चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह किस राजवंश में कर अपनी स्थिति को सुदृढ़ बनाया ?
- (1)लिच्छवी वंश
- (2)कदम्ब वंश
- (3)वाकाटक वंश
- (4)नाग वंश
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), वाकाटक वंश.
एच. सी. रायचौधुरी की पॉलिटिकल हिस्ट्री ऑफ़ एंशिएंट इंडिया (5वाँ संस्करण, 1950) चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल की प्रमुख बाहरी घटनाओं में पृथ्वीषेण प्रथम के पुत्र, वाकाटक राजा रुद्रसेन द्वितीय के साथ उनके वैवाहिक गठबंधन को गिनाती है।
रायचौधुरी लिखते हैं कि चन्द्रगुप्त द्वितीय की प्रभावती नाम की एक पुत्री थी, जिसका विवाह उन्होंने बरार और आसपास के प्रांतों के वाकाटक राजा रुद्रसेन द्वितीय से किया।
फिर वे इसके उद्देश्य पर वी. ए. स्मिथ का मत उद्धृत करते हैं: गुजरात और सुराष्ट्र के शक क्षत्रपों के प्रदेश पर उत्तर से आक्रमण करने वाले के लिए वाकाटक शासक की स्थिति बहुत सहायक या बहुत हानिकारक हो सकती थी, इसलिए इस विवाह ने उसका गठबंधन सुनिश्चित किया।
प्रभावती का विवाह जिस राजवंश में हुआ, वह विकल्प (3), वाकाटक वंश, है।
याद रखने की बात: चन्द्रगुप्त द्वितीय और नाग राजकुमारी कुबेरनागा की पुत्री प्रभावती गुप्ता का विवाह वाकाटक राजा रुद्रसेन द्वितीय से हुआ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)लिच्छवी वंश — लिच्छवी विवाह एक पहले के गुप्त शासक का है। रायचौधुरी कहते हैं कि चन्द्रगुप्त प्रथम ने लिच्छवी राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह करके, लिच्छवियों के साथ वैवाहिक गठबंधन से अपनी स्थिति सुदृढ़ की।
सिक्कों के अग्रभाग पर राजा और रानी हैं, और पृष्ठभाग पर 'लिच्छवयः' लेख है। लिच्छवी वंश चन्द्रगुप्त प्रथम के विवाह वाले प्रश्न का उत्तर है।
- (2)कदम्ब वंश — कदम्ब संबंध उलटी दिशा में था। रायचौधुरी तालगुंड अभिलेख का हवाला देते हैं, जो कहता है कि कदम्ब राजा काकुत्स्थवर्मन ने अपनी पुत्रियों का विवाह गुप्त और अन्य राजाओं से किया।
यानी गुप्तों ने कदम्ब वधुएँ लीं; प्रभावती वाकाटकों को दी गईं। कदम्ब वंश तालगुंड अभिलेख के वैवाहिक गठबंधनों वाले प्रश्न का उत्तर है।
- (4)नाग वंश — नाग प्रभावती की कथा में उनकी माता के माध्यम से आते हैं, पति के माध्यम से नहीं। रायचौधुरी कहते हैं कि चन्द्रगुप्त द्वितीय ने नाग वंश की राजकुमारी कुबेरनागा से विवाह किया और उनसे पुत्री प्रभावती हुई।
नाग वंश चन्द्रगुप्त द्वितीय की रानी कुबेरनागा के कुल वाले प्रश्न का उत्तर है।
अवधारणा
रायचौधुरी विवाह को गुप्त विदेश नीति का साधन मानते हैं। लिच्छवी संबंध ने बिहार में गुप्तों को सुदृढ़ किया था; ऊपरी प्रांतों को जीतने के बाद उन्होंने उन अन्य शासक कुलों से गठबंधन चाहा जिनकी सहायता उन्हें चाहिए थी।
वे बताते हैं कि समुद्रगुप्त को शक-कुषाण सरदारों और अन्य विदेशी शासकों से कन्याओं की भेंट (कन्योपायन) मिली, और चन्द्रगुप्त द्वितीय ने स्वयं नाग वंश की कुबेरनागा से विवाह किया।
प्रभावती के विवाह ने बरार के वाकाटकों को गुप्त कुल से जोड़ा। रायचौधुरी उनके पुत्रों के नाम दिवाकरसेन, दामोदरसेन और प्रवरसेन द्वितीय बताते हैं।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "भारत का इतिहास" के अंतर्गत "प्रमुख राजवंशों के महत्वपूर्ण शासकों की उपलब्धियाँ : मौर्य, कुषाण, सातवाहन, गुप्त, चालुक्य, पल्लव एवं चोल।" सूचीबद्ध है।
