बाजार मूल्यों पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद है –
- (1)बाजार मूल्यों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – विदेश से शुद्ध आय
- (2)बाजार मूल्यों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – हस्तान्तरण भुगतान
- (3)बाजार मूल्यों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – मूल्यह्रास
- (4)बाजार मूल्यों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – अनुदान
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), बाजार मूल्यों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – मूल्यह्रास.
NCERT की कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक इंट्रोडक्टरी मैक्रोइकोनॉमिक्स अपने राष्ट्रीय आय लेखांकन वाले अध्याय में समुच्चयों को क्रम से बनाती है। पहला चरण: GNP ≡ GDP + विदेश से शुद्ध साधन आय।
इसके बाद, वर्ष के दौरान पूँजी स्टॉक का एक भाग घिस जाता है। पाठ्यपुस्तक इस घिसावट को मूल्यह्रास कहती है और बताती है कि यह किसी की आय का भाग नहीं बनता। इसे GNP से घटाने पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद मिलता है: NNP ≡ GNP – मूल्यह्रास।
पाठ्यपुस्तक आगे कहती है कि ये सभी चर बाजार मूल्यों पर आँके जाते हैं, इसलिए परिणाम बाजार मूल्यों पर NNP है। उसकी सारांश तालिका इसे NNPMP = GNPMP − मूल्यह्रास के रूप में लिखती है।
सकल से शुद्ध तक का एकमात्र चरण मूल्यह्रास घटाना है, यानी बाजार मूल्यों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – मूल्यह्रास।
याद रखने योग्य बात: सकल से शुद्ध में मूल्यह्रास घटता है; घरेलू से राष्ट्रीय में विदेश से शुद्ध साधन आय जुड़ती है; बाजार मूल्य से साधन लागत में शुद्ध अप्रत्यक्ष कर घटते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)बाजार मूल्यों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – विदेश से शुद्ध आय — चूँकि GNP ≡ GDP + विदेश से शुद्ध साधन आय, इस आय को फिर से घटाने पर वापस बाजार मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद मिलता है।
इससे राष्ट्रीय घरेलू में बदलता है, पर आँकड़ा सकल ही रहता है: मूल्यह्रास अब भी उसके भीतर है। NNP के लिए मूल्यह्रास घटाना होता है, विदेश से साधन आय नहीं।
- (2)बाजार मूल्यों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – हस्तान्तरण भुगतान — हस्तान्तरण भुगतान, जैसे NCERT के उदाहरणों में पेंशन, छात्रवृत्ति और पुरस्कार, उत्पादन की लागत नहीं हैं, इसलिए वे सकल और शुद्ध उत्पाद के बीच का अंतर नहीं हैं।
NCERT के क्रम में वे बहुत बाद में आते हैं, जहाँ वैयक्तिक आय तक पहुँचने के लिए जोड़े जाते हैं: PI ≡ NI – अवितरित लाभ – परिवारों द्वारा किया गया शुद्ध ब्याज भुगतान – निगम कर + सरकार और फर्मों से परिवारों को हस्तान्तरण भुगतान।
- (4)बाजार मूल्यों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद – अनुदान — अनुदान (सब्सिडी) बाजार मूल्यों से साधन लागत वाले चरण से जुड़े हैं, और वहाँ वे घटाए नहीं, वापस जोड़े जाते हैं। NCERT लिखती है: साधन लागत पर NNP ≡ बाजार मूल्यों पर NNP – (अप्रत्यक्ष कर – अनुदान)।
बाजार मूल्यों पर GNP से अनुदान घटाने से न मूल्यह्रास हटता है, न शुद्ध अप्रत्यक्ष कर, इसलिए NNP नहीं मिलता।
अवधारणा
राष्ट्रीय आय के समुच्चय तीन लेबल बदलकर बनते हैं। घरेलू या राष्ट्रीय: घरेलू से राष्ट्रीय तक जाने के लिए विदेश से शुद्ध साधन आय जोड़ें। सकल या शुद्ध: सकल से शुद्ध तक जाने के लिए मूल्यह्रास घटाएँ। बाजार मूल्य या साधन लागत: अप्रत्यक्ष कर घटाएँ और अनुदान जोड़ें।
मूल्यह्रास एक वर्ष में उपयोग हुई पूँजी का मूल्य है। NCERT बताती है कि इसे स्थायी पूँजी का उपभोग भी कहते हैं।
