुम्भा के पिता थे, और राणा रायमल (4), सांगा के पिता, हूजा की तिथियों के अनुसार 1473 से 1508 तक शासक रहे।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित युद्धों को कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए: A. सुमेल B. सारंगपुर C. साहेबा D. गागरोण (राणा सांगा)
- (a)B, D, C, A
- (b)B, C, D, A
- (c)D, B, A, C
- (d)B, D, A, C
उत्तर(1) — सारंगपुर 1437, गागरोण 1519, साहेबा 1541-42, सुमेल 1544। विकल्प (2) साहेबा को गागरोण से पहले रखता है; विकल्प (3) गागरोण को सारंगपुर से पहले रखता है; विकल्प (4) सुमेल (1544) को साहेबा (1541-42) से पहले रखता है।