राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के निम्नलिखित अध्यक्षों में से किन्होंने पाँच वर्ष की पदावधि पूरी की ?
- (1)न्यायमूर्ति श्रीमती कांता भटनागर
- (2)न्यायमूर्ति एन.के. जैन
- (3)न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद
- (4)न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), न्यायमूर्ति एन.के. जैन.
प्रश्न पूछता है कि इन चार पूर्व अध्यक्षों में से किन्होंने पाँच वर्ष की पदावधि पूरी की। आयोग की पूर्व पदधारियों की अपनी सूची हर व्यक्ति के पदभार ग्रहण और पद छोड़ने की तिथि देती है, इसलिए उत्तर तिथियों के अंतर से निकलता है।
न्यायमूर्ति एन.के. जैन ने 16 जुलाई 2005 को पदभार ग्रहण किया और 15 जुलाई 2010 को पद छोड़ा। यह पूरे पाँच वर्ष हैं, जो उस समय मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में तय पदावधि थी: पाँच वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो।
बाकी तीन पाँच वर्ष से पहले पद से हटे। न्यायमूर्ति कांता भटनागर 23 मार्च 2000 से 11 अगस्त 2000 तक, न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद 16 फरवरी 2001 से 3 जून 2004 तक, और न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया 11 मार्च 2016 से 25 नवम्बर 2019 तक पद पर रहे।
याद रखने की बात: कानून में तय पदावधि एक अधिकतम सीमा है, गारंटी नहीं। त्यागपत्र, पद से हटाए जाने या आयु-सीमा पूरी होने पर पद पहले समाप्त हो सकता है, इसलिए केवल वास्तविक तिथियाँ बताती हैं कि पदावधि किसने पूरी की।
प्रश्न यह नहीं पूछता कि कोई पहले क्यों हटा; उत्तर केवल तिथियों से मिल जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)न्यायमूर्ति श्रीमती कांता भटनागर — न्यायमूर्ति कांता भटनागर 23 मार्च 2000 से 11 अगस्त 2000 तक पद पर रहीं — पाँच महीने से कम, विकल्पों में दिए चार कार्यकालों में सबसे छोटा।
आयोग मार्च 2000 में कार्यशील हुआ, और उनके पदभार ग्रहण की तिथि 23 मार्च 2000 है। वे इस प्रश्न का सही उत्तर हैं कि 2000 में आयोग के कार्य शुरू करने के समय उसका अध्यक्ष कौन था, इसका नहीं कि पाँच वर्ष किसने पूरे किए।
- (3)न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद — न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद 16 फरवरी 2001 से 3 जून 2004 तक, लगभग तीन वर्ष चार महीने, पद पर रहे, इसलिए उन्होंने पाँच वर्ष पूरे नहीं किए।
वे इससे पहले भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश रहे थे; उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीशों की सूची में उनका नाम अंग्रेज़ी में S. Saghir Ahmad लिखा है। विकल्पों के चार नामों में से वे इस प्रश्न का सही उत्तर हैं कि इनमें से कौन उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा था।
- (4)न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया — न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया 11 मार्च 2016 से 25 नवम्बर 2019 तक, लगभग तीन वर्ष आठ महीने, पद पर रहे — पाँच वर्ष से कम।
विकल्पों के चार नामों में से उन्होंने सबसे बाद में पद छोड़ा। वे इस प्रश्न का सही उत्तर हैं कि इन चार में से किसने 2016–2019 में आयोग की अध्यक्षता की, इसका नहीं कि पाँच वर्ष की पदावधि किसने पूरी की।
अवधारणा
राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग एक सांविधिक निकाय है, जो मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत बना है — संविधान के अंतर्गत नहीं। यह अधिनियम केंद्र में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग और हर उस राज्य में राज्य मानव अधिकार आयोग का प्रावधान करता है जो इसका गठन करे।
राज्यपाल अध्यक्ष और सदस्यों को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफ़ारिश पर नियुक्त करता है। पद से हटाना राष्ट्रपति के आदेश से, अधिनियम में दिए आधारों पर, होता है।
पदावधि बदली है। 2019 तक यह पाँच वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, थी। मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने इसे घटाकर तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, कर दिया।
उसी संशोधन ने राज्य आयोग के अध्यक्ष की पात्रता बढ़ाई। उससे पहले इस पद के लिए उच्च न्यायालय का पूर्व मुख्य न्यायाधीश होना आवश्यक था; उसके बाद उच्च न्यायालय का पूर्व मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश, दोनों पात्र हैं।
