बखनाजी, संतदास जी, जगन्नाथ दास और माधोदास नामक संतों का संबंध निम्नलिखित में से किस सम्प्रदाय के साथ था?
- (1)दादू पंथ
- (2)लालदासी सम्प्रदाय
- (3)जसनाथी सम्प्रदाय
- (4)रामस्नेही सम्प्रदाय
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), दादू पंथ.
प्रश्न के चारों नाम दादू परम्परा के हैं, इसलिए सम्प्रदाय दादू पंथ है। हीरालाल माहेश्वरी की हिस्ट्री ऑफ़ राजस्थानी लिटरेचर (साहित्य अकादेमी) दादू सम्प्रदाय वाले खंड में इन चारों की चर्चा करती है।
माहेश्वरी नरैना के बखनाजी (लगभग 1553–1623) को दादू का शिष्य बताते हैं। वे लिखते हैं कि संतदास बारह-हज़ारी दादू के शिष्य थे और 1639 में फतेहपुर (शेखावाटी) में उनका देहांत हुआ।
उसी खंड के अनुसार आमेर के जगन्नाथ दास ने रज्जब की सर्वंगी के ढंग पर गुण गंज नामा नामक संकलन तैयार किया। जगजीवनजी के शिष्य बताए गए माधोदास सम्प्रदाय के उल्लेखनीय कवियों में गिनाए गए हैं।
माहेश्वरी लिखते हैं कि दादू (1543–1603) ने सांभर में ब्रह्म सम्प्रदाय की स्थापना की, जिसका नाम बाद में उनके नाम पर दादू पंथ पड़ा। उनका देहांत नरैना में हुआ।
बखनाजी, संतदास, जगन्नाथ दास और माधोदास दादू पंथ के नाम हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)लालदासी सम्प्रदाय — लालदासी सम्प्रदाय एक अलग संत के इर्द-गिर्द विकसित हुआ। माहेश्वरी लिखते हैं कि लालदास का जन्म 1540 में अलवर के निकट धोलीदूप में एक मेव मुस्लिम परिवार में हुआ, 1648 में उनका देहांत हुआ, और सम्प्रदाय का नाम उन्हीं पर पड़ा।
वे लालदास के शिष्यों में हरिदास, डूंगरसी साध, प्राणी साध और भीखन साध के नाम देते हैं। प्रश्न के चारों संतों में से कोई भी उस विवरण में नहीं है।
- (3)जसनाथी सम्प्रदाय — माहेश्वरी लिखते हैं कि जसनाथजी (1482–1506) ने लगभग 1500 में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना कतरियासर (बीकानेर) में की, जो इसकी प्रमुख पीठ है।
वे सम्प्रदाय के 35 नियम गिनाते हैं, जिनमें दैनिक हवन भी है, और जसनाथियों के अग्नि नृत्य का उल्लेख करते हैं। प्रश्न के चारों संतों को वे दादू के अंतर्गत रखते हैं, यहाँ नहीं।
- (4)रामस्नेही सम्प्रदाय — माहेश्वरी रेण, शाहपुरा, सिंहथल और खेड़ापा के चार रामस्नेही सम्प्रदायों का वर्णन करते हैं, जो 18वीं शताब्दी में अस्तित्व में आए। वे इन्हें एक साझा नाम वाली अलग-अलग परम्पराएँ मानते हैं।
रामचरणजी (1719–1798) ने 1760 में भीलवाड़ा में शाहपुरा शाखा की स्थापना की और 1769 में शाहपुरा चले गए। दादू के शिष्य संतदास बारह-हज़ारी का देहांत 1639 में, इन पीठों की स्थापना से पहले, हो चुका था।
दो नाम अवश्य दोहराए जाते हैं: इन शाखाओं के लिए माहेश्वरी की वंश-तालिका में गूदड़ पंथ के एक संतदास (1642–1749) और एक माधोदास मैदानी हैं। पर बखनाजी, संतदास बारह-हज़ारी, आमेर के जगन्नाथ दास और माधोदास को वे एक साथ दादू वाले खंड में रखते हैं।
अवधारणा
राजस्थान के संत सम्प्रदाय भक्ति परम्पराएँ हैं, जिनमें से हर एक किसी संस्थापक और संस्थापक तथा उनके शिष्यों की वाणी के इर्द-गिर्द बनी है। एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर के अनुसार दादू की रचनाओं में निराकार की उपासना प्रधान है।
दादू (1543–1603) ने करडाला और सांभर में साधना की, और माहेश्वरी के अनुसार उन्होंने सांभर में ब्रह्म सम्प्रदाय की स्थापना की, जो बाद में दादू पंथ कहलाया। यह चार शाखाओं में बँटा: खालसा, नागा, उत्तराधा और विरक्त।
उनके शिष्यों में सांगानेर के रज्जब, फतेहपुर के सुंदरदास (छोटे), बखनाजी, संतदास बारह-हज़ारी और वाजिंद थे। रज्जब का संकलन सर्वंगी लगभग 65 कवियों की रचनाएँ समेटता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान के इतिहास, कला और संस्कृति के अंतर्गत "धार्मिक जीवन : धार्मिक समुदाय, राजस्थान में संत एवं सम्प्रदाय। राजस्थान के लोक देवी–देवता।" सूचीबद्ध है।
संत परम्पराएँ राजस्थानी साहित्य का भी हिस्सा हैं: इनके कई संतों ने राजस्थानी में, कभी-कभी ब्रज मिलाकर, साखी और पद लिखे। किसी संत का नाम, उसके गुरु और उसकी पीठ मिलकर उसे एक परम्परा में रखते हैं।
