विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 1871 ई. में राजमुन्द्री सोशल रिफॉर्म एसोसिएशन स्थापित किया गया था –
- (1)वीरेंशलिंगम द्वारा
- (2)के. रामकृष्ण पिल्लई द्वारा
- (3)के. टी. तेलंग द्वारा
- (4)गोपालाचारियार द्वारा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), वीरेंशलिंगम द्वारा.
राजमुन्द्री सोशल रिफॉर्म एसोसिएशन की स्थापना मद्रास प्रेसिडेंसी के तेलुगु क्षेत्र में राजमुन्द्री के कंदुकूरी वीरेंशलिंगम पंतुलु (1848–1919) ने की थी।
चार्ल्स एच. हाइमसाथ की इंडियन नेशनलिज़्म एंड हिन्दू सोशल रिफ़ॉर्म (1964) उन्हें दक्षिण भारत का विद्यासागर कहती है, और बताती है कि उन्होंने 1878 में राजमुन्द्री सोशल रिफॉर्म एसोसिएशन की स्थापना की और थोपे गए वैधव्य के विरुद्ध अपना अभियान शुरू किया।
वर्ष प्रश्न से अलग है। हाइमसाथ 1871 नहीं, 1878 देते हैं। आर. सुंथरलिंगम की पॉलिटिक्स एंड नेशनलिस्ट अवेकनिंग इन साउथ इंडिया, 1852–1891 भी यही कहती है: वीरेंशलिंगम ने 1874 में एक तेलुगु साप्ताहिक शुरू किया, और उसके चार वर्ष बाद उन्होंने और उनके सहयोगियों ने यह एसोसिएशन संगठित किया।
वर्ष 1871 एस. नटराजन की अ सेंचुरी ऑफ़ सोशल रिफ़ॉर्म इन इंडिया (1959) में आता है, पर एक दूसरी संस्था के लिए: मद्रास में 1871 में एक विधवा पुनर्विवाह संघ शुरू हुआ था, जिसे बाद में दीवान बहादुर रघुनाथ राव ने पुनर्जीवित किया।
दोनों में से किसी भी तिथि पर राजमुन्द्री संस्था के संस्थापक वही हैं। हाइमसाथ जोड़ते हैं कि वीरेंशलिंगम ने बाद में 1891 में एक विधवा विवाह एसोसिएशन और राजमुन्द्री में एक विधवा आश्रम की स्थापना की।
राजमुन्द्री सोशल रिफॉर्म एसोसिएशन — वीरेंशलिंगम।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)के. रामकृष्ण पिल्लई द्वारा — के. रामकृष्ण पिल्लई (1878–1916) का जन्म 1871 के बाद हुआ, इसलिए वे उस वर्ष किसी संस्था की स्थापना नहीं कर सकते थे।
वे त्रावणकोर के मलयालम पत्रकार थे, जो स्वदेशाभिमानी के संपादक के रूप में जाने जाते हैं। दीवान और महाराजा की आलोचना के बाद यह समाचार पत्र ज़ब्त कर लिया गया, और 1910 में उन्हें त्रावणकोर से निर्वासित कर दिया गया।
- (3)के. टी. तेलंग द्वारा — काशीनाथ त्र्यंबक तेलंग (1850–1893) ने बम्बई में काम किया, तेलुगु क्षेत्र में नहीं। हाइमसाथ उन्हें रानडे, भंडारकर और चंदावरकर के साथ बम्बई के मुख्यधारा के समाज सुधार आंदोलन में रखते हैं।
वे बम्बई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे और फ़ीरोज़शाह मेहता तथा बदरुद्दीन तैयबजी के साथ बॉम्बे प्रेसिडेंसी एसोसिएशन के संस्थापक थे।
- (4)गोपालाचारियार द्वारा — राजमुन्द्री संस्था पर यहाँ प्रयुक्त स्रोत, हाइमसाथ (1964) और सुंथरलिंगम, इसके संस्थापक के रूप में वीरेंशलिंगम का नाम लेते हैं, गोपालाचारियार का नहीं।
नटराजन 1871 के मद्रास विधवा पुनर्विवाह संघ को भी इस नाम से नहीं, बल्कि बाद में दीवान बहादुर रघुनाथ राव द्वारा उसके पुनर्जीवन से जोड़ते हैं।
अवधारणा
हाइमसाथ के अनुसार विधवा पुनर्विवाह पहला सामाजिक सुधार मुद्दा बना जिसे पूरे देश में उठाया गया। वे इसे पश्चिमी भारत से अहमदाबाद तक, वीरेंशलिंगम के माध्यम से मद्रास प्रेसिडेंसी तक, और दयानंद सरस्वती तथा आर्य समाज के माध्यम से उत्तर भारत तक फैलते हुए दिखाते हैं।
वीरेंशलिंगम तेलुगु में लिखते थे और राजमुन्द्री से काम करते थे। उनका तेलुगु उपन्यास राजशेखर चरित्रमु 1878 से धारावाहिक रूप में छपा और 1880 में पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ।
