निम्नांकित में से कौन राजकोषीय नीति का उपकरण नहीं है ?
- (1)सार्वजनिक व्यय
- (2)ब्याज दर
- (3)हीनार्थ प्रबन्ध
- (4)करारोपण
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), ब्याज दर.
राजकोषीय नीति सरकार द्वारा अपने बजट का उपयोग है। NCERT की कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक ‘इंट्रोडक्टरी मैक्रोइकोनॉमिक्स’ (2026-27 पुनर्मुद्रण) इसका वर्णन इस तरह करती है: अपने व्यय और करों में बदलाव करके सरकार उत्पादन और आय बढ़ाने तथा अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव को स्थिर करने का प्रयास करती है।
सार्वजनिक व्यय, विकल्प (1), और करारोपण, विकल्प (4), उसी बजट के दो पक्ष हैं। हीनार्थ प्रबन्ध, विकल्प (3), सरकार की प्राप्तियों से अधिक खर्च करने और उस अंतर को पूरा करने का निर्णय है, और NCERT के अनुसार यह अंतर कर, उधार या मुद्रा छापकर पूरा करना होता है।
ब्याज दर मौद्रिक नीति का उपकरण है। 2016 में संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत मौद्रिक नीति चलाने का दायित्व भारतीय रिज़र्व बैंक को सौंपा गया है, और छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति नीतिगत दर तय करती है।
याद रखने योग्य बात: व्यय, कर और घाटा राजकोषीय नीति (सरकार) हैं; ब्याज दरें और मुद्रा आपूर्ति मौद्रिक नीति (RBI) हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)सार्वजनिक व्यय — सार्वजनिक व्यय राजकोषीय उपकरण है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता। यह बजट का एक पक्ष है: NCERT बताती है कि जब सरकार वस्तुओं और सेवाओं की अपनी खरीद बढ़ाती है, तो समग्र माँग बढ़ती है।
अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए व्यय बढ़ाना या घटाना वह है जिसे NCERT विवेकाधीन राजकोषीय नीति कहती है।
- (3)हीनार्थ प्रबन्ध — हीनार्थ प्रबन्ध राजकोषीय उपकरण है। इसका अर्थ है ऐसा बजट चलाना जिसमें व्यय प्राप्तियों से अधिक हो, और फिर उस अंतर का वित्तपोषण करना।
NCERT बजट घाटे के वित्तपोषण के तरीके बताती है: कर, उधार या मुद्रा छापना। घाटा चलाने का निर्णय सरकार के बजट का है, भले ही उधार या मुद्रा सृजन में केंद्रीय बैंक शामिल हो।
- (4)करारोपण — करारोपण राजकोषीय उपकरण है। कर आय और प्रयोज्य आय के बीच का अंतर बदलते हैं, और इस तरह परिवारों की खर्च करने की क्षमता बदलते हैं।
NCERT जोड़ती है कि आनुपातिक आयकर स्वचालित स्थिरकारी का काम करता है: जब GDP बढ़ता है तो प्रयोज्य आय उससे कम बढ़ती है, जिससे उपभोग के उतार-चढ़ाव कम होते हैं।
अवधारणा
सरकारें और केंद्रीय बैंक अलग-अलग उपकरणों से अर्थव्यवस्था की माँग को दिशा देते हैं।
राजकोषीय नीति सरकारी बजट के माध्यम से काम करती है: व्यय, करारोपण, और घाटे का आकार तथा उसका वित्तपोषण। संघ का बजट संसद स्वीकृत करती है, जिसे संविधान का अनुच्छेद 112 वार्षिक वित्तीय विवरण कहता है।
मौद्रिक नीति मुद्रा और साख के माध्यम से काम करती है। NCERT RBI के परिमाणात्मक उपकरण नकद आरक्षित अनुपात, बैंक दर और खुले बाजार की क्रियाओं में बदलाव बताती है, और रेपो क्रियाओं को RBI की मौद्रिक नीति का मुख्य उपकरण बताती है। इन दरों को बदलने से पूरी अर्थव्यवस्था में उधार की लागत बदलती है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "अर्थशास्त्र की मूलभूत अवधारणाएं" के अंतर्गत बजट निर्माण, बैंकिंग और लोक–वित्त के साथ "राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियाँ" सूचीबद्ध हैं।
भारत में दोनों नीतियाँ अलग-अलग हाथों में हैं। संघ सरकार बजट के माध्यम से राजकोषीय नीति बनाती है। मौद्रिक नीति के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 में मई 2016 में संशोधन कर लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचे को वैधानिक आधार दिया गया।
