निम्नलिखित में से किसने कहा था, “एक संविधान एक मशीन की तरह बेजान चीज़ है, इसमें वे लोग जीवन फूंकते हैं जो इसका नियंत्रण करते हैं, भारत में बस कुछ ईमानदार लोगों की आवश्यकता है जिनके लिए राष्ट्रहित ही सर्वोपरि हैं”?
- (1)डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
- (2)जवाहर लाल नेहरू
- (3)डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
- (4)महात्मा गांधी
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), डॉ. राजेन्द्र प्रसाद.
ये शब्द संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के 26 नवंबर 1949 के समापन भाषण से हैं, जिस दिन सभा ने संविधान पारित किया।
संसद की डिजिटल लाइब्रेरी (ई-पार्लिब) में उस दिन की संविधान सभा की बहसें उनका यह कथन अंग्रेज़ी में दर्ज करती हैं।
उसका हिन्दी आशय है: आख़िरकार, एक संविधान मशीन की तरह एक बेजान चीज़ है; उसमें जीवन उन लोगों से आता है जो उसका नियंत्रण करते हैं और उसे चलाते हैं, और भारत को आज ईमानदार लोगों के ऐसे समूह से अधिक किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं है जिनके सामने देश का हित हो।
प्रश्न का हिन्दी पाठ इसी अंग्रेज़ी कथन का अनुवाद है, शब्दशः प्रतिलिपि नहीं। मूल में आख़िरकार और उसे चलाते हैं के आशय वाले अंश भी हैं, जो हिन्दी पाठ में नहीं हैं; विचार वही है।
इस अंश का आशय: संविधान में जो भी प्रावधान हों, देश का कल्याण उसे चलाने वाले लोगों पर निर्भर है। अच्छे पाठ को चलाने के लिए ईमानदार लोग चाहिए।
याद रखने का विचार: संविधान मशीन की तरह बेजान चीज़ है: यह उपमा राजेन्द्र प्रसाद की है, 26 नवंबर 1949।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)जवाहर लाल नेहरू — नेहरू सभा के प्रमुख सदस्य थे: ग्रैनविल ऑस्टिन दर्ज करते हैं कि जनवरी 1947 में उनकी अध्यक्षता में संघ शक्ति समिति बनाई गई।
प्रश्न में उद्धृत अंश उनका नहीं है। यह सभा के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद के 26 नवंबर 1949 के समापन भाषण से है।
- (3)डॉ. बी. आर. अम्बेडकर — अम्बेडकर ने एक दिन पहले, 25 नवंबर 1949 को, अपने भाषण में मिलती-जुलती बात कही थी। उसका हिन्दी आशय है: संविधान कितना भी अच्छा हो, वह बुरा ही सिद्ध होगा यदि उसे चलाने के लिए बुलाए गए लोग बुरे निकलें।
लेकिन प्रश्न की मशीन वाली उपमा राजेन्द्र प्रसाद की है, उनके 26 नवंबर 1949 के भाषण से। दोनों ने संविधान की सफलता को उसे चलाने वाले लोगों से जोड़ा।
- (4)महात्मा गांधी — महात्मा गांधी का निधन 30 जनवरी 1948 को हुआ, संविधान सभा की नवंबर 1949 की समापन बहस से लगभग दो वर्ष पहले, जिसमें यह अंश कहा गया।
ये शब्द सभा के अध्यक्ष के रूप में राजेन्द्र प्रसाद के 26 नवंबर 1949 के भाषण से हैं।
अवधारणा
यह उद्धरण इस तर्क का हिस्सा है कि संविधान काम कैसे करते हैं। प्रसाद ने कहा कि संविधान में कुछ हो या न हो, देश का कल्याण इस पर निर्भर करेगा कि उसका प्रशासन कैसे होता है, और वह प्रशासन करने वाले लोगों पर निर्भर है।
उसी भाषण में उन्होंने कहा (हिन्दी आशय) कि चरित्रवान और सत्यनिष्ठ योग्य लोग दोषपूर्ण संविधान का भी सर्वोत्तम उपयोग कर सकेंगे, और यदि ऐसे लोग न हों तो संविधान देश की सहायता नहीं कर सकता।
उन्होंने दो खेद भी बताए: विधानमंडलों के सदस्यों के लिए कोई अर्हता निर्धारित नहीं की गई, और स्वतंत्र भारत का पहला संविधान किसी भारतीय भाषा में तैयार नहीं किया गया।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन प्रणाली के अंतर्गत "संविधान सभा, भारतीय संविधान की विशेषताएं, संवैधानिक संशोधन।" सूचीबद्ध है।
इस भाषण के साथ संविधान के पाठ पर सभा का काम समाप्त हुआ। प्रसाद ने बताया कि प्रारूप बढ़कर 395 अनुच्छेदों और 8 अनुसूचियों का हो गया था, जबकि बी. एन. राव के मूल प्रारूप में 243 अनुच्छेद और 13 अनुसूचियाँ थीं।
फिर उन्होंने अम्बेडकर का यह प्रस्ताव मतदान के लिए रखा कि सभा द्वारा निर्धारित रूप में संविधान पारित किया जाए; प्रस्ताव स्वीकृत हुआ, और उन्होंने संविधान को अधिप्रमाणित किया।
अम्बेडकर के पिछले दिन के भाषण ने भी यही समानांतर बात कही थी कि संविधान का काम करना उसे चलाने वाले लोगों और दलों पर निर्भर है।
