रूमा देवी के बारे में निम्न में से कौनसा कथन सही नहीं है?
- (1)उन्हें हस्तशिल्प के क्षेत्र में जाना जाता है।
- (2)वे जसरापुर (खेतड़ी) गाँव में पली – बढ़ी।
- (3)उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा 2018 में ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
- (4)उन्होंने हजारों महिलाओं को रोजगार बढ़ावा देने में अहम भागीदारी निभाई।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), वे जसरापुर (खेतड़ी) गाँव में पली – बढ़ी।
प्रश्न वह कथन पूछता है जो सही नहीं है। 2019 में प्रकाशित रूमा देवी के परिचय उन्हें बाड़मेर ज़िले से जोड़ते हैं, और उनमें से एक बताता है कि वे वहीं पली-बढ़ीं। इसलिए विकल्प (2), वे जसरापुर (खेतड़ी) गाँव में पली – बढ़ी, गलत कथन है और यही उत्तर है।
द हिन्दू बिज़नेसलाइन (30 अगस्त 2019) के अनुसार वे सीमावर्ती बाड़मेर ज़िले के छोटे गाँव रावसर में पली-बढ़ीं। वह यह भी बताता है कि 17 वर्ष की आयु में विवाह के बाद वे 2006 में मंगला की बेरी गाँव में अपने ससुराल आ गईं।
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (26 फ़रवरी 2019) उन्हें बाड़मेर के धूल भरे मंगला की बेरी गाँव की रूमा देवी बताता है। इन दोनों में से कोई भी परिचय उन्हें खेतड़ी से नहीं जोड़ता।
बाकी तीन कथन इन्हीं रिपोर्टों से मेल खाते हैं। वे हस्तशिल्प में काम करती हैं, उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार 2018 के लिए चुना गया, और रिपोर्टें उन्हें 22,000 महिलाओं के साथ काम का श्रेय देती हैं।
रूमा देवी बाड़मेर की शिल्पकार हैं, खेतड़ी की नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)उन्हें हस्तशिल्प के क्षेत्र में जाना जाता है। — यह कथन सही है, इसलिए ‘सही नहीं है’ पूछने वाले प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकता।
बिज़नेसलाइन (2019) के अनुसार उन्होंने अपनी कृतियों में बाड़मेरी पैचवर्क और ऐप्लिक काम का प्रयोग किया, जिसमें सूफ़, पक्का, खारक, कच्चा और सिंधी जैसे कढ़ाई के नमूने हैं। द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (2019) बताता है कि वे 2008 में बाड़मेर की गैर-सरकारी संस्था ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान से जुड़ीं और 2010 में उसकी अध्यक्ष बनीं।
- (3)उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा 2018 में ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। — 2018 को पुरस्कार का वर्ष मानकर पढ़ें तो यह कथन सही है: उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार 2018 मिला। द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने 26 फ़रवरी 2019 को बताया कि उन्हें प्रतिष्ठित नारी शक्ति पुरस्कार 2018 के लिए चुना गया है और वे 8 मार्च को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से इसे प्राप्त करेंगी।
द ट्रिब्यून ने बताया कि राष्ट्रपति कोविंद ने 8 मार्च 2019 को राष्ट्रपति भवन में नारी शक्ति पुरस्कार प्रदान किए। यानी समारोह 2019 में हुआ; कथन का ‘2018 में’ पुरस्कार के नाम से मेल खाता है, समारोह की तिथि से नहीं। विकल्प (2) दोनों में से किसी भी अर्थ में गलत है।
- (4)उन्होंने हजारों महिलाओं को रोजगार बढ़ावा देने में अहम भागीदारी निभाई। — यह कथन सही है। द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (26 फ़रवरी 2019) उन्हें बाड़मेर, बीकानेर और जैसलमेर के 75 गाँवों में रहने वाली 22,000 महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के पीछे की शक्ति बताता है।
बिज़नेसलाइन (30 अगस्त 2019) के अनुसार उस समय 22,000 महिलाएँ उनके साथ काम कर रही थीं, जो अपने कौशल के अनुसार ₹3,000-10,000 कमाती थीं।
अवधारणा
रूमा देवी बाड़मेर ज़िले की हस्तशिल्प कारीगर हैं। द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (2019) के अनुसार विवाह के बाद उन्होंने 2006 में अपने गाँव की महिलाओं के साथ एक स्वयं सहायता समूह बनाया, और बाद में बाड़मेर की गैर-सरकारी संस्था ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान का नेतृत्व किया।
