राजस्थान में लोकायुक्त के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं? (A) वह राज्यपाल द्वारा नियुक्त एवं विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होता है। (B) उसका क्षेत्राधिकार मंत्रियों, राज्य विधानसभा के सदस्यों एवं उच्च लोक सेवकों तक फैला है। (C) वह भ्रष्टाचार एवं कु–प्रशासन के मामलों पर विचार करता है। (D) उसका कार्य आरोपों की जाँच करना है, न कि शिकायतों की। कूट :
- (1)(A) एवं (C)
- (2)(A) एवं (D)
- (3)(A), (B) एवं (C)
- (4)(A), (B), (C) एवं (D)
उत्तर
क्यों
RPSC ने अपनी अंतिम उत्तर कुंजी में यह प्रश्न विलोपित कर दिया, इसलिए कोई विकल्प सही नहीं दिखाया गया है।
चारों कथन राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 (1973 का अधिनियम संख्या 9) से संबंधित हैं। हर विषय पर उसकी धाराएँ क्या कहती हैं, यह नीचे दिया गया है। यहाँ उसका वह अंग्रेज़ी अनुवाद प्रयुक्त है जिसे PRS ने 2019 के संशोधन के साथ प्रकाशित किया; नीचे धाराओं के शब्द उसी का हिन्दी रूपांतर हैं।
कथन (A), नियुक्ति और प्रतिवेदन। धारा 3(1) के अनुसार राज्यपाल अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा एक व्यक्ति को लोकायुक्त के रूप में नियुक्त करेगा। धारा 12 के अंतर्गत विशेष और वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल को जाते हैं, जो उन्हें सदन के समक्ष रखवाते हैं।
कथन (B), क्षेत्राधिकार। धारा 7(1) किसी मंत्री या सचिव द्वारा, या उनके अनुमोदन से, की गई कार्रवाई, नामित पंचायती राज और नगरपालिका पदाधिकारियों, तथा लोक सेवकों के अधिसूचित वर्गों को शामिल करती है। धारा 2(f) 'मंत्री' से मुख्यमंत्री को बाहर रखती है।
कथन (C), विषय-वस्तु। धारा 2(b) आरोप को इस प्रकार परिभाषित करती है: लाभ के लिए या अनुचित हानि या कष्ट पहुँचाने के लिए पद का दुरुपयोग, व्यक्तिगत हित या अनुचित अथवा भ्रष्ट उद्देश्यों से की गई कार्रवाई, या भ्रष्टाचार अथवा सत्यनिष्ठा का अभाव।
कथन (D), आरोप। धारा 7 जाँच को आरोप से युक्त शिकायत (अंग्रेज़ी अनुवाद में "a complaint involving an allegation") से जोड़ती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)(A) एवं (C) — विकल्प (1) कथन (A) और (C) को स्वीकार करता है। RPSC की अंतिम कुंजी कोई विकल्प नहीं दिखाती।
(A) पर, धारा 3(1) के अनुसार राज्यपाल अधिपत्र द्वारा लोकायुक्त की नियुक्ति करते हैं, और धारा 12 प्रतिवेदनों को राज्यपाल के माध्यम से सदन तक पहुँचाती है। (C) पर, धारा 2(b) आरोप को पद के दुरुपयोग, अनुचित या भ्रष्ट उद्देश्यों, और भ्रष्टाचार अथवा सत्यनिष्ठा के अभाव के रूप में परिभाषित करती है।
- (2)(A) एवं (D) — विकल्प (2) कथन (A) और (D) को स्वीकार करता है। RPSC की अंतिम कुंजी कोई विकल्प नहीं दिखाती।
(D) पर, धारा 7 का अंग्रेज़ी अनुवाद लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त दोनों के लिए आरोप से युक्त शिकायत के शब्दों का प्रयोग करता है (हिन्दी रूपांतर)। (A) पर, राज्यपाल धारा 3(1) के अंतर्गत उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष से परामर्श के बाद लोकायुक्त की नियुक्ति करते हैं।
- (3)(A), (B) एवं (C) — विकल्प (3) क्षेत्राधिकार वाला कथन (B) जोड़ता है। RPSC की अंतिम कुंजी कोई विकल्प नहीं दिखाती।
