सूची–I एवं सूची–II को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर चुनिए – सूची–I (A) हावड़ा षड्यंत्र केस (B) लाहौर षड्यंत्र केस (C) दिल्ली षड्यंत्र केस (D) अलीपुर षड्यंत्र केस सूची–II (i) मास्टर अमीचंद (अमीरचंद) (ii) अरविन्द घोष (iii) जतिन्द्रनाथ मुखर्जी (iv) राजगुरु कूट –
- (1)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i)
- (2)A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv)
- (3)A-(iii), B-(iv), C-(i), D-(ii)
- (4)A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), A-(iii), B-(iv), C-(i), D-(ii).
सही कूट A-(iii), B-(iv), C-(i), D-(ii) है। हर केस उन क्रांतिकारियों से जुड़ता है जिन पर उसमें मुकदमा चला।
(A) हावड़ा षड्यंत्र केस → (iii) जतिन्द्रनाथ मुखर्जी। जनवरी 1910 में अनुशीलन समिति के 47 सदस्य गिरफ़्तार हुए और हावड़ा–शिबपुर षड्यंत्र केस में कलकत्ता में उन पर मुकदमा चला। जतिन्द्रनाथ मुखर्जी (बाघा जतिन) उनमें थे।
(B) लाहौर षड्यंत्र केस → (iv) राजगुरु। राजगुरु, भगत सिंह और सुखदेव पर 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में पुलिस अधिकारी जॉन पी. सॉन्डर्स की हत्या का मुकदमा चला, और 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में उन्हें फाँसी दी गई।
(C) दिल्ली षड्यंत्र केस → (i) मास्टर अमीरचंद। 23 दिसंबर 1912 को दिल्ली में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंके जाने के बाद अमीरचंद, अवध बिहारी, भाई बालमुकुन्द, बसंत कुमार बिस्वास और लाला हनुमंत सहाय के विरुद्ध यह केस चलाया गया।
(D) अलीपुर षड्यंत्र केस → (ii) अरविन्द घोष। मई 1908 से मई 1909 के बीच अलीपुर सेशन्स कोर्ट में जिन अभियुक्तों पर मुकदमा चला, उनमें अरविन्द घोष और उनके भाई बारीन घोष थे।
हावड़ा – जतिन मुखर्जी; लाहौर – राजगुरु; दिल्ली – अमीरचंद; अलीपुर – अरविन्द।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i) — इस कूट का एक भी जोड़ा सही नहीं है। यह राजगुरु को हावड़ा केस में, जतिन्द्रनाथ मुखर्जी को लाहौर केस में, अरविन्द घोष को दिल्ली केस में और अमीरचंद को अलीपुर केस में रखता है।
राजगुरु सॉन्डर्स की हत्या वाले लाहौर केस से जुड़े हैं, और अमीरचंद हार्डिंग पर हमले वाले दिल्ली केस से।
- (2)A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv) — यह कूट दोनों सूचियों को बस छपे क्रम में जोड़ता है, और इसका एक भी जोड़ा सही नहीं है।
अमीरचंद पर दिल्ली केस में मुकदमा चला, हावड़ा केस में नहीं। अरविन्द घोष अलीपुर केस में अभियुक्त थे, लाहौर में नहीं। जतिन्द्रनाथ मुखर्जी हावड़ा केस से जुड़े हैं, और राजगुरु लाहौर से।
- (4)A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i) — इस कूट का एक भी जोड़ा सही नहीं है। यह अरविन्द घोष को हावड़ा, जतिन्द्रनाथ मुखर्जी को लाहौर, राजगुरु को दिल्ली और अमीरचंद को अलीपुर भेजता है।
1908–09 का अलीपुर केस ही वह केस है जिसमें अरविन्द घोष अभियुक्त बने; 1910 का हावड़ा–शिबपुर केस जतिन्द्रनाथ मुखर्जी से जुड़ा है।
अवधारणा
इनमें से हर मुकदमे में क्रांतिकारियों के एक समूह पर एक साथ ‘षड्यंत्र केस’ के रूप में मुकदमा चला, जिसका नाम मुकदमे या षड्यंत्र से जुड़े किसी स्थान पर पड़ा।
अलीपुर बम केस (1908–09) खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी द्वारा मुज़फ़्फ़रपुर में मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड पर हमले के बाद चला। हावड़ा–शिबपुर केस (1910) पुलिस अधिकारी शम्सुल आलम की हत्या के बाद चला। दिल्ली केस (1912–14) चाँदनी चौक में लॉर्ड हार्डिंग पर फेंके गए बम के बाद चला।
