निम्नलिखित को सुमेलित करके सही उत्तर का चयन कीजिए । समाचार पत्र I. फ्री हिन्दुस्तान II. इण्डियन ओपिनियन III. वायस् आफ इण्डिया IV. बंगाली सम्पादक a. महात्मा गाँधी b. दादाभाई नौरोजी c. सुरेन्द्रनाथ बनर्जी d. तारकनाथ दास
- (a)I – d, II – a, III – b, IV – c
- (b)I – c, II – d, III – a, IV – b
- (c)I – d, II – c, III – b, IV – a
- (d)I – c, II – a, III – d, IV – b
सही — A, I – d, II – a, III – b, IV – c। युग्मों को एक-एक करके लीजिए। 'फ्री हिन्दुस्तान' तारकनाथ दास का पत्र था: कलकत्ता से जतींद्रनाथ मुखर्जी, यानी 'बाघा जतिन', द्वारा भेजे गए धन से वे वैंकूवर में यह अंग्रेज़ी पत्रिका शुरू कर सके, और साथ में गुरुमुखी संस्करण 'स्वदेश सेवक' भी; इसे कनाडा का पहला दक्षिण एशियाई प्रकाशन बताया जाता है, और 1908 में दास के कनाडा से निष्कासन के बाद यह सिएटल से और फिर न्यूयॉर्क से निकलता रहा, जिसके शीर्ष पर उन्हीं का आदर्श वाक्य छपता था — 'हर अत्याचार का विरोध करना मानवता की सेवा और सभ्यता का कर्तव्य है।' टॉल्स्टॉय, हिंडमैन, श्यामजी कृष्ण वर्मा और मैडम कामा ने इसे लेकर उनसे पत्राचार किया। 'इण्डियन ओपिनियन' गांधी ने दक्षिण अफ़्रीका में शुरू किया था; उसका पहला अंक 4 जून 1903 को निकला, वह गुजराती, हिन्दी, तमिल और अंग्रेज़ी में प्रकाशित होता था, और 1904 में प्रेस डरबन के पास उनकी फ़ीनिक्स बस्ती में चला गया। इस पर गांधी का अपना निर्णय था कि 'इण्डियन ओपिनियन के बिना सत्याग्रह असंभव होता।' 'द वॉयस ऑफ़ इंडिया' दादाभाई नौरोजी निकालते थे, वही पारसी अर्थशास्त्री जिन्होंने इससे पहले 1854 में गुजराती पाक्षिक 'रास्त गोफ़्तार' शुरू किया, आगे चलकर 1886 में कांग्रेस अध्यक्ष बने और 1901 में 'पॉवर्टी ऐंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' लिखी। 'द बंगाली' की स्थापना 1862 में कलकत्ता में गिरीश चंद्र घोष ने की थी, और सुरेंद्रनाथ बनर्जी उसके संपादक रहे; वह उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी के आरंभ का सबसे अधिक प्रसार वाला साप्ताहिक बना, सूरत विभाजन के बाद उदारवादियों के पक्ष में रहा, और 1925 में बनर्जी की मृत्यु के बाद ढल गया। इसलिए क्रम है I-d, II-a, III-b, IV-c। यह केवल विकल्प (a) में है; बाक़ी तीनों शृंखलाएँ इनमें से कम-से-कम दो सुस्थापित युग्म तोड़ देती हैं।
- (b)I – c, II – d, III – a, IV – b — यह हर युग्म तोड़ देता है। यह सुरेंद्रनाथ बनर्जी को — कलकत्ता के उदारवादी, जो विदेश में क्रांतिकारी पत्रकारिता के लिए कभी भारत से बाहर नहीं गए — वैंकूवर और सिएटल से छपने वाले प्रवासी पत्र का प्रभारी बना देता है, और गांधी का दक्षिण अफ़्रीकी साप्ताहिक तारकनाथ दास को सौंप देता है। इनमें से चारों में किसी एक के बारे में भी कोई ज्ञात तथ्य लगाते ही यह पूरा विकल्प ढह जाता है।
