निम्नलिखित में से किस वर्ष में भारत की सकल राष्ट्रीय आय एवं शुद्ध राष्ट्रीय आय में वार्षिक वृद्धि की दर प्रचलित एवं स्थिर दोनों ही कीमतों पर ऋणात्मक रही हैं ?
- (1)2018-19
- (2)2019-20
- (3)2020-21
- (4)2021-22
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), 2020-21.
प्रश्न ऐसा एक वर्ष माँगता है जिसमें चारों वृद्धि दरें शून्य से नीचे रहीं: सकल राष्ट्रीय आय (GNI) और शुद्ध राष्ट्रीय आय (NNI), दोनों प्रचलित कीमतों पर भी और स्थिर कीमतों पर भी।
2020-21 वही वर्ष है। 29 फरवरी 2024 को जारी MoSPI के अंतिम अनुमानों में प्रचलित कीमतों पर GNI 1.6% और NNI 2.8% घटी।
स्थिर (2011-12) कीमतों पर GNI ₹143.93 लाख करोड़ से घटकर लगभग ₹134.9 लाख करोड़ रह गई, यानी लगभग 6.2% की गिरावट, और NNI लगभग 7.9% घटी।
2020-21 कोविड-19 महामारी का पहला पूरा वित्तीय वर्ष था। वास्तविक GDP 5.8% संकुचित हुआ।
याद रखने की बात: प्रचलित कीमतों पर वृद्धि मोटे तौर पर वास्तविक वृद्धि और मुद्रास्फीति का जोड़ है। वास्तविक आय में छोटी गिरावट की भरपाई बढ़ती कीमतें कर सकती हैं, जिससे प्रचलित कीमतों पर वृद्धि धनात्मक बनी रहती है। 2020-21 में उत्पादन इतना गिरा कि प्रचलित कीमतों वाले आँकड़े भी ऋणात्मक हो गए।
NNI, GNI से अधिक घटी, क्योंकि NNI = GNI − स्थिर पूंजी का उपभोग, और आय घटने के दौरान यह घटाई जाने वाली राशि बढ़ती रही।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)2018-19 — 2018-19 में वृद्धि हुई, संकुचन नहीं।
GNI प्रचलित कीमतों पर 10.6% और स्थिर कीमतों पर 6.5% बढ़ी; NNI 10.4% और 6.2% बढ़ी। यह चारों मापों पर धनात्मक वृद्धि का वर्ष है — प्रश्न में पूछी गई ऋणात्मक वृद्धि का उलटा।
- (2)2019-20 — 2019-20 में वृद्धि धीमी हुई, पर चारों मापों पर शून्य से ऊपर रही।
GNI प्रचलित कीमतों पर 6.5% और स्थिर कीमतों पर 4.0% बढ़ी; NNI 6.2% और 3.6% बढ़ी। यह महामारी से पहले के धीमी वृद्धि वाले वर्ष का सही उत्तर है, और वही आधार जिससे 2020-21 में गिरावट आई।
- (4)2021-22 — 2021-22 पुनरुद्धार का वर्ष था, जिसकी वृद्धि 2020-21 के निचले आधार से मापी गई।
MoSPI के फरवरी 2024 के अनुमानों (2021-22 के दूसरे संशोधित अनुमान) में प्रचलित कीमतों पर GNI 19.1% और NNI 19.7% बढ़ी, और स्थिर कीमतों पर लगभग 9.9% और 10.4%। यह तेज़ पुनरुद्धार वाले वर्ष का सही उत्तर है, प्रश्न का उलटा।
अवधारणा
राष्ट्रीय आय दो तरह से मापी जा सकती है। प्रचलित कीमतों (नाममात्र) पर उत्पादन का मूल्य उसी वर्ष की कीमतों पर आँका जाता है। स्थिर कीमतों (वास्तविक) पर उसका मूल्य किसी आधार वर्ष की कीमतों पर आँका जाता है — यहाँ प्रयुक्त शृंखला में 2011-12 — ताकि कीमतों में बदलाव का प्रभाव हट जाए।
सकल राष्ट्रीय आय = GDP + शेष विश्व से शुद्ध प्राथमिक आय। शुद्ध राष्ट्रीय आय = GNI − स्थिर पूंजी का उपभोग, यानी वर्ष के दौरान खप चुकी पूंजी का मूल्य।
प्रचलित कीमतों पर वृद्धि मोटे तौर पर वास्तविक वृद्धि और मुद्रास्फीति का जोड़ है। यदि कीमतें उत्पादन की गिरावट से तेज़ बढ़ें, तो वास्तविक आय घटने पर भी प्रचलित कीमतों पर आय बढ़ सकती है।
चारों दरें ऋणात्मक होने के लिए वास्तविक आय घटनी चाहिए और कीमतों की वृद्धि उसकी भरपाई के लिए बहुत कम होनी चाहिए। जब पूंजी-उपभोग की कटौती बढ़ती रहे, तो NNI, GNI से तेज़ घट सकती है।
RPSC के 2024 के प्रारंभिक पाठ्यक्रम में "आर्थिक अवधारणाएँ एवं भारतीय अर्थव्यवस्था" के अंतर्गत "अर्थशास्त्र की मूलभूत अवधारणाएं" में "बजट निर्माण, बैंकिंग, लोक–वित्त, वस्तु एवं सेवा कर, राष्ट्रीय आय, संवृद्धि एवं विकास का आधारभूत ज्ञान" शामिल है।
यह विषय दो स्तरों को जोड़ता है। अवधारणा का स्तर है सकल और शुद्ध का अंतर, तथा प्रचलित और स्थिर कीमतों का अंतर। आँकड़ों का स्तर है MoSPI के राष्ट्रीय लेखा प्रकाशनों में भारत की हाल की वृद्धि का अभिलेख।
