निम्नलिखित में से किसकी कक्षा अत्यधिक लम्बी अण्डाकार है ?
- (a)कोमेट
- (b)छोटा तारा
- (c)उल्का
- (d)उल्का पिंड
सही — A, कोमेट, यानी धूमकेतु। कोई कक्षा कितनी खिंची हुई है, इसका मानक माप उत्केंद्रता है: 0 पूर्ण वृत्त है और 1 परवलय। पृथ्वी की कक्षा की उत्केंद्रता लगभग 0.017 है, यानी व्यावहारिक रूप से वृत्त; हैली धूमकेतु की उत्केंद्रता 0.967 है। इस एक संख्या के परिणाम नाटकीय हैं और 'अत्यधिक लम्बी' का मानसिक चित्र इन्हीं से बनता है। हैली उपसौर पर 0.59 खगोलीय इकाई तक भीतर आ जाता है, यानी शुक्र से भी सूर्य के नज़दीक, और अपसौर पर 35.14 खगोलीय इकाई तक बाहर चला जाता है, लगभग प्लूटो की दूरी तक, और यह चक्कर 74 से 80 वर्ष में पूरा करता है — वह अंतिम बार 8 फ़रवरी 1986 को उपसौर से गुज़रा और अगली बार 28 जुलाई 2061 को गुज़रेगा। उसकी कक्षा प्रतिगामी भी है, क्रांतिवृत्त से 18 डिग्री झुकी हुई, और वह दो वार्षिक उल्का वर्षाओं को जन्म देता है — मई के आरंभ में एटा एक्वेरिड्स और अक्टूबर के अंत में ओरियोनिड्स। यह लंबाई धूमकेतु के स्वरूप के लिए आकस्मिक नहीं है; यही कारण है कि धूमकेतु वैसा बर्ताव करता है जैसा वह करता है। धूमकेतु जमे हुए वाष्पशील पदार्थों का पिंड है — मार्च 1986 में जियोत्तो यान ने हैली से निकलती गैस को लगभग 80 प्रतिशत जलवाष्प के साथ कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड मापा — जो धूल के साथ मुश्किल से 15 किमी लंबे नाभिक में बँधे रहते हैं, यानी वही 'गंदा बर्फ़-गोला' जिसकी भविष्यवाणी फ़्रेड व्हिपल ने की थी। अपनी लंबी कक्षा के अधिकांश हिस्से में वह जमा और अदृश्य रहता है, और केवल उपसौर के पास के छोटे-से खंड में कोमा और पूँछ बनाता है, जब सूर्य की गर्मी बर्फ़ का ऊर्ध्वपातन कर देती है। लगभग वृत्ताकार कक्षा वाला पिंड या तो हमेशा तपता रहता या हमेशा जमा रहता, और कभी ऐसा बर्ताव न करता। बाक़ी तीन विकल्प दो बिलकुल अलग कारणों से गिरते हैं: क्षुद्रग्रह सूर्य की परिक्रमा तो करते हैं, पर कम उत्केंद्रता वाली, लगभग वृत्ताकार राहों पर; और उल्का तथा उल्का पिंड परिक्रमा करने वाले पिंड हैं ही नहीं, बल्कि उस टुकड़े के दो बाद के चरण हैं जो कक्षा छोड़ चुका है। एक बात ध्यान रखिए: आपके हिन्दी स्तंभ में विकल्प (B) 'छोटा तारा' छपा है, जबकि सामने के अंग्रेज़ी स्तंभ में वही विकल्प 'Asteroid' है — यानी यहाँ 'छोटा तारा' से आशय क्षुद्रग्रह है, कोई तारा नहीं।
- (b)छोटा तारा — यही अकेला दूसरा विकल्प है जो सचमुच सूर्य की परिक्रमा करने वाला पिंड है, और इसीलिए असली भ्रामक विकल्प है। पहले एक बात साफ़ कर लीजिए: आपके हिन्दी स्तंभ में यह 'छोटा तारा' छपा है, पर अंग्रेज़ी स्तंभ में यही विकल्प 'Asteroid' है, यानी क्षुद्रग्रह — यह कोई तारा नहीं। मुख्य पट्टी के क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच लगभग वृत्ताकार, कम उत्केंद्रता वाली राहों पर चलते हैं और सूर्य से लगभग एक-सी दूरी पर बने रहते हैं — यानी धूमकेतु से ठीक उलट। वे बर्फ़ीले नहीं, चट्टानी और धात्विक होते हैं, और उनकी पूँछ कभी नहीं बनती।
- (c)उल्का — उल्का कोई वस्तु ही नहीं, एक घटना है — प्रकाश की वह लकीर जो अंतरिक्ष से आया कोई टुकड़ा वायुमंडल में घुसकर जलते हुए बनाता है। प्रवेश से पहले वह पिंड उल्कापिंडक (मीटियोरॉइड) कहलाता है, जो कणों से लेकर लगभग एक मीटर तक का होता है। चूँकि उल्का वायुमंडल के भीतर एक-दो सेकंड चलने वाली चमक है, इसलिए उसकी कक्षा पूछना श्रेणी की ही भूल है।
- (d)उल्का पिंड — उसी क्रम का तीसरा चरण: उल्का पिंड वह है जो वायुमंडल में घर्षण से क्षय सहकर बच जाता है और धरती तक पहुँच जाता है। परिभाषा से ही वह किसी ग्रह की सतह पर होता है, इसलिए उसकी भी कोई कक्षा नहीं होती। अंतरिक्ष में उल्कापिंडक, आकाश में उल्का, ज़मीन पर उल्का पिंड — इन तीन में से दो को विकल्पों में रखकर यही भेद जाँचा जा रहा है।
सौरमंडल के छोटे पिंडों का वर्गीकरण उनकी संरचना और स्थिति से होता है, और इस विकल्प-समुच्चय के चार शब्द दो अलग वर्गीकरण-योजनाओं से आते हैं, जिन्हें विद्यार्थी नियमित रूप से मिला देते हैं। संरचना और कक्षा के अनुसार: क्षुद्रग्रह चट्टानी या धात्विक लघु-ग्रह हैं, जो मंगल और बृहस्पति के बीच मुख्य पट्टी में केंद्रित हैं और कम उत्केंद्रता वाली कक्षाओं पर हैं; धूमकेतु वरुण से परे कुइपर पट्टी के या उससे कहीं दूर ऊर्ट बादल के बर्फ़ीले पिंड हैं, जो लंबी और अत्यधिक उत्केंद्र कक्षाओं पर फेंक दिए जाते हैं और उन्हीं से थोड़े समय के लिए भीतरी सौरमंडल में आते हैं। सूर्य के पास आने पर धूमकेतु की बर्फ़ ऊर्ध्वपातित होकर कोमा और पूँछ बनाती है, और पूँछ सदा सूर्य से दूर की ओर रहती है, क्योंकि उसे विकिरण दाब और सौर पवन धकेलते हैं — वह गति की दिशा के पीछे घिसटती नहीं। दूसरी योजना किसी एक टुकड़े की यात्रा की है: उल्कापिंडक अंतरिक्ष में मौजूद छोटा पिंड है, प्रायः किसी धूमकेतु से झड़ा या किसी क्षुद्रग्रह से टूटा मलबा; उल्का वह चमकती लकीर है जो वह वायुमंडल में घुसते समय बनाता है; और उल्का पिंड वह टुकड़ा है जो बचकर ज़मीन तक पहुँच जाता है। हर दिन लगभग ढाई करोड़ उल्कापिंडक और सूक्ष्म-उल्कापिंडक पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, जो वर्ष भर में लगभग 15,000 टन बनते हैं, और इस द्रव्यमान का बहुत छोटा अंश ही सतह तक पहुँचता है।
इस प्रश्न को दो छलनियाँ हल कर देती हैं, और किसी को भी उत्केंद्रता का मान याद रखने की ज़रूरत नहीं। पहली है श्रेणी की जाँच: प्रश्न कक्षा के बारे में है, इसलिए पूछिए कि चार में से कौन-सा विकल्प ऐसी चीज़ का नाम है जो परिक्रमा करती भी है। धूमकेतु करते हैं, क्षुद्रग्रह करते हैं, और उल्का तथा उल्का पिंड नहीं करते — पहला वायुमंडलीय घटना है और दूसरा किसी ग्रह पर पड़ा पत्थर। इससे प्रश्न दो पर सिमट जाता है। दूसरी है बर्ताव की जाँच: पूछिए कि बचे हुए दोनों करते क्या हैं। क्षुद्रग्रह हमेशा वहीं, हर समय, उसी पथ पर रहते हैं; धूमकेतु प्रकट होते