2014 में नरपत मल लोढ़ा की अध्यक्षता में गठित समिति निम्न में से किस विषय से सम्बन्धित है ?
- (1)पंचायती राज
- (2)मानवाधिकार
- (3)राज्यपाल
- (4)लोकायुक्त
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), लोकायुक्त.
लोकायुक्त सचिवालय की आधिकारिक वेबसाइट का परिचय पृष्ठ दर्ज करता है कि 28 फरवरी 2014 को राज्य सरकार ने महाधिवक्ता नरपत मल लोढ़ा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की।
पृष्ठ के अनुसार इसका उद्देश्य मौजूदा लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन कर अधिनियम को सशक्त और प्रभावी बनाना था। पृष्ठ यह भी बताता है कि समिति को सभी पक्षों से परामर्श कर एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी थी।
मौजूदा अधिनियम राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 (1973 का अधिनियम संख्या 9) है। इसके अंतर्गत लोकायुक्त मंत्रियों, सचिवों और अन्य लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और निष्क्रियता की शिकायतों की जाँच करता है।
इसलिए समिति का विषय लोकायुक्त था, और उत्तर विकल्प (4) है।
याद रखने योग्य बात: लोढ़ा समिति, 2014 — राजस्थान के 1973 के लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन के लिए।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)पंचायती राज — राज्य में पंचायती राज संस्थाएँ राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत गठित होती हैं, जबकि 2014 की समिति एक अलग कानून, लोकायुक्त अधिनियम, में संशोधन के लिए बनी थी।
दोनों कानून एक जगह मिलते हैं: लोकायुक्त अधिनियम जिला परिषद के प्रमुख और उप-प्रमुख तथा पंचायत समिति के प्रधान और उप-प्रधान को अपने लोक सेवकों में गिनता है।
- (2)मानवाधिकार — राज्य में मानव अधिकारों का विषय राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग का है, जो केंद्रीय कानून मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत स्थापित है।
इसकी अपनी वेबसाइट बताती है कि राज्य सरकार ने इसके गठन की अधिसूचना 18 जनवरी 1999 को जारी की और यह मार्च 2000 से कार्यशील हुआ। लोढ़ा समिति का संबंध लोकायुक्त अधिनियम से था, इस आयोग से नहीं।
- (3)राज्यपाल — लोकायुक्त अधिनियम में राज्यपाल की भूमिका है, पर वे समिति का विषय नहीं थे। धारा 3 के अंतर्गत राज्यपाल अधिपत्र द्वारा लोकायुक्त की नियुक्ति करते हैं, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष से परामर्श के बाद।
धारा 12(4) के अंतर्गत लोकायुक्त का वार्षिक समेकित प्रतिवेदन भी राज्यपाल को जाता है।
अवधारणा
लोकायुक्त राज्य-स्तरीय ओम्बड्समैन है: एक स्वतंत्र प्राधिकारी जो मंत्रियों और लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों की जाँच करता है। राजस्थान लोकायुक्त का इतिहास पृष्ठ इस विचार का मूल स्वीडन के ओम्बड्समैन में बताता है।
राजस्थान में यह पद राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 पर आधारित है। धारा 2 "अभिकथन" को ऐसे कथन के रूप में परिभाषित करती है कि किसी लोक सेवक ने लाभ या हानि पहुँचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया, व्यक्तिगत हित या भ्रष्ट उद्देश्य से काम किया, या वह भ्रष्टाचार या सत्यनिष्ठा की कमी का दोषी है। "कार्रवाई" में कार्य न करना भी शामिल है।
राज्यपाल धारा 3 के अंतर्गत लोकायुक्त की नियुक्ति करते हैं और धारा 6 के अंतर्गत केवल कदाचार या अक्षमता के आधार पर उसे हटा सकते हैं। हटाने के लिए जाँच और सदन द्वारा विशेष बहुमत से पारित समावेदन आवश्यक है।
राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम, 2019 के बाद से धारा 5(1) आठ वर्ष के स्थान पर पाँच वर्ष का कार्यकाल देती है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान की "संस्थाएं" के अंतर्गत "राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग" शामिल हैं।
लोकायुक्त का इतिहास पृष्ठ बताता है कि राजस्थान की प्रशासनिक सुधार समिति ने 1963 में ओम्बड्समैन जैसे निकाय की सिफारिश की। पृष्ठ के अनुसार एक अध्यादेश 3 फरवरी 1973 से प्रभावी हुआ और कानून को 26 मार्च 1973 को राष्ट्रपति की अनुमति मिली; अधिनियम की धारा 1(3) इसे 3 फरवरी 1973 से प्रवृत्त मानती है।
सचिवालय की कार्यकाल सूची न्यायमूर्ति आई.डी. दुआ को 28 अगस्त 1973 से पहला लोकायुक्त बताती है। 2014 में यह पद न्यायमूर्ति एस.एस. कोठारी के पास था, और 1 अक्टूबर 2023 को न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा के पास, जिनका कार्यकाल 9 मार्च 2021 से चल रहा था।