- (c)I – d, II – c, III – b, IV – a — सबसे ख़तरनाक विकल्प, क्योंकि यह चार में से दो युग्म सही कर देता है — फ्री हिन्दुस्तान को तारकनाथ दास और वॉयस ऑफ़ इंडिया को दादाभाई नौरोजी — और फिर बचे हुए दो में गांधी तथा सुरेंद्रनाथ बनर्जी को आपस में बदल देता है। जो उम्मीदवार केवल पहला युग्म और वही युग्म जाँचता है जिस पर उसे सबसे अधिक भरोसा है, वह यहीं रुक जाएगा।
- (d)I – c, II – a, III – d, IV – b — इण्डियन ओपिनियन सही कर देता है और बाक़ी सब ग़लत, जो पिछले जाल का उल्टा रूप है। यह फ्री हिन्दुस्तान सुरेंद्रनाथ बनर्जी को दे देता है और, उससे भी बेतुके ढंग से, 'द बंगाली' — 1860 के दशक से चला आ रहा कलकत्ता का साप्ताहिक — दादाभाई नौरोजी को; और तारकनाथ दास को वॉयस ऑफ़ इंडिया के साथ छोड़ देता है, जो बिलकुल दूसरी पीढ़ी और दूसरे उद्देश्य का पत्र है।
राष्ट्रवादी प्रेस एक चीज़ नहीं, तीन थी, और यह प्रश्न चुपचाप तीनों से नमूना ले लेता है। एक थी भारत के भीतर की संवैधानिक प्रेस, जो कलकत्ता और बंबई से छपती थी और शिक्षित भारतीय मत तथा सहानुभूति रखने वाले अंग्रेज़ों को लक्ष्य करती थी — सुरेंद्रनाथ बनर्जी के अधीन 'द बंगाली' इसका आदर्श है: स्वर में उदार, प्रसार में विशाल, और उस भारतीय संघ (इंडियन नेशनल एसोसिएशन) से गहराई से जुड़ा जिसे उन्होंने कांग्रेस के अस्तित्व में आने से पहले बनाया था। दूसरी थी ब्रिटेन को लक्ष्य करने वाली प्रचार-प्रेस, जिसका उदाहरण दादाभाई नौरोजी की 'वॉयस ऑफ़ इंडिया' है: नौरोजी ने अपना बहुत सारा जीवन लंदन में बिताया, हाउस ऑफ़ कॉमन्स के सदस्य रहे, और इस सिद्धांत पर काम किया कि ब्रिटिश जनमत को मोड़ा जा सकता है यदि उसे दिखा दिया जाए कि भारतीय शासन की असल क़ीमत क्या है — यही तर्क उन्होंने 'पॉवर्टी ऐंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' में रखा। और तीसरी थी विदेश की प्रवासी तथा क्रांतिकारी प्रेस — वैंकूवर, सिएटल और न्यूयॉर्क से 'फ्री हिन्दुस्तान', लंदन से 'इंडियन सोशियोलॉजिस्ट', जिनेवा से 'बंदे मातरम्' — जो भारतीय प्रेस-क़ानून की पहुँच से बाहर थी और इसीलिए अपनी भाषा में कहीं अधिक खुली। गांधी का 'इण्डियन ओपिनियन' इन तीनों से थोड़ा अलग बैठता है: वह दक्षिण अफ़्रीका में विदेश बसे भारतीय समुदाय के लिए छपता था और मत का माध्यम कम, किसी अभियान का चलता हुआ औज़ार अधिक था।
सुमेलन वाले प्रश्न चारों युग्म जानकर नहीं, उन दो युग्मों को जानकर हल होते हैं जो सबसे तेज़ी से विकल्प काटते हैं। तरीक़ा यह है कि जिस युग्म पर निश्चय हो उसे पकड़िए, उससे टकराने वाला हर विकल्प काट दीजिए, और फिर दोहराइए। यहाँ अधिकांश उम्मीदवारों के लिए सबसे पक्का युग्म इण्डियन ओपिनियन और गांधी है, और अकेले इसे लगाते ही विकल्प (b) तथा (c) तुरंत हट जाते हैं, और केवल (a) और (d) बचते हैं। ये दोनों फ्री हिन्दुस्तान