‘राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों’ के अनुसार निम्नांकित में से कौन से विभाग के प्राक्कलन, प्राक्कलन समिति ‘क’ के नियंत्रणाधीन नहीं है?
- (1)सार्वजनिक निर्माण विभाग
- (2)गृह विभाग
- (3)शिक्षा विभाग
- (4)वित्त विभाग
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), गृह विभाग.
राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों का नियम 231 दो प्राक्कलन समितियाँ, ‘क’ और ‘ख’, बनाता है। ये चौथी अनुसूची में उल्लिखित विभिन्न विभागों के प्राक्कलनों की जाँच के लिए हैं।
विधानसभा की वेबसाइट पर जून 2019 में उपलब्ध चौथी अनुसूची (वेबैक मशीन पर सुरक्षित प्रति) प्राक्कलन समिति ‘क’ के अंतर्गत अन्य विभागों के साथ सार्वजनिक निर्माण विभाग, शिक्षा विभाग और वित्त विभाग को सूचीबद्ध करती है।
गृह विभाग उस सूची में नहीं है। वह प्राक्कलन समिति ‘ख’ के अंतर्गत है, राजस्व, कृषि, निर्वाचन तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जैसे विभागों के साथ।
विधानसभा की वेबसाइट पर नियमों का बाद का पाठ (नवंबर 2023 में बनी फ़ाइल) इस बिंदु पर वही बँटवारा रखता है: गृह विभाग, पुलिस विभाग और भ्रष्टाचार निरोधक की प्रविष्टि समिति ‘ख’ के अंतर्गत है।
समिति ‘क’ से बाहर का विभाग विकल्प (2), गृह विभाग, है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)सार्वजनिक निर्माण विभाग — सार्वजनिक निर्माण विभाग समिति ‘क’ में है। जून 2019 की प्रति वाली चौथी अनुसूची में प्राक्कलन समिति ‘क’ की सूची में यह क्रम 2 पर है।
विधानसभा की वेबसाइट का बाद का पाठ भी सार्वजनिक निर्माण विभाग को समिति ‘क’ के अंतर्गत, क्रम 3 पर, रखता है।
- (3)शिक्षा विभाग — शिक्षा समिति ‘क’ में है। जून 2019 की प्रति वाली चौथी अनुसूची में शिक्षा विभाग प्राक्कलन समिति ‘क’ के अंतर्गत क्रम 3 पर है।
बाद का पाठ प्रारंभिक, माध्यमिक, उच्च, संस्कृत और तकनीकी शिक्षा विभागों के नाम अलग-अलग देता है, और ये सभी समिति ‘क’ के अंतर्गत हैं।
- (4)वित्त विभाग — जून 2019 की प्रति वाली चौथी अनुसूची में वित्त समिति ‘क’ में है, जहाँ वित्त विभाग प्राक्कलन समिति ‘क’ के अंतर्गत क्रम 6 पर है।
बाद के पाठ में वित्त विभाग की कोई एकल प्रविष्टि नहीं है; वह वित्त से जुड़े विभागों, जैसे वाणिज्यिक कर, पंजीयन एवं मुद्रांक, आबकारी, कोष एवं लेखा प्रशासन और पेंशन, को समिति ‘क’ के अंतर्गत रखता है।
अवधारणा
प्राक्कलन समिति सरकारी विभागों के प्राक्कलनों की जाँच करती है। राजस्थान में यह कार्य नियम 231 के अंतर्गत दो समितियों में बँटा है, और हर समिति चौथी अनुसूची में उसके लिए सूचीबद्ध विभागों को देखती है।
नियम 231क इनके कार्य तय करता है: यह प्रतिवेदन देना कि क्या मितव्ययिता, संगठन में सुधार, दक्षता या प्रशासनिक सुधार किए जा सकते हैं; दक्षता और मितव्ययिता के लिए वैकल्पिक नीतियाँ सुझाना; और यह जाँचना कि प्राक्कलनों में निहित नीति की सीमा में धन ठीक से लगाया गया है या नहीं।
नियम 232 के अंतर्गत हर समिति में पंद्रह से अधिक सदस्य नहीं होते, जिन्हें सदन हर वर्ष आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुनता है। कोई मंत्री सदस्य नहीं हो सकता, और कार्यकाल एक वर्ष से अधिक नहीं होता, हालाँकि अध्यक्ष इसे छह महीने तक बढ़ा सकता है।
नियम 231 के पहले परंतुक के अंतर्गत अध्यक्ष या सदन दोनों समितियों के बीच विभागों का बँटवारा बदल सकता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत, राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में, "राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद्, विधानसभा, उच्च न्यायालय।" सूचीबद्ध है।
नियम 233 प्राक्कलन समितियों को पूरे वित्तीय वर्ष में प्राक्कलनों की जाँच करने देता है, और जोड़ता है कि किसी समिति के प्रतिवेदन न देने पर भी अनुदान माँगों पर मतदान हो सकता है।
राजकीय उपक्रम अलग रखे गए हैं: नियम 231 प्राक्कलन समितियों को राजकीय उपक्रम समिति को सौंपे गए कार्यों से रोकता है, जिसकी सूची पाँचवीं अनुसूची है।
अनुसूची का शब्दांकन 2019 की प्रति और 2023 में विधानसभा की वेबसाइट के पाठ के बीच बदला है; बाद वाला पाठ विभागों को उनके बाद के नामों से सूचीबद्ध करता है।
