कृष्णदेव राय द्वारा निम्नलिखित किस कवि को ‘आन्ध्र कविता पितामह’ की उपाधि दी गयी थी ?
- (1)अल्लसानी पेड्डना
- (2)भट्टुमूर्ति
- (3)तेनाली रामकृष्ण
- (4)पिंगली सूरन्ना
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), अल्लसानी पेड्डना.
साहित्य अकादेमी का एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर, तेलुगु साहित्य के अपने सर्वेक्षण में, कहता है कि कृष्णदेव राय के दरबारी कवियों में अल्लसानी पेड्डना (उस सर्वेक्षण में 1470–1535) प्रथम और सर्वश्रेष्ठ थे, और उनके राजा उन्हें स्नेह से आन्ध्र कविता पितामह, यानी आन्ध्र कविता के पितामह, कहते थे।
मनुचरित्रमु पर उसकी प्रविष्टि जोड़ती है कि तेलुगु के पंच काव्य कहलाने वाले पाँच महान ग्रन्थों में से एक, इसी रचना ने पेड्डना को आन्ध्र कविता पितामह की उपाधि दिलाई।
वही प्रविष्टि पेड्डना को कृष्णदेव राय के दरबार के प्रसिद्ध अष्टदिग्गजों के एक प्रकार के प्रमुख कवि बताती है। यह उपाधि पाने वाले कवि विकल्प (1), अल्लसानी पेड्डना, हैं।
याद रखने की बात: आन्ध्र कविता पितामह = कृष्णदेव राय के दरबार में मनुचरित्र के रचयिता अल्लसानी पेड्डना।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)भट्टुमूर्ति — एनसाइक्लोपीडिया भट्टुमूर्ति की पहचान रामराजभूषण से करता है और उन्हें सूरन्ना और पेड्डना का अनुकरण करने वाला बताता है। उसके अनुसार उन्होंने पेड्डना के मनुचरित्र से आगे निकलने के लिए वसुचरित्र लिखा, और द्व्यर्थी शैली में हरिश्चन्द्र-नलोपाख्यान लिखा।
भट्टुमूर्ति वसुचरित्र के रचयिता वाले प्रश्न का उत्तर हैं।
- (3)तेनाली रामकृष्ण — एनसाइक्लोपीडिया तेनाली रामकृष्ण को पाण्डुरंग माहात्म्य का रचयिता बताता है, जिसे वह एक प्रमुख काव्य और श्रेष्ठतम काव्यों में से एक कहता है, पर आन्ध्र कविता पितामह की उपाधि वह पेड्डना को देता है।
तेनाली रामकृष्ण पाण्डुरंग माहात्म्य के रचयिता वाले प्रश्न का उत्तर हैं।
- (4)पिंगली सूरन्ना — एनसाइक्लोपीडिया पिंगली सूरन्ना का काल 1520–80 बताता है और उन्हें उन कवियों में गिनता है जो 1530 में कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद चमके।
वह उन्हें पूरी तरह श्लेष में रचित राघव पाण्डवीय (1545) और कलापूर्णोदय (1550) का श्रेय देता है। पिंगली सूरन्ना कलापूर्णोदय के रचयिता वाले प्रश्न का उत्तर हैं।
अवधारणा
कृष्णदेव राय का शासनकाल तेलुगु प्रबंध का युग है। साहित्य अकादेमी का एनसाइक्लोपीडिया कहता है कि उनका दरबार भुवनविजय कहलाता था और आठ कवियों, अष्टदिग्गजों, से सुशोभित था, यद्यपि आलोचक इस पर एकमत नहीं हैं कि वे आठ कौन थे।
मनुचरित्र मार्कण्डेय पुराण से ली गई स्वारोचिष मनु की कथा को फिर से कहता है। इसकी तिथि पर एनसाइक्लोपीडिया की प्रविष्टियाँ अलग हैं: मनुचरित्रमु प्रविष्टि बताती है कि कहा जाता है, इसकी रचना लगभग 1522 में हुई, जबकि कृष्णदेव राय प्रविष्टि कहती है कि राजा को इसका समर्पण सम्भवतः 1516 और 1517 के दौरान हुआ होगा।
वे पेड्डना के जन्म पर भी अलग हैं: तेलुगु साहित्य सर्वेक्षण 1470 देता है, और मनुचरित्रमु प्रविष्टि गंडिकोटा के निकट कोकटा में लगभग 1475।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "भारत का इतिहास" के अंतर्गत "सल्तनतकाल : प्रमुख सल्तनत शासकों की उपलब्धियाँ। विजयनगर की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ।" सूचीबद्ध है।
राजा स्वयं भी कवि थे। एनसाइक्लोपीडिया कहता है कि आन्ध्र भोज कहलाने वाले कृष्णदेव राय ने कला और साहित्य को संरक्षण दिया और स्वयं आमुक्तमाल्यद लिखा; वह उनका शासनकाल 1509 से 1530 में उनकी मृत्यु तक बताता है।
