वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन असत्य है ?
- (1)इसकी स्थापना सन् 1888 में कर्नल सी.के.एम. वाल्टर के प्रयासों से हुई थी ।
- (2)इसका उद्देश्य राजस्थान के राजपूतों और दलितों के लिए सुधारात्मक कार्य करना था ।
- (3)इसकी प्रथम बैठक का आयोजन अजमेर में हुआ था ।
- (4)सभा ने अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सामाजिक नियम बनाए ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), इसका उद्देश्य राजस्थान के राजपूतों और दलितों के लिए सुधारात्मक कार्य करना था ।
प्रश्न असत्य कथन पूछता है। विकल्प (2) वही कथन है: सभा का सुधार-कार्य राजपूतों और चारणों से संबंधित था, दलितों से नहीं।
साहित्य अकादेमी का ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर’ केसरी सिंह बारहठ को वाल्टर-राजपूत-हितकारिणी सभा का सक्रिय सदस्य बताता है, जिन्होंने राजपूत और चारण समुदायों में सामाजिक सुधार लाने में सहायता की।
शेष तीन कथन RPSC की कुंजी में सत्य माने गए हैं। सभा की स्थापना 1888 में कर्नल सी.के.एम. वाल्टर के प्रयासों से हुई, इसकी प्रथम बैठक अजमेर में हुई, और इसने अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सामाजिक नियम बनाए।
डी.एल. पालीवाल की 1956 की बारहठ-जीवनी भी यही चित्र देती है: वाल्टर ने संवत 1944 (1887–88) में अजमेर में राजपूत और चारण सरदारों को एकत्र किया, और सभा ने इन दोनों जातियों के लिए शादी-गमी के रीति-रिवाजों पर नियम बनाए।
याद रखने की बात: वाल्टरकृत सभा ने कर्नल वाल्टर के अधीन राजपूतों और चारणों में सुधार के लिए काम किया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)इसकी स्थापना सन् 1888 में कर्नल सी.के.एम. वाल्टर के प्रयासों से हुई थी । — RPSC की कुंजी में यह कथन सत्य है, इसलिए यह उत्तर नहीं है। सभा के नाम में कर्नल वाल्टर का नाम है। राजपूताना के लिए गवर्नर-जनरल के एजेंट के रूप में उन्होंने शासकों को पत्र लिखे, सभा बुलाई और उसकी अध्यक्षता की; पालीवाल की बारहठ-जीवनी यह भी बताती है कि कविराजा श्यामलदास ने उन्हें इसे आरंभ करने के लिए प्रेरित किया।
असत्य कथन विकल्प (2) है, जो चारणों के स्थान पर दलितों को रख देता है।
- (3)इसकी प्रथम बैठक का आयोजन अजमेर में हुआ था । — RPSC की कुंजी में यह कथन सत्य है, इसलिए यह उत्तर नहीं है। सभा की प्रथम बैठक अजमेर में आयोजित हुई, जो उस समय राजपूताना के भीतर एक ब्रिटिश प्रांत था।
असत्य कथन विकल्प (2) है, जो इस बारे में है कि सुधार किनके लिए थे।
- (4)सभा ने अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सामाजिक नियम बनाए । — RPSC की कुंजी में यह कथन सत्य है, इसलिए यह उत्तर नहीं है। सभा ने जिन समुदायों में काम किया, उनके लिए सामाजिक नियम बनाकर सुधार का प्रयास किया।
केवल विकल्प (2) सभा के बारे में गलत बात कहता है, चारणों के स्थान पर दलितों का नाम लेकर।
अवधारणा
वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा राजपूताना की एक सामाजिक सुधार संस्था थी, जिसका नाम गवर्नर-जनरल के एजेंट कर्नल सी.के.एम. वाल्टर के नाम पर रखा गया; वे ही इसके अध्यक्ष थे। इसके सुधार राजपूत और चारण समुदायों के लिए थे।
चारण वह पारम्परिक कवि समुदाय था, जिससे स्वयं केसरी सिंह बारहठ आते थे। सभा की पूरे क्षेत्र में शाखाएँ थीं और इसके वार्षिक सम्मेलन होते थे।
1905 में सभा की कोटा शाखा के एक सम्मेलन में बारहठ ने प्रस्ताव रखा कि सभा राजपूतों के नियंत्रण में और ब्रिटिश प्रभाव से मुक्त हो, और उन्होंने इसकी कार्यवाही में हिन्दी के प्रयोग पर ज़ोर दिया।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "आधुनिक राजस्थान का उदय : 19वीं–20वीं शताब्दी के दौरान राजस्थान में सामाजिक जागृति के कारक" सूचीबद्ध है।