मुख्य तथ्य
- नियम 231: दो प्राक्कलन समितियाँ, ‘क’ और ‘ख’, चौथी अनुसूची में सूचीबद्ध विभागों के प्राक्कलनों की जाँच करती हैं।
- चौथी अनुसूची (विधानसभा वेबसाइट, जून 2019 की प्रति): समिति ‘क’ में सार्वजनिक निर्माण, शिक्षा और वित्त विभाग शामिल हैं।
- वही अनुसूची गृह विभाग को प्राक्कलन समिति ‘ख’ के अंतर्गत रखती है।
- नियम 232: हर प्राक्कलन समिति में 15 से अधिक सदस्य नहीं, जो हर वर्ष एकल संक्रमणीय मत से चुने जाते हैं; कोई मंत्री सदस्य नहीं हो सकता।
- नियम 233: किसी प्राक्कलन समिति के प्रतिवेदन न देने पर भी अनुदान माँगों पर मतदान हो सकता है।
केवल गृह विभाग समिति ‘क’ से बाहर है: विकल्प (2)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- किसी विभाग के आकार या महत्व से समिति का अनुमान लगाना। अनुसूची बस सूची देती है: वित्त और शिक्षा ‘क’ के अंतर्गत, गृह तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ‘ख’ के अंतर्गत।
- किसी भी पाठ को निश्चित रूप से अक्टूबर 2021 में लागू पाठ मान लेना। 2019 की प्रति एक ही वित्त विभाग का नाम देती है, 2023 का पाठ वित्त से जुड़े विभागों को अलग करता है, और दोनों गृह विभाग को ‘ख’ के अंतर्गत रखते हैं।
- प्राक्कलन समितियों को राजकीय उपक्रम समिति समझ लेना, जिसे नियम 231 अलग रखता है।
कोई प्रश्न विभागों के नाम देकर पूछ सकता है कि कौन-सा प्राक्कलन समिति ‘क’ या ‘ख’ से बाहर है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न प्राक्कलन समिति के सदस्यों की संख्या, उनके चुने जाने का तरीका, या समितियाँ बनाने वाला नियम भी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
निम्नलिखित में से राजस्थान विधान सभा में अधीनस्थ विधान संबंधी कौन सा कथन सही नहीं है ?
- (1) अधीनस्थ विधान समिति संविधान के प्रावधान या ऐसे आदेश बनाने के लिए अधीनस्थ प्राधिकारी को शक्ति सौंपने वाले कानून के प्रावधानों के अनुसरण में बनाए गए सभी “आदेशों” की जाँच करती है ।
- (2) समिति उन विधेयकों के प्रावधानों की जाँच कर सकती है जो आदेश देने के लिए शक्तियाँ सौंपने की माँग करते हैं ।
- (3) अध्यक्ष विधायी शक्तियों के प्रत्यायोजन के प्रावधान वाले विधेयकों को समिति को संदर्भित करता है ।
- (4) यह राजस्थान विधान सभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 240 द्वारा शासित होता है ।
उत्तर(4)
वही नियम, दूसरी समिति: वह प्रश्न पूछता है कि राजस्थान विधान सभा में अधीनस्थ विधान संबंधी कौन सा कथन सही नहीं है (RPSC की कुंजी: विकल्प (4), यह राजस्थान विधान सभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 240 द्वारा शासित होता है)। यह प्रश्न प्राक्कलन समितियों और चौथी अनुसूची के बारे में है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 232 के अंतर्गत प्रत्येक प्राक्कलन समिति के सदस्य —
- (a)अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाते हैं
- (b)सदन द्वारा हर वर्ष आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुने जाते हैं
- (c)मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल द्वारा नियुक्त किए जाते हैं
- (d)हर पाँच वर्ष में साधारण बहुमत से चुने जाते हैं
उत्तर(2) — नियम 232: पंद्रह से अधिक सदस्य नहीं, जिन्हें सदन हर वर्ष आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुनता है। अध्यक्ष (1) केवल आकस्मिक रिक्तियों में, एक-तिहाई तक, नामनिर्देशन करता है; राज्यपाल (3) का नाम नहीं है; कार्यकाल (4) अधिकतम एक वर्ष है, जिसे अध्यक्ष छह महीने तक बढ़ा सकता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया नियमों की चौथी अनुसूची (जैसी 2019 में विधानसभा की वेबसाइट पर थी) के अनुसार किस विभाग के प्राक्कलन प्राक्कलन समिति ‘ख’ के अंतर्गत आते हैं?
- (a)वित्त विभाग
- (b)वन विभाग
- (c)चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग
- (d)ऊर्जा विभाग
उत्तर(3) — चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग समिति ‘ख’ के अंतर्गत क्रम 11 पर है। वित्त (1), वन (2) और ऊर्जा (4) विभाग सभी समिति ‘क’ के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं।