राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए : (i) मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के प्रावधानानुसार आयोग में एक अध्यक्ष एवं चार सदस्य हैं । (ii) वर्तमान में न्यायमूर्ति गोपाल कृष्ण व्यास इसके अध्यक्ष हैं ।
- (1)न तो (i) न ही (ii) सही है ।
- (2)(i) व (ii) दोनों सही हैं ।
- (3)केवल (ii) सही है ।
- (4)केवल (i) सही है ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), केवल (ii) सही है ।
कथन (i) गलत है। आयोग की अपनी वेबसाइट बताती है कि राज्य सरकार की 18 जनवरी 1999 की अधिसूचना ने इसे एक पूर्णकालिक अध्यक्ष और मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत 4 सदस्यों के साथ गठित किया।
वही पृष्ठ आगे बताता है कि मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार आयोग में एक अध्यक्ष और 2 सदस्य हैं। चार सदस्य 1993 के अधिनियम की व्यवस्था है, 2006 के संशोधन की नहीं।
कथन (ii) 1 अक्टूबर 2023 के लिए सही है। आयोग के 2022-23 और 2023-24 के वार्षिक प्रतिवेदन न्यायमूर्ति जी.के. व्यास को 25 जनवरी 2021 से अध्यक्ष दिखाते हैं, और उनका कार्यकाल जारी दिखाते हैं। 2023-24 के प्रतिवेदन की प्रस्तावना पर अध्यक्ष के रूप में गोपाल कृष्ण व्यास के हस्ताक्षर हैं।
(i) गलत और (ii) सही होने से कूट विकल्प (3) है, केवल (ii) सही है ।
याद रखने योग्य बात: 1993 के अधिनियम में चार सदस्य, 2006 के संशोधन में दो।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)न तो (i) न ही (ii) सही है । — कथन (i) गलत है, पर यह कूट कथन (ii) को भी नकार देता है, जो सही है। 2023-24 का वार्षिक प्रतिवेदन न्यायमूर्ति जी.के. व्यास को 25 जनवरी 2021 से अध्यक्ष दिखाता है, जो पद पर बने हुए थे।
वही प्रतिवेदन दो सदस्यों, महेश गोयल और न्यायमूर्ति रामचन्द्र सिंह झाला, का कार्यकाल जारी दिखाता है, जो 2006 के संशोधन की दो सदस्यों वाली संख्या से मेल खाता है।
- (2)(i) व (ii) दोनों सही हैं । — कथन (ii) सही है, पर कथन (i) नहीं। एक अध्यक्ष और 4 सदस्य 1993 के अधिनियम के अंतर्गत जारी 1999 की अधिसूचना वाली संख्या थी।
आयोग की वेबसाइट मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के अंतर्गत एक अध्यक्ष और 2 सदस्य बताती है।
- (4)केवल (i) सही है । — यह कूट उत्तर को उलट देता है। कथन (i) 1993 के अधिनियम वाली चार सदस्यों की संरचना को 2006 के संशोधन से जोड़ देता है, जबकि आयोग की वेबसाइट के अनुसार वह संशोधन दो सदस्य देता है।
सही कथन (ii) है: न्यायमूर्ति जी.के. व्यास 25 जनवरी 2021 से अध्यक्ष थे, और 2023-24 का वार्षिक प्रतिवेदन उनका कार्यकाल जारी दिखाता है।
अवधारणा
केंद्रीय कानून मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग और राज्य मानव अधिकार आयोगों का प्रावधान करता है। राजस्थान आयोग की वेबसाइट उसकी भूमिका राज्य में मानव अधिकारों के प्रहरी के रूप में बताती है।
अधिनियम ने आयोग के आकार और पात्रता के नियम एक से अधिक बार बदले हैं। आयोग की वेबसाइट 1993 के अधिनियम के अंतर्गत एक अध्यक्ष और चार सदस्य, और 2006 के संशोधन के अंतर्गत एक अध्यक्ष और दो सदस्य बताती है।
जुलाई 2019 में दोनों सदनों से पारित मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019 के PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के सारांश के अनुसार इसने राज्य आयोग का अध्यक्ष पद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के साथ-साथ पूर्व न्यायाधीश के लिए भी खोल दिया।
वेबसाइट आयोग की अपनी अन्वेषण एजेंसी का उल्लेख करती है, जिसका प्रमुख महानिरीक्षक से अनिम्न स्तर का पुलिस अधिकारी होता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान की "संस्थाएं" के अंतर्गत "राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग" शामिल हैं।
आयोग की वेबसाइट के अनुसार यह 18 जनवरी 1999 को अधिसूचित हुआ और मार्च 2000 से कार्यशील हुआ। इसकी पहली अध्यक्ष, न्यायमूर्ति कांता भटनागर, ने 23 मार्च 2000 को पद ग्रहण किया।