उस ढाँचे के अंतर्गत लक्ष्य 4 प्रतिशत CPI मुद्रास्फीति है, जिसकी ऊपरी सहनीय सीमा 6 प्रतिशत और निचली 2 प्रतिशत है। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2021 को इसे अप्रैल 2021 से मार्च 2026 के लिए यथावत रखा।
मुख्य तथ्य
- NCERT: अपने व्यय और करों में बदलाव करके सरकार उत्पादन और आय बढ़ाने तथा अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का प्रयास करती है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2016 में संशोधित) के अंतर्गत RBI विकास को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता को प्राथमिक उद्देश्य मानकर मौद्रिक नीति चलाता है।
- RBI अधिनियम की धारा 45ZB नीतिगत दर तय करने के लिए छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति का प्रावधान करती है।
- भारत का मुद्रास्फीति लक्ष्य 4 प्रतिशत CPI मुद्रास्फीति है, सहनीय दायरा 2-6 प्रतिशत, जो अप्रैल 2021 से मार्च 2026 के लिए यथावत रखा गया।
- NCERT RBI के परिमाणात्मक उपकरण नकद आरक्षित अनुपात, बैंक दर और खुले बाजार की क्रियाओं में बदलाव बताती है।
स्रोत: NCERT कक्षा 12 ‘इंट्रोडक्टरी मैक्रोइकोनॉमिक्स’, अध्याय 3 और 5; RBI का मौद्रिक नीति परिचय पृष्ठ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- ब्याज बजट में भी आता है: सरकारी ऋण पर ब्याज भुगतान सार्वजनिक व्यय का हिस्सा है। ब्याज चुकाना राजकोषीय है; ब्याज दर तय करना मौद्रिक है।
- हीनार्थ प्रबन्ध बैंकिंग जैसा लगता है, पर प्राप्तियों से अधिक खर्च करने का निर्णय बजट का निर्णय है, इसलिए यह राजकोषीय उपकरण है।
- खुले बाजार की क्रियाएँ सरकारी बॉण्ड में लेन-देन करती हैं, फिर भी वे मौद्रिक उपकरण हैं: NCERT बताती है कि जब RBI सरकारी बॉण्ड खरीदता है तो आरक्षित निधियाँ और मुद्रा आपूर्ति बढ़ती हैं।
कोई प्रश्न चार उपकरणों की सूची देकर पूछ सकता है कि कौन-सा राजकोषीय नीति का उपकरण नहीं है, या कौन-सा मौद्रिक नीति का उपकरण है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि भारत की नीतिगत रेपो दर कौन-सा निकाय तय करता है, या कौन-सा कानून RBI को मौद्रिक नीति का दायित्व देता है।
संबंधित PYQ
राजस्थान के राजकोषीय घाटे के सम्बन्ध में निम्न कथनों पर विचार करें : A. वर्ष 2022-23 में वास्तविक राजकोषीय घाटा राज्य सकल घरेलू उत्पाद का 3.76 प्रतिशत रहा है । B. यह एफ.आर.बी.एम. अधिनियम, 2005 द्वारा अनुमोदित सीमा से कम है । C. वर्ष 2022-23 का राजकोषीय घाटा 2021-22 की तुलना में अधिक था । सही विकल्प को चुनिए :
- (1) A व C दोनों सही हैं ।
- (2) A व B दोनों सही हैं ।
- (3) B व C दोनों सही हैं ।
- (4) A, B व C सभी सही हैं ।
उत्तर(4)
व्यवहार में राजकोषीय नीति का एक नियम: 2022-23 में राजस्थान के राजकोषीय घाटे और एफ.आर.बी.एम. अधिनियम, 2005 की सीमा पर कथन (RPSC की कुंजी: A, B व C सभी सही हैं)। यह प्रश्न राजकोषीय और मौद्रिक उपकरणों के सामान्य अंतर पर ही रहता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन मौद्रिक नीति का उपकरण है ?
- (a)करारोपण
- (b)सार्वजनिक उधार
- (c)रेपो दर
- (d)सब्सिडी
उत्तर(3) — रेपो दर RBI की मौद्रिक नीति समिति तय करती है और यह उधार की लागत बदलती है। विकल्प (1), (2) और (4) सरकार के बजट संबंधी निर्णय हैं, इसलिए राजकोषीय उपकरण हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत में नीतिगत रेपो दर कौन तय करता है ?
- (a)वित्त आयोग
- (b)मौद्रिक नीति समिति
- (c)GST परिषद
- (d)नीति आयोग
उत्तर(2) — RBI अधिनियम की धारा 45ZB नीतिगत दर तय करने के लिए छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति का प्रावधान करती है। विकल्प (1) करों की शुद्ध प्राप्तियों के संघ और राज्यों के बीच वितरण की सिफारिश करता है (अनुच्छेद 280)। विकल्प (3) अनुच्छेद 279A के अंतर्गत वस्तु एवं सेवा कर परिषद है। विकल्प (4) नीतिगत दर तय नहीं करता।