मुख्य तथ्य
- दादू (1543–1603) ने सांभर में ब्रह्म सम्प्रदाय की स्थापना की, जो बाद में दादू पंथ कहलाया; उनका देहांत नरैना में हुआ (माहेश्वरी)।
- माहेश्वरी दादू पंथ की चार शाखाएँ बताते हैं: खालसा, नागा, उत्तराधा और विरक्त।
- दादू के शिष्य संतदास बारह-हज़ारी का देहांत 1639 में फतेहपुर में हुआ; उनकी वाणी आलम गंज कहलाती है।
- अलवर के निकट धोलीदूप में जन्मे लालदास (1540–1648) के नाम पर लालदासी सम्प्रदाय का नाम पड़ा।
- जसनाथजी (1482–1506) ने लगभग 1500 में बीकानेर के कतरियासर में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
तिथियाँ और स्थान हीरालाल माहेश्वरी की हिस्ट्री ऑफ़ राजस्थानी लिटरेचर (साहित्य अकादेमी) के अनुसार।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- एक ही नाम अलग-अलग परम्पराओं का हो सकता है। संतदास बारह-हज़ारी दादू के शिष्य थे; एक दूसरे संतदासजी गूदड़ पंथ से जुड़े हैं।
- लालदास ने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की, पर माहेश्वरी गरीबदास की परम्परा के एक बाद के लालदास का भी उल्लेख करते हैं, जिन्होंने दादू के 152 शिष्यों के नाम वाली नाम माला लिखी।
- चार रामस्नेही सम्प्रदायों का नाम साझा है, संस्थापक नहीं: हर पीठ का अपना संस्थापक है।
कोई प्रश्न संतों का एक समूह देकर पूछ सकता है कि वे किस सम्प्रदाय से संबंधित हैं, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न किसी सम्प्रदाय का नाम देकर उसका संस्थापक या प्रमुख पीठ भी पूछ सकता है, या यह पूछ सकता है कि कोई नामित संत किसके शिष्य थे।
संबंधित PYQ
राजस्थान में किस संप्रदाय के पुरुषों द्वारा अग्नि नृत्य किया जाता है ?
- (1) बिश्नोई संप्रदाय
- (2) रामस्नेही संप्रदाय
- (3) जसनाथी सिद्ध
- (4) दादू पंथ
उत्तर(3)
इन्हीं में से तीन सम्प्रदाय उसके विकल्पों में हैं (रामस्नेही संप्रदाय, जसनाथी सिद्ध, दादू पंथ), और लालदासी की जगह बिश्नोई संप्रदाय है। वह प्रश्न पूछता है कि राजस्थान में किस संप्रदाय के पुरुषों द्वारा अग्नि नृत्य किया जाता है (RPSC की कुंजी: विकल्प (3), जसनाथी सिद्ध); यह प्रश्न पूछता है कि चार नामित संतों का संबंध किस सम्प्रदाय से था।
संत लालदास के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प चुनिए : A. संत लालदास आजीवन अविवाहित रहे । B. संत लालदास की मृत्यु के पश्चात् उनके समाधि स्थान पर मन्दिर का निर्माण करवाया गया ।
- (1) केवल A सत्य है ।
- (2) केवल B सत्य है ।
- (3) A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4) A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर(2)
राजस्थान के संत एवं सम्प्रदाय का वही शीर्षक। वह प्रश्न संत लालदास के बारे में दो कथनों की जाँच करता है (RPSC की कुंजी: विकल्प (2), केवल B सत्य है); यहाँ लालदासी सम्प्रदाय गलत विकल्पों में से एक है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जिस रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ शाहपुरा में है, उसकी स्थापना किसने की?
- (a)दरियावजी
- (b)रामचरणजी
- (c)हरिरामदासजी
- (d)रामदासजी
उत्तर(2) — माहेश्वरी लिखते हैं कि रामचरणजी ने 1760 में भीलवाड़ा में सम्प्रदाय की स्थापना की और 1769 में उसकी प्रमुख पीठ शाहपुरा आए। विकल्प (1), दरियावजी, ने रेण शाखा की स्थापना की; विकल्प (3), हरिरामदासजी, ने सिंहथल शाखा की; विकल्प (4), रामदासजी, ने खेड़ापा शाखा की। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संतदास बारह-हज़ारी, जिनकी वाणी आलम गंज कहलाती है, किसके शिष्य थे?
- (a)लालदास
- (b)जसनाथजी
- (c)दादू
- (d)रामचरणजी
उत्तर(3) — माहेश्वरी लिखते हैं कि संतदास बारह-हज़ारी दादू के शिष्य थे और 1639 में फतेहपुर में उनका देहांत हुआ। विकल्प (1), लालदास, ने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की; विकल्प (2), जसनाथजी, का देहांत 1506 में हुआ; विकल्प (4), रामचरणजी, का जन्म 1719 में, संतदास के देहांत के बाद, हुआ।