सूचना के अधिकार अधिनियम के उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित में से कौनसा सही नहीं है?
- (1)सरकार के कार्यकरण में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को बढ़ाना
- (2)हमारे लोकतंत्र को ऐसा बनाना ताकि वह वास्तव में लोगों के लिए काम करें
- (3)समाज की महिलाओं एवं कमज़ोर तबकों (वर्गों) को सशक्त करने के लिए काम करना
- (4)नागरिकों को सशक्त करना
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), समाज की महिलाओं एवं कमज़ोर तबकों (वर्गों) को सशक्त करने के लिए काम करना.
प्रश्न पूछता है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के उद्देश्यों के बारे में कौन-सा कथन सही नहीं है। भारत सरकार का RTI पोर्टल, rti.gov.in, 21 अक्टूबर 2021 के संग्रहीत रूप में, अधिनियम का उद्देश्य अंग्रेज़ी में एक वाक्य में बताता है।
उसका हिन्दी आशय है: सूचना के अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त करना, सरकार के कार्यकरण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और हमारे लोकतंत्र को वास्तविक अर्थों में लोगों के लिए कार्य करने वाला बनाना है।
विकल्प (1), (2) और (4) तीनों इस वाक्य में हैं: पारदर्शिता और उत्तरदायित्व, लोकतंत्र का वास्तव में लोगों के लिए काम करना, और नागरिकों को सशक्त करना।
विकल्प (3) इसमें नहीं है। अधिनियम यह अधिकार सभी नागरिकों को समान रूप से देता है; धारा 3 के अनुसार सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार होगा। यह किसी समूह के रूप में महिलाओं एवं कमज़ोर तबकों के लिए नहीं गढ़ा गया है।
याद रखने का विचार: RTI नागरिकों को नागरिक के रूप में सशक्त करता है — पारदर्शिता, जवाबदेही, कम भ्रष्टाचार, काम करता लोकतंत्र।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)सरकार के कार्यकरण में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व को बढ़ाना — यह घोषित उद्देश्य है। अधिनियम का पूरा नाम (लंबा शीर्षक) कहता है कि वह प्रत्येक लोक प्राधिकारी के कार्यकरण में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाने के लिए सूचना के अधिकार की व्यावहारिक व्यवस्था करता है (हिन्दी आशय)।
RTI पोर्टल का अधिनियम के मूल उद्देश्य वाला कथन भी सरकार के कार्यकरण में पारदर्शिता और जवाबदेही दोहराता है।
- (2)हमारे लोकतंत्र को ऐसा बनाना ताकि वह वास्तव में लोगों के लिए काम करें — यह भी घोषित उद्देश्य है। RTI पोर्टल के अनुसार मूल उद्देश्य में हमारे लोकतंत्र को वास्तविक अर्थों में लोगों के लिए कार्य करने वाला बनाना शामिल है; विकल्प यही बात कहता है।
अधिनियम की उद्देशिका इसका कारण देती है: लोकतंत्र के लिए सूचित नागरिक और सूचना की पारदर्शिता आवश्यक है, जो उसके कार्य करने के लिए और सरकारों को शासितों के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए अनिवार्य है।
- (4)नागरिकों को सशक्त करना — RTI पोर्टल यही पहला उद्देश्य बताता है: अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त करना है।
अधिनियम यह धारा 3 से करता है, जिसके अंतर्गत अधिनियम के उपबंधों के अधीन सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार होगा, और लोक प्राधिकारियों के उत्तर देने की समय-सीमाओं से।
अवधारणा
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्या 22) लोक प्राधिकारियों के पास उपलब्ध सूचना नागरिकों को मिलने की व्यावहारिक व्यवस्था बनाता है।
धारा 6(2) के अनुसार आवेदक से सूचना माँगने का कोई कारण बताने की अपेक्षा नहीं की जाएगी। धारा 7(1) के अनुसार लोक सूचना अधिकारी को तीस दिन के भीतर सूचना देनी होगी या अनुरोध अस्वीकार करना होगा, और जहाँ सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी हो, वहाँ अड़तालीस घंटे के भीतर।
इनकार धारा 8 और 9 की छूटों पर ही आधारित हो सकता है। अधिनियम शिकायतें और अपीलें सुनने के लिए केन्द्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों का गठन भी करता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत "लोक नीति, विधिक अधिकार एवं नागरिक अधिकार–पत्र।" सूचीबद्ध है, और उसकी संस्थाओं में "राज्य सूचना आयोग" भी।