सभा के एक सक्रिय सदस्य सामाजिक सुधार से राजनीति की ओर बढ़े। शाहपुरा रियासत के चारण केसरी सिंह बारहठ (1872–1941) ने डिंगल में ‘चेतावणी रा चूंगट्या’ की रचना की, जिसे महाराणा फतेह सिंह को 1903 के दिल्ली दरबार में जाने से रोकने का श्रेय दिया जाता है।
बारहठ ने क्रांतिकारी संगठन वीर भारत सभा की स्थापना भी की और राजस्थान सेवा संघ के सह-संस्थापक रहे।
मुख्य तथ्य
- वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा का नाम राजपूताना के लिए गवर्नर-जनरल के एजेंट कर्नल वाल्टर के नाम पर रखा गया, जो इसके अध्यक्ष थे।
- साहित्य अकादेमी का ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर’ कहता है कि केसरी सिंह बारहठ ने सभा के सक्रिय सदस्य के रूप में राजपूतों और चारणों में सामाजिक सुधार लाने में सहायता की।
- RPSC की कुंजी स्वीकार करती है कि सभा की स्थापना 1888 में हुई, इसकी प्रथम बैठक अजमेर में हुई और इसने सामाजिक नियम बनाए।
- 1905 में सभा की कोटा शाखा के एक सम्मेलन में केसरी सिंह बारहठ ने प्रस्ताव रखा कि यह राजपूतों के नियंत्रण में और ब्रिटिश प्रभाव से मुक्त हो।
- बारहठ की डिंगल रचना ‘चेतावणी रा चूंगट्या’ को महाराणा फतेह सिंह को 1903 के दिल्ली दरबार में जाने से रोकने का श्रेय दिया जाता है।
प्रश्न असत्य कथन पूछता है: विकल्प (2)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- चारणों के स्थान पर दलितों को रख देना: सभा के सुधार राजपूतों और चारणों से संबंधित थे।
- "असत्य" पूछने वाले प्रश्न का उत्तर किसी सत्य कथन से देना: यहाँ तीन कथन टिकते हैं, और उत्तर वह है जो नहीं टिकता।
- सभा को शुरू से ही राजनीतिक संस्था मान लेना: यह एक सुधार संगठन था, और राजपूत नियंत्रण की माँग 1905 में इसकी कोटा शाखा के एक सम्मेलन में उठी।
कोई प्रश्न किसी सुधार संस्था के बारे में कथनों की सूची — जैसे उसका संस्थापक, वर्ष, प्रथम बैठक, लक्षित समुदाय या कार्य-पद्धति — देकर पूछ सकता है कि कौन-सा असत्य है।
कोई प्रश्न राजस्थान की उन्नीसवीं शताब्दी की संस्थाओं को उनके संस्थापकों या स्थापना-वर्षों से सुमेलित भी करवा सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2016 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा का उद्देश्य किन समुदायों में सामाजिक सुधार था ?
- (a)राजपूत और चारण
- (b)राजपूत और जाट
- (c)चारण और भील
- (d)जाट और भील
उत्तर(1) — इसके सुधार राजपूत और चारण समुदायों से संबंधित थे। विकल्प (2) चारणों के स्थान पर जाटों को रखता है; विकल्प (3) राजपूतों को छोड़ देता है, जिनका नाम सभा के नाम में ही है; और विकल्प (4) इन दोनों में से किसी समुदाय का नाम नहीं लेता। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
केसरी सिंह बारहठ की डिंगल रचना ‘चेतावणी रा चूंगट्या’ को किस शासक को 1903 के दिल्ली दरबार में न जाने के लिए राज़ी करने का श्रेय दिया जाता है ?
- (a)मेवाड़ के महाराणा फतेह सिंह
- (b)बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह
- (c)जोधपुर के महाराजा उम्मेद सिंह
- (d)जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह द्वितीय
उत्तर(1) — ये पंक्तियाँ महाराणा फतेह सिंह को संबोधित थीं, जो दरबार में शामिल हुए बिना दिल्ली से लौट आए। विकल्प (2) और (4) वे शासक नहीं थे जिन्हें ये पंक्तियाँ संबोधित थीं; और विकल्प (3) का जन्म 1903 में हुआ और वे 1918 में ही जोधपुर के महाराजा बने।