निम्नलिखित में से किसके द्वारा ‘सुरकोटड़ा’ नामक हड़प्पा संस्कृति के स्थल की खोज की गई थी ?
- (1)बी.बी. लाल
- (2)एस.आर. राव
- (3)वाई.डी. शर्मा
- (4)जगतपति जोशी
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), जगतपति जोशी.
ए. घोष के एन इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन आर्कियोलॉजी, खंड II (1989) में सुरकोटड़ा की प्रविष्टि स्वयं जे. पी. जोशी ने लिखी है। वे कहते हैं कि कच्छ का यह स्थल उन्होंने और उनके दल ने 1964 से 1968 के बीच उत्तरी कच्छ के अन्वेषण के दौरान 17 अन्य हड़प्पा स्थलों के साथ प्रकाश में लाया।
जोशी की अपनी ASI रिपोर्ट (मेमॉयर्स ऑफ़ द ASI संख्या 87, 1990), जो 1971-72 के सुरकोटड़ा उत्खनन और कच्छ के अन्वेषण पर है, उनके अन्वेषणों को दिसम्बर 1964–जनवरी 1965, दिसम्बर 1965 और जनवरी 1968 में रखती है। वह कहती है कि उन्होंने दिसम्बर 1964 में यह टीला खोजा, और सुरकोटड़ा को रापर तालुका की एक हड़प्पाई किलेबंद बस्ती बताती है।
उसी दल ने आगे चलकर स्थल का उत्खनन भी किया। इसलिए प्रश्न में पूछे गए खोजकर्ता विकल्प (4), जगतपति जोशी, हैं।
याद रखने की बात: सुरकोटड़ा (कच्छ): 1964 से जे. पी. जोशी के अन्वेषण में मिला, 1970 के दशक के आरम्भ में उन्हीं ने उत्खनन किया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)बी.बी. लाल — बी. बी. लाल का नाम जोशी की रिपोर्ट में आता है, पर आभार में: जोशी पूर्व महानिदेशकों ए. घोष और बी. बी. लाल को कच्छ में अन्वेषण और सुरकोटड़ा में उत्खनन का अवसर देने के लिए धन्यवाद देते हैं।
घोष का इनसाइक्लोपीडिया कहता है कि कालीबंगा का उत्खनन 1961 से 1969 के बीच नौ सत्रों में बी. बी. लाल और बी. के. थापर ने किया। बी.बी. लाल कालीबंगा के उत्खनन वाले प्रश्न का उत्तर हैं।
- (2)एस.आर. राव — एस. आर. राव ने कच्छ में अन्वेषण किया था। जोशी की रिपोर्ट उन्हें वहाँ कुछ हड़प्पा स्थल खोजने का श्रेय देती है और देसलपर तथा सोमघोघा के नाम लेती है; पर जोशी की इनसाइक्लोपीडिया प्रविष्टि सुरकोटड़ा का श्रेय उनके अपने दल को देती है।
घोष का इनसाइक्लोपीडिया कहता है कि लोथल की खोज एस. आर. राव ने 1954 में की और 1954-55 से 1962-63 तक उसका उत्खनन किया। एस.आर. राव लोथल की खोज वाले प्रश्न का उत्तर हैं।
- (3)वाई.डी. शर्मा — घोष के इनसाइक्लोपीडिया में वाई. डी. शर्मा लिखते हैं कि उन्होंने ASI के लिए 1952 से 1955 तक सतलुज के बाएँ तट पर स्थित रोपड़ के टीले का उत्खनन किया।
प्रविष्टि रोपड़ को वह स्थल बताती है जहाँ विभाजन के बाद के भारत में पहली बार हड़प्पाई अवशेषों का उत्खनन हुआ। वाई.डी. शर्मा रोपड़ के उत्खनन वाले प्रश्न का उत्तर हैं।
अवधारणा
सुरकोटड़ा कच्छ की एक किलेबंद हड़प्पाई बस्ती है। जोशी की रिपोर्ट इसे आडेसर से 12 किमी उत्तर-पूर्व और भुज से 160 किमी उत्तर-पूर्व में, पाँच से आठ मीटर ऊँचे टीले पर बताती है।
घोष के इनसाइक्लोपीडिया में जोशी तीन चरणों का क्रम बताते हैं। काल IA में, जिसे वे लगभग 2300 ई.पू. का मानते हैं, हड़प्पावासियों ने कच्ची ईंटों, मिट्टी के ढेलों और रोड़ी से एक किलेबंद दुर्ग-क्षेत्र और आवासीय उपखंड बनाया; दुर्ग-क्षेत्र की विस्तृत प्रवेशद्वार-संकुल वाली विशाल रोड़ी की प्राचीर काल IC की है।