हैं, चमकते हैं, पूँछ निकालते हैं, और दशकों या सहस्राब्दियों के लिए ग़ायब हो जाते हैं। जो पिंड छिहत्तर वर्ष के लिए ग़ायब होकर लौटे, उसे अपनी कक्षा के एक छोर पर दूसरे छोर की तुलना में बहुत अधिक दूर जाना ही पड़ेगा — और अत्यधिक लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षा का अर्थ ठीक यही है। खगोल के प्रश्नों के लिए यही आदत बनाने लायक़ है: किसी भौतिक वर्णन को दिखाई देने वाले परिणाम में बदल दीजिए, क्योंकि परीक्षा के विकल्प प्रायः इसी से अलग होते हैं कि आपको क्या दिखेगा, न कि किसी संख्या से जो याद रखनी पड़े। यह उस सबसे आम भूल से भी बचाता है जो इस विषय में होती है, और वह धूमकेतु को क्षुद्रग्रह समझना नहीं, बल्कि उल्का, उल्कापिंडक और उल्का पिंड को आपस में गड्डमड्ड कर देना है।
- हैली धूमकेतु की कक्षीय उत्केंद्रता 0.967 है, उपसौर 0.59 खगोलीय इकाई (शुक्र की कक्षा के भीतर) और अपसौर 35.14 खगोलीय इकाई (लगभग प्लूटो की दूरी); पृथ्वी की अपनी उत्केंद्रता लगभग 0.017 है
- हैली का आवर्तकाल 74 से 80 वर्ष के बीच बदलता है; वह अंतिम बार 8 फ़रवरी 1986 को उपसौर पर पहुँचा और अगली बार 28 जुलाई 2061 को अपेक्षित है, तथा उसकी कक्षा प्रतिगामी और क्रांतिवृत्त से 18 डिग्री झुकी है
- हैली दो वार्षिक उल्का वर्षाओं को जन्म देता है — मई के आरंभ में एटा एक्वेरिड्स और अक्टूबर के अंत में ओरियोनिड्स
- जियोत्तो यान ने मार्च 1986 में हैली के नाभिक की तस्वीरें लीं — लगभग 15 किमी लंबा और 8 किमी चौड़ा — और उससे निकलती गैस को लगभग 80 प्रतिशत जलवाष्प मापा, जिससे फ़्रेड व्हिपल का 'गंदा बर्फ़-गोला' मॉडल पुष्ट हुआ
- उल्कापिंडक, उल्का और उल्का पिंड एक ही वस्तु के तीन चरण हैं: अंतरिक्ष में छोटा पिंड (कणों से लेकर लगभग एक मीटर तक), वायुमंडलीय प्रवेश की चमकती लकीर, और ज़मीन तक पहुँचने वाला टुकड़ा
- प्रतिदिन लगभग ढाई करोड़ उल्कापिंडक और सूक्ष्म-उल्कापिंडक पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, जो वर्ष भर में लगभग 15,000 टन सामग्री बनते हैं

- 'उल्कापिंडक' के अर्थ में 'उल्का' लिख देना; अंतरिक्ष में कक्षा वाला पिंड केवल उल्कापिंडक होता है
- यह मान लेना कि धूमकेतु की पूँछ धुएँ की तरह पीछे बहती है — उसे विकिरण दाब और सौर पवन बाहर की ओर धकेलते हैं, इसलिए धूमकेतु के लौटते समय भी वह सूर्य से दूर की ओर ही रहती है
- सभी क्षुद्रग्रहों को वृत्ताकार कक्षाओं वाले पट्टी-पिंड मान लेना; निकट-पृथ्वी क्षुद्रग्रह ग्रहों की कक्षाएँ काटते हैं, यद्यपि धूमकेतुओं की तुलना में कहीं कम उत्केंद्रता के साथ
BPSC खगोल को एक-गुण वाली पहचान के रूप में पूछता है — किस पिंड की यह कक्षा है, कौन ज़मीन पर पड़ा पत्थर है, कौन आकाश की चमक है — और विकल्प लगभग पर्यायवाची शब्दों से भर देता है, ताकि ढीली शब्दावली अंक गँवा दे। UPSC यही सामग्री बहु-कथन तुलना के रूप में पूछ चुका है, और सबसे सीधे अपने क्षुद्रग्रह-बनाम-धूमकेतु प्रश्न में, जहाँ सच्चे कथनों के बीच धूमकेतु कहाँ मिलते हैं इस पर एक विश्वसनीय पर असत्य कथन रोप दिया गया है।
