राजस्थान में कहाँ, ‘वैदिक यंत्रालय’ छापाखाना स्थापित किया गया था?
- (1)जोधपुर
- (2)उदयपुर
- (3)अजमेर
- (4)जयपुर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), अजमेर.
वैदिक यंत्रालय स्वामी दयानन्द सरस्वती का छापाखाना था। इसकी शुरुआत राजस्थान में नहीं हुई: भवानीलाल भारतीय द्वारा संपादित महेशप्रसाद मौलवी ग्रन्थावली के अनुसार यह 1880 में काशी में स्थापित हुआ, 1881 में प्रयाग गया और 1891 में अजमेर पहुँचा।
भारतीय की परोपकारिणी सभा का इतिहास (1975) भी यंत्रालय के 1891 में अजमेर आने को दर्ज करती है। हरबिलास शारदा की वर्क्स ऑफ़ महर्षि दयानन्द एंड परोपकारिणी सभा (1942) बताती है कि सत्यार्थ प्रकाश के 1884, 1887 और 1890 के संस्करण तब छपे जब यंत्रालय इलाहाबाद में ही था।
इस प्रकार राजस्थान में यह छापाखाना अजमेर में, यानी विकल्प (3) में, स्थापित हुआ, जहाँ परोपकारिणी सभा इसे चलाती थी; शारदा की अपनी 1942 की पुस्तक वैदिक यंत्रालय, अजमेर के मैनेजर द्वारा प्रकाशित हुई थी।
याद रखने की बात: वैदिक यंत्रालय — काशी 1880, प्रयाग 1881, अजमेर 1891।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)जोधपुर — छापाखाना जोधपुर में स्थापित नहीं हुआ। मौलवी ग्रन्थावली वैदिक यंत्रालय को काशी से प्रयाग और फिर अजमेर तक ले जाती है, जहाँ यह 1891 में पहुँचा।
उस विवरण में राजस्थान का नगर अजमेर है, जो 1891 से परोपकारिणी सभा के अधीन यंत्रालय का ठिकाना रहा।
- (2)उदयपुर — उदयपुर परोपकारिणी सभा का केंद्र था, छापाखाने का नहीं। भारतीय के अनुसार दयानन्द ने उदयपुर में सभा का पुनर्गठन किया, जहाँ उसका पंजीकरण 27 फरवरी 1883 का है, और सभा का कार्यालय 1893 तक उदयपुर में रहा।
छापाखाना स्वयं 1891 में प्रयाग से अजमेर आया, और सभा का कार्यालय 1893 में उसके पीछे अजमेर आया।
- (4)जयपुर — छापाखाने के दर्ज स्थानांतरणों में जयपुर नहीं आता। मौलवी ग्रन्थावली इसे काशी (1880) से प्रयाग (1881) और फिर अजमेर (1891) तक ले जाती है।
भारतीय का परोपकारिणी सभा का इतिहास भी 1891 से यंत्रालय को अजमेर में रखता है।
अवधारणा
आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती ने अपनी रचनाएँ छापने के लिए अपना छापाखाना स्थापित किया। मौलवी ग्रन्थावली इसकी काशी में स्थापना को 12 फरवरी 1880 की बताती है; यह 1881 में प्रयाग और 1891 में अजमेर गया।
छापाखाना परोपकारिणी सभा को मिला। भारतीय के अनुसार दयानन्द ने पहले 1880 में मेरठ में पंजीकृत एक वसीयत (स्वीकार पत्र) द्वारा सभा बनाई, जिसमें उसे उनके वस्त्र, धन, पुस्तकों और यंत्रालय पर अधिकार दिए गए।
1883 के आरंभ में उदयपुर में एक दूसरे स्वीकार पत्र द्वारा सभा का पुनर्गठन हुआ; उदयपुर राज्य की जिस परिषद को भारतीय महद्राज सभा कहते हैं, उसने इसे 27 फरवरी 1883 को पंजीकृत किया। दयानन्द का निधन 30 अक्टूबर 1883 को अजमेर में हुआ।
सभा का कार्यालय 1893 तक उदयपुर में रहा, जब हरबिलास शारदा संयुक्त मंत्री बने और कार्यालय अजमेर ले जाया गया, जहाँ छापाखाना पहले से था।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत के अंतर्गत "आधुनिक राजस्थान का उदय : 19वीं–20वीं शताब्दी के दौरान राजस्थान में सामाजिक जागृति के कारक। राजनीतिक जागरण : समाचार पत्रों एवं राजनीतिक संस्थाओं की भूमिका।" सूचीबद्ध है।
आर्य समाज ऐसा ही एक कारक है। राजस्थान से इसके संबंध उदयपुर से होकर जाते हैं, जहाँ राज्य की परिषद ने 1883 में परोपकारिणी सभा को पंजीकृत किया, और अजमेर से, जहाँ दयानन्द का निधन हुआ और सभा स्थायी रूप से बसी।
छापाखाना दयानन्द की अपनी रचनाएँ छापता था। शारदा की 1942 की पुस्तक बताती है कि सत्यार्थ प्रकाश के 1884, 1887 और 1890 के संस्करण वैदिक यंत्रालय से तब निकले जब वह अजमेर जाने से पहले इलाहाबाद में था।
