निम्नलिखित में से किन तीन नदियों के संगम को ‘त्रिवेणी’ कहा जाता है ?
- (1)बनास, मैनाल, बेडच
- (2)गम्भीरी, मांसी, धुन्ध
- (3)कोठारी, खोरी, बेडच
- (4)सोम, आहू, बाण्डी
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), बनास, मैनाल, बेडच.
बेडच और मैनाल बीगोद के पास एक साथ बनास में मिलती हैं। तीन नदियों के इसी संगम को त्रिवेणी कहा जाता है, इसलिए बनास, मैनाल, बेडच सही उत्तर है।
भीलवाड़ा जिला गजेटियर के अनुसार मैनाल दूसरी नदी बेडच के साथ बीगोद के पास बनास में मिलती है। गजेटियर लिखता है कि यह स्थान स्थानीय रूप से त्रिवेणी संगम कहलाता है और बहुत पवित्र माना जाता है।
वही गजेटियर बेडच और बनास का मिलन माण्डलगढ़ तहसील में बीगोद के पास बताता है, और बीगोद गाँव के पास त्रिवेणी पर लगने वाले एक दिन के त्रिवेणी महादेव मेले का उल्लेख करता है।
दोनों सहायक नदियों में बेडच उदयपुर तहसील के उत्तर की पहाड़ियों से निकलकर बनास के दाहिने किनारे पर मिलती है; मैनाल माण्डलगढ़ की पहाड़ियों से निकलने वाली एक छोटी नदी है।
बीगोद की त्रिवेणी = बनास + बेडच + मैनाल।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)गम्भीरी, मांसी, धुन्ध — इन तीनों में से कोई भी बीगोद के संगम का हिस्सा नहीं है। चित्तौड़गढ़ जिला गजेटियर एक गम्भीरी का वर्णन करता है, जो मध्य प्रदेश में जावद के पास से निकलकर चित्तौड़गढ़ नगर से लगभग 2 किमी उत्तर में बेडच में मिलती है।
भीलवाड़ा गजेटियर के अनुसार मांसी एक अलग नदी, खारी, में शाहपुरा तहसील के फुलिया पर मिलती है। धुन्ध उन तीन नदियों में नहीं है जिनका नाम वह गजेटियर बीगोद पर लेता है।
- (3)कोठारी, खोरी, बेडच — यह विकल्प त्रिवेणी की एक नदी, बेडच, रखता है और दो दूसरी नदियाँ जोड़ देता है। कोठारी भी बनास की सहायक नदी है, पर भीलवाड़ा गजेटियर के अनुसार वह बीगोद पर नहीं, माण्डलगढ़ से थोड़ा पश्चिम में नन्दराय पर बनास में मिलती है।
बीगोद के संगम के गजेटियर-वर्णन में केवल बनास, बेडच और मैनाल के नाम हैं; खोरी उनमें नहीं है।
- (4)सोम, आहू, बाण्डी — सोम और आहू बनास में नहीं, दूसरी नदियों में मिलती हैं। डूंगरपुर जिला गजेटियर के अनुसार लोरावल और बिलूड़ा के पास जाखम सोम में मिलती है, और फिर सोम बेणेश्वर पर माही में मिल जाती है, जहाँ हर वर्ष एक बड़ा मेला लगता है।
झालावाड़ जिला गजेटियर के अनुसार आहू गागरोन के पास कालीसिंध में मिलती है। बाण्डी बीगोद के संगम का हिस्सा नहीं है।
अवधारणा
संगम नदियों का मिलन है, और त्रिवेणी तीन नदियों का मिलन। भीलवाड़ा जिला गजेटियर बीगोद के पास के उस स्थान को त्रिवेणी संगम नाम देता है, जहाँ बेडच और मैनाल बनास में मिलती हैं।
उस गजेटियर के अनुसार बनास दूदिया के पास भीलवाड़ा जिले में प्रवेश करती है। माण्डलगढ़ की पहाड़ियों के पास इसके दाहिने किनारे पर बेडच और बाएँ किनारे पर कोठारी मिलती है; फिर यह जहाजपुर तहसील के पश्चिमी भाग के साथ उत्तर और उत्तर-पूर्व की ओर बहकर टोंक जिले में जाती है।
बनास थोड़ी ही दूरी में कई सहायक नदियाँ समेटती है। कोठारी माण्डलगढ़ से थोड़ा पश्चिम में नन्दराय पर मिलती है; बेडच और मैनाल एक साथ बीगोद के पास।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का भूगोल" के अंतर्गत "प्रमुख नदियाँ एवं झीलें" शामिल है। नदियाँ, उनकी सहायक नदियाँ और उनके मिलन-स्थल इसी शीर्षक के अंतर्गत आते हैं।
संगम पवित्र और सामाजिक स्थलों के रूप में भी महत्त्व रखते हैं। भीलवाड़ा गजेटियर बीगोद की त्रिवेणी को बहुत पवित्र माना जाने वाला स्थान बताता है और वहाँ एक मेले का उल्लेख करता है; डूंगरपुर गजेटियर बेणेश्वर पर, जहाँ सोम माही से मिलती है, हर वर्ष लगने वाले बड़े मेले का उल्लेख करता है।