इसके वार्षिक प्रतिवेदनों में अध्यक्षों की सूची में पूर्णकालिक और कार्यवाहक, दोनों प्रकार के पदधारी हैं। न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया 11 मार्च 2016 से 25 नवम्बर 2019 तक रहे, और न्यायमूर्ति महेश चन्द्र शर्मा 5 दिसम्बर 2019 से 24 जनवरी 2021 तक कार्यवाहक अध्यक्ष रहे।
1 अक्टूबर 2023 को, 2023-24 के वार्षिक प्रतिवेदन के अनुसार, न्यायमूर्ति जी.के. व्यास अध्यक्ष थे और दो सदस्य पद पर थे।
मुख्य तथ्य
- राज्य सरकार की 18 जनवरी 1999 की अधिसूचना ने 1993 के अधिनियम के अंतर्गत आयोग को एक पूर्णकालिक अध्यक्ष और 4 सदस्यों के साथ गठित किया।
- आयोग की वेबसाइट के अनुसार राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग मार्च 2000 से कार्यशील हुआ।
- आयोग की वेबसाइट के अनुसार मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के अंतर्गत आयोग में एक अध्यक्ष और 2 सदस्य हैं।
- न्यायमूर्ति जी.के. व्यास 25 जनवरी 2021 को अध्यक्ष बने और 1 अक्टूबर 2023 को पद पर थे; 2022-23 और 2023-24 के वार्षिक प्रतिवेदन उनका कार्यकाल जारी दिखाते हैं।
- 2023-24 का वार्षिक प्रतिवेदन दो सदस्यों का कार्यकाल जारी दिखाता है: महेश गोयल (25 जनवरी 2021 से) और न्यायमूर्ति रामचन्द्र सिंह झाला (16 जनवरी 2023 से)।
आयोग की वेबसाइट, उसके 2022-23 और 2023-24 के वार्षिक प्रतिवेदनों, और 2019 के विधेयक पर PRS के सारांश से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 1993 वाली संरचना को 2006 के संशोधन से जोड़ देना: चार सदस्य 1993 के अधिनियम के अंतर्गत 1999 की अधिसूचना के साथ आए; 2006 का संशोधन दो देता है।
- कार्यवाहक अध्यक्षों को पूर्णकालिक गिन लेना: आयोग के वार्षिक प्रतिवेदनों की सूची कई पदधारियों को कार्यवाहक दिखाती है, जैसे 5 दिसम्बर 2019 से 24 जनवरी 2021 तक न्यायमूर्ति महेश चन्द्र शर्मा।
- पुराना पात्रता नियम लागू करना: 2019 के विधेयक पर PRS के सारांश के अनुसार उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के साथ पूर्व न्यायाधीश भी राज्य आयोग के अध्यक्ष बन सकते हैं।
कोई प्रश्न किसी नामित अधिनियम के अंतर्गत आयोग की संरचना पर एक कथन को वर्तमान अध्यक्ष पर एक कथन के साथ जोड़ सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि आयोग कब अधिसूचित या कार्यशील हुआ, या किस अध्यक्ष ने पूरा कार्यकाल पूरा किया।
संबंधित PYQ
राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के निम्नलिखित अध्यक्षों में से किन्होंने पाँच वर्ष की पदावधि पूरी की ?
- (1) न्यायमूर्ति श्रीमती कांता भटनागर
- (2) न्यायमूर्ति एन.के. जैन
- (3) न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद
- (4) न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया
उत्तर(2)
अध्यक्षों की वही सूची। वह प्रश्न पूछता है कि चार अध्यक्षों में से किसने पाँच वर्ष की पदावधि पूरी की (RPSC की कुंजी: न्यायमूर्ति एन.के. जैन); यह प्रश्न पूछता है कि क्या न्यायमूर्ति गोपाल कृष्ण व्यास वर्तमान अध्यक्ष हैं।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के अनुसार आयोग में एक अध्यक्ष और दो सदस्य किसके प्रावधानों के अनुसार हैं ?
- (a)मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
- (b)मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006
- (c)राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग विनियम, 2001
- (d)राजस्थान सरकार की 18 जनवरी 1999 की अधिसूचना
उत्तर(2) — आयोग की वेबसाइट दो सदस्यों वाली संख्या को 2006 के संशोधन अधिनियम से जोड़ती है। विकल्प (1) और (4) वह कानून और अधिसूचना हैं जिनके अंतर्गत आयोग चार सदस्यों के साथ शुरू हुआ; विकल्प (3) आयोग के अपने विनियम हैं, उसकी संरचना का स्रोत नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के पहले अध्यक्ष कौन थे ?
- (a)न्यायमूर्ति कांता भटनागर
- (b)न्यायमूर्ति एन.के. जैन
- (c)न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद
- (d)न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया
उत्तर(1) — आयोग की सूची न्यायमूर्ति कांता भटनागर को 23 मार्च 2000 से दिखाती है। विकल्प (3) 16 फरवरी 2001 से, विकल्प (2) 16 जुलाई 2005 से, और विकल्प (4) 11 मार्च 2016 से अध्यक्ष रहे।