मारवाड़ के राव चूण्डा के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प का चयन कीजिए : A. राव चूण्डा को मण्डोर दहेज में प्राप्त हुआ । B. राव चूण्डा की मृत्यु के तुरंत पश्चात् राव रणमल राजगद्दी पर आसीन हुआ ।
- (1)केवल A सत्य है ।
- (2)केवल B सत्य है ।
- (3)A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4)A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), केवल A सत्य है ।
कथन A सत्य है। राव चूण्डा ने लगभग 1395 में प्रतिहारों की ईंदा शाखा में विवाह किया, और मण्डोर उन्हें दहेज में मिला।
बी.एन. रेउ की ‘ग्लोरीज़ ऑफ़ मारवाड़’ इस दहेज को 1395 का बताती है और ईंदों को मुस्लिम सेनाओं के सामने मण्डोर को बचाए रखने में असमर्थ बताती है। इसके बाद मण्डोर चूण्डा की राजधानी बना।
एक डिंगल दोहा इस परम्परा को जीवित रखता है। वह कहता है कि राठौड़ों को ईंदों का उपकार सदा याद रखना चाहिए, जिन्होंने चूण्डा को विवाह में बेटी और दहेज में मण्डोर दिया।
कथन B असत्य है। चूण्डा ने अपने बड़े पुत्र रणमल को छोड़कर अपने छोटे पुत्र कान्हा को उत्तराधिकारी बनाया था। कान्हा गद्दी पर बैठे और कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई; फिर राव सत्ता का अल्प शासन रहा। इसके बाद ही रणमल ने मेवाड़ की सेना की सहायता से मण्डोर लिया।
A सत्य और B असत्य होने से कूट विकल्प (1) है।
याद रखने की बात: चूण्डा, फिर कान्हा, फिर सत्ता, फिर रणमल।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)केवल B सत्य है । — यह कूट असत्य कथन को रखता है और सत्य कथन को छोड़ देता है। चूण्डा की मृत्यु के बाद, उनकी इच्छा के अनुसार, कान्हा राजगद्दी पर बैठे; फिर सत्ता आए, और रणमल इन दोनों के बाद ही आए।
कथन A, कि चूण्डा को मण्डोर दहेज में मिला, वही है जिसका परम्परा समर्थन करती है।
- (3)A और B दोनों सत्य हैं । — कथन A टिकता है, पर B नहीं। रणमल चूण्डा के तुरंत पश्चात् गद्दी पर नहीं बैठे: पहले कान्हा और फिर सत्ता ने शासन किया।
पिता द्वारा उपेक्षित रणमल मेवाड़ के दरबार में चले गए थे, जहाँ उनकी बहन हंसाबाई का विवाह राणा लाखा से हुआ था। वे मेवाड़ की सहायता से मण्डोर लेने लौटे।
- (4)A और B दोनों असत्य हैं । — यह कूट कथन A को नकारता है, जो सत्य है। लगभग 1395 में ईंदा प्रतिहारों में विवाह करने पर चूण्डा को मण्डोर दहेज में मिला, और उन्होंने उसे अपनी राजधानी बनाया।
केवल कथन B असत्य है, क्योंकि चूण्डा के उत्तराधिकारी कान्हा थे, रणमल नहीं।
अवधारणा
जोधपुर के अस्तित्व में आने से पहले मारवाड़ के राठौड़ मण्डोर से शासन करते थे। राव चूण्डा ने लगभग 1395 में मण्डोर को अपनी राजधानी बनाया। राव जोधा ने 1459 में मण्डोर से लगभग छह मील दक्षिण में जोधपुर की स्थापना की, और बाद में जोधपुर ने राजधानी के रूप में मण्डोर का स्थान लिया।
इस वंश में उत्तराधिकार सदा बड़े पुत्र को नहीं मिला। चूण्डा ने अपने छोटे पुत्र कान्हा को उत्तराधिकारी बनाया, और उनके बड़े पुत्र रणमल मेवाड़ चले गए।
"तुरंत पश्चात्" वाला कथन पूरे उत्तराधिकार-क्रम की परख है, केवल इसकी नहीं कि बाद में कभी किसने शासन किया।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "प्रमुख राजवंशों के महत्वपूर्ण शासकों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ–गुहिल, प्रतिहार, चौहान, परमार, राठौड़, सिसोदिया और कच्छावा।" सूचीबद्ध है।