वह एक पहले के युग की मिलती-जुलती उपाधि भी दर्ज करता है: ताल्लपाक अन्नमाचार्य (1424–1501) को पदकविता पितामह, यानी गीतात्मक पदों के पितामह, कहा जाता था।
मुख्य तथ्य
- साहित्य अकादेमी एनसाइक्लोपीडिया, तेलुगु साहित्य सर्वेक्षण: कृष्णदेव राय अल्लसानी पेड्डना को आन्ध्र कविता पितामह, यानी आन्ध्र कविता के पितामह, कहते थे।
- मनुचरित्रमु पर उसकी प्रविष्टि कहती है कि इसी रचना ने पेड्डना को यह उपाधि दिलाई, और इसे तेलुगु के पाँच महान ग्रन्थों, पंच काव्यों, में गिनती है।
- एनसाइक्लोपीडिया के अनुसार कृष्णदेव राय ने 1509 से 1530 में अपनी मृत्यु तक शासन किया; उनका दरबार भुवनविजय कहलाता था।
- एनसाइक्लोपीडिया वसुचरित्र का श्रेय भट्टुमूर्ति (रामराजभूषण) को और पाण्डुरंग माहात्म्य का श्रेय तेनाली रामकृष्ण को देता है।
- एनसाइक्लोपीडिया के अनुसार पिंगली सूरन्ना (1520–80) ने राघव पाण्डवीय (1545) और कलापूर्णोदय (1550) लिखे।
आन्ध्र कविता पितामह: अल्लसानी पेड्डना, विकल्प (1)। स्रोत: एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर, खंड III (साहित्य अकादेमी)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- मिलती-जुलती उपाधियों को मिला देना: पेड्डना आन्ध्र कविता पितामह थे, अन्नमाचार्य पदकविता पितामह कहलाते थे, और स्वयं राजा आन्ध्र भोज।
- प्रबंध युग के हर तेलुगु कवि को कृष्णदेव राय के दरबार में रख देना: एनसाइक्लोपीडिया पिंगली सूरन्ना (1520–80) को उन कवियों में गिनता है जो 1530 में राजा की मृत्यु के बाद चमके, और उनकी तिथि-युक्त रचनाएँ 1545–55 की हैं।
- अष्टदिग्गजों की सूची को तय मान लेना: एनसाइक्लोपीडिया बताता है कि वे आठ कवि कौन थे, इस पर मतभेद है।
कोई प्रश्न किसी कवि की उपाधि देकर पूछ सकता है कि वह किसे मिली थी, या विजयनगर के तेलुगु कवियों का उनकी रचनाओं से मिलान करवा सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किस शासक को आन्ध्र भोज कहा गया, या राजा ने कौन सी रचना लिखी।
संबंधित PYQ
कृष्णदेवराय के दरबार में कवि मल्लनार्य ने “भाव चिंता रत्न” एवं “वीरशैवामृत” ग्रन्थ किस भाषा में लिखे थे ?
- (1) संस्कृत
- (2) तमिल
- (3) तेलुगू
- (4) कन्नड़
उत्तर(4)
वही दरबार, दूसरी भाषा: वह प्रश्न पूछता है कि कृष्णदेवराय के दरबार में कवि मल्लनार्य ने “भाव चिंता रत्न” एवं “वीरशैवामृत” ग्रन्थ किस भाषा में लिखे थे (RPSC की कुंजी: कन्नड़)। यह प्रश्न पूछता है कि राजा ने किस तेलुगु कवि को आन्ध्र कविता पितामह कहा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
पेड्डना के मनुचरित्र से आगे निकलने के लिए रचा गया तेलुगु वसुचरित्र किसने लिखा?
- (a)नन्दि तिम्मन
- (b)भट्टुमूर्ति
- (c)तेनाली रामकृष्ण
- (d)पिंगली सूरन्ना
उत्तर(2) — साहित्य अकादेमी का एनसाइक्लोपीडिया कहता है कि रामराजभूषण, यानी भट्टुमूर्ति, ने मनुचरित्र से आगे निकलने के लिए वसुचरित्र लिखा। वह विकल्प (1) को पारिजातापहरण का, विकल्प (3) को पाण्डुरंग माहात्म्य का, और विकल्प (4) को कलापूर्णोदय का श्रेय देता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
साहित्य अकादेमी के एनसाइक्लोपीडिया ने ताल्लपाक अन्नमाचार्य के लिए कौन सी उपाधि दर्ज की?
- (a)आन्ध्र कविता पितामह
- (b)आन्ध्र भोज
- (c)पदकविता पितामह
- (d)कविबान्धव
उत्तर(3) — एनसाइक्लोपीडिया कहता है कि अन्नमाचार्य को पदकविता पितामह, यानी गीतात्मक पदों के पितामह, कहा जाता था। विकल्प (1) अल्लसानी पेड्डना की और विकल्प (2) कृष्णदेव राय की उपाधि थी; विकल्प (4) वह उपाधि नहीं है जो एनसाइक्लोपीडिया अन्नमाचार्य को देता है।