अकबर द्वारा फतेहपुर सीकरी में निर्मित किस इमारत में बौद्ध स्थापत्य कला का अनुसरण किया गया था ?
- (1)शेख सलीम चिश्ती का मकबरा
- (2)बुलन्द दरवाजा
- (3)पंचमहल
- (4)तुर्की सुल्ताना का महल
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), पंचमहल.
इम्पीरियल गज़ेटियर ऑफ़ इंडिया, खंड XII (1908), फतेहपुर सीकरी में अकबर के महल-भवनों का वर्णन करते हुए कहता है कि पंचमहल में एक के ऊपर एक पाँच दीर्घाएँ हैं, और यह किसी बौद्ध प्रतिरूप की नकल प्रतीत होता है।
गज़ेटियर बाकी तीन इमारतों का वर्णन दूसरे ढंग से करता है। शेख सलीम चिश्ती का मकबरा मस्जिद के विशाल चतुष्कोणीय प्रांगण के भीतर जालीदार परदे वाली, नक्काशीदार संगमरमर की इमारत है; बुलन्द दरवाजा उसी प्रांगण का ऊँचा द्वार है।
उसके अनुसार तुर्की सुल्ताना का महल बलुआ पत्थर का है, जिस पर ज्यामितीय आकृतियों और शिकार के दृश्यों की भरपूर नक्काशी है।
बौद्ध प्रतिरूप से जुड़ी इमारत विकल्प (3), पंचमहल, है।
याद रखने की बात: फतेहपुर सीकरी का पंचमहल: एक के ऊपर एक पाँच दीर्घाएँ, जिनके बारे में इम्पीरियल गज़ेटियर कहता है कि वे किसी बौद्ध प्रतिरूप की नकल प्रतीत होती हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)शेख सलीम चिश्ती का मकबरा — इम्पीरियल गज़ेटियर मकबरे को बारीक नक्काशीदार दीवारों वाली संगमरमर की इमारत बताता है, जिसमें शवपेटिका जालीदार परदे से घिरी है और उस पर सीप की जड़ाई वाला छत्र है। यूनेस्को कहता है कि यह जामा मस्जिद के भीतर है और 1580–81 में पूरा हुआ।
शेख सलीम चिश्ती का मकबरा फतेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद के भीतर संत के संगमरमर के मकबरे वाले प्रश्न का उत्तर है।
- (2)बुलन्द दरवाजा — बुलन्द दरवाजा एक प्रवेशद्वार है, बौद्ध प्रतिरूप पर बनी इमारत नहीं। यूनेस्को कहता है कि मस्जिद के प्रांगण के दक्षिण में स्थित यह 40 मीटर ऊँचा द्वार 1572 की गुजरात विजय की स्मृति में 1575 में पूरा हुआ।
बुलन्द दरवाजा अकबर की गुजरात विजय की स्मृति में बने प्रवेशद्वार वाले प्रश्न का उत्तर है।
- (4)तुर्की सुल्ताना का महल — इम्पीरियल गज़ेटियर तुर्की सुल्ताना के महल को एक विशाल प्रांगण के दक्षिणी आधे भाग में, अकबर के निजी कक्षों के साथ, बताता है, और इसे ज्यामितीय आकृतियों और शिकार के दृश्यों की भरपूर नक्काशी वाले बलुआ पत्थर का बताता है।
तुर्की सुल्ताना का महल फतेहपुर सीकरी के शिकार-दृश्यों की नक्काशी वाले मंडप वाले प्रश्न का उत्तर है।
अवधारणा
फतेहपुर सीकरी उस पहाड़ी के आसपास बसी जहाँ, इम्पीरियल गज़ेटियर के अनुसार, संत सलीम चिश्ती रहते थे और उन्होंने अकबर को पुत्र-जन्म की भविष्यवाणी की थी। गज़ेटियर निर्माण का आरम्भ 1569 में बताता है; यूनेस्को नगर का निर्माण 1571–73 में बताता है।
गज़ेटियर महल-खंड का वर्णन उसके पश्चिमी भाग से शुरू करता है: जोधबाई का महल, फिर बीरबल और मरियम के भवनों के आगे एक विशाल प्रांगण, जिसके दक्षिणी आधे भाग में अकबर के निजी कक्ष और तुर्की सुल्ताना का महल हैं, और उत्तरी भाग में पंचमहल और दीवान-ए-ख़ास।
यूनेस्को इन इमारतों को देशी और फ़ारसी शैलियों का मेल बताता है, जो अधिकतर लाल बलुआ पत्थर से बनी हैं।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "भारत का इतिहास" के अंतर्गत "मध्यकाल में कला एवं वास्तु, चित्रकला एवं संगीत का विकास।" सूचीबद्ध है।
पंचमहल को एक से अधिक ढंग से देखा गया है। इम्पीरियल गज़ेटियर के अनुसार यह किसी बौद्ध प्रतिरूप की नकल प्रतीत होता है, जबकि यूनेस्को की सूची इसे फ़ारसी बादगीर, यानी पवन-संग्राहक मीनार, के ढंग पर बनी पूर्णतः स्तम्भों वाली पाँच-मंज़िला संरचना बताती है।