स्रोतों में नदियों के नामों की वर्तनी बदलती है। अंग्रेज़ी गजेटियर बेडच को Berach और मैनाल को Menali लिखते हैं, इसलिए हर वर्तनी को पहले उसकी नदी से मिलाना होता है।
मुख्य तथ्य
- बेडच और मैनाल माण्डलगढ़ तहसील में बीगोद के पास बनास में मिलती हैं; भीलवाड़ा जिला गजेटियर के अनुसार यह स्थान स्थानीय रूप से त्रिवेणी संगम कहलाता है।
- भीलवाड़ा गजेटियर के अनुसार बेडच उदयपुर तहसील के उत्तर की पहाड़ियों से निकलकर बनास के दाहिने किनारे पर मिलती है।
- भीलवाड़ा गजेटियर के अनुसार कोठारी देवगढ़ के पास से निकलकर माण्डलगढ़ से थोड़ा पश्चिम में नन्दराय पर बनास में मिलती है।
- चित्तौड़गढ़ गजेटियर के अनुसार मध्य प्रदेश में जावद के पास से निकलने वाली गम्भीरी चित्तौड़गढ़ नगर से लगभग 2 किमी उत्तर में बेडच में मिलती है।
- डूंगरपुर गजेटियर के अनुसार सोम बेणेश्वर पर माही में मिलती है, जहाँ हर वर्ष एक बड़ा मेला लगता है।
भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर और झालावाड़ जिला गजेटियरों से; तहसीलों के नाम वैसे ही हैं जैसे उन खण्डों में दिए गए हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- बेडच विकल्प (1) और (3) दोनों में है। एक सही नदी से तीनों का समूह सही नहीं हो जाता; तीनों नदियों का एक ही स्थान पर मिलना ज़रूरी है।
- कोठारी और बेडच दोनों माण्डलगढ़ क्षेत्र में बनास तक पहुँचती हैं, पर अलग-अलग बिन्दुओं पर: कोठारी नन्दराय पर, बेडच बीगोद के पास।
- बेणेश्वर पर सोम–माही का मिलन एक अलग संगम है, जिसका अपना बड़ा मेला है। उसकी नदियाँ बीगोद की त्रिवेणी का हिस्सा नहीं हैं।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि किन तीन नदियों का संगम किसी नाम से जाना जाता है, जैसा यह प्रश्न करता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कोई सहायक नदी अपनी मुख्य नदी से कहाँ मिलती है, नदियों को उनके मिलन-स्थलों से सुमेलित करवा सकता है, या पूछ सकता है कि कोई सहायक नदी किस नदी तंत्र की है।
संबंधित PYQ
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर का चयन कीजिये : सूची-I (जिला) – सूची-II (नदी) A. उदयपुर – i. साबी तथा रूपारेल B. बूँदी – ii. गम्भीरी तथा पार्वती C. भरतपुर – iii. सोम तथा जाखम D. अलवर – iv. कुराल कूट :
- (1) A-iii, B-iv, C-i, D-ii
- (2) A-iv, B-iii, C-ii, D-i
- (3) A-i, B-iii, C-ii, D-iv
- (4) A-iii, B-iv, C-ii, D-i
उत्तर(4)
नदियों की स्थिति पहचानने का वही कौशल। वह प्रश्न जिलों को नदियों से सुमेलित करवाता है (RPSC की कुंजी: विकल्प (4), A-iii, B-iv, C-ii, D-i — जिसमें उदयपुर – सोम तथा जाखम और भरतपुर – गम्भीरी तथा पार्वती शामिल हैं); इस प्रश्न का विकल्प (4) भी सोम का नाम लेता है, और विकल्प (2) एक गम्भीरी का।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बेडच और मैनाल नदियाँ किस स्थान के पास बनास में मिलती हैं ?
- (a)बेणेश्वर
- (b)बीगोद
- (c)गागरोन
- (d)नन्दराय
उत्तर(2) — भीलवाड़ा जिला गजेटियर यह मिलन बीगोद के पास बताता है, जो स्थानीय रूप से त्रिवेणी संगम कहलाता है। विकल्प (1), बेणेश्वर, वह स्थान है जहाँ सोम माही में मिलती है। विकल्प (3), गागरोन, आहू और कालीसिंध के मिलन के पास है। विकल्प (4), नन्दराय, वह स्थान है जहाँ कोठारी बनास में मिलती है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बेणेश्वर पर सोम नदी किस नदी में मिलती है ?
- (a)माही
- (b)जाखम
- (c)अनास
- (d)मोरन
उत्तर(1) — डूंगरपुर जिला गजेटियर के अनुसार सोम बेणेश्वर पर माही में मिलती है। विकल्प (2), जाखम, इससे पहले ऊपरी धारा में लोरावल और बिलूड़ा के पास सोम में मिलती है। विकल्प (3), अनास, बाँसवाड़ा जिले में माही की सहायक नदी है। विकल्प (4), मोरन, डूंगरपुर जिले में माही की एक मौसमी सहायक नदी है।