NCERT का क्रम है: GDP → GNP → बाजार मूल्यों पर NNP → साधन लागत पर NNP, जो राष्ट्रीय आय है → वैयक्तिक आय → वैयक्तिक प्रयोज्य आय।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "आर्थिक अवधारणाएँ एवं भारतीय अर्थव्यवस्था" के "अर्थशास्त्र की मूलभूत अवधारणाएं" के अंतर्गत "बजट निर्माण, बैंकिंग, लोक–वित्त, वस्तु एवं सेवा कर, राष्ट्रीय आय, संवृद्धि एवं विकास का आधारभूत ज्ञान" सूचीबद्ध है।
यही तर्क राज्य के लेखों में भी है। राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2020-21 के अनुसार शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद निकालने के लिए सकल मूल्य आँकड़ों में से स्थायी पूँजी का उपभोग (CFC) घटाया जाता है।
समीक्षा CFC को पूँजी स्टॉक के उस भाग का प्रतिस्थापन मूल्य बताती है जो वर्ष के दौरान उत्पादन में उपयोग हो गया।
मुख्य तथ्य
- NCERT: GNP ≡ GDP + विदेश से शुद्ध साधन आय।
- NCERT: NNP ≡ GNP – मूल्यह्रास; बाजार मूल्यों पर आँकने पर यह बाजार मूल्यों पर NNP है।
- NCERT: साधन लागत पर NNP ≡ राष्ट्रीय आय ≡ बाजार मूल्यों पर NNP – (अप्रत्यक्ष कर – अनुदान)।
- NCERT: मूल्यह्रास को स्थायी पूँजी का उपभोग भी कहते हैं।
- राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2020-21 सकल आँकड़ों में से स्थायी पूँजी का उपभोग घटाकर शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद निकालती है।
स्रोत: NCERT, इंट्रोडक्टरी मैक्रोइकोनॉमिक्स (कक्षा 12), अध्याय 2, राष्ट्रीय आय लेखांकन।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- राष्ट्रीय वाले समायोजन को शुद्ध वाले समायोजन से मिला देना: विदेश से शुद्ध साधन आय घटाने पर GDP मिलता है, NNP नहीं।
- अनुदान को घटाई जाने वाली मद मान लेना: बाजार मूल्य से साधन लागत वाले चरण में वे वापस जोड़े जाते हैं।
- हस्तान्तरण भुगतान को उत्पादन समुच्चयों में रखना: वे केवल वैयक्तिक आय के चरण में आते हैं।
कोई प्रश्न एक समुच्चय देकर पूछ सकता है कि दूसरे तक पहुँचने के लिए क्या जोड़ना या घटाना होगा, जैसे GNP से NNP।
कोई प्रश्न GDP, विदेश से शुद्ध साधन आय, मूल्यह्रास और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर के आँकड़े देकर राष्ट्रीय आय भी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
निम्नलिखित में से किस वर्ष में भारत की सकल राष्ट्रीय आय एवं शुद्ध राष्ट्रीय आय में वार्षिक वृद्धि की दर प्रचलित एवं स्थिर दोनों ही कीमतों पर ऋणात्मक रही हैं ?
- (1) 2018-19
- (2) 2019-20
- (3) 2020-21
- (4) 2021-22
उत्तर(3)
यह भी सकल और शुद्ध राष्ट्रीय समुच्चयों पर है। वह प्रश्न पूछता है कि किस वर्ष भारत की सकल राष्ट्रीय आय एवं शुद्ध राष्ट्रीय आय में वार्षिक वृद्धि की दर प्रचलित एवं स्थिर दोनों ही कीमतों पर ऋणात्मक रही (RPSC की कुंजी: 2020-21); यह प्रश्न पूछता है कि सकल आँकड़े से शुद्ध आँकड़ा कैसे निकलता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राष्ट्रीय आय (साधन लागत पर NNP) बराबर है
- (a)बाजार मूल्यों पर NNP – मूल्यह्रास
- (b)बाजार मूल्यों पर NNP – (अप्रत्यक्ष कर – अनुदान)
- (c)बाजार मूल्यों पर GNP + अनुदान
- (d)बाजार मूल्यों पर GDP + विदेश से शुद्ध साधन आय
उत्तर(2) — NCERT साधन लागत पर NNP को बाजार मूल्यों पर NNP में से शुद्ध अप्रत्यक्ष कर घटाकर परिभाषित करती है। विकल्प (1) मूल्यह्रास दो बार घटाता है, विकल्प (3) मूल्यह्रास और अप्रत्यक्ष कर दोनों भीतर रखता है, और विकल्प (4) बाजार मूल्यों पर GNP देता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बाजार मूल्यों पर GDP 500 करोड़ रुपये है, विदेश से शुद्ध साधन आय –20 करोड़ रुपये है और मूल्यह्रास 50 करोड़ रुपये है। बाजार मूल्यों पर NNP है
- (a)430 करोड़ रुपये
- (b)470 करोड़ रुपये
- (c)450 करोड़ रुपये
- (d)480 करोड़ रुपये
उत्तर(1) — GNP = 500 + (–20) = 480। NNP = 480 – 50 = 430। विकल्प (2) 20 को घटाने के बजाय जोड़ता है, विकल्प (3) विदेश से साधन आय को छोड़ देता है, और विकल्प (4) मूल्यह्रास से पहले का GNP है।