धारा 7(1) किसी मंत्री या सचिव द्वारा की गई कार्रवाई, नामित पंचायती राज और नगरपालिका पदाधिकारियों, तथा लोक सेवकों के अधिसूचित वर्गों का नाम लेती है। धारा 2(f) मंत्री को मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मंत्रिपरिषद् के सदस्य के रूप में परिभाषित करती है, जिसमें राज्य मंत्री और उप मंत्री शामिल हैं।
- (4)(A), (B), (C) एवं (D) — विकल्प (4) चारों कथनों को स्वीकार करता है। RPSC की अंतिम कुंजी कोई विकल्प नहीं दिखाती।
चारों की जाँच के लिए धारा 3 (नियुक्ति), धारा 7 (क्षेत्राधिकार), धारा 2(b) (आरोप) और धारा 12 (प्रतिवेदन) को साथ पढ़ना होता है। अधिनियम के 2019 के संशोधन ने, जो 6 मार्च 2019 से प्रवृत्त माना गया, धारा 5(1) में कार्यकाल के लिए 'आठ वर्ष' के स्थान पर 'पाँच वर्ष' रखा।
अवधारणा
लोकायुक्त राज्य स्तर का एक प्राधिकारी है जो लोक पदधारियों के विरुद्ध शिकायतों की जाँच करता है। राजस्थान का कानून राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 है, जिसे 26 मार्च 1973 को राष्ट्रपति की अनुमति मिली और जो 3 फरवरी 1973 से प्रवृत्त माना गया है।
अधिनियम के दो स्तर हैं। लोकायुक्त मंत्रियों, सचिवों और नामित पंचायती राज तथा नगरपालिका पदाधिकारियों की कार्रवाई की जाँच करता है; उप-लोकायुक्त अन्य लोक सेवकों की जाँच करते हैं और लोकायुक्त के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करते हैं।
यदि कोई आरोप सिद्ध हो, तो लोकायुक्त अपने निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी को भेजता है, जिसे तीन माह के भीतर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई बतानी होती है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत संस्थाएं शीर्षक में "राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग।" सूचीबद्ध है।
धारा 3 नियुक्ति में परामर्श को अनिवार्य बनाती है। राज्यपाल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष से, या ऐसा नेता न होने पर विपक्ष द्वारा चुने गए सदस्य से, परामर्श करते हैं; उप-लोकायुक्तों की नियुक्ति लोकायुक्त से परामर्श के बाद होती है।
धारा 2(i) में 'लोक सेवक' की परिभाषा के चार वर्णन हैं: मंत्री; अधिकारी; नामित पंचायती राज और नगरपालिका पदाधिकारी; और अधिसूचित स्थानीय प्राधिकरणों, राज्य निगमों, सरकारी कंपनियों तथा अधिसूचित सोसाइटियों की सेवा या वेतन में व्यक्ति।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 (1973 का अधिनियम संख्या 9): 26 मार्च 1973 को राष्ट्रपति की अनुमति; 3 फरवरी 1973 से प्रवृत्त माना गया।
- धारा 3(1): राज्यपाल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष से परामर्श के बाद अधिपत्र द्वारा लोकायुक्त की नियुक्ति करते हैं।
- धारा 2(f): 'मंत्री' का अर्थ मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मंत्रिपरिषद् का सदस्य है, जिसमें राज्य मंत्री और उप मंत्री शामिल हैं।
- धारा 12(4)-(5): लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त राज्यपाल को वार्षिक प्रतिवेदन देते हैं, जो उसे व्याख्यात्मक ज्ञापन के साथ सदन के समक्ष रखवाते हैं।
- राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने, जो 6 मार्च 2019 से प्रवृत्त माना गया, धारा 5(1) में 'आठ वर्ष' के स्थान पर 'पाँच वर्ष' रखा।
स्रोत: राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973, अंग्रेज़ी अनुवाद (2019 के संशोधन सहित PRS प्रति)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अधिनियम के अंतर्गत मुख्यमंत्री को 'मंत्री' मान लेना: धारा 2(f) मंत्री को मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मंत्रिपरिषद् का सदस्य बताती है।