यह गठबंधन चन्द्रगुप्त द्वितीय के पश्चिमी युद्ध के लिए महत्वपूर्ण था। रायचौधुरी इसे शक क्षत्रपों के विरुद्ध युद्ध के साथ रखते हैं, जिसने पश्चिमी मालवा और सुराष्ट्र (काठियावाड़) को गुप्त साम्राज्य में जोड़ा।
यह संबंध एक पीढ़ी से आगे चला: रायचौधुरी वाकाटक राजा नरेन्द्रसेन को प्रभावती के माध्यम से चन्द्रगुप्त द्वितीय का प्रपौत्र बताते हैं।
मुख्य तथ्य
- रायचौधुरी: चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह बरार और आसपास के प्रांतों के वाकाटक राजा रुद्रसेन द्वितीय से किया।
- रायचौधुरी के अनुसार प्रभावती की माता कुबेरनागा नाग वंश की राजकुमारी थीं।
- रायचौधुरी चन्द्रगुप्त द्वितीय का राज्यारोहण 381 ई. से पहले और उनकी मृत्यु 413–14 ई. में या उसके आसपास रखते हैं।
- रायचौधुरी प्रभावती को दिवाकरसेन, दामोदरसेन और प्रवरसेन द्वितीय की माता बताते हैं।
- चन्द्रगुप्त प्रथम और लिच्छवी राजकुमारी कुमारदेवी के विवाह की स्मृति 'लिच्छवयः' लेख वाले सिक्कों पर है।
प्रभावती का विवाह वाकाटक वंश में, विकल्प (3)। स्रोत: एच. सी. रायचौधुरी, पॉलिटिकल हिस्ट्री ऑफ़ एंशिएंट इंडिया (1950)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रभावती की माता के कुल को पति का कुल समझ लेना: कुबेरनागा नाग वंश की थीं, जबकि रुद्रसेन द्वितीय वाकाटक थे।
- दोनों चन्द्रगुप्तों को मिला देना: कुमारदेवी से लिच्छवी विवाह चन्द्रगुप्त प्रथम का था।
- कदम्ब संबंध को उलट देना: तालगुंड अभिलेख कहता है कि कदम्ब काकुत्स्थवर्मन ने गुप्तों को पुत्रियाँ दीं।
कोई प्रश्न किसी राजकीय विवाह का उल्लेख करके पूछ सकता है कि उसने किस राजवंश से संबंध जोड़ा, या किसी रानी का नाम देकर उसके पिता या पति के बारे में पूछ सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किस गुप्त शासक ने लिच्छवी राजकुमारी से विवाह किया।
संबंधित PYQ
कुषाण वंश के कैडफिसेस द्वितीय ने निम्नलिखित में से कौन सी उपाधि धारण की ?
- (1) सकारी
- (2) सर्वलोकेश्वर
- (3) महाक्षत्रप
- (4) सिंह चन्द्र
उत्तर(2)
वही पाठ्यक्रम शीर्षक, प्रमुख प्राचीन राजवंशों के शासक: वह प्रश्न पूछता है कि कुषाण वंश के कैडफिसेस द्वितीय ने कौन सी उपाधि धारण की (RPSC की कुंजी: सर्वलोकेश्वर)। यह प्रश्न पूछता है कि चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह किस राजवंश में किया।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
लिच्छवी राजकुमारी कुमारदेवी के साथ किस गुप्त शासक के विवाह की स्मृति सिक्कों पर अंकित है?
- (a)चन्द्रगुप्त प्रथम
- (b)समुद्रगुप्त
- (c)चन्द्रगुप्त द्वितीय
- (d)कुमारगुप्त प्रथम
उत्तर(1) — रायचौधुरी कहते हैं कि लिच्छवी कुल के साथ चन्द्रगुप्त प्रथम के संबंध की स्मृति उन सिक्कों पर है जिन पर वे और कुमारदेवी अंकित हैं। विकल्प (2) को शक-कुषाण सरदारों से कन्याओं की भेंट मिली; विकल्प (3) ने नाग राजकुमारी कुबेरनागा से विवाह किया; विकल्प (4) ध्रुवदेवी से चन्द्रगुप्त द्वितीय के पुत्र थे। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
प्रभावती गुप्ता किस वाकाटक शासक की माता थीं?
- (a)प्रवरसेन द्वितीय
- (b)पृथ्वीषेण प्रथम
- (c)नरेन्द्रसेन
- (d)हरिषेण
उत्तर(1) — रायचौधुरी प्रभावती को दिवाकरसेन, दामोदरसेन और प्रवरसेन द्वितीय की माता बताते हैं। विकल्प (2) उनके पति रुद्रसेन द्वितीय के पिता थे; विकल्प (3) उनके माध्यम से चन्द्रगुप्त द्वितीय के प्रपौत्र थे; विकल्प (4) रायचौधुरी की वंशावली में वाकाटकों की वत्सगुल्म शाखा में आते हैं, प्रभावती के पुत्रों में नहीं।