दोनों विवरण एक ही रूप का वर्णन करते हैं: एक के ऊपर एक उठती पाँच मंज़िलें।
मुख्य तथ्य
- इम्पीरियल गज़ेटियर ऑफ़ इंडिया (1908): पंचमहल में एक के ऊपर एक पाँच दीर्घाएँ हैं, और यह किसी बौद्ध प्रतिरूप की नकल प्रतीत होता है।
- यूनेस्को पंचमहल को फ़ारसी बादगीर, यानी पवन-संग्राहक मीनार, के ढंग पर बनी पूर्णतः स्तम्भों वाली पाँच-मंज़िला संरचना बताता है।
- यूनेस्को: 40 मीटर ऊँचा बुलन्द दरवाजा 1572 की गुजरात विजय की स्मृति में 1575 में पूरा हुआ।
- यूनेस्को: जामा मस्जिद के भीतर शेख सलीम चिश्ती का मकबरा 1580–81 में पूरा हुआ और 1606 में जहाँगीर के समय और सजाया गया।
- इम्पीरियल गज़ेटियर कहता है कि अकबर ने 1569 में फतेहपुर का निर्माण शुरू किया; यूनेस्को नगर का निर्माण 1571–73 में बताता है।
बौद्ध प्रतिरूप: पंचमहल, विकल्प (3)। स्रोत: इम्पीरियल गज़ेटियर ऑफ़ इंडिया, खंड XII (1908); यूनेस्को।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- बौद्ध प्रतिरूप को एकमात्र व्याख्या मान लेना: यूनेस्को पंचमहल की तुलना फ़ारसी बादगीर, यानी पवन-संग्राहक मीनार, से करता है।
- बुलन्द दरवाजे को नगर की स्थापना से जोड़ देना: यूनेस्को कहता है कि यह 1572 की गुजरात विजय की स्मृति में 1575 में पूरा हुआ।
- धार्मिक इमारतों को मिला देना: सलीम चिश्ती का मकबरा जामा मस्जिद के भीतर है, और बुलन्द दरवाजा उसके प्रांगण के दक्षिण में।
कोई प्रश्न फतेहपुर सीकरी की किसी इमारत का नाम देकर उसकी शैली या प्रयोजन पूछ सकता है, या इमारतों का उनकी विशेषताओं से मिलान करवा सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि अकबर का कौन सा स्मारक किसी अभियान की स्मृति में बना।
संबंधित PYQ
निम्न में से किन इमारतों का निर्माण सम्राट शेरशाह के द्वारा करवाया गया था ? A. सासाराम का मकबरा B. किला–ए–कुह्न मस्जिद C. सिकंदरा का मकबरा D. जामा मस्जिद
- (1) A, B
- (2) A, C
- (3) A, D
- (4) B, D
उत्तर(1)
वही पाठ्यक्रम शीर्षक, किसी शासक से जुड़े स्मारक: वह प्रश्न पूछता है कि चार इमारतों में से किनका निर्माण सम्राट शेरशाह के द्वारा करवाया गया था (RPSC की कुंजी: A, B — सासाराम का मकबरा और किला–ए–कुह्न मस्जिद)। यह प्रश्न पूछता है कि फतेहपुर सीकरी में अकबर की किस इमारत में बौद्ध स्थापत्य कला का अनुसरण हुआ।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
यूनेस्को के अनुसार फतेहपुर सीकरी का बुलन्द दरवाजा किस विजय की स्मृति में पूरा किया गया?
- (a)गुजरात विजय
- (b)चित्तौड़ विजय
- (c)पानीपत की विजय
- (d)कश्मीर विजय
उत्तर(1) — यूनेस्को कहता है कि बुलन्द दरवाजा 1572 की गुजरात विजय की स्मृति में 1575 में पूरा हुआ। विकल्प (2), (3) और (4) वह विजय नहीं हैं जिसका यूनेस्को नाम लेता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
इम्पीरियल गज़ेटियर ऑफ़ इंडिया (1908) के अनुसार फतेहपुर सीकरी की किस इमारत पर ज्यामितीय आकृतियों और शिकार के दृश्यों की भरपूर नक्काशी है?
- (a)पंचमहल
- (b)तुर्की सुल्ताना का महल
- (c)दीवान-ए-ख़ास
- (d)बुलन्द दरवाजा
उत्तर(2) — गज़ेटियर तुर्की सुल्ताना के महल को ज्यामितीय आकृतियों और शिकार के दृश्यों की भरपूर नक्काशी वाले बलुआ पत्थर का बताता है। वह विकल्प (1) को एक के ऊपर एक पाँच दीर्घाओं वाला, विकल्प (3) को विशाल अष्टकोणीय स्तम्भ वाला कक्ष, और विकल्प (4) को मस्जिद के प्रांगण का ऊँचा द्वार बताता है।