पर भिन्न हैं: (a) उसे तारकनाथ दास को देता है और (d) सुरेंद्रनाथ बनर्जी को। एक ही भौगोलिक तथ्य इसे तय कर देता है — फ्री हिन्दुस्तान उत्तरी अमेरिका के प्रशांत तट से छपता था, और सुरेंद्रनाथ बनर्जी का पूरा कार्यकाल कलकत्ता में बीता — इसलिए (a) बच जाता है। देखिए कि इसमें पूरे ग्रिड का कितना कम हिस्सा लगा। दूसरी बनाने योग्य आदत यह है कि नाम से जाँचने से पहले काल और स्थान से विश्वसनीयता जाँच लीजिए। तारकनाथ दास 1900 और 1910 के दशकों की विदेश वाली ग़दर पीढ़ी के हैं; सुरेंद्रनाथ बनर्जी 1870 और 1880 के दशकों के बंगाल के; दादाभाई नौरोजी उसी युग के लंदन-मुखी अभियान के; और गांधी इस मामले में दक्षिण अफ़्रीका के। जो भी युग्म किसी व्यक्ति को ग़लत महाद्वीप या ग़लत दशक में रखे, उसे किसी शीर्षक-पंक्ति को याद करने की कोशिश से पहले ही हटाया जा सकता है।
- फ्री हिन्दुस्तान तारकनाथ दास ने वैंकूवर में अंग्रेज़ी में शुरू किया, जिसके लिए धन जतींद्रनाथ मुखर्जी ('बाघा जतिन') ने भेजा था, और साथ में गुरुमुखी संस्करण 'स्वदेश सेवक' भी; जुलाई 1908 से वह सिएटल से और बाद में न्यूयॉर्क से निकलता रहा
- इण्डियन ओपिनियन गांधी ने दक्षिण अफ़्रीका में शुरू किया, पहला अंक 4 जून 1903, जो गुजराती, हिन्दी, तमिल और अंग्रेज़ी में छपता था; प्रेस 1904 में डरबन के पास फ़ीनिक्स बस्ती में गया और प्रकाशन 1961 तक चला
- गांधी ने उसके बारे में लिखा: 'इण्डियन ओपिनियन के बिना सत्याग्रह असंभव होता'; भारत में उन्होंने आगे चलकर यंग इंडिया, हरिजन और नवजीवन निकाले
- दादाभाई नौरोजी 'द वॉयस ऑफ़ इंडिया' प्रकाशित करते थे; उन्होंने 1854 में गुजराती पाक्षिक 'रास्त गोफ़्तार' शुरू किया था, 1886 में कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए, और 1901 में 'पॉवर्टी ऐंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' प्रकाशित की
- द बंगाली की स्थापना 1862 में कलकत्ता में गिरीश चंद्र घोष ने की और उसका संपादन सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने किया; वह उस काल का सबसे अधिक प्रसार वाला साप्ताहिक था और 1925 में उनकी मृत्यु के बाद ढल गया
- तारकनाथ दास ने लाला हरदयाल के साथ हिंदी एसोसिएशन ऑफ़ द पैसिफ़िक ओशन बनाने में भी मदद की, वही संगठन जिससे ग़दर पार्टी निकली

- यह मान लेना कि कोई प्रसिद्ध भारतीय संपादक विदेश के किसी पत्र का ही संपादक रहा होगा; फ्री हिन्दुस्तान उत्तरी अमेरिका के प्रवासी समुदाय का है, कलकत्ता की पत्रकारिता का नहीं
- गांधी के दक्षिण अफ़्रीकी पत्र इण्डियन ओपिनियन को उनके बाद के भारतीय पत्रों — यंग इंडिया, नवजीवन और हरिजन — से गड्डमड्ड कर देना
- 'द बंगाली' की स्थापना सुरेंद्रनाथ बनर्जी को दे देना; उसकी स्थापना 1862 में गिरीश चंद्र घोष ने की थी और बनर्जी उसके संपादक थे
