राजस्थान के निम्नलिखित जिला समूहों का दक्षिणी–पश्चिमी मानसून में औसत वर्षा के आधार पर सही आरोही क्रम कौन सा है ?
- (1)जालौर, जयपुर, कोटा
- (2)जैसलमेर, बाँसवाड़ा, राजसमन्द
- (3)नागौर, धौलपुर, अजमेर
- (4)चूरू, बारां, भीलवाड़ा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), जालौर, जयपुर, कोटा.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) हर जिले के लिए दक्षिणी–पश्चिमी मानसून ऋतु, जून से सितम्बर, की सामान्य वर्षा देता है। उसका मौसम केंद्र जयपुर 1971–2020 के आँकड़ों पर आधारित ये सामान्य मान राजस्थान मानसून रिपोर्ट 2024 (Rajasthan Monsoon Report 2024) में देता है।
विकल्प (1) के तीनों जिलों के लिए: जालौर 417.8 मिमी, जयपुर 524.3 मिमी, कोटा 732.2 मिमी। हर आँकड़ा अपने पिछले आँकड़े से अधिक है, इसलिए जालौर, जयपुर, कोटा आरोही क्रम में है।
इसके पीछे का प्रतिरूप: राजस्थान में मानसूनी वर्षा सामान्यतः उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ती है। जालौर IMD के पश्चिमी राजस्थान उपखण्ड में है, जयपुर पूर्व-मध्य भाग में, और कोटा दक्षिण-पूर्व के हाड़ौती पठार पर।
हर चरण जाँचिए, केवल पहला जिला नहीं। बाकी तीनों विकल्पों में पहला जिला सबसे सूखा है, पर बीच वाला जिला अंतिम जिले से अधिक वर्षा वाला है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)जैसलमेर, बाँसवाड़ा, राजसमन्द — जैसलमेर (176.9 मिमी) सही रूप से पहले है, पर बाँसवाड़ा (886 मिमी) राजसमन्द (538.1 मिमी) से कहीं अधिक वर्षा वाला है, इसलिए क्रम अंतिम चरण पर टूट जाता है।
आर्द्र दक्षिण का बाँसवाड़ा राज्य के सबसे ऊँचे मानसूनी सामान्य मानों वाले जिलों में है। इन तीनों का सही आरोही क्रम जैसलमेर, राजसमन्द, बाँसवाड़ा है।
- (3)नागौर, धौलपुर, अजमेर — नागौर (369.5 मिमी) तीनों में सबसे सूखा है, पर धौलपुर (584.1 मिमी) अजमेर (458.3 मिमी) से अधिक वर्षा वाला है।
राज्य के सुदूर पूर्व में स्थित धौलपुर को मध्य भाग के अजमेर से अधिक मानसूनी वर्षा मिलती है। सही आरोही क्रम नागौर, अजमेर, धौलपुर है।
- (4)चूरू, बारां, भीलवाड़ा — चूरू (334 मिमी) सही रूप से पहले है, पर बारां (832 मिमी) भीलवाड़ा (604.5 मिमी) से अधिक वर्षा वाला है।
बारां दक्षिण-पूर्व के हाड़ौती पठार पर है, जो राजस्थान के सबसे अधिक वर्षा वाले भागों में है, जबकि भीलवाड़ा अपेक्षाकृत सूखे मध्यवर्ती मैदान पर है। सही आरोही क्रम चूरू, भीलवाड़ा, बारां है।
अवधारणा
राजस्थान की अधिकांश वर्षा जून से सितम्बर के बीच दक्षिणी–पश्चिमी मानसून से होती है। पूरे राज्य के लिए IMD का मानसून ऋतु का सामान्य मान 435.6 मिमी है। उसके पूर्वी राजस्थान उपखण्ड का सामान्य मान 626.6 मिमी और पश्चिमी राजस्थान का 283.6 मिमी है।
यह ढाल मोटे तौर पर उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है। पश्चिम के थार वाले जिलों को सबसे कम वर्षा मिलती है, जबकि दक्षिण के पहाड़ी जिलों और हाड़ौती पठार को सबसे अधिक।
सूखे पश्चिम की एक व्याख्या अरावली की दिशा है। अरब सागर मानसून की एक शाखा पश्चिमी राजस्थान के ऊपर से अरावली को पार करने के बजाय उसके साथ-साथ गुजरती है, इसलिए अरावली इन पवनों को ऊपर उठाकर वर्षा कराने में बहुत कम भूमिका निभाती है।
RPSC के 2024 के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का भूगोल" के अंतर्गत "जलवायु की विशेषताएं" शामिल है। मानसूनी वर्षा का मानचित्र इस शीर्षक का हिस्सा है, क्योंकि वर्षा ही राज्य की कृषि ऋतुओं, मरुस्थल की सीमा और सूखे के जोखिम को तय करती है।
