सूची–I एवं सूची–II को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर चुनिए – सूची–I (त्यौहार) (A) बूंदी की कजली तीज (B) होली (C) पर्युषण पर्व (D) गणगौर सूची–II (उत्सव की तिथि/माह) (i) भाद्रपद कृष्ण तृतीया (ii) फाल्गुन पूर्णिमा (iii) भाद्रपद माह (iv) चैत्र माह कूट –
- (1)A-(i), B-(ii), C-(iv), D-(iii)
- (2)A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv)
- (3)A-(iii), B-(iv), C-(i), D-(ii)
- (4)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv).
सही कूट A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv) है। हर त्यौहार एक तिथि या माह से जुड़ता है।
(A) बूंदी की कजली तीज → (i)। प्रीतिप्रभा गोयल की पुस्तक भारत के व्रत एवं त्योहार (राजस्थानी साहित्य संस्थान, जोधपुर) बड़ी तीज, सातू तीज, कजली तीज या बूढ़ी तीज को भाद्रपद कृष्ण तृतीया, यानी भाद्रपद के कृष्ण पक्ष के तीसरे दिन, का त्यौहार बताती है।
(B) होली → (ii)। बूंदी ज़िला गज़ेटियर (1964) के अनुसार होली फाल्गुन माह में पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर होती है। गोयल के अनुसार भी होली फाल्गुन पूर्णिमा को है।
(C) पर्युषण पर्व → (iii)। गोयल के अनुसार यह भादो (भाद्रपद) माह का जैन पर्व है। बूंदी गज़ेटियर के अनुसार यह भादवा माह में मनाया जाता है।
(D) गणगौर → (iv)। गोयल के अनुसार गणगौर होली के अगले दिन, चैत्र कृष्ण प्रतिपदा, से चैत्र शुक्ल तृतीया तक चलता है। बूंदी गज़ेटियर इसे चैत्र के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन रखता है।
कजली तीज और पर्युषण दोनों भाद्रपद में आते हैं; गणगौर चैत्र का है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)A-(i), B-(ii), C-(iv), D-(iii) — यह कूट कजली तीज और होली सही रखता है, पर अंतिम दो को आपस में बदल देता है। यह पर्युषण पर्व को चैत्र में और गणगौर को भाद्रपद में रखता है।
गोयल और बूंदी गज़ेटियर दोनों पर्युषण को भाद्रपद में और गणगौर को चैत्र में रखते हैं, इसलिए C-(iv) और D-(iii) दोनों गलत हैं।
- (3)A-(iii), B-(iv), C-(i), D-(ii) — यह कूट पर्युषण पर्व को (i), भाद्रपद कृष्ण तृतीया, पर रखता है, जो गोयल के अनुसार कजली तीज की तिथि है। यह होली को चैत्र माह में और गणगौर को फाल्गुन पूर्णिमा पर भी ले जाता है।
होली फाल्गुन पूर्णिमा का त्यौहार है, और गणगौर चैत्र शुक्ल तृतीया को समाप्त होता है। (i) कजली तीज का होते ही यह कूट गलत हो जाता है।
- (4)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i) — इस कूट का एक भी जोड़ा सही नहीं है। यह कजली तीज को चैत्र में, होली को भाद्रपद में, पर्युषण को फाल्गुन पूर्णिमा पर और गणगौर को भाद्रपद कृष्ण तृतीया पर रखता है।
चारों में चैत्र का त्यौहार गणगौर है; फाल्गुन पूर्णिमा होली की है।
अवधारणा
राजस्थान में हिन्दू और जैन त्यौहार चंद्र पंचांग से तय होते हैं: माह, पक्ष और तिथि। कृष्ण पक्ष (बदी) अंधेरा पखवाड़ा है और शुक्ल पक्ष (सुदी) उजाला पखवाड़ा।
इन स्रोतों द्वारा प्रयुक्त पंचांग में फाल्गुन के बाद चैत्र आता है। होली फाल्गुन पूर्णिमा को पड़ती है, और गोयल के अनुसार गणगौर अगले दिन, चैत्र कृष्ण प्रतिपदा, से शुरू होकर चैत्र शुक्ल तृतीया को समाप्त होता है।