BPSC समाचारपत्र–संपादक की जोड़ियाँ चार-मद वाले सुमेलन ग्रिड और कूट के रूप में रखता है, और विकल्प-शृंखलाएँ ऐसी बनाई जाती हैं कि दो युग्म सही कर लेने पर भी दो विकल्प खड़े रह जाएँ — इसीलिए निष्कासन जानी-पहचानी दिखने वाली शृंखला पहचानकर नहीं, युग्म-दर-युग्म करना पड़ता है। UPSC यही सामग्री व्यक्ति-से-पत्रिका सुमेलन या एकल पहचान के रूप में पूछता है, और वह क्रांतिकारी तथा प्रवासी प्रेस में और गहरे जाता है — इंडियन सोशियोलॉजिस्ट, द तलवार, वैनगार्ड — इसलिए विदेश के शीर्षक भी उतने ही मायने रखते हैं जितने भारत के।
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए: सूची I (व्यक्ति) I. श्यामजी कृष्ण वर्मा II. मैडम भीकाजी कामा III. एनी बेसेंट IV. अरविंद घोष सूची II (पत्रिकाएँ) A. बंदे मातरम् B. इंडियन सोशियोलॉजिस्ट C. द तलवार D. कॉमनवील कूट:
- (a) I-B, II-C, III-D, IV-A
- (b) I-C, II-B, III-A, IV-D
- (c) I-B, II-C, III-A, IV-D
- (d) I-C, II-B, III-D, IV-A
उत्तर(a) I-B, II-C, III-D, IV-A
वही ग्रिड उल्टी दिशा में — समाचारपत्र से संपादक के बजाय व्यक्ति से पत्रिका — और वह भी उसी विदेशी क्रांतिकारी प्रेस से उठाया गया जिसने फ्री हिन्दुस्तान दिया।
निम्नलिखित में से कौन एम. एन. रॉय की प्रवासी साम्यवादी पत्रिका थी?
- (a) किसान सभा
- (b) द वर्कर
- (c) वैनगार्ड
- (d) अनुशीलन
उत्तर(c) वैनगार्ड
प्रवासी प्रेस का एक और शीर्षक, और वही परीक्षा एकल-उत्तर रूप में — किसी भारतीय क्रांतिकारी द्वारा विदेश में निकाला गया पत्र कलकत्ता के साप्ताहिकों से बिलकुल अलग दुनिया का है, और यहाँ के ग़लत विकल्प इन्हीं दोनों को मिला देने पर टिके हैं।
बिहार के निम्नलिखित समाचारपत्रों में सबसे पहले कौन-सा प्रकाशित हुआ?
- (a) बिहार बंधु
- (b) पटना हरकारा
- (c) अख़बार-ए-बिहार
- (d) बिहार हेराल्ड
उत्तर(b) पटना हरकारा
प्रेस वाला विषय अगले संस्करण में भी और स्थानीय रूप में — BPSC राष्ट्रीय समाचारपत्र–संपादक ग्रिड और बिहार के अपने अख़बारों का कालक्रम, दोनों की अपेक्षा करता है, इसलिए यह क्षेत्र दोनों पैमानों पर दोहराना पड़ता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
महात्मा गांधी ने समाचारपत्र 'इण्डियन ओपिनियन' किस देश में शुरू किया था ?
- (a)भारत
- (b)इंग्लैंड
- (c)दक्षिण अफ़्रीका
- (d)केन्या
उत्तर(c) दक्षिण अफ़्रीका — पहला अंक 4 जून 1903 को निकला और 1904 में प्रेस डरबन के पास फ़ीनिक्स बस्ती में चला गया।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
सुरेंद्रनाथ बनर्जी द्वारा संपादित 'द बंगाली' की मूल स्थापना 1862 में किसने की थी ?
- (a)गिरीश चंद्र घोष
- (b)शिशिर कुमार घोष
- (c)मोतीलाल घोष
- (d)कृष्ण दास पाल
उत्तर(a) गिरीश चंद्र घोष — बनर्जी ने बाद में संपादन सँभाला और उसे उस काल का सबसे अधिक प्रसार वाला साप्ताहिक बनाया।