मोटा मानचित्र सरल है: सूखा पश्चिम, अधिक वर्षा वाला दक्षिण और दक्षिण-पूर्व। बारीक ब्योरा सरल नहीं है। राज्य के अलग-अलग भागों के कुछ जिलों के सामान्य मान पास-पास हैं — धौलपुर और राजसमन्द में 50 मिमी से कम का अंतर है।
IMD के जिला-वार सामान्य मान दीर्घकालीन प्रतिरूप बताते हैं। किसी एक ऋतु की वास्तविक वर्षा सामान्य से बहुत अलग हो सकती है, जैसा 2024 के मानसून में दिखा।
मुख्य तथ्य
- पूरे राजस्थान के लिए IMD की दक्षिणी–पश्चिमी मानसून (जून–सितम्बर) की सामान्य वर्षा 435.6 मिमी है, जो 1971–2020 के आँकड़ों पर आधारित है।
- IMD के जून–सितम्बर के सामान्य मान: जालौर 417.8 मिमी, जयपुर 524.3 मिमी और कोटा 732.2 मिमी।
- IMD की 33 जिलों वाली राजस्थान तालिका में सबसे कम मानसूनी सामान्य मान जैसलमेर का है, 176.9 मिमी।
- उसी तालिका में सबसे अधिक मानसूनी सामान्य मान प्रतापगढ़ का है (914.2 मिमी), उसके बाद बाँसवाड़ा (886 मिमी)।
- IMD के पूर्वी राजस्थान उपखण्ड का मानसूनी सामान्य मान 626.6 मिमी है, जबकि पश्चिमी राजस्थान का 283.6 मिमी।
स्रोत: IMD मौसम केंद्र जयपुर, राजस्थान मानसून रिपोर्ट 2024 (सामान्य मान 1971–2020 पर आधारित)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- तीनों गलत विकल्प सबसे सूखे जिले से शुरू होते हैं और अंतिम चरण पर टूटते हैं। केवल पहले जिले को बाकी से मिलाकर देखने पर यह त्रुटि पकड़ में नहीं आती।
- पश्चिम से पूर्व का सीधा नियम सबसे अधिक वर्षा वाले जिलों को पूर्व में रखता है, पर IMD के सबसे ऊँचे मानसूनी सामान्य मान दक्षिण के प्रतापगढ़ और बाँसवाड़ा के हैं।
- किसी एक ऋतु की वास्तविक वर्षा सामान्य मान नहीं होती। 2024 में जैसलमेर को अपने सामान्य मान की 248% वर्षा मिली, इसलिए एक वर्ष के आँकड़े सामान्य मानों पर बने क्रम को उलट सकते हैं।
कोई प्रश्न तीन या चार जिले देकर मानसूनी वर्षा का आरोही या अवरोही क्रम पूछ सकता है, जैसा यह प्रश्न करता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कौन-सा जिला सबसे सूखा या सबसे अधिक वर्षा वाला है, किन क्षेत्रों को पश्चिमी विक्षोभ से शीतकालीन वर्षा मिलती है, या कौन-सा जलवायु प्रकार किसी जिले से मेल खाता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023, 2021 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान के निम्नलिखित जिलों में से किसकी दक्षिणी–पश्चिमी मानसून की सामान्य वर्षा सबसे अधिक है?
- (a)जालौर
- (b)बाँसवाड़ा
- (c)चूरू
- (d)नागौर
उत्तर(2) — बाँसवाड़ा का जून–सितम्बर का सामान्य मान 886 मिमी है। विकल्प (1), जालौर, 417.8 मिमी है। विकल्प (4), नागौर, 369.5 मिमी है। विकल्प (3), चूरू, 334 मिमी है। सभी आँकड़े 1971–2020 पर आधारित IMD के सामान्य मान हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जिलों का निम्नलिखित में से कौन-सा समूह दक्षिणी–पश्चिमी मानसून की सामान्य वर्षा के अवरोही क्रम में व्यवस्थित है?
- (a)बारां, भीलवाड़ा, चूरू
- (b)भीलवाड़ा, बारां, चूरू
- (c)चूरू, भीलवाड़ा, बारां
- (d)बारां, चूरू, भीलवाड़ा
उत्तर(1) — बारां 832 मिमी, भीलवाड़ा 604.5 मिमी, चूरू 334 मिमी: हर आँकड़ा अपने पिछले से कम है। विकल्प (2) भीलवाड़ा को अधिक वर्षा वाले बारां से ऊपर रखता है। विकल्प (3) आरोही क्रम है। विकल्प (4) चूरू को अधिक वर्षा वाले भीलवाड़ा से ऊपर रखता है।