चूण्डा ने मारवाड़ का विस्तार किया। उन्होंने 1396 में गुजरात के ज़फ़र ख़ाँ से मण्डोर की रक्षा की और सांभर, डीडवाना, खाटू तथा अजमेर जैसे स्थानों पर अधिकार किया।
नागौर में भाटियों और सांखलों की संयुक्त सेना ने, मुल्तान के सूबेदार की सहायता से, उन्हें मार डाला; रेउ इस सूबेदार का नाम सलीम बताते हैं।
मारवाड़–मेवाड़ का संबंध चूण्डा की पुत्री हंसाबाई से जुड़ा था, जो राणा लाखा की पत्नी थीं। रणमल बाद में चित्तौड़ में शक्तिशाली हुए और लगभग 1438 में वहीं उनकी हत्या कर दी गई।
मुख्य तथ्य
- राव चूण्डा ने लगभग 1395 में प्रतिहारों की ईंदा शाखा में विवाह किया, और मण्डोर उनकी राजधानी बना।
- एक डिंगल दोहा स्मरण कराता है कि ईंदों ने चूण्डा को विवाह में बेटी और दहेज में मण्डोर दिया।
- नागौर में भाटियों और सांखलों ने मुल्तान की सहायता से चूण्डा को मार डाला; रेउ की ‘ग्लोरीज़ ऑफ़ मारवाड़’ इसे 1424 का बताती है, ‘ए कॉम्प्रिहेंसिव हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया’ (खंड 5) 1423 का।
- चूण्डा के बाद कान्हा और फिर सत्ता आए, दोनों का शासन अल्प रहा; इसके बाद रणमल ने मेवाड़ की सहायता से मण्डोर लिया।
- रणमल के पुत्र राव जोधा ने 1453 में मण्डोर वापस लिया और 12 मई 1459 को जोधपुर की नींव रखी।
रणमल चूण्डा के तुरंत पश्चात् नहीं, बल्कि उनके बाद तीसरे क्रम पर आए।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि बड़ा पुत्र ही उत्तराधिकारी बना: रणमल चूण्डा के बड़े पुत्र थे, पर चूण्डा ने कान्हा को उत्तराधिकारी बनाया।
- "तुरंत पश्चात्" को ढीले अर्थ में पढ़ना: रणमल मारवाड़ के राव बने अवश्य, पर कान्हा और सत्ता के बाद ही।
- चूण्डा की मृत्यु का एक ही वर्ष तय कर लेना: रेउ की ‘ग्लोरीज़ ऑफ़ मारवाड़’ 1424 देती है, जबकि ‘ए कॉम्प्रिहेंसिव हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया’ (खंड 5) 1423 देती है।
कोई प्रश्न किसी शासक को राजधानी कैसे मिली, इस पर एक कथन को उसका उत्तराधिकारी कौन बना, इस पर एक कथन के साथ रखकर पूछ सकता है कि कौन-सा सत्य है।
कोई प्रश्न शासकों का क्रम भी पूछ सकता है, या शासकों को मण्डोर के राजधानी बनने या जोधपुर की स्थापना जैसी घटनाओं से सुमेलित करवा सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मारवाड़ की राजगद्दी पर राव चूण्डा का उत्तराधिकारी कौन बना ?
- (a)राव रणमल
- (b)राव कान्हा
- (c)राव जोधा
- (d)राव सत्ता
उत्तर(2) — चूण्डा ने अपने छोटे पुत्र कान्हा को उत्तराधिकारी बनाया था, और कान्हा ही उनके बाद गद्दी पर बैठे। विकल्प (1) कान्हा और सत्ता के बाद ही गद्दी पर आए; विकल्प (3) रणमल के पुत्र थे; और विकल्प (4) ने कान्हा के बाद शासन किया। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित को कालानुक्रम में व्यवस्थित कीजिए : A. राव जोधा द्वारा जोधपुर की स्थापना B. राव चूण्डा द्वारा मण्डोर को राजधानी बनाना C. चित्तौड़ में राव रणमल की हत्या D. राव जोधा द्वारा मण्डोर वापस लेना कूट :
- (a)B, C, D, A
- (b)B, D, C, A
- (c)C, B, D, A
- (d)B, C, A, D
उत्तर(1) — B (लगभग 1395), C (लगभग 1438), D (1453), A (1459)। विकल्प (2) जोधा द्वारा मण्डोर वापस लेने को उनके पिता की मृत्यु से पहले रखता है; विकल्प (3) रणमल की मृत्यु को चूण्डा की राजधानी से पहले रखता है; और विकल्प (4) जोधपुर की स्थापना को मण्डोर वापस लेने से पहले रखता है।