क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं में क्या अंतर है? 1. क्षुद्रग्रह छोटे चट्टानी लघु-ग्रह हैं, जबकि धूमकेतु जमी हुई गैसों से बने होते हैं जिन्हें चट्टानी और धात्विक पदार्थ बाँधे रखते हैं। 2. क्षुद्रग्रह अधिकतर बृहस्पति और मंगल की कक्षाओं के बीच मिलते हैं, जबकि धूमकेतु अधिकतर शुक्र और बुध के बीच मिलते हैं। 3. धूमकेतुओं में स्पष्ट चमकती पूँछ दिखती है, जबकि क्षुद्रग्रहों में नहीं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 1 और 3
- (c) केवल 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(b) केवल 1 और 3
ठीक वही तुलना जिस पर यह प्रश्न टिका है, कथन-दर-कथन रखी गई — संरचना, स्थिति और पूँछ — और असत्य कथन वही है जो धूमकेतुओं को भीतरी सौरमंडल की किसी सुव्यवस्थित कक्षा पर बैठा देता है।
उल्का है
- (a) तेज़ी से चलता हुआ तारा
- (b) पदार्थ का वह टुकड़ा जो बाह्य अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर गया हो
- (c) किसी नक्षत्रमंडल का भाग
- (d) बिना पूँछ का धूमकेतु
उत्तर(b) पदार्थ का वह टुकड़ा जो बाह्य अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर गया हो
वही परिभाषा जो यहाँ चार में से दो विकल्प हटा देती है — उल्का वायुमंडल की चीज़ है, सूर्य की परिक्रमा की नहीं — और उसके भ्रामक विकल्पों में एक तो 'बिना पूँछ का धूमकेतु' ही है, यानी वही भ्रम दूसरी ओर से।
सूची–I को सूची–II से सुमेलित कीजिए : सूची—I (अंतरिक्ष अभियान) a. कैसिनी-ह्यूजेंस b. जूनो c. आर्टेमिस d. वेरिटास सूची—II (अन्वेषण) 1. बृहस्पति 2. शनि और उसके वलय 3. शुक्र 4. मानव अंतरिक्ष उड़ान—चंद्रमा से मंगल तक नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) a b c d 2 1 4 3
- (b) a b c d 3 1 4 2
- (c) a b c d 2 3 4 1
- (d) a b c d 3 1 2 4
उत्तर(a) a b c d 2 1 4 3
69वीं का सौरमंडल वाला ख़ाना, पिंडों के बजाय अभियानों के रास्ते पूछा गया — सौरमंडल की वस्तुओं को एक-दूसरे से अलग रखने की वही माँग, यहाँ हर यान को उसी पिंड से मिलाकर जिसके लिए वह वास्तव में भेजा गया था।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
अंतरिक्ष से आया वह टुकड़ा जो वायुमंडल से गुज़रने के बाद बच जाता है और पृथ्वी की सतह तक पहुँचता है, कहलाता है
- (a)उल्कापिंडक
- (b)उल्का
- (c)उल्का पिंड
- (d)क्षुद्रग्रह
उत्तर(c) उल्का पिंड — उल्कापिंडक अंतरिक्ष में मौजूद पिंड है, उल्का प्रवेश के समय बनी चमकती लकीर, और उल्का पिंड वह जो ज़मीन पर गिरता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
धूमकेतु की पूँछ सदा किस ओर रहती है
- (a)सूर्य की ओर
- (b)सूर्य से दूर की ओर
- (c)अपनी गति की दिशा के विपरीत
- (d)निकटतम ग्रह की ओर
उत्तर(b) सूर्य से दूर की ओर — विकिरण दाब और सौर पवन पूँछ को बाहर की ओर धकेलते हैं, इसलिए सूर्य से दूर जाते समय पूँछ नाभिक के आगे-आगे चलती है।