राजस्थान लोक सेवा आयोग अपने कार्यों का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है –
- (1)विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष
- (2)राष्ट्रपति के समक्ष
- (3)राज्यपाल के समक्ष
- (4)मुख्य सचिव के समक्ष
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), राज्यपाल के समक्ष.
संविधान का अनुच्छेद 323(2) राज्य आयोग का यह कर्तव्य बनाता है कि वह राज्य के राज्यपाल को आयोग द्वारा किए गए कार्य के बारे में प्रतिवर्ष प्रतिवेदन दे।
राजस्थान लोक सेवा आयोग राजस्थान का राज्य आयोग है, इसलिए उसका वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल के समक्ष जाता है।
वही खंड आगे बताता है कि राज्यपाल उसके साथ क्या करेगा। प्रतिवेदन प्राप्त होने पर राज्यपाल उसकी प्रति राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाता है, उन मामलों में अस्वीकृति के कारण स्पष्ट करने वाले ज्ञापन के साथ जिनमें आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई थी।
इस प्रकार प्रतिवेदन विधानसभा तक पहुँचता है, पर राज्यपाल के माध्यम से, आयोग से सीधे नहीं।
याद रखने का विचार: संघ आयोग राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देता है; राज्य आयोग राज्यपाल को, जो उसे विधान-मंडल के समक्ष रखवाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष — आयोग अपना प्रतिवेदन विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्तुत नहीं करता। अनुच्छेद 323(2) के अंतर्गत प्रतिवेदन राज्यपाल को जाता है, और राज्यपाल ही उसकी प्रति राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाता है, स्वीकार न की गई सलाह पर ज्ञापन के साथ।
विधानसभा प्रतिवेदन देखती है, पर केवल राज्यपाल द्वारा वहाँ भेजे जाने के बाद।
- (2)राष्ट्रपति के समक्ष — राष्ट्रपति संघ आयोग का प्रतिवेदन प्राप्त करता है, राज्य आयोग का नहीं। अनुच्छेद 323(1) संघ आयोग का यह कर्तव्य बनाता है कि वह राष्ट्रपति को अपने कार्य के बारे में प्रतिवर्ष प्रतिवेदन दे।
राष्ट्रपति फिर उसे ज्ञापन सहित संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है। राजस्थान लोक सेवा आयोग जैसे राज्य आयोग के लिए खंड (2) राज्यपाल का नाम देता है।
- (4)मुख्य सचिव के समक्ष — अनुच्छेद 323 प्रतिवेदन में मुख्य सचिव को कोई भूमिका नहीं देता। वह केवल राज्यपाल का नाम देता है, जो राज्य आयोग का प्रतिवेदन प्राप्त करता है, और राज्य के विधान-मंडल का, जिसके समक्ष राज्यपाल उसे रखवाता है।
आयोग की सलाह स्वीकार न करने के कारण प्रतिवेदन के साथ ही जाते हैं, उस ज्ञापन में जिसे राज्यपाल उसके साथ रखवाता है।
अवधारणा
अनुच्छेद 315(1) "संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग" का उपबंध करता है। संविधान हर आयोग को उसके अपने कार्यपालिका प्रमुख से जोड़ता है।
राज्य आयोग के लिए अनुच्छेद 316(1) के अंतर्गत अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है, और अनुच्छेद 323(2) के अंतर्गत आयोग हर वर्ष राज्यपाल को प्रतिवेदन देता है।
प्रतिवेदन राज्यपाल पर नहीं रुकता। राज्यपाल को उसे विधान-मंडल के समक्ष रखवाना होता है, उन मामलों में कारण स्पष्ट करने वाले ज्ञापन के साथ जिनमें आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई थी।
संयुक्त आयोग, जिसका उपबंध संसद् अनुच्छेद 315(2) के अंतर्गत विधि द्वारा तब कर सकती है जब दो या अधिक राज्य करार करें और उनके विधान-मंडल संकल्प पारित करें, जिन राज्यों की आवश्यकताएँ पूरी करता है उनमें से प्रत्येक के राज्यपाल को उस राज्य के लिए किए गए कार्य का प्रतिवेदन देता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत, संस्थाएं शीर्षक में, "राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग।" सूचीबद्ध है।
अन्य अनुच्छेद आयोग की शर्तें तय करते हैं। अनुच्छेद 322 उसके व्यय, जिनमें सदस्यों और कर्मचारिवृंद के वेतन और पेंशन शामिल हैं, राज्य की संचित निधि पर भारित करता है।
अनुच्छेद 316(2) सदस्य की पदावधि छह वर्ष या बासठ वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, तय करता है। अनुच्छेद 317 हटाए जाने की अनुमति केवल राष्ट्रपति के आदेश से देता है।
वार्षिक प्रतिवेदन और उसके ज्ञापन के माध्यम से आयोग की सलाह स्वीकार न करने के कारण विधान-मंडल के समक्ष आते हैं।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 323(2): राज्य लोक सेवा आयोग अपने कार्य का वार्षिक प्रतिवेदन राज्य के राज्यपाल को देता है।