नारी शक्ति पुरस्कार केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए सेवा पर दिया जाने वाला राष्ट्रीय पुरस्कार है। 2018 के पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, 8 मार्च 2019 को प्रदान किए।
किसी पुरस्कार का नाम उसके वर्ष से होता है, जो समारोह की तिथि से भिन्न हो सकता है। रूमा देवी नारी शक्ति पुरस्कार 2018 के प्राप्तकर्ताओं में सूचीबद्ध हैं, जो 8 मार्च 2019 को प्रदान किया गया।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान के इतिहास, कला और संस्कृति के अंतर्गत "राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व" सूचीबद्ध है। उसी खंड में "चित्रकला की विभिन्न शैलियाँ और हस्तशिल्प" भी शामिल है।
बाड़मेर की कढ़ाई और ऐप्लिक काम एक जीवित व्यक्तित्व को राज्य की शिल्प परम्परा से जोड़ते हैं। तिथि वाला परिचय किसी व्यक्ति से जुड़े तथ्यों को सही स्थान और सही वर्ष से बाँधे रखने में मदद करता है।
मुख्य तथ्य
- बिज़नेसलाइन (30 अगस्त 2019): रूमा देवी बाड़मेर ज़िले के छोटे गाँव रावसर में पली-बढ़ीं और 2006 में मंगला की बेरी गाँव आ गईं।
- द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (26 फ़रवरी 2019) ने नारी शक्ति पुरस्कार 2018 के लिए उनके चयन की सूचना दी।
- राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 8 मार्च 2019 को राष्ट्रपति भवन में नारी शक्ति पुरस्कार प्रदान किए (द ट्रिब्यून)।
- वे 2008 में बाड़मेर के ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान से जुड़ीं और 2010 में उसकी अध्यक्ष बनीं (द टाइम्स ऑफ़ इंडिया, 2019)।
- 2019 की दोनों रिपोर्टें उन्हें 22,000 महिलाओं के साथ काम का श्रेय देती हैं।
तीन कथन सही और एक गलत; गलत कथन, विकल्प (2), उत्तर है। स्रोत: द टाइम्स ऑफ़ इंडिया और द हिन्दू बिज़नेसलाइन, 2019।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रश्न वह कथन पूछता है जो सही नहीं है, इसलिए तीनों सही कथन उत्तर नहीं हो सकते।
- पुरस्कार का वर्ष और समारोह की तिथि अलग हो सकते हैं: नारी शक्ति पुरस्कार 2018 8 मार्च 2019 को प्रदान किया गया।
- कोष्ठक में किसी वास्तविक स्थान के साथ दिया गाँव का नाम सटीक लग सकता है। स्वीकार करने से पहले उस स्थान को व्यक्ति के ज़िले से मिलाकर देखें।
कोई प्रश्न किसी एक व्यक्तित्व के बारे में चार कथन देकर पूछ सकता है कि कौन-सा सही नहीं है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न किसी व्यक्तित्व का गृह ज़िला, किसी पुरस्कार के पीछे का कार्यक्षेत्र, या पुरस्कार का वर्ष भी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
नारी शक्ति पुरस्कार 2018 के लिए चुनी गई रूमा देवी राजस्थान के किस ज़िले में पली-बढ़ीं?
- (a)झुंझुनूं
- (b)सीकर
- (c)बाड़मेर
- (d)चूरू
उत्तर(3) — द हिन्दू बिज़नेसलाइन (2019) के अनुसार वे बाड़मेर ज़िले के छोटे गाँव रावसर में पली-बढ़ीं, और द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (2019) उन्हें बाड़मेर के मंगला की बेरी गाँव में बताता है। विकल्प (1), विकल्प (2) और विकल्प (4) ऐसे ज़िले हैं जिनसे ये परिचय उन्हें नहीं जोड़ते। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के राष्ट्रपति ने नारी शक्ति पुरस्कार 2018 किस तिथि को प्रदान किए?
- (a)26 जनवरी 2019
- (b)8 मार्च 2018
- (c)8 मार्च 2019
- (d)15 अगस्त 2018
उत्तर(3) — द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (26 फ़रवरी 2019) ने बताया कि 2018 के पुरस्कार विजेताओं को 8 मार्च को पुरस्कार मिलेगा, और द ट्रिब्यून ने 8 मार्च 2019 को राष्ट्रपति भवन में समारोह की सूचना दी। विकल्प (2) में दिन सही है, पर वर्ष समारोह का नहीं, पुरस्कार का है। विकल्प (1) और विकल्प (4) समारोह की तिथि नहीं हैं।