हाइमसाथ जोड़ते हैं कि वीरेंशलिंगम बाद में विधवाओं के लिए अपना काम मद्रास शहर तक ले गए, जहाँ उन्होंने एक और विधवा आश्रम स्थापित किया, जिसे 1902 में हिन्दू सोशल रिफ़ॉर्म एसोसिएशन को सौंप दिया गया।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में भारत के इतिहास के आधुनिक काल के अंतर्गत "19वीं शताब्दी के दौरान सामाजिक–धार्मिक सुधारः विभिन्न नेता एवं संस्थाएँ" सूचीबद्ध है।
मद्रास प्रेसिडेंसी में सुधार के अपने नेता थे। हाइमसाथ बताते हैं कि राजमुन्द्री में वीरेंशलिंगम और कोकनाडा तथा मसूलीपट्टनम में आर. वेंकट रत्नम नायडू ने अपना काम मद्रास शहर से बाहर केंद्रित किया, जबकि तेलंग और रानडे बम्बई में काम करते थे।
मुख्य तथ्य
- राजमुन्द्री के कंदुकूरी वीरेंशलिंगम पंतुलु (1848–1919) ने राजमुन्द्री सोशल रिफॉर्म एसोसिएशन की स्थापना की; हाइमसाथ (1964) इसे 1878 का बताते हैं।
- हाइमसाथ वीरेंशलिंगम को दक्षिण भारत का विद्यासागर कहते हैं।
- नटराजन (1959): मद्रास में 1871 में एक विधवा पुनर्विवाह संघ शुरू हुआ, जिसे 1880 के दशक में दीवान बहादुर रघुनाथ राव ने पुनर्जीवित किया।
- हाइमसाथ: वीरेंशलिंगम ने 1891 में एक विधवा विवाह एसोसिएशन और राजमुन्द्री में एक विधवा आश्रम की स्थापना की।
- के. टी. तेलंग (1850–1893) बम्बई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और बॉम्बे प्रेसिडेंसी एसोसिएशन के एक संस्थापक थे।
विकल्प (1) संस्थापक हैं। हाइमसाथ (1964) राजमुन्द्री एसोसिएशन को 1878 का बताते हैं; प्रश्न में 1871 छपा है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रश्न का वर्ष, 1871, राजमुन्द्री एसोसिएशन के लिए हाइमसाथ के 1878 से अलग है; नटराजन का 1871 मद्रास के एक विधवा पुनर्विवाह संघ का है।
- किसी सुधारक का जीवन-काल किसी विकल्प को बाहर कर सकता है: के. रामकृष्ण पिल्लई का जन्म 1878 में हुआ।
- तेलंग भी समाज सुधारक थे, पर बम्बई में; एसोसिएशन के नाम का स्थान तेलुगु क्षेत्र की ओर संकेत करता है।
कोई प्रश्न किसी सुधार संस्था का नाम देकर उसका संस्थापक पूछ सकता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न किसी संस्था का वर्ष या स्थान भी पूछ सकता है, सुधारकों को संस्थाओं से सुमेलित करवा सकता है, या पूछ सकता है कि संस्था और संस्थापक का कौन-सा युग्म सही नहीं है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किस समाज सुधारक को दक्षिण भारत का विद्यासागर कहा गया है?
- (a)कंदुकूरी वीरेंशलिंगम
- (b)के. टी. तेलंग
- (c)एम. जी. रानडे
- (d)रघुनाथ राव
उत्तर(1) — हाइमसाथ (1964) विधवा पुनर्विवाह के लिए उनके काम के कारण वीरेंशलिंगम पंतुलु को दक्षिण भारत का विद्यासागर कहते हैं। विकल्प (2), तेलंग, और विकल्प (3), रानडे, बम्बई के सुधारक थे; विकल्प (4), रघुनाथ राव, ने नटराजन (1959) के अनुसार 1880 के दशक में मद्रास के एक विधवा पुनर्विवाह संघ को पुनर्जीवित किया। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
तेलुगु उपन्यास राजशेखर चरित्रमु (1880) के लेखक कौन थे?
- (a)के. रामकृष्ण पिल्लई
- (b)कंदुकूरी वीरेंशलिंगम
- (c)के. टी. तेलंग
- (d)आर. वेंकट रत्नम नायडू
उत्तर(2) — वीरेंशलिंगम ने 1880 में राजशेखर चरित्रमु प्रकाशित किया। विकल्प (1), के. रामकृष्ण पिल्लई, मलयालम में लिखते थे; विकल्प (3), के. टी. तेलंग, बम्बई के न्यायाधीश और संस्कृत विद्वान थे; विकल्प (4), आर. वेंकट रत्नम नायडू, मद्रास के सुधारक थे जिन्होंने कोकनाडा और मसूलीपट्टनम में काम किया।