संशोधन की पहल लोकायुक्त की ओर से भी हुई। इसका 28वाँ वार्षिक प्रतिवेदन बताता है कि सचिवालय ने 17 जनवरी 2014 को राज्य सरकार को अपना संशोधन अधिनियम का प्रारूप भेजा।
मुख्य तथ्य
- लोकायुक्त सचिवालय की वेबसाइट के अनुसार 28 फरवरी 2014 को राज्य सरकार ने लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन के लिए महाधिवक्ता नरपत मल लोढ़ा की अध्यक्षता में समिति गठित की।
- राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973, 1973 का अधिनियम संख्या 9 है।
- धारा 3: राज्यपाल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष से परामर्श के बाद लोकायुक्त की नियुक्ति करते हैं।
- राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने धारा 5(1) में "आठ वर्ष" के स्थान पर "पाँच वर्ष" किया।
- राजस्थान लोकायुक्त के इतिहास पृष्ठ के अनुसार केंद्रीय लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 16 जनवरी 2014 से लागू हुआ।
तिथियाँ लोकायुक्त सचिवालय की वेबसाइट और वार्षिक प्रतिवेदन, तथा 2019 के संशोधन अधिनियम से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अनुमान से समिति को विषय से जोड़ना: लोकायुक्त सचिवालय स्वयं दर्ज करता है कि 2014 की लोढ़ा समिति लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन के लिए गठित हुई।
- राजस्थान के लोकायुक्त को केंद्र के 2013 के अधिनियम की देन मान लेना: राज्य का अपना अधिनियम 1973 का है।
- यह मान लेना कि राज्यपाल अकेले लोकायुक्त की नियुक्ति करते हैं: धारा 3 उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष से परामर्श अनिवार्य करती है।
कोई प्रश्न किसी समिति, उसके अध्यक्ष और वर्ष का नाम देकर पूछ सकता है कि उसका संबंध किस संस्था से था।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि लोकायुक्त की नियुक्ति से पहले राज्यपाल किनसे परामर्श करते हैं, या 1973 के अधिनियम के अंतर्गत कौन-से पदधारी लोक सेवक गिने जाते हैं।
संबंधित PYQ
राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 7 के तहत, लोकायुक्त को कुछ मामलों में मंत्रियों और लोक सेवकों के खिलाफ आरोपों की जाँच करने का अधिकार है । निम्नलिखित में से कौन सा विषय उन जाँचों का हिस्सा नहीं है ?
- (1) लोक सेवकों द्वारा पहुँचाई गई अकारण हानि या पीड़ा ।
- (2) अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए अवैध लाभ प्राप्त करने के लिए एक लोक सेवक के रूप में अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करना ।
- (3) महिलाओं का यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और बच्चों के खिलाफ हिंसा ।
- (4) लोक सेवक की हैसियत से भ्रष्टाचार का दोषी होने या पारदर्शिता की कमी से संबंधित हो सकता है ।
उत्तर(3)
वही 1973 का अधिनियम। वह प्रश्न पूछता है कि कौन-सा विषय धारा 7 के अंतर्गत लोकायुक्त की जाँचों का हिस्सा नहीं है (RPSC की कुंजी: महिलाओं का यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और बच्चों के खिलाफ हिंसा); यह प्रश्न पूछता है कि नरपत मल लोढ़ा की अध्यक्षता वाली 2014 की समिति किस संस्था से संबंधित थी।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 3 के अंतर्गत राज्यपाल लोकायुक्त की नियुक्ति किनसे परामर्श के बाद करते हैं ?
- (a)मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष
- (b)उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
- (c)भारत के मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री
- (d)विधानसभा अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
उत्तर(2) — धारा 3(1) का परंतुक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष से परामर्श अनिवार्य करता है। विकल्प (1) ऐसे दो पदधारियों का नाम लेता है जिन्हें धारा सूचीबद्ध नहीं करती; विकल्प (3) उच्च न्यायालय के स्थान पर भारत के मुख्य न्यायाधीश का नाम लेता है; विकल्प (4) मुख्य न्यायाधीश को हटाकर विधानसभा अध्यक्ष को जोड़ता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : (i) लोकायुक्त अपने कार्यों के निष्पादन पर वार्षिक समेकित प्रतिवेदन राज्यपाल को प्रस्तुत करता है। (ii) 2019 के संशोधन के बाद धारा 5(1) के अंतर्गत लोकायुक्त का कार्यकाल आठ वर्ष है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a)केवल (i)
- (b)केवल (ii)
- (c)(i) और (ii) दोनों
- (d)न तो (i) न ही (ii)
उत्तर(1) — कथन (i) धारा 12(4) है। कथन (ii) गलत है: राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने "आठ वर्ष" के स्थान पर "पाँच वर्ष" किया। विकल्प (2) और (3) गलत कार्यकाल स्वीकार करते हैं; विकल्प (4) प्रतिवेदन वाले प्रावधान को नकारता है।