निम्न कथनों पर विचार कीजिये और दिये गये कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर का चयन कीजिये – कथन 1 : विजयनगर के शासक कृष्णदेवराय ने अमुक्तामाल्यद ग्रंथ की रचना की। कथन 2 : कृष्णदेवराय को आन्ध्र भोज के नाम से भी जाना जाता है। कथन 3 : उनके दरबार को अल्लसानी पेड्डना नामक राजकवि सुशोभित करता था, जो संस्कृत एवं तमिल दोनों भाषाओं का ज्ञाता था। कूट –
- (1)कथन 1 सही है
- (2)कथन 2 सही है
- (3)कथन 1 और 2 दोनों सही हैं
- (4)सभी तीनों कथन सही हैं
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), कथन 1 और 2 दोनों सही हैं.
कथन 1 सही है। NCERT की अंग्रेज़ी पाठ्यपुस्तक थीम्स इन इंडियन हिस्ट्री, भाग II के अनुसार विजयनगर के सबसे प्रसिद्ध शासक कृष्णदेवराय ने शासन-कला पर तेलुगु में एक रचना की, जो अमुक्तामाल्यद के नाम से जानी जाती है।
साहित्य अकादमी का एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर अमुक्तामाल्यद को, जिसे विष्णुचित्तीयमु भी कहते हैं, उनकी लिखी एकमात्र तेलुगु कविता बताता है, और उनकी कई संस्कृत काव्य-रचनाएँ गिनाता है।
कथन 2 सही है। पी. चेंचय्या और राजा एम. भुजंग राव की ए हिस्ट्री ऑफ़ तेलुगु लिटरेचर के अनुसार तेलुगु साहित्य को निरंतर संरक्षण और प्रोत्साहन देने के कारण कृष्णदेवराय आन्ध्र भोज के नाम से जाने जाते हैं।
कथन 3 गलत है। वही पुस्तक अल्लसानी पेड्डना को कृष्णदेवराय के दरबार का राजकवि बताती है, पर जिस विद्वत्ता का श्रेय उन्हें देती है वह संस्कृत और तेलुगु की है; कथन का तमिल इससे मेल नहीं खाता। उनका मनुचरित्र तेलुगु की एक श्रेष्ठ रचना है।
कथन 1 और 2 सही और 3 गलत होने से कूट विकल्प (3), कथन 1 और 2 दोनों सही हैं, बनता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)कथन 1 सही है — कथन 1 सही तो है, पर यह कूट वहीं रुक जाता है और कथन 2 को छोड़ देता है, जो भी सही है।
चेंचय्या और भुजंग राव दर्ज करते हैं कि तेलुगु साहित्य को संरक्षण देने के कारण कृष्णदेवराय आन्ध्र भोज के नाम से जाने जाते हैं, इसलिए पूरे कूट में कथन 2 भी होना चाहिए।
- (2)कथन 2 सही है — कथन 2 सही है, पर यह कूट कथन 1 को छोड़ देता है, जो भी सही है।
NCERT के अनुसार कृष्णदेवराय ने शासन-कला पर तेलुगु रचना अमुक्तामाल्यद की, इसलिए पूरे कूट में कथन 1 भी होना चाहिए।
- (4)सभी तीनों कथन सही हैं — कथन 3 गलत है, इसलिए तीनों सही नहीं हो सकते।
अल्लसानी पेड्डना कृष्णदेवराय के राजकवि थे, पर चेंचय्या और भुजंग राव उनकी विद्वत्ता संस्कृत और तेलुगु में बताते हैं। कथन का "संस्कृत एवं तमिल" मेल नहीं खाता; पेड्डना का मनुचरित्र तेलुगु रचना है।
अवधारणा
NCERT तुलुव वंश के कृष्णदेवराय को विजयनगर का सबसे प्रसिद्ध शासक बताती है। उनके शासनकाल पर स्रोतों में एक वर्ष का अंतर है: NCERT 1509–29 देती है, जबकि साहित्य अकादमी का एनसाइक्लोपीडिया और चेंचय्या तथा भुजंग राव 1509–30 देते हैं।
वे संरक्षक होने के साथ स्वयं कवि भी थे। एनसाइक्लोपीडिया उनकी संस्कृत रचनाएँ गिनाता है, जिनमें जाम्बवती परिणयम् है, और अमुक्तामाल्यद को उनकी एकमात्र तेलुगु कविता बताता है।
चेंचय्या और भुजंग राव के अनुसार उन्होंने अमुक्तामाल्यद से तेलुगु प्रबंध आंदोलन की शुरुआत की; यह संत विष्णुचित्त की पालित पुत्री और श्रीरंगम के रंगनाथ के प्रति उसकी भक्ति की एक वैष्णव कथा है।
उनके दरबार में आठ कवियों का एक मंडल, अष्टदिग्गज, इस आंदोलन का नेतृत्व करता था। पुस्तक अल्लसानी पेड्डना को सूची में पहले रखती है और उन्हें आन्ध्र कविता पितामहुडु की उपाधि वाला राजकवि बताती है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में भारत का इतिहास के अंतर्गत "सल्तनतकाल : प्रमुख सल्तनत शासकों की उपलब्धियाँ। विजयनगर की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ।" सूचीबद्ध है।