वे सबसे निचले स्तरों से इक्वस (अश्व वंश) की हड्डियाँ मिलने की भी सूचना देते हैं, जिसे वे इस बात का संकेत मानते हैं कि हड़प्पावासी इस पशु से परिचित थे।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "भारत का इतिहास" के अंतर्गत "भारत के सांस्कृतिक आधार –सिन्धु एवं वैदिक काल" सूचीबद्ध है।
जोशी की रिपोर्ट कहती है कि उनके कच्छ सर्वेक्षण का उद्देश्य वहाँ हड़प्पावासियों के आवागमन और उनके मार्गों पर प्रकाश डालना था। उनकी इनसाइक्लोपीडिया प्रविष्टि कहती है कि सुरकोटड़ा और उत्तरी कच्छ में मिले अन्य स्थल सिंध से गुजरात तक स्थल मार्गों से हड़प्पा संस्कृति के विस्तार का संकेत देते हैं।
इससे सुरकोटड़ा गुजरात में हड़प्पावासियों के अध्ययन में लोथल के साथ आता है, जिसकी खोज का श्रेय घोष का इनसाइक्लोपीडिया एस. आर. राव को देता है।
मुख्य तथ्य
- घोष के इनसाइक्लोपीडिया (1989) में जे. पी. जोशी की प्रविष्टि: सुरकोटड़ा को उन्होंने और उनके दल ने 1964–68 में उत्तरी कच्छ के अन्वेषण के दौरान प्रकाश में लाया।
- जोशी का ASI मेमॉयर संख्या 87 (1990) उनके कच्छ अन्वेषणों को दिसम्बर 1964–जनवरी 1965, दिसम्बर 1965 और जनवरी 1968 में रखता है।
- जोशी की रिपोर्ट कहती है कि इन अन्वेषणों में प्रागैतिहासिक से ऐतिहासिक काल तक के पूरे एक सौ बीस नए स्थल मिले।
- उत्खनन के वर्ष स्रोत के अनुसार अलग हैं: जोशी की इनसाइक्लोपीडिया प्रविष्टि 1970-72 देती है; उनकी ASI रिपोर्ट 1971 और 1972।
- घोष के इनसाइक्लोपीडिया में जोशी सुरकोटड़ा की पूरी सांस्कृतिक अवधि लगभग 2300–1750 ई.पू. बताते हैं।
सुरकोटड़ा: जगतपति जोशी, विकल्प (4)। स्रोत: ए. घोष (सं.), एन इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन आर्कियोलॉजी, खंड II (1989)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कच्छ में अन्वेषण करने के कारण एस. आर. राव को चुन लेना: जोशी राव को देसलपर और सोमघोघा का, और अपने दल को सुरकोटड़ा का श्रेय देते हैं।
- सुरकोटड़ा रिपोर्ट में बी. बी. लाल के नाम को खोज का प्रमाण समझ लेना: जोशी उन्हें महानिदेशक के रूप में अन्वेषण और उत्खनन का अवसर देने के लिए धन्यवाद देते हैं।
- खोज और उत्खनन को एक ही तिथि मान लेना: जोशी का अन्वेषण दिसम्बर 1964 में शुरू हुआ, जबकि उत्खनन 1970 के दशक के आरम्भ में हुए।
कोई प्रश्न किसी हड़प्पा स्थल का नाम देकर पूछ सकता है कि उसकी खोज या उत्खनन किसने किया, या कई स्थलों का उनके उत्खननकर्ताओं से मिलान करवा सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कोई स्थल आज के किस राज्य या क्षेत्र में है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1954 में हड़प्पा स्थल लोथल की खोज किसने की?
- (a)जगतपति जोशी
- (b)एस. आर. राव
- (c)बी. बी. लाल
- (d)वाई. डी. शर्मा
उत्तर(2) — घोष का इनसाइक्लोपीडिया कहता है कि लोथल की खोज एस. आर. राव ने 1954 में की और उन्हीं ने उसका उत्खनन किया। विकल्प (1) ने सुरकोटड़ा खोजा, विकल्प (3) ने बी. के. थापर के साथ कालीबंगा का उत्खनन किया, और विकल्प (4) ने रोपड़ का उत्खनन किया। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वाई. डी. शर्मा ने 1952 से 1955 तक किस हड़प्पा स्थल का उत्खनन किया?
- (a)सुरकोटड़ा
- (b)कालीबंगा
- (c)रोपड़
- (d)लोथल
उत्तर(3) — वाई. डी. शर्मा घोष के इनसाइक्लोपीडिया में लिखते हैं कि उन्होंने 1952 से 1955 तक रोपड़ का उत्खनन किया। विकल्प (1) जे. पी. जोशी का स्थल है, विकल्प (2) का उत्खनन बी. बी. लाल और बी. के. थापर ने, और विकल्प (4) का एस. आर. राव ने किया।