भाद्रपद में कजली तीज (कृष्ण तृतीया) और जैन पर्युषण पर्व दोनों आते हैं। गोयल के अनुसार दिगंबर जैन इसे भाद्रपद शुक्ल पंचमी से शुक्ल चतुर्दशी तक दशलक्षण पर्व के रूप में मनाते हैं।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान के इतिहास, कला और संस्कृति के अंतर्गत "राजस्थान में सामाजिक जीवन : मेले एवं त्योहार; सामाजिक रीति–रिवाज तथा परम्पराये; वेशभूषा एवं आभूषण।" सूचीबद्ध है।
चंद्र तिथि किसी त्यौहार को उसके मौसम से जोड़ती है। गणगौर वसंत में होली के बाद आता है, जबकि तीज के त्यौहार और पर्युषण वर्षा ऋतु के श्रावण और भाद्रपद महीनों में पड़ते हैं।
मुख्य तथ्य
- गोयल के अनुसार बड़ी तीज, जिसे कजली तीज भी कहते हैं, भाद्रपद कृष्ण तृतीया (भादो बदी तीज) को है।
- बूंदी ज़िला गज़ेटियर (1964) बूंदी में तीज के दो मेले दर्ज करता है: एक श्रावण के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन, दूसरा भादवा के तीसरे दिन।
- होली फाल्गुन पूर्णिमा को पड़ती है (बूंदी गज़ेटियर, 1964; गोयल)।
- गोयल: गणगौर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक, 16–17 दिन चलता है।
- गोयल: श्वेतांबर जैन भाद्रपद शुक्ल पंचमी को समाप्त होने वाला आठ दिन का पर्युषण मनाते हैं; दिगंबर जैन शुक्ल पंचमी से शुक्ल चतुर्दशी तक दशलक्षण पर्व मनाते हैं।
सही कूट, विकल्प (2)। तिथियाँ गोयल की भारत के व्रत एवं त्योहार और बूंदी ज़िला गज़ेटियर (1964) के अनुसार।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- इस सूची के दो त्यौहार भाद्रपद में आते हैं। निश्चित तिथि, भाद्रपद कृष्ण तृतीया, कजली तीज की है; पर्युषण को माह मिलता है।
- वर्षा ऋतु में तीज दो बार आती है: बूंदी गज़ेटियर एक तीज मेला श्रावण में और एक भादवा में दर्ज करता है। कजली तीज भाद्रपद वाली है।
- पंचांग में होली और गणगौर पास-पास हैं। होली फाल्गुन पूर्णिमा है; गणगौर अगले दिन शुरू होता है और चैत्र का है।
कोई प्रश्न त्यौहारों को उनके माह या चंद्र तिथि से सुमेलित करवा सकता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न कोई तिथि देकर यह भी पूछ सकता है कि उस दिन कौन-सा त्यौहार पड़ता है, किसी त्यौहार का क्षेत्रीय रूप कहाँ मनाया जाता है, या किसी जैन पर्व का माह क्या है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2016 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान का निम्नलिखित में से कौन-सा त्यौहार चैत्र के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन (शुक्ल तृतीया) को समाप्त होता है?
- (a)कजली तीज
- (b)गणगौर
- (c)होली
- (d)संवत्सरी
उत्तर(2) — गोयल के अनुसार गणगौर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक चलता है, और बूंदी गज़ेटियर इसे चैत्र के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन रखता है। विकल्प (1), कजली तीज, भाद्रपद कृष्ण तृतीया को पड़ती है; विकल्प (3), होली, फाल्गुन पूर्णिमा को; विकल्प (4), संवत्सरी, भाद्रपद में पर्युषण का समापन करती है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जैन पर्व पर्युषण पर्व हिन्दू पंचांग के किस माह में मनाया जाता है?
- (a)चैत्र
- (b)आषाढ़
- (c)भाद्रपद
- (d)कार्तिक
उत्तर(3) — गोयल के अनुसार पर्युषण भादो (भाद्रपद) में है, और बूंदी गज़ेटियर के अनुसार यह भादवा माह में मनाया जाता है। विकल्प (1), चैत्र, गणगौर का माह है; विकल्प (2), आषाढ़, और विकल्प (4), कार्तिक, वह माह नहीं हैं जो इनमें से कोई स्रोत देता है।