- राज्यपाल उसकी प्रति, आयोग की सलाह की किसी अस्वीकृति के कारण स्पष्ट करने वाले ज्ञापन सहित, राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाता है।
- अनुच्छेद 323(1): संघ लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को देता है, जो उसे संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है।
- संयुक्त आयोग जिन राज्यों की आवश्यकताएँ पूरी करता है उनमें से प्रत्येक के राज्यपाल को उस राज्य के लिए किए गए कार्य का प्रतिवेदन देता है।
- अनुच्छेद 322: राज्य आयोग के व्यय राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं।
हर प्रतिवेदन के साथ स्वीकार न की गई किसी सलाह पर ज्ञापन जाता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रतिवेदन अंत में विधानसभा पहुँचता है, इसलिए विधानसभा अध्यक्ष चुन लेना। आयोग उसे राज्यपाल को देता है, जो उसे विधान-मंडल के समक्ष रखवाता है।
- संघ और राज्य के मार्ग मिला देना। संघ लोक सेवा आयोग राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देता है; राज्य आयोग राज्यपाल को।
- नियुक्त करने और हटाने वाले प्राधिकारी को एक ही मान लेना। राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है, पर अनुच्छेद 317 के अंतर्गत हटाया जाना केवल राष्ट्रपति के आदेश से होता है।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि राज्य लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन किसके समक्ष प्रस्तुत करता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि वह प्रतिवेदन विधान-मंडल के समक्ष कौन रखवाता है, या आयोग की सलाह स्वीकार न होने पर उसके साथ क्या जाना चाहिए।
संबंधित PYQ
राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए : (i) आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य राजस्थान के राज्यपाल द्वारा नियुक्त होते हैं । (ii) आयोग के अध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य केवल राष्ट्रपति की आज्ञा से अपने पद से हटाए जा सकते हैं ।
- (1) न तो (i) न ही (ii) सही है ।
- (2) (i) व (ii) दोनों सही हैं ।
- (3) केवल (ii) सही है ।
- (4) केवल (i) सही है ।
उत्तर(2)
वही आयोग, अन्य उपबंध: वह प्रश्न पूछता है कि क्या आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य राजस्थान के राज्यपाल द्वारा नियुक्त होते हैं और केवल राष्ट्रपति की आज्ञा से अपने पद से हटाए जा सकते हैं (RPSC की कुंजी: विकल्प (2), (i) व (ii) दोनों सही हैं)। यह प्रश्न पूछता है कि राजस्थान लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन किसके समक्ष प्रस्तुत करता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अनुच्छेद 323(2) के अंतर्गत जब राज्यपाल राज्य लोक सेवा आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन विधान-मंडल के समक्ष रखवाता है, तो उसके साथ क्या होना आवश्यक है?
- (a)मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्रमाणपत्र
- (b)आयोग की सलाह की अस्वीकृति के कारण, यदि कोई हों, स्पष्ट करने वाला ज्ञापन
- (c)नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का लेखा-परीक्षा प्रतिवेदन
- (d)विधानसभा अध्यक्ष की टिप्पणियाँ
उत्तर(2) — अनुच्छेद 323(2) उन मामलों के संबंध में, जिनमें आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई थी, अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाला ज्ञापन माँगता है। अनुच्छेद न मुख्यमंत्री का प्रमाणपत्र (1), न नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का प्रतिवेदन (3), न विधानसभा अध्यक्ष की टिप्पणियाँ (4) माँगता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है —
- (a)भारत के राष्ट्रपति को
- (b)जिन राज्यों की वह सेवा करता है उनमें सबसे बड़े राज्य के राज्यपाल को
- (c)जिन राज्यों की वह सेवा करता है उनमें से प्रत्येक के राज्यपाल को
- (d)सीधे संसद् को
उत्तर(3) — अनुच्छेद 323(2) संयुक्त आयोग का यह कर्तव्य बनाता है कि वह जिन राज्यों की आवश्यकताएँ पूरी करता है उनमें से प्रत्येक के राज्यपाल को उस राज्य के लिए किए गए कार्य का प्रतिवर्ष प्रतिवेदन दे। राष्ट्रपति (1) संघ आयोग का प्रतिवेदन प्राप्त करता है; न अकेले सबसे बड़े राज्य का राज्यपाल (2) और न सीधे संसद् (4) का नाम है।