राजस्थान के राजकोषीय घाटे के सम्बन्ध में निम्न कथनों पर विचार करें : A. वर्ष 2022-23 में वास्तविक राजकोषीय घाटा राज्य सकल घरेलू उत्पाद का 3.76 प्रतिशत रहा है । B. यह एफ.आर.बी.एम. अधिनियम, 2005 द्वारा अनुमोदित सीमा से कम है । C. वर्ष 2022-23 का राजकोषीय घाटा 2021-22 की तुलना में अधिक था । सही विकल्प को चुनिए :
- (1)A व C दोनों सही हैं ।
- (2)A व B दोनों सही हैं ।
- (3)B व C दोनों सही हैं ।
- (4)A, B व C सभी सही हैं ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), A, B व C सभी सही हैं ।
तीनों कथन राजस्थान सरकार की आर्थिक समीक्षा 2023-24 के अध्याय 10 (राज्य वित्त और विकास के अन्य संसाधन) से जाँचे जा सकते हैं।
कथन A सही है। 2022-23 में वास्तविक राजकोषीय घाटा ₹51,029 करोड़ था, जिसे समीक्षा राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 3.76 प्रतिशत बताती है।
कथन B सही है। समीक्षा 3.76 प्रतिशत की तुलना एफ.आर.बी.एम. अधिनियम, 2005 के तहत 4.37 प्रतिशत की अनुमत सीमा से करती है। इस सीमा में ऊर्जा क्षेत्र के लिए 0.50 प्रतिशत और राज्यों को विशेष सहायता योजना के 50-वर्षीय ऋणों के लिए 0.37 प्रतिशत की अतिरिक्त उधार-छूट शामिल है।
कथन C रुपयों में सही है। घाटा 2021-22 के ₹48,238 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में ₹51,029 करोड़ हो गया।
तीनों कथन सही हैं, इसलिए उत्तर A, B व C सभी सही हैं है।
याद रखने की बात: घाटा रुपयों में बढ़ते हुए भी GSDP के हिस्से के रूप में घट सकता है। यहाँ अनुपात 4.04 से घटकर 3.76 प्रतिशत हुआ, क्योंकि GSDP घाटे से तेज़ी से बढ़ा।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)A व C दोनों सही हैं । — A और C सही हैं, पर यह कूट B को छोड़ देता है, जो भी सही है।
आर्थिक समीक्षा 2022-23 के 3.76 प्रतिशत के अनुपात की तुलना एफ.आर.बी.एम. अधिनियम, 2005 के तहत 4.37 प्रतिशत की अनुमत सीमा से करती है। घाटा उस सीमा के भीतर था, इसलिए B भी सही है।
- (2)A व B दोनों सही हैं । — यह कूट C को छोड़ देता है। यह तभी ठीक बैठता जब C घाटे के अनुपातों की तुलना करता: 2021-22 में GSDP का 4.04 प्रतिशत और 2022-23 में 3.76 प्रतिशत।
C स्वयं घाटे की तुलना करता है, और रुपयों में घाटा बढ़ा, ₹48,238 करोड़ से ₹51,029 करोड़। RPSC की कुंजी C को सही मानती है, जो केवल इसी अर्थ में ठीक बैठता है।
- (3)B व C दोनों सही हैं । — यह कूट A को छोड़ देता है, जबकि A समीक्षा का अपना आँकड़ा है: 2022-23 का ₹51,029 करोड़ का राजकोषीय घाटा GSDP का 3.76 प्रतिशत है (GSDP ₹13,57,851 करोड़)।
B और C भी सही हैं, इसलिए पूरा समूह A, B और C है।
अवधारणा
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और उधार को छोड़कर उसकी कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर है। यह मापता है कि सरकार को वर्ष में कितना उधार लेना होगा।
इसे दो तरह से बताया जाता है: रुपयों में, और राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के प्रतिशत के रूप में। राजकोषीय नियम अनुपात को लक्ष्य बनाते हैं, क्योंकि वह उधार को अर्थव्यवस्था के आकार के अनुपात में रखता है।
राजस्थान का राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2005 राज्य के घाटे और ऋण घटाने के लक्ष्य देता है। किसी वर्ष का अनुमत घाटा मूल सीमा से अधिक हो सकता है, जब केंद्र ऊर्जा क्षेत्र के सुधार जैसी शर्तों से जुड़ा अतिरिक्त उधार अनुमत करता है।
