निम्नलिखित में से कौन सा समीकरण सकल राजकोषीय घाटे के सूत्र को दर्शाता है ?
- (1)सकल राजकोषीय घाटा = प्राथमिक घाटा + विदेशों से प्राप्त शुद्ध उधार
- (2)सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ
- (3)सकल राजकोषीय घाटा = राजस्व घाटा + पूँजी व्यय
- (4)सकल राजकोषीय घाटा = शुद्ध घरेलू उधार + आर.बी.आई. से उधार + विदेशी उधार
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), सकल राजकोषीय घाटा = शुद्ध घरेलू उधार + आर.बी.आई. से उधार + विदेशी उधार.
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और उधार को छोड़कर उसकी कुल प्राप्तियों का अंतर है। NCERT की कक्षा XII की पाठ्यपुस्तक ‘इंट्रोडक्टरी मैक्रोइकोनॉमिक्स’ (अध्याय 5, सरकारी बजट और अर्थव्यवस्था; 2026-27 पुनर्मुद्रण) इसे दो तरह से लिखती है।
बजट की ओर से: सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियाँ + ऋण-सृजन न करने वाली पूँजीगत प्राप्तियाँ)।
यह अंतर उधार से पूरा करना पड़ता है, इसलिए NCERT इसे वित्तपोषण की ओर से भी मापती है: सकल राजकोषीय घाटा = शुद्ध घरेलू उधार + आर.बी.आई. से उधार + विदेशी उधार। यही विकल्प (4) का समीकरण है।
NCERT के अनुसार शुद्ध घरेलू उधार में अल्प बचत योजनाओं जैसे ऋण-पत्रों के माध्यम से जनता से सीधे लिया गया उधार, और सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) के माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों से परोक्ष रूप से लिया गया उधार शामिल है।
याद रखने योग्य बात: राजकोषीय घाटा सभी स्रोतों से सरकार की कुल उधार आवश्यकता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)सकल राजकोषीय घाटा = प्राथमिक घाटा + विदेशों से प्राप्त शुद्ध उधार — NCERT सकल प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा – शुद्ध ब्याज देनदारियाँ परिभाषित करती है। इसे उलटने पर राजकोषीय घाटा प्राथमिक घाटे और शुद्ध ब्याज देनदारियों का योग है, विदेशी उधार का नहीं।
विदेशी उधार उन तीन स्रोतों में से एक है जो पूरे राजकोषीय घाटे का वित्तपोषण करते हैं, जैसा विकल्प (4) दिखाता है।
- (2)सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ — यह ऋण-सृजन न करने वाली पूँजीगत प्राप्तियों को छोड़ देता है, जैसे ऋणों की वसूली और सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री से प्राप्तियाँ, जिन्हें NCERT घटाने से पहले राजस्व प्राप्तियों में जोड़ती है।
आर्थिक समीक्षा 2022-23 में राजस्थान के 2021-22 के आँकड़ों पर लगाने से यह 50,643 करोड़ रुपये (2,34,563 – 1,83,920) देता है, जो मुद्रित राजकोषीय घाटे 48,238 करोड़ रुपये से 2,405 करोड़ रुपये की गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियों जितना अधिक है।
- (3)सकल राजकोषीय घाटा = राजस्व घाटा + पूँजी व्यय — NCERT के रूप में एक तीसरा पद है: राजकोषीय घाटा = राजस्व घाटा + पूँजी व्यय – ऋण-सृजन न करने वाली पूँजीगत प्राप्तियाँ। विकल्प (3) यह घटाव छोड़ देता है।
उसके बिना विकल्प (3) विकल्प (2) के बराबर ही हो जाता है, क्योंकि राजस्व घाटा और पूँजी व्यय का योग कुल व्यय में से राजस्व प्राप्तियाँ घटाने के बराबर है।
अवधारणा
NCERT सरकारी घाटे को तीन तरह से मापती है। राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ। राजकोषीय घाटा कुल व्यय में से राजस्व प्राप्तियाँ और ऋण-सृजन न करने वाली पूँजीगत प्राप्तियाँ घटाकर मिलता है। प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे में से शुद्ध ब्याज देनदारियाँ घटाकर मिलता है।
ऋण-सृजन न करने वाली पूँजीगत प्राप्तियों से कोई ऋण उत्पन्न नहीं होता; NCERT के उदाहरण ऋणों की वसूली और सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री से प्राप्तियाँ हैं। उधार वह पूँजीगत प्राप्ति है जिसे छोड़ दिया जाता है।
राजस्व घाटा राजकोषीय घाटे के भीतर रहता है। NCERT बताती है कि राजकोषीय घाटे में राजस्व घाटे का बड़ा हिस्सा होने का अर्थ है कि उधार का बड़ा भाग निवेश के बजाय उपभोग व्यय पूरा करने में जा रहा है।
प्राथमिक घाटा पिछले ऋण पर ब्याज को अलग कर देता है, ताकि चालू वर्ष का अपना असंतुलन दिखे।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "आर्थिक अवधारणाएँ एवं भारतीय अर्थव्यवस्था" के अंतर्गत "बजट निर्माण, बैंकिंग, लोक–वित्त, वस्तु एवं सेवा कर, राष्ट्रीय आय, संवृद्धि एवं विकास का आधारभूत ज्ञान" और "राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियाँ" शामिल हैं।
