राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा नगर परिषद् में अधिकतम कितने व्यक्ति नाम निर्दिष्ट किये जा सकते हैं?
- (1)10
- (2)12
- (3)8
- (4)6
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), 8.
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 6(1)(क)(ii) हर नगरपालिका में नाम निर्दिष्ट सदस्यों का प्रावधान करती है। इसे राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2021 (2021 का अधिनियम सं. 4) ने प्रतिस्थापित किया।
प्रतिस्थापित खंड के अनुसार नगरपालिका प्रशासन का विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्ति राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नाम निर्दिष्ट करती है: नगरपालिका मंडल में छह, नगर परिषद् में आठ और नगर निगम में बारह।
संशोधन अधिनियम को 6 अप्रैल 2021 को राज्यपाल की अनुमति मिली, 8 अप्रैल 2021 को राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित हुआ और तुरंत लागू हो गया, इसलिए परीक्षा की तिथि पर यही विधि थी।
नगर परिषद् के लिए संख्या 8 है, विकल्प (3)।
याद रखने का विचार: नाम निर्दिष्ट सदस्य — मंडल 6, परिषद् 8, निगम 12 (अप्रैल 2021 से)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)10 — दस किसी भी प्रकार की नगरपालिका के लिए धारा 6(1)(क)(ii) में दी गई संख्या नहीं है। 2021 का पाठ नगरपालिका मंडल के लिए छह, नगर परिषद् के लिए आठ और नगर निगम के लिए बारह देता है।
नगर परिषद् की अधिकतम संख्या आठ है।
- (2)12 — बारह नगर निगम की संख्या है, नगर परिषद् की नहीं। 2021 में प्रतिस्थापित धारा 6(1)(क)(ii) नगर निगम में बारह नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों की अनुमति देती है, वह निकाय जिसे अधिनियम वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए बनाता है।
लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए बनी नगर परिषद् को आठ मिलते हैं।
- (4)6 — छह नगरपालिका मंडल की संख्या है, नगर परिषद् की नहीं। धारा 6(1)(क)(ii) का 2021 का पाठ नगरपालिका मंडल में छह नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों की अनुमति देता है, जो संक्रमणशील क्षेत्र का निकाय है।
नगर परिषद् की संख्या आठ है।
अवधारणा
संविधान के अनुच्छेद 243द (243R) का खंड (2)(क)(i) राज्य के विधान-मंडल को विधि द्वारा नगरपालिका में "नगरपालिका प्रशासन का विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों" के प्रतिनिधित्व का उपबंध करने देता है, इस परंतुक के साथ कि उन्हें नगरपालिका के अधिवेशनों में मत देने का अधिकार नहीं होगा।
राजस्थान यह शक्ति अपने 2009 के अधिनियम की धारा 6 में प्रयोग करता है। धारा 5 तीन प्रकार की नगरपालिकाएँ बनाती है: संक्रमणशील क्षेत्र के लिए नगरपालिका मंडल, लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद् और वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम।
नाम निर्दिष्ट सदस्य इसी क्रम में हैं: छह, आठ और बारह। राज्य सरकार किसी नाम निर्दिष्ट सदस्य को किसी भी समय वापस ले सकती है, और नाम निर्दिष्ट सदस्य को नगरपालिका की बैठकों में मत देने का अधिकार नहीं है।
2021 के संशोधन ने यह भी जोड़ा कि हर नगरपालिका में नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों में एक निःशक्त व्यक्ति शामिल होगा।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत, प्रशासनिक व्यवस्था में, "जिला प्रशासन, स्थानीय स्वशासन एवं पंचायती राज संस्थाएं।" सूचीबद्ध है।
विधेयक का उद्देश्यों और कारणों का कथन 2021 के परिवर्तन को निर्वाचित स्थानों की वृद्धि से जोड़ता है। उसके अनुसार राज्य सरकार ने 10 जून 2019 की अधिसूचना से जनगणना 2011 के आधार पर नगरपालिका स्थान पुनर्निर्धारित किए, और हर नगरपालिका में स्थानों की संख्या काफ़ी बढ़ गई।
कथन आगे कहता है कि जनप्रतिनिधियों और संगठनों की ओर से नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों की संख्या भी बढ़ाने की व्यापक माँग थी, और सरकार ने ऐसा करने का निर्णय लिया।
उसी अधिनियम ने धारा 24 बदली, ताकि निरर्हता के लिए संतानों की संख्या गिनते समय पूर्व प्रसव से हुई निःशक्त संतान न गिनी जाए।
मुख्य तथ्य
- धारा 6(1)(क)(ii), राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 (2021 में यथासंशोधित): नगरपालिका मंडल में छह, नगर परिषद् में आठ, नगर निगम में बारह नाम निर्दिष्ट व्यक्ति।
- राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2021 (2021 का अधिनियम सं. 4) को 6 अप्रैल 2021 को अनुमति मिली और वह तुरंत लागू हुआ।
- नाम निर्दिष्ट सदस्यों को नगरपालिका प्रशासन का विशेष ज्ञान या अनुभव होना चाहिए, और वे राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नाम निर्दिष्ट होते हैं।
- नाम निर्दिष्ट सदस्य को नगरपालिका की बैठकों में मत देने का अधिकार नहीं है, और राज्य सरकार उसे किसी भी समय वापस ले सकती है।
- 2021 के संशोधन के बाद से हर नगरपालिका में नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों में एक निःशक्त व्यक्ति होना आवश्यक है।
हर समूह में एक निःशक्त व्यक्ति होना आवश्यक है। नाम निर्दिष्ट सदस्य बैठकों में मत नहीं दे सकते।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- क्रम को उलट देना। छह नगरपालिका मंडल का और बारह नगर निगम का है; बीच वाली नगर परिषद् के आठ हैं।
- अप्रैल 2021 से पहले की संख्याएँ प्रयोग करना। राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2021 ने खंड प्रतिस्थापित कर संख्याएँ बढ़ाईं।
- यह मान लेना कि नाम निर्दिष्ट सदस्य मत देते हैं। अनुच्छेद 243द और धारा 6 दोनों उन्हें नगरपालिका की बैठकों में मत देने के अधिकार से वंचित करते हैं।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि राज्य सरकार नगरपालिका मंडल, नगर परिषद् या नगर निगम में अधिकतम कितने व्यक्ति नाम निर्दिष्ट कर सकती है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि क्या नाम निर्दिष्ट सदस्य मत दे सकते हैं, या 2021 के संशोधन ने निःशक्त व्यक्तियों के बारे में क्या जोड़ा।
संबंधित PYQ
किस अधिनियम के द्वारा जयपुर विकास प्राधिकरण की स्थापना हुयी थी ?
- (1) जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1982
- (2) जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1983
- (3) जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1984
- (4) जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985
उत्तर(1)
वही क्षेत्र, कानून द्वारा नगरीय शासन: वह प्रश्न पूछता है कि किस अधिनियम के द्वारा जयपुर विकास प्राधिकरण की स्थापना हुयी थी (RPSC की कुंजी: विकल्प (1), जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1982)। यह प्रश्न राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के अंतर्गत नाम निर्देशन के बारे में पूछता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 (2021 में यथासंशोधित) के अंतर्गत राज्य सरकार नगर निगम में कितने व्यक्ति नाम निर्दिष्ट कर सकती है?
- (a)6
- (b)8
- (c)10
- (d)12
उत्तर(4) — धारा 6(1)(क)(ii) नगर निगम में बारह नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों की अनुमति देती है। छह (1) नगरपालिका मंडल की और आठ (2) नगर परिषद् की संख्या है; दस (3) खंड में कोई संख्या नहीं है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 6 के अंतर्गत नगरपालिका में नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
- (a)उन्हें नगरपालिका की बैठकों में मत देने का अधिकार है
- (b)वे राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नाम निर्दिष्ट किए जाते हैं
- (c)एक बार नाम निर्दिष्ट होने के बाद उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता
- (d)नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों में एक निःशक्त व्यक्ति शामिल होना चाहिए
उत्तर(4) — 2021 में जोड़ा गया परंतुक (iv) नाम निर्दिष्ट व्यक्तियों में एक निःशक्त व्यक्ति को आवश्यक बनाता है। नाम निर्दिष्ट सदस्यों को मत देने का अधिकार नहीं है (1); उन्हें राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा नाम निर्दिष्ट करती है (2); और राज्य सरकार किसी नाम निर्दिष्ट सदस्य को किसी भी समय वापस ले सकती है (3)।