MoSPI हर वर्ष के अनुमान कई बार संशोधित करता है, इसलिए दशमलव के अंक प्रकाशनों के बीच बदलते हैं। 2020-21 के लिए दिशा नहीं बदलती: चारों माप घटे।
महामारी वाला वर्ष इस अवधारणा का स्पष्ट उदाहरण है: प्रचलित कीमतों पर वृद्धि तभी ऋणात्मक होती है जब वास्तविक गिरावट कीमतों की वृद्धि से बड़ी हो।
मुख्य तथ्य
- MoSPI के अंतिम अनुमान (29 फरवरी 2024): 2020-21 में प्रचलित कीमतों पर GNI 1.6% और NNI 2.8% घटी।
- स्थिर (2011-12) कीमतों पर GNI 2019-20 के ₹143.93 लाख करोड़ से घटकर 2020-21 में लगभग ₹134.9 लाख करोड़ रह गई; NNI लगभग 7.9% घटी।
- कोविड-19 महामारी के पहले पूरे वित्तीय वर्ष, 2020-21, में भारत का वास्तविक GDP 5.8% संकुचित हुआ।
- GNI = GDP + शेष विश्व से शुद्ध प्राथमिक आय; NNI = GNI − स्थिर पूंजी का उपभोग।
- 2019-20 में स्थिर कीमतों पर GNI 4.0% और NNI 3.6% बढ़ी — धीमी, पर फिर भी धनात्मक वृद्धि।
पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि, आधार वर्ष 2011-12। MoSPI के राष्ट्रीय लेखा प्रेस नोट, 28 फरवरी 2023 और 29 फरवरी 2024; 2021-22 की स्थिर कीमतों वाली दरें प्रकाशित स्तरों से निकाली गई हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- वास्तविक आय में गिरावट अपने-आप प्रचलित कीमतों पर वृद्धि को ऋणात्मक नहीं बनाती। जाँचें कि कीमतें उसकी भरपाई के लिए पर्याप्त बढ़ीं या नहीं।
- सकल और शुद्ध माप एक ही वर्ष में अलग-अलग मात्रा में बदल सकते हैं। NNI में स्थिर पूंजी का उपभोग घटाया जाता है, जो आय घटने पर भी बढ़ता रह सकता है।
- संशोधित अनुमानों से दशमलव बदलते हैं। याद किए गए प्रतिशत के बजाय स्पष्ट रूप से असामान्य वर्ष में बदलाव की दिशा को उत्तर का आधार बनाएँ।
राष्ट्रीय आय पर प्रश्न पूछ सकता है कि एक समुच्चय दूसरे से कैसे निकलता है, आधार वर्ष का क्या अर्थ है, या माप की पद्धति में क्या बदला।
प्रश्न भारत के वृद्धि अभिलेख से कोई वर्ष भी पूछ सकता है — किसी माप पर सबसे अधिक वृद्धि वाला वर्ष, या, जैसा यहाँ है, वह वर्ष जिसमें प्रचलित और स्थिर कीमतों वाले सभी माप घटे।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021, 2016 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी वर्ष में यदि किसी अर्थव्यवस्था का वास्तविक GDP 5 प्रतिशत घटे और सामान्य कीमत स्तर 3 प्रतिशत बढ़े, तो उसका नाममात्र GDP लगभग –
- (a)8 प्रतिशत बढ़ेगा
- (b)2 प्रतिशत घटेगा
- (c)8 प्रतिशत घटेगा
- (d)2 प्रतिशत बढ़ेगा
उत्तर(2) — नाममात्र वृद्धि मोटे तौर पर वास्तविक वृद्धि और मुद्रास्फीति का जोड़ है: −5 + 3 = −2। सटीक गणना: 0.95 × 1.03 = 0.9785, यानी लगभग 2.15 प्रतिशत की गिरावट। विकल्प (1) दोनों को ऐसे जोड़ता है मानो दोनों वृद्धि हों। विकल्प (3) मुद्रास्फीति को जोड़ने के बजाय घटाता है। विकल्प (4) चिह्न उलट देता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के 2020-21 के राष्ट्रीय लेखों में स्थिर कीमतों पर शुद्ध राष्ट्रीय आय, सकल राष्ट्रीय आय से अधिक तेज़ी से घटी। इसका कारण है कि –
- (a)GNI घटने के दौरान स्थिर पूंजी का उपभोग बढ़ता रहा
- (b)शेष विश्व से शुद्ध प्राथमिक आय धनात्मक हो गई
- (c)उत्पादों पर सब्सिडी में भारी कटौती हुई
- (d)वर्ष के दौरान शृंखला का आधार वर्ष बदल दिया गया
उत्तर(1) — NNI = GNI − स्थिर पूंजी का उपभोग। स्थिर कीमतों पर 2020-21 में स्थिर पूंजी का उपभोग लगभग 5.9% बढ़ा, जबकि GNI घटी, इसलिए NNI और अधिक घटी।विकल्प (2) गलत है, क्योंकि शेष विश्व से शुद्ध प्राथमिक आय ऋणात्मक ही रही। विकल्प (3) गलत है, क्योंकि उस वर्ष उत्पादों पर सब्सिडी बढ़ी, और सब्सिडी GDP को प्रभावित करती है, GNI से NNI वाले चरण को नहीं। विकल्प (4) गलत है, क्योंकि शृंखला 2011-12 के आधार पर ही रही।