मुख्य तथ्य
- संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में राजेन्द्र प्रसाद ने 26 नवंबर 1949 को कहा (हिन्दी आशय) कि संविधान मशीन की तरह एक बेजान चीज़ है।
- 26 नवंबर 1949 को सभा ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया कि सभा द्वारा निर्धारित रूप में संविधान पारित किया जाए।
- प्रसाद: पारित संविधान में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं, जबकि बी. एन. राव के मूल प्रारूप में 243 अनुच्छेद और 13 अनुसूचियाँ।
- बी. आर. अम्बेडकर, 25 नवंबर 1949: अच्छा संविधान भी बुरा सिद्ध होगा यदि उसे चलाने के लिए बुलाए गए लोग बुरे निकलें (हिन्दी आशय)।
- प्रसाद के दो खेद: विधायकों के लिए कोई अर्हता नहीं, और संविधान किसी भारतीय भाषा में तैयार नहीं हुआ।
स्रोत: संविधान सभा की बहसें, 25 और 26 नवंबर 1949 (संसद की डिजिटल लाइब्रेरी, ई-पार्लिब); कथनों का हिन्दी आशय।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- संविधान को चलाने के बारे में हर पंक्ति अम्बेडकर को दे देना: उनके 25 नवंबर के भाषण में मिलती-जुलती बात थी, पर मशीन वाली उपमा प्रसाद की है।
- शब्द अलग होने के कारण प्रश्न के कथन को खारिज कर देना: बहसें अंग्रेज़ी में हैं, और प्रश्न का हिन्दी पाठ उनका अनुवाद है, जिसमें मूल के आख़िरकार और उसे चलाते हैं के आशय वाले अंश नहीं हैं।
- गांधीजी को समापन बहस में रख देना: उनका निधन 30 जनवरी 1948 को, संविधान पारित होने से पहले, हो गया था।
कोई प्रश्न संविधान सभा की बहसों की कोई पंक्ति उद्धृत कर पूछ सकता है कि वह किसने कही।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कोई भाषण किस तिथि को दिया गया, अंगीकरण के समय कितने अनुच्छेद और अनुसूचियाँ थीं, या 26 नवंबर 1949 को सभा ने कौन-सा प्रस्ताव पारित किया।
संबंधित PYQ
भारत की संविधान सभा के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए : (i) संविधान सभा का अंतिम अधिवेशन 24 जनवरी, 1950 को हुआ । (ii) इस अंतिम अधिवेशन में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के राष्ट्रपति पद पर विधिवत निर्वाचित घोषित किए गए ।
- (1) न तो (i) न ही (ii) सही है ।
- (2) (i) और (ii) दोनों सही हैं ।
- (3) केवल (ii) सही है ।
- (4) केवल (i) सही है ।
उत्तर(2)
सभा के समापन पर वही व्यक्ति: वह प्रश्न पूछता है कि क्या संविधान सभा का अंतिम अधिवेशन 24 जनवरी, 1950 को हुआ और क्या उसमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के राष्ट्रपति पद पर विधिवत निर्वाचित घोषित किए गए (RPSC की कुंजी: विकल्प (2), (i) और (ii) दोनों सही हैं)। यह प्रश्न सभा के संविधान पारित करने के दिन अध्यक्ष के रूप में उनके भाषण को उद्धृत करता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
26 नवंबर 1949 के अपने भाषण में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि पारित संविधान में थे
- (a)395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ
- (b)395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ
- (c)243 अनुच्छेद और 13 अनुसूचियाँ
- (d)315 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ
उत्तर(1) — प्रसाद ने कहा कि पारित होने तक प्रारूप में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ हो गई थीं। विकल्प (3), 243 अनुच्छेद और 13 अनुसूचियाँ, बी. एन. राव का मूल प्रारूप था। विकल्प (2) और (4) वे आँकड़े नहीं हैं जो उन्होंने दिए। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में किसने कहा था कि संविधान कितना भी अच्छा हो, यदि उसे चलाने के लिए बुलाए गए लोग बुरे निकलें तो वह बुरा ही सिद्ध होगा?
- (a)डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
- (b)डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
- (c)जवाहरलाल नेहरू
- (d)सरदार वल्लभभाई पटेल
उत्तर(2) — अम्बेडकर ने यह बात 25 नवंबर 1949 के अपने भाषण में कही। विकल्प (1), प्रसाद, ने 26 नवंबर को संविधान के मशीन जैसा होने की बात कही। विकल्प (3) और (4) ने यह भाषण नहीं दिया।