मुख्य तथ्य
- मौलवी ग्रन्थावली (सं. भवानीलाल भारतीय) वैदिक यंत्रालय की काशी में स्थापना को 12 फरवरी 1880 की बताती है।
- मौलवी ग्रन्थावली के अनुसार यंत्रालय 1881 में प्रयाग गया और 1891 में अजमेर पहुँचा; भारतीय का सभा का इतिहास भी अजमेर के लिए 1891 देता है।
- भारतीय: परोपकारिणी सभा का उदयपुर में पुनर्गठन हुआ और वहाँ 27 फरवरी 1883 को उसका पंजीकरण हुआ।
- स्वामी दयानन्द सरस्वती का निधन 30 अक्टूबर 1883 को अजमेर में हुआ।
- भारतीय: सभा का कार्यालय 1893 तक उदयपुर में रहा, फिर हरबिलास शारदा के संयुक्त मंत्री रहते अजमेर आया।
राजस्थान में छापाखाना अजमेर में स्थापित हुआ, विकल्प (3)। स्रोत: मौलवी ग्रन्थावली; भारतीय (1975); शारदा (1942)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अजमेर को छापाखाने का पहला ठिकाना मान लेना। वैदिक यंत्रालय 1880 में काशी में शुरू हुआ और प्रयाग होते हुए 1891 में ही अजमेर आया।
- परोपकारिणी सभा के वहाँ पंजीकृत होने के कारण उदयपुर चुन लेना। उदयपुर में 1893 तक सभा का कार्यालय था; छापाखाना अजमेर में था।
- छापाखाने के स्थानांतरण (1891) और सभा के कार्यालय के स्थानांतरण (1893) को एक मान लेना। भारतीय दोनों के अलग-अलग वर्ष देते हैं।
कोई प्रश्न 19वीं शताब्दी के किसी छापाखाने, समाचार पत्र या संस्था का नाम देकर पूछ सकता है कि वह किस नगर में स्थापित हुई, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कोई छापाखाना किन स्थानों से किस क्रम में गुज़रा, या दयानन्द सरस्वती की संस्थाओं को उनसे जुड़े नगरों से सुमेलित करवा सकता है।
संबंधित PYQ
वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन असत्य है ?
- (1) इसकी स्थापना सन् 1888 में कर्नल सी.के.एम. वाल्टर के प्रयासों से हुई थी ।
- (2) इसका उद्देश्य राजस्थान के राजपूतों और दलितों के लिए सुधारात्मक कार्य करना था ।
- (3) इसकी प्रथम बैठक का आयोजन अजमेर में हुआ था ।
- (4) सभा ने अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सामाजिक नियम बनाए ।
उत्तर(2)
पाठ्यक्रम का वही शीर्षक, राजस्थान में सामाजिक जागृति के कारक: वह प्रश्न पूछता है कि वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा के संबंध में कौन सा कथन असत्य है (RPSC की कुंजी: विकल्प (2), इसका उद्देश्य राजस्थान के राजपूतों और दलितों के लिए सुधारात्मक कार्य करना था)। यह प्रश्न पूछता है कि वैदिक यंत्रालय छापाखाना कहाँ स्थापित किया गया।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भवानीलाल भारतीय के परोपकारिणी सभा के इतिहास के अनुसार 1893 में सभा का कार्यालय उदयपुर से कहाँ ले जाया गया?
- (a)मेरठ
- (b)अजमेर
- (c)जोधपुर
- (d)प्रयाग
उत्तर(2) — भारतीय दर्ज करते हैं कि कार्यालय 1893 तक उदयपुर में रहा और फिर संयुक्त मंत्री हरबिलास शारदा के समय अजमेर ले जाया गया। मेरठ (1) वह स्थान है जहाँ सभा पहली बार 1880 में पंजीकृत हुई। प्रयाग (4) में 1881 से 1891 तक छापाखाना रहा। जोधपुर (3) वह नगर नहीं है जिसका वे नाम लेते हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जिन स्थानों पर वैदिक यंत्रालय कार्यरत रहा, उन्हें कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए: A. अजमेर B. काशी C. प्रयाग
- (a)A, B, C
- (b)C, B, A
- (c)B, C, A
- (d)B, A, C
उत्तर(3) — मौलवी ग्रन्थावली के अनुसार पहले काशी (1880), फिर प्रयाग (1881), फिर अजमेर (1891)। विकल्प (1) और (2) अजमेर या प्रयाग से शुरू होते हैं, और विकल्प (4) अजमेर को प्रयाग से पहले रखता है।