- उप-लोकायुक्तों पर लोकायुक्त वाला परामर्श-क्रम लागू कर देना: धारा 3(1) का परंतुक (a) लोकायुक्त के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष का नाम लेता है, जबकि परंतुक (b) के अनुसार उप-लोकायुक्तों की नियुक्ति लोकायुक्त से परामर्श के बाद होती है।
- दोनों स्तरों को मिला देना: धारा 7 मंत्रियों और सचिवों को लोकायुक्त के और अन्य लोक सेवकों को उप-लोकायुक्तों के क्षेत्र में रखती है, हालाँकि धारा 7(3) लोकायुक्त को लिखित में दर्ज कारणों से ऐसा मामला अपने हाथ में लेने देती है।
कोई प्रश्न लोकायुक्त की नियुक्ति, क्षेत्राधिकार और विषय-वस्तु पर कथन देकर पूछ सकता है कि राजस्थान के अधिनियम के अंतर्गत कौन से सही हैं।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि अधिनियम किस पदधारी पर लागू होता है, या लोकायुक्त की नियुक्ति से पहले राज्यपाल किससे परामर्श करते हैं।
संबंधित PYQ
राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 7 के तहत, लोकायुक्त को कुछ मामलों में मंत्रियों और लोक सेवकों के खिलाफ आरोपों की जाँच करने का अधिकार है । निम्नलिखित में से कौन सा विषय उन जाँचों का हिस्सा नहीं है ?
- (1) लोक सेवकों द्वारा पहुँचाई गई अकारण हानि या पीड़ा ।
- (2) अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए अवैध लाभ प्राप्त करने के लिए एक लोक सेवक के रूप में अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करना ।
- (3) महिलाओं का यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और बच्चों के खिलाफ हिंसा ।
- (4) लोक सेवक की हैसियत से भ्रष्टाचार का दोषी होने या पारदर्शिता की कमी से संबंधित हो सकता है ।
उत्तर(3)
वही अधिनियम, धारा 7: वह प्रश्न पूछता है कि राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 7 के तहत कौन सा विषय लोकायुक्त की जाँचों का हिस्सा नहीं है (RPSC की कुंजी: विकल्प (3), महिलाओं का यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और बच्चों के खिलाफ हिंसा)। यह प्रश्न नियुक्ति, क्षेत्राधिकार और विषय-वस्तु पर कथन देता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 3(1) के अंतर्गत राज्यपाल लोकायुक्त की नियुक्ति किससे परामर्श के बाद करते हैं?
- (a)उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
- (b)मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष
- (c)भारत के मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री
- (d)राज्य निर्वाचन आयुक्त और मुख्य सचिव
उत्तर(1) — धारा 3(1) का परंतुक (a) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष का, या नेता प्रतिपक्ष न होने पर विपक्ष द्वारा चुने गए सदस्य का, नाम लेता है। विकल्प (2), (3) और (4) ऐसे पदधारियों के नाम देते हैं जिन्हें परंतुक परामर्शदाता के रूप में सूचीबद्ध नहीं करता। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 2(f) के अंतर्गत 'मंत्री' शब्द में कौन शामिल नहीं है?
- (a)राज्य मंत्री
- (b)उप मंत्री
- (c)मुख्यमंत्री
- (d)कैबिनेट मंत्री
उत्तर(3) — धारा 2(f) मंत्री को मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मंत्रिपरिषद् के सदस्य, अर्थात् मंत्री, राज्य मंत्री और उप मंत्री, के रूप में परिभाषित करती है। विकल्प (1), (2) और (4) सभी इस परिभाषा के भीतर आते हैं।