यही परिभाषाएँ राज्य के बजट पर भी लागू होती हैं। राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2022-23 (सारणी 10.1) वर्ष 2021-22 के लिए कुल व्यय 2,34,563 करोड़ रुपये और कुल प्राप्तियाँ (राजस्व और गैर-ऋण पूँजीगत) 1,86,325 करोड़ रुपये दर्ज करती है।
उसमें मुद्रित राजकोषीय घाटा, 48,238 करोड़ रुपये, ठीक इन दोनों आँकड़ों का अंतर है, और GSDP का 3.96 प्रतिशत है।
उसका प्राथमिक घाटा, 20,138 करोड़ रुपये, वही राजकोषीय घाटा है जिसमें से उसी सारणी के 28,100 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान घटाए गए हैं।
मुख्य तथ्य
- NCERT: सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियाँ + ऋण-सृजन न करने वाली पूँजीगत प्राप्तियाँ)।
- NCERT, वित्तपोषण की ओर से: सकल राजकोषीय घाटा = शुद्ध घरेलू उधार + आर.बी.आई. से उधार + विदेशी उधार।
- NCERT: राजकोषीय घाटा = राजस्व घाटा + पूँजी व्यय – ऋण-सृजन न करने वाली पूँजीगत प्राप्तियाँ।
- NCERT: सकल प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा – शुद्ध ब्याज देनदारियाँ।
- राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2022-23: 2021-22 में राज्य का राजकोषीय घाटा 48,238 करोड़ रुपये था, जो GSDP का 3.96 प्रतिशत है।
सभी आँकड़े राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2022-23 की सारणी 10.1 में मुद्रित रूप में; घटाव मुद्रित योगों की जाँच करते हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- ऋण-सृजन न करने वाली पूँजीगत प्राप्तियों को भूल जाना: कुल व्यय में से केवल राजस्व प्राप्तियाँ घटाने पर राजकोषीय घाटा ऋणों की वसूली और विनिवेश प्राप्तियों जितना बढ़ा हुआ आता है।
- प्राथमिक घाटे में गलत पद जोड़ना: राजकोषीय घाटा प्राथमिक घाटे और शुद्ध ब्याज देनदारियों का योग है।
- विकल्प (2) और (3) को अलग-अलग मानना: राजस्व घाटा और पूँजी व्यय का योग कुल व्यय में से राजस्व प्राप्तियाँ घटाने के समान है।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि कौन-सा समीकरण सकल राजकोषीय घाटा देता है, बजट की ओर से या वित्तपोषण की ओर से।
कोई प्रश्न बजट के आँकड़े देकर राजस्व, राजकोषीय या प्राथमिक घाटा भी पूछ सकता है, या यह पूछ सकता है कि ऋण-सृजन न करने वाली पूँजीगत प्राप्तियों में क्या शामिल है।
संबंधित PYQ
राजस्थान के राजकोषीय घाटे के सम्बन्ध में निम्न कथनों पर विचार करें : A. वर्ष 2022-23 में वास्तविक राजकोषीय घाटा राज्य सकल घरेलू उत्पाद का 3.76 प्रतिशत रहा है । B. यह एफ.आर.बी.एम. अधिनियम, 2005 द्वारा अनुमोदित सीमा से कम है । C. वर्ष 2022-23 का राजकोषीय घाटा 2021-22 की तुलना में अधिक था । सही विकल्प को चुनिए :
- (1) A व C दोनों सही हैं ।
- (2) A व B दोनों सही हैं ।
- (3) B व C दोनों सही हैं ।
- (4) A, B व C सभी सही हैं ।
उत्तर(4)
वही माप, राजस्थान पर लागू। वह प्रश्न राज्य के राजकोषीय घाटे पर तीन कथन जाँचता है: वर्ष 2022-23 में यह राज्य सकल घरेलू उत्पाद का 3.76 प्रतिशत रहा, एफ.आर.बी.एम. अधिनियम, 2005 द्वारा अनुमोदित सीमा से कम है, और 2021-22 की तुलना में अधिक था (RPSC की कुंजी: A, B व C सभी सही हैं); यह प्रश्न सकल राजकोषीय घाटे को परिभाषित करने वाला सूत्र पूछता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी सरकार के बजट में (करोड़ रुपये): राजस्व प्राप्तियाँ 100, राजस्व व्यय 120, पूँजी व्यय 40, ऋणों की वसूली 5, और विनिवेश प्राप्तियाँ 5 हैं। उसका सकल राजकोषीय घाटा कितना है ?
- (a)60 करोड़ रुपये
- (b)50 करोड़ रुपये
- (c)20 करोड़ रुपये
- (d)40 करोड़ रुपये
उत्तर(2) — कुल व्यय = 120 + 40 = 160। गैर-ऋण प्राप्तियाँ = 100 + 5 + 5 = 110। राजकोषीय घाटा = 160 – 110 = 50। विकल्प (1) 160 – 100 है, जो गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ छोड़ देता है; विकल्प (3) राजस्व घाटा (120 – 100) है; विकल्प (4) केवल पूँजी व्यय है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन सकल प्राथमिक घाटे की सही परिभाषा है ?
- (a)सकल राजकोषीय घाटा – शुद्ध ब्याज देनदारियाँ
- (b)सकल राजकोषीय घाटा + शुद्ध ब्याज देनदारियाँ
- (c)राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ
- (d)कुल व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ
उत्तर(1) — NCERT सकल प्राथमिक घाटे को सकल राजकोषीय घाटे में से शुद्ध ब्याज देनदारियाँ घटाकर परिभाषित करती है। विकल्प (2) ब्याज हटाने के बजाय जोड़ता है; विकल्प (3) राजस्व घाटा है; विकल्प (4) गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ छोड़ देता है और ब्याज नहीं हटाता।