RPSC के 2024 के प्रारंभिक पाठ्यक्रम में "राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था" के अंतर्गत "संस्थाएं" शीर्षक में ये निकाय सूचीबद्ध हैं: "राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग।"
इन निकायों को चार बातों से समझा जा सकता है: इन्हें बनाने वाला कानून, इनकी संरचना, पात्रता, और तिथियाँ — गठन की और पदधारियों के कार्यकाल की।
ये तथ्य समय के साथ बदलते हैं। 2019 के संशोधन ने पदावधि और पात्रता, दोनों बदल दीं, इसलिए जो नियम 2013 में सही था वह 2025 में गलत हो सकता है। हर तथ्य को संबंधित तिथि पर लागू कानून के अनुसार देखना होता है।
हर संस्था के लिए एक छोटी तालिका इन चारों बातों को समेट लेती है: स्थापना का कानून, संरचना, पदावधि, और तिथियों सहित नाम।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान सरकार ने 18 जनवरी 1999 को अधिसूचना जारी कर राज्य मानव अधिकार आयोग का गठन किया; आयोग मार्च 2000 में कार्यशील हुआ।
- न्यायमूर्ति एन.के. जैन 16 जुलाई 2005 से 15 जुलाई 2010 तक अध्यक्ष रहे — पाँच वर्ष की पूरी पदावधि।
- न्यायमूर्ति कांता भटनागर (23 मार्च–11 अगस्त 2000), न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद (16 फरवरी 2001–3 जून 2004) और न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया (11 मार्च 2016–25 नवम्बर 2019) ने पाँच वर्ष पूरे नहीं किए।
- मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने पदावधि पाँच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, कर दी।
- 2019 के संशोधन के बाद उच्च न्यायालय का पूर्व मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश राज्य आयोग का अध्यक्ष बन सकता है; पहले इस पद के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश होना आवश्यक था।
तिथियाँ राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग की पूर्व अध्यक्षों और सदस्यों की सूची के अनुसार।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कानून में पाँच वर्ष की पदावधि का अर्थ यह नहीं कि हर पदधारी पाँच वर्ष रहा। त्यागपत्र, पद से हटाया जाना या आयु-सीमा पद को पहले समाप्त कर सकते हैं, इसलिए वास्तविक तिथियाँ जाँचें।
- सदस्य अध्यक्ष नहीं होता। न्यायमूर्ति अमर सिंह गोदारा ने आयोग में पाँच वर्ष (7 जुलाई 2000–6 जुलाई 2005) बिताए, पर सदस्य के रूप में।
- 2019 में पात्रता बदली। उससे पहले केवल उच्च न्यायालय का पूर्व मुख्य न्यायाधीश राज्य आयोग का अध्यक्ष बन सकता था; उसके बाद उच्च न्यायालय का पूर्व न्यायाधीश भी पात्र है। कथन को परीक्षा की तिथि के अनुसार परखें।
इस आयोग पर प्रश्न पूछ सकता है कि कौन अध्यक्ष था या नहीं था, अध्यक्ष बनने के लिए कौन पात्र है, या गठन की तिथियों, संरचना और कार्यकाल पर कौन-से कथन सही हैं।
प्रश्न सीधे कार्यकाल की परख भी कर सकता है — किस पदधारी ने पूरी पदावधि पूरी की — जो पदभार ग्रहण और पद छोड़ने की तिथियों पर टिकी है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021, 2018 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग की पूर्व पदधारियों की सूची के अनुसार, व्यक्ति और पद का निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही है?
- (a)न्यायमूर्ति अमर सिंह गोदारा – अध्यक्ष
- (b)न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद – सदस्य
- (c)न्यायमूर्ति एन.के. जैन – अध्यक्ष
- (d)न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया – सदस्य
उत्तर(3) — न्यायमूर्ति एन.के. जैन 16 जुलाई 2005 से 15 जुलाई 2010 तक अध्यक्ष रहे। विकल्प (1) गलत है, क्योंकि न्यायमूर्ति अमर सिंह गोदारा सदस्य थे (2000–2005)। विकल्प (2) और (4) गलत हैं, क्योंकि न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद और न्यायमूर्ति प्रकाश टाटिया अध्यक्ष थे, सदस्य नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
2019 में संशोधित मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत राज्य मानव अधिकार आयोग का अध्यक्ष कितनी अवधि के लिए पद धारण करता है?
- (a)पाँच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो
- (b)पाँच वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो
- (c)तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो
- (d)तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो
उत्तर(3) — 2019 के संशोधन ने पदावधि तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तय की। विकल्प (2) 2019 से पहले का नियम था। विकल्प (1) और (4) 65 वर्ष की आयु-सीमा लेते हैं, जो अधिनियम इस पद के लिए तय नहीं करता।