निम्नलिखित में से कौन से जिलों का समूह प्राप्त मॉनसूनी वर्षा की मात्रा के अनुसार अवरोही क्रम में सही ढंग से व्यवस्थित है ?
- (1)धौलपुर, राजसमंद, जालौर
- (2)भीलवाड़ा, बारां, सीकर
- (3)राजसमंद, जालौर, धौलपुर
- (4)पाली, जयपुर, भरतपुर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), धौलपुर, राजसमंद, जालौर.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) हर जिले के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून ऋतु (जून से सितम्बर) की सामान्य वर्षा देता है। उसके मौसम विज्ञान केन्द्र, जयपुर ने अपनी राजस्थान मानसून रिपोर्ट 2022 में 2022 के मानसून को 1971–2020 के आँकड़ों पर आधारित सामान्य मानों से मापा।
विकल्प (1) के तीनों जिलों के मान: धौलपुर 584.1 मिमी, राजसमंद 538.1 मिमी, जालौर 417.8 मिमी। हर मान पिछले से कम है, इसलिए धौलपुर, राजसमंद, जालौर अवरोही क्रम में है।
केन्द्र की 2021 की रिपोर्ट में प्रयुक्त पुराने, 1961–2010 के आँकड़ों पर आधारित सामान्य मान भी यही क्रम देते हैं: धौलपुर 605.2 मिमी, राजसमंद 506 मिमी, जालौर 385.7 मिमी।
इसके पीछे का व्यापक प्रारूप: राजस्थान में मानसूनी वर्षा सामान्यतः पश्चिम की ओर घटती जाती है। जालौर IMD के पश्चिमी राजस्थान उपखण्ड में है, जिसका सामान्य मान 283.6 मिमी है, जबकि पूर्वी राजस्थान का 626.6 मिमी।
सामान्य मान एक दीर्घकालीन औसत है, और कोई एक ऋतु उससे काफी हट सकती है। 2022 के मानसून में जालौर को उसके 417.8 मिमी के सामान्य मान के मुकाबले 626.4 मिमी वर्षा मिली।
केवल पहला जिला नहीं, क्रम का हर चरण जाँचिए।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)भीलवाड़ा, बारां, सीकर — पहला ही चरण गलत है। भीलवाड़ा का मानसून सामान्य मान 604.5 मिमी और बारां का 832 मिमी है, इसलिए बारां भीलवाड़ा से अधिक वर्षा वाला है।
सीकर, 407.1 मिमी के साथ, तीनों में सबसे कम वर्षा वाला है। इन्हीं जिलों का अवरोही क्रम बारां, भीलवाड़ा, सीकर होगा।
- (3)राजसमंद, जालौर, धौलपुर — ये वही तीन जिले हैं जो उत्तर में हैं, पर गलत क्रम में। धौलपुर (584.1 मिमी) तीनों में सबसे अधिक वर्षा वाला है, फिर भी उसे जालौर (417.8 मिमी) के बाद अंत में रखा गया है।
घटती वर्षा के क्रम में यही समूह धौलपुर, राजसमंद, जालौर — विकल्प (1) बन जाता है।
- (4)पाली, जयपुर, भरतपुर — यह समूह अवरोही नहीं, आरोही क्रम में है। पाली का सामान्य मान 491.6 मिमी, जयपुर का 524.3 मिमी और भरतपुर का 543.3 मिमी है, यानी हर मान पिछले से अधिक है।
उलटकर, भरतपुर, जयपुर, पाली के रूप में, यह अवरोही क्रम में होता।
अवधारणा
किसी जिले की सामान्य वर्षा एक लम्बी आधार-अवधि का औसत होती है। IMD के मौसम विज्ञान केन्द्र, जयपुर ने राजस्थान मानसून रिपोर्ट 2022 में जून–सितम्बर के सामान्य मानों के लिए 1971–2020 के आँकड़े लिए; उसकी 2021 की रिपोर्ट में 1961–2010 के आँकड़े लिए गए थे।
1971–2020 के आधार पर पूरे राजस्थान का मानसून सामान्य मान 435.6 मिमी है। IMD राज्य को दो उपखण्डों में बाँटता है: पूर्वी राजस्थान, जिसका सामान्य मान 626.6 मिमी है, और पश्चिमी राजस्थान, 283.6 मिमी।
रिपोर्ट की 33 जिलों वाली तालिका में सबसे कम मानसून सामान्य मान जैसलमेर का (176.9 मिमी) और सबसे अधिक प्रतापगढ़ का (914.2 मिमी) है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का भूगोल" के अंतर्गत "जलवायु की विशेषताएं" शामिल है। राज्य के जिलों में मानसूनी वर्षा का फैलाव इसी शीर्षक के अंतर्गत आता है।
मानसून का फैलाव खरीफ खेती और सूखे के लिए महत्त्वपूर्ण है। शुष्क पश्चिम और अधिक वर्षा वाला दक्षिण व दक्षिण-पूर्व — यह व्यापक चित्र है, पर पड़ोसी मान बहुत पास-पास हो सकते हैं: राजसमंद और जयपुर में 15 मिमी से कम का अंतर है।