लाहौर में एक से अधिक षड्यंत्र मुकदमे चले। पहले लाहौर षड्यंत्र केस (1915) में ग़दर क्रांतिकारियों पर मुकदमा चला; बाद वाले में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और अन्य पर।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में भारत के इतिहास के आधुनिक काल के अंतर्गत "स्वतंत्रता संघर्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन– विभिन्न अवस्थाएँ, धाराएँ, महत्वपूर्ण योगदानकर्ता एवं देश के अलग–अलग हिस्सों का योगदान" सूचीबद्ध है।
क्रांतिकारी धारा बंगाल की अनुशीलन समिति से लेकर भगत सिंह और उनके साथियों की हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) तक चली। ये मुकदमे इसकी अवस्थाएँ दिखाते हैं: 1908–10 में बंगाल, 1912–15 में दिल्ली और लाहौर, और 1929–30 में फिर लाहौर।
मुख्य तथ्य
- अलीपुर बम केस का मुकदमा मई 1908 से मई 1909 के बीच कलकत्ता के अलीपुर सेशन्स कोर्ट में चला; अरविन्द और बारीन घोष अभियुक्तों में थे।
- जनवरी 1910 में हावड़ा–शिबपुर षड्यंत्र केस में जतिन्द्रनाथ मुखर्जी सहित अनुशीलन समिति के 47 सदस्य गिरफ़्तार हुए।
- 23 दिसंबर 1912 को दिल्ली के चाँदनी चौक में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंका गया, जिससे दिल्ली षड्यंत्र केस चला।
- 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में जॉन पी. सॉन्डर्स को गोली मारी गई; 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी दी गई।
- पहले लाहौर षड्यंत्र केस (1915) में ग़दर षड्यंत्र के क्रांतिकारियों पर मुकदमा चला।
सही कूट, विकल्प (3)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- लाहौर में एक से अधिक षड्यंत्र मुकदमे चले। राजगुरु सॉन्डर्स की हत्या वाले बाद के केस से जुड़े हैं, 1915 के ग़दर मुकदमे से नहीं।
- अरविन्द घोष और जतिन्द्रनाथ मुखर्जी दोनों उन्हीं वर्षों के बंगाल के क्रांतिकारी थे; अलीपुर केस (1908–09) और हावड़ा केस (1910) उन्हें अलग करते हैं।
- दिल्ली षड्यंत्र केस को दिल्ली–लाहौर षड्यंत्र भी कहते हैं, और उसके पीछे के 1912 के हमले को हार्डिंग बम काण्ड (RPSC के 2018 के प्रश्न का शब्द) भी कहा जा सकता है, इसलिए प्रश्न में इनमें से कोई भी नाम आ सकता है।
कोई प्रश्न षड्यंत्र केसों को उन क्रांतिकारियों से सुमेलित करवा सकता है जिन पर उनमें मुकदमा चला, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किसी केस में कौन शामिल नहीं था, केसों को कालक्रम में रखवा सकता है, या पूछ सकता है कि किस घटना के बाद कोई मुकदमा चला।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
लॉर्ड हार्डिंग पर बम हमले (1912) के बाद चले दिल्ली षड्यंत्र केस में निम्नलिखित में से कौन अभियुक्त नहीं था?
- (a)मास्टर अमीरचंद
- (b)अवध बिहारी
- (c)बसंत कुमार बिस्वास
- (d)बारीन्द्र कुमार घोष
उत्तर(4) — बारीन्द्र कुमार (बारीन) घोष 1908–09 के अलीपुर बम केस में अभियुक्त थे। विकल्प (1), अमीरचंद, विकल्प (2), अवध बिहारी, और विकल्प (3), बसंत कुमार बिस्वास, उन लोगों में थे जिनके विरुद्ध दिल्ली षड्यंत्र केस चलाया गया। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1910 का हावड़ा–शिबपुर षड्यंत्र केस किससे संबंधित है?
- (a)जतिन्द्रनाथ मुखर्जी
- (b)भगत सिंह
- (c)रासबिहारी बोस
- (d)अरविन्द घोष
उत्तर(1) — जनवरी 1910 में हावड़ा–शिबपुर केस में गिरफ़्तार अनुशीलन समिति के 47 सदस्यों में जतिन्द्रनाथ मुखर्जी थे। विकल्प (2), भगत सिंह, पर लाहौर में मुकदमा चला; विकल्प (3), रासबिहारी बोस, 1912 में हार्डिंग पर हमले के षड्यंत्र के प्रमुख थे; विकल्प (4), अरविन्द घोष, अलीपुर केस में अभियुक्त थे।