RPSC के 2024 के प्रारंभिक पाठ्यक्रम में "राजस्थान की अर्थव्यवस्था" के अंतर्गत "अर्थव्यवस्था का वृहत् परिदृश्य" सूचीबद्ध है, और "अर्थशास्त्र की मूलभूत अवधारणाएं" में "बजट निर्माण, बैंकिंग, लोक–वित्त, वस्तु एवं सेवा कर, राष्ट्रीय आय, संवृद्धि एवं विकास का आधारभूत ज्ञान"। राज्य का घाटा इन दोनों के मिलन-बिंदु पर है।
राजस्थान सरकार की आर्थिक समीक्षा 2023-24 अपने राज्य वित्त वाले अध्याय 10 में 2022-23 तक के वास्तविक राजकोषीय आँकड़े देती है।
हाल के वर्षों में यह अनुपात तेज़ी से बदला है: 2019-20 में GSDP का 3.77 प्रतिशत, 2020-21 में 5.83 प्रतिशत, फिर 2021-22 में 4.04 प्रतिशत और 2022-23 में 3.76 प्रतिशत।
मुख्य तथ्य
- 2022-23 में राजस्थान का वास्तविक राजकोषीय घाटा ₹51,029 करोड़, यानी GSDP का 3.76 प्रतिशत था (आर्थिक समीक्षा 2023-24)।
- 2022-23 के लिए एफ.आर.बी.एम. अधिनियम, 2005 के तहत अनुमत सीमा GSDP का 4.37 प्रतिशत थी, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र के लिए 0.50 प्रतिशत और 50-वर्षीय ऋणों के लिए 0.37 प्रतिशत शामिल है।
- 2021-22 में राजस्थान का राजकोषीय घाटा ₹48,238 करोड़, यानी GSDP का 4.04 प्रतिशत था।
- राजकोषीय घाटा/GSDP: 3.78% (2018-19), 3.77% (2019-20), 5.83% (2020-21), 4.04% (2021-22), 3.76% (2022-23)।
- प्रचलित कीमतों पर राजस्थान का GSDP 2022-23 में ₹13,57,851 करोड़ था, जबकि 2021-22 में ₹11,94,961 करोड़।
स्रोत: आर्थिक समीक्षा 2023-24, राजस्थान सरकार, अध्याय 10 और तालिका 10.1।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- "अधिक" के साथ इकाई देखनी होती है। रुपयों में 2022-23 का घाटा 2021-22 से अधिक था; GSDP के हिस्से के रूप में कम (4.04 के मुकाबले 3.76 प्रतिशत)। जाँचें कि कथन राशियों की तुलना करता है या अनुपातों की।
- किसी वर्ष की अनुमत सीमा FRBM के मूल आँकड़े से अधिक हो सकती है। समीक्षा की 2022-23 की 4.37 प्रतिशत की सीमा में ऊर्जा क्षेत्र के सुधारों (0.50) और 50-वर्षीय ऋणों (0.37) की अतिरिक्त छूट शामिल है।
- बजट, संशोधित और वास्तविक आँकड़े अलग होते हैं। 2022-23 के घाटे का संशोधित अनुमान ₹61,264 करोड़ था; वास्तविक ₹51,029 करोड़। वास्तविक घाटे पर कथन बाद वाले आँकड़े से जाँचा जाता है।
राज्य वित्त पर कोई प्रश्न किसी नामित वर्ष का घाटा-अनुपात देकर उसे FRBM सीमा से परख सकता है और किसी पिछले वर्ष से उसकी तुलना कर सकता है।
कोई प्रश्न एक ही कथन-समूह में अलग-अलग इकाइयों — रुपये और GSDP का प्रतिशत — वाले दावे रख सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2023-24 के अनुसार, 2021-22 में राज्य का राजकोषीय घाटा GSDP के प्रतिशत के रूप में था –
- (a)3.76 प्रतिशत
- (b)4.04 प्रतिशत
- (c)5.83 प्रतिशत
- (d)3.77 प्रतिशत
उत्तर(2) — समीक्षा की तालिका 10.1 में 2021-22 के लिए 4.04 प्रतिशत है।विकल्प (1) 2022-23 का अनुपात है, विकल्प (3) 2020-21 का और विकल्प (4) 2019-20 का।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
2021-22 से 2022-23 के बीच राजस्थान का राजकोषीय घाटा रुपयों में बढ़ा, फिर भी GSDP के 4.04 से घटकर 3.76 प्रतिशत रह गया। निम्नलिखित में से कौन-सा इसका कारण है?
- (a)GSDP राजकोषीय घाटे से तेज़ी से बढ़ा
- (b)राज्य की राजस्व प्राप्तियाँ घटीं
- (c)घाटे का वित्तपोषण केंद्र से ऋण लेकर किया गया
- (d)ब्याज भुगतान को घाटे से बाहर रखा गया
उत्तर(1) — घाटा लगभग 6 प्रतिशत बढ़ा (₹48,238 से ₹51,029 करोड़), जबकि GSDP लगभग 14 प्रतिशत बढ़ा, इसलिए अनुपात घटा।विकल्प (2) गलत है: राजस्व प्राप्तियाँ बढ़ीं। विकल्प (3) घाटे के वित्तपोषण से जुड़ा है, उसके आकार से नहीं। विकल्प (4) इसलिए गलत है कि ब्याज भुगतान राजकोषीय घाटे में गिने जाते हैं।