सामान्य मान अपनी आधार-अवधि और अपने जिला-मानचित्र से भी बँधा होता है। IMD की 2022 की रिपोर्ट 1971–2020 के आँकड़ों का उपयोग करती है और 33 जिलों की तालिका देती है।
मुख्य तथ्य
- 1971–2020 के आँकड़ों पर आधारित IMD का पूरे राजस्थान का जून–सितम्बर सामान्य मान 435.6 मिमी है (राजस्थान मानसून रिपोर्ट 2022)।
- उत्तर वाले जिलों के IMD मानसून सामान्य मान: धौलपुर 584.1 मिमी, राजसमंद 538.1 मिमी, जालौर 417.8 मिमी।
- IMD के पूर्वी राजस्थान उपखण्ड का मानसून सामान्य मान 626.6 मिमी है, जबकि पश्चिमी राजस्थान का 283.6 मिमी।
- IMD की 33 जिलों वाली तालिका में सबसे कम मानसून सामान्य मान जैसलमेर का (176.9 मिमी) और सबसे अधिक प्रतापगढ़ का (914.2 मिमी) है।
- IMD के पुराने 1961–2010 के सामान्य मानों (राजस्थान मानसून रिपोर्ट 2021) पर भी धौलपुर 605.2 मिमी, राजसमंद 506 मिमी और जालौर 385.7 मिमी यही क्रम बनाए रखते हैं।
विकल्पों के सभी नौ जिले, सबसे अधिक सामान्य मान पहले। स्रोत: IMD मौसम विज्ञान केन्द्र, जयपुर, राजस्थान मानसून रिपोर्ट 2022।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विकल्प (3) में वही तीन जिले हैं जो उत्तर में हैं। कौन-सा जिला अधिक या कम वर्षा वाला है, इतना जानना काफी नहीं; क्रम भी जाँचना होता है।
- विकल्प (4) सही क्रम में है, पर आरोही। मान मिलाने से पहले पक्का कीजिए कि प्रश्न अवरोही क्रम माँगता है या आरोही।
- कुछ सामान्य मान बहुत पास-पास हैं: भरतपुर (543.3 मिमी) राजसमंद (538.1 मिमी) से बस थोड़ा ऊपर है, और जयपुर (524.3 मिमी) ठीक नीचे।
कोई प्रश्न तीन-तीन जिलों के समूह देकर पूछ सकता है कि कौन-सा समूह मानसूनी वर्षा के अवरोही या आरोही क्रम में है, जैसा यह प्रश्न करता है।
कोई प्रश्न चार जिलों में से सबसे अधिक या सबसे कम वर्षा वाला जिला भी पूछ सकता है, या पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान उपखण्डों की तुलना करवा सकता है।
संबंधित PYQ
राजस्थान के निम्नलिखित जिला समूहों का दक्षिणी–पश्चिमी मानसून में औसत वर्षा के आधार पर सही आरोही क्रम कौन सा है ?
- (1) जालौर, जयपुर, कोटा
- (2) जैसलमेर, बाँसवाड़ा, राजसमन्द
- (3) नागौर, धौलपुर, अजमेर
- (4) चूरू, बारां, भीलवाड़ा
उत्तर(1)
जिलों को वर्षा के अनुसार क्रम में रखने का वही कार्य, पर उलटी दिशा में। वह प्रश्न पूछता है कि कौन-सा समूह दक्षिणी–पश्चिमी मानसून में औसत वर्षा के आरोही क्रम में है (RPSC की कुंजी: विकल्प (1), जालौर, जयपुर, कोटा); यह प्रश्न अवरोही क्रम पूछता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान के निम्नलिखित जिला समूहों में से कौन-सा दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य वर्षा के आरोही क्रम में सही ढंग से व्यवस्थित है ?
- (a)जैसलमेर, जोधपुर, कोटा
- (b)चूरू, बाड़मेर, उदयपुर
- (c)नागौर, अजमेर, सीकर
- (d)टोंक, दौसा, अलवर
उत्तर(1) — IMD सामान्य मान: जैसलमेर 176.9 मिमी, जोधपुर 292.6 मिमी, कोटा 732.2 मिमी, हर मान पिछले से अधिक। विकल्प (2) पहले चरण पर ही गलत है: चूरू (334 मिमी) बाड़मेर (272.7 मिमी) से अधिक वर्षा वाला है। विकल्प (3) अगले चरण पर गलत है: अजमेर (458.3 मिमी) सीकर (407.1 मिमी) से अधिक है। विकल्प (4) भी: दौसा (594.5 मिमी) अलवर (545.9 मिमी) से अधिक है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1971–2020 के आँकड़ों पर आधारित IMD के सामान्य मानों के अनुसार, इनमें से किस जिले का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य वर्षा मान सबसे अधिक है ?
- (a)बाँसवाड़ा
- (b)प्रतापगढ़
- (c)झालावाड़
- (d)सिरोही
उत्तर(2) — प्रतापगढ़ का सामान्य मान 914.2 मिमी है, जो IMD की 33 जिलों वाली तालिका में सबसे अधिक है। बाकी ठीक पीछे हैं: विकल्प (1), बाँसवाड़ा, 886 मिमी; विकल्प (3), झालावाड़, 884.3 मिमी; विकल्प (4), सिरोही, 873 मिमी।