अधिनियम की उद्देशिका उसका प्रयोजन समझाती है (हिन्दी आशय): लोकतंत्र के लिए सूचित नागरिक और सूचना की पारदर्शिता आवश्यक है, जो उसके कार्य करने के लिए, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए और सरकारों तथा उनके साधनों को शासितों के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए अनिवार्य है।
उद्देशिका एक टकराव भी स्वीकार करती है। सूचना का प्रकटन अन्य लोकहितों से टकरा सकता है, जैसे सरकार का कुशल संचालन, सीमित राजकोषीय संसाधन और संवेदनशील सूचना की गोपनीयता, और अधिनियम लोकतांत्रिक आदर्श की सर्वोपरिता बनाए रखते हुए इनमें सामंजस्य चाहता है।
मुख्य तथ्य
- RTI पोर्टल (rti.gov.in, 21 अक्टूबर 2021 का संग्रहीत रूप): अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त करना, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और लोकतंत्र को लोगों के लिए कार्य करने वाला बनाना है।
- धारा 3: अधिनियम के उपबंधों के अधीन सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार होगा।
- धारा 6(2): आवेदक को सूचना माँगने का कोई कारण नहीं बताना होगा।
- धारा 7(1): सूचना तीस दिन के भीतर; व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी हो तो अड़तालीस घंटे के भीतर।
- लंबा शीर्षक: अधिनियम प्रत्येक लोक प्राधिकारी के कार्यकरण में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाता है और केन्द्रीय तथा राज्य सूचना आयोगों का गठन करता है।
स्रोत: rti.gov.in (21 अक्टूबर 2021 का वेबैक संग्रह); सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, लंबा शीर्षक और धारा 3।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कल्याणकारी लगने वाले लक्ष्य को RTI का उद्देश्य मान लेना: अधिनियम यह अधिकार सभी नागरिकों को देता है, महिलाओं या कमज़ोर वर्गों जैसे किसी नामित समूह को नहीं।
- भ्रष्टाचार पर अंकुश को RTI से बाहर मानना: उद्देशिका और RTI पोर्टल दोनों इसका नाम लेते हैं।
- समय-सीमाएँ भूल जाना: सामान्यतः तीस दिन, और सूचना जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी हो तो अड़तालीस घंटे।
कोई प्रश्न कई उद्देश्य देकर पूछ सकता है कि कौन-सा सूचना का अधिकार अधिनियम का नहीं है, या उसकी उद्देशिका में कौन-से शब्द आते हैं।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि उत्तर देने की समय-सीमा क्या है, या कौन-सी धारा छूटों या सूचना आयोगों से संबंधित है।
संबंधित PYQ
सूचना का अधिकार अधिनियम की निम्न में से कौन सी धारा केन्द्रीय सूचना आयोग के कार्य और शक्तियों से सम्बन्धित नहीं है ?
- (1) 25
- (2) 19
- (3) 18
- (4) 12
उत्तर(4)
वही अधिनियम, उसकी धाराएँ: वह प्रश्न पूछता है कि कौन सी धारा केन्द्रीय सूचना आयोग के कार्य और शक्तियों से सम्बन्धित नहीं है (RPSC की कुंजी: विकल्प (4), 12)। यह प्रश्न अधिनियम के उद्देश्यों को जाँचता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 7(1) के अंतर्गत, जहाँ माँगी गई सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित हो, वह कितने समय के भीतर दी जाएगी?
- (a)24 घंटे
- (b)48 घंटे
- (c)7 दिन
- (d)30 दिन
उत्तर(2) — धारा 7(1) का परंतुक अनुरोध प्राप्त होने के अड़तालीस घंटे के भीतर की सीमा रखता है। विकल्प (4), तीस दिन, सामान्य सीमा है। विकल्प (1) और (3) धारा 7(1) की सीमाएँ नहीं हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(2) के अंतर्गत सूचना माँगने वाले व्यक्ति को
- (a)अनुरोध का कारण बताना होगा
- (b)कोई कारण बताने की, या संपर्क के लिए आवश्यक विवरण के सिवा कोई व्यक्तिगत विवरण देने की, आवश्यकता नहीं है
- (c)यह दिखाना होगा कि सूचना उससे व्यक्तिगत रूप से संबंधित है
- (d)पहले सूचना आयोग में आवेदन करना होगा
उत्तर(2) — धारा 6(2) के अनुसार आवेदक से कोई कारण, या उससे संपर्क करने के लिए आवश्यक विवरण के सिवा कोई व्यक्तिगत विवरण, देने की अपेक्षा नहीं की जाएगी। विकल्प (1), (3) और (4) ऐसी शर्तें जोड़ते हैं जो यह धारा नहीं लगाती।