विजयनगर की संस्कृति अनेक भाषाओं वाली थी। साहित्य अकादमी का एनसाइक्लोपीडिया कृष्णदेवराय के संस्कृत और तेलुगु दोनों में लिखने को दर्ज करता है, और चेंचय्या तथा भुजंग राव उन्हें तीन भाषाओं, संस्कृत, कन्नड़ और तेलुगु, का विद्वान बताते हैं।
तेलुगु के लिए चेंचय्या और भुजंग राव उनके शासनकाल से एक प्रबंध काल की शुरुआत मानते हैं, उनके आठ दरबारी कवियों के नाम देते हैं, और पेड्डना के मनुचरित्र को काव्य साहित्य का आदर्श मानी गई श्रेष्ठ रचना बताते हैं।
NCERT अमुक्तामाल्यद को ऐतिहासिक स्रोत के रूप में भी लेती है और उसकी यह सलाह उद्धृत करती है कि राजा को अपने बंदरगाहों को सुधारकर वाणिज्य को प्रोत्साहन देना चाहिए।
मुख्य तथ्य
- NCERT: कृष्णदेवराय ने शासन-कला पर तेलुगु में एक रचना की, जो अमुक्तामाल्यद के नाम से जानी जाती है।
- साहित्य अकादमी का एनसाइक्लोपीडिया: अमुक्तामाल्यद, जिसे विष्णुचित्तीयमु भी कहते हैं, कृष्णदेवराय की लिखी एकमात्र तेलुगु कविता है।
- चेंचय्या और भुजंग राव: तेलुगु साहित्य को संरक्षण देने के कारण कृष्णदेवराय आन्ध्र भोज के नाम से जाने जाते हैं।
- चेंचय्या और भुजंग राव: राजकवि अल्लसानी पेड्डना की उपाधि आन्ध्र कविता पितामहुडु थी।
- चेंचय्या और भुजंग राव: संस्कृत और तेलुगु में पेड्डना की विद्वत्ता असाधारण थी।
कथन 1 और 2 सही, 3 गलत: विकल्प (3)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- किसी कथन का अधिकांश भाग सही होने से उसे मान लेना। पेड्डना राजकवि थे, पर संस्कृत और तमिल का भाषा-युग्म उनकी तेलुगु विद्वत्ता से मेल नहीं खाता।
- पहले सही कथन पर रुक जाना। विकल्प (1) और (2) में से हर एक एक सही कथन बताता है, पर दोनों को केवल विकल्प (3) समेटता है।
- दोनों उपाधियों को आपस में मिला देना। आन्ध्र भोज राजा की उपाधि है; आन्ध्र कविता पितामह पेड्डना की।
कोई प्रश्न किसी शासक की रचनाओं, उपाधियों और दरबारी कवियों के बारे में कथन देकर पूछ सकता है कि उनमें से कौन से सही हैं, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न आन्ध्र कविता पितामह जैसी किसी उपाधि का नाम देकर यह भी पूछ सकता है कि वह किसकी थी, या किसी दरबार में लिखी रचना की भाषा पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
कृष्णदेव राय द्वारा निम्नलिखित किस कवि को ‘आन्ध्र कविता पितामह’ की उपाधि दी गयी थी ?
- (1) अल्लसानी पेड्डना
- (2) भट्टुमूर्ति
- (3) तेनाली रामकृष्ण
- (4) पिंगली सूरन्ना
उत्तर(1)
वही दरबार, वही कवि: वह प्रश्न पूछता है कि कृष्णदेव राय द्वारा किस कवि को 'आन्ध्र कविता पितामह' की उपाधि दी गयी थी (RPSC की कुंजी: विकल्प (1), अल्लसानी पेड्डना)। यह प्रश्न राजा की अपनी रचना, उनकी उपाधि और पेड्डना की भाषाओं के बारे में पूछता है।
कृष्णदेवराय के दरबार में कवि मल्लनार्य ने “भाव चिंता रत्न” एवं “वीरशैवामृत” ग्रन्थ किस भाषा में लिखे थे ?
- (1) संस्कृत
- (2) तमिल
- (3) तेलुगू
- (4) कन्नड़
उत्तर(4)
वही दरबार, दूसरी भाषा: वह प्रश्न पूछता है कि कृष्णदेवराय के दरबार में कवि मल्लनार्य ने "भाव चिंता रत्न" एवं "वीरशैवामृत" ग्रन्थ किस भाषा में लिखे थे (RPSC की कुंजी: विकल्प (4), कन्नड़)। यह प्रश्न उस दरबार के तेलुगु साहित्य के बारे में है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कृष्णदेवराय ने अमुक्तामाल्यद की रचना किस भाषा में की?
- (a)संस्कृत
- (b)कन्नड़
- (c)तेलुगु
- (d)तमिल
उत्तर(3) — NCERT इसे शासन-कला पर तेलुगु रचना बताती है, और साहित्य अकादमी का एनसाइक्लोपीडिया इसे उनकी एकमात्र तेलुगु कविता बताता है। संस्कृत (1) उनकी अन्य रचनाओं की भाषा है, जैसे जाम्बवती परिणयम्। कन्नड़ (2) और तमिल (4) वह भाषा नहीं हैं जो ये स्रोत इसके लिए बताते हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
'आन्ध्र भोज' उपाधि किससे संबंधित है?
- (a)अल्लसानी पेड्डना
- (b)कृष्णदेवराय
- (c)तेनाली रामकृष्ण
- (d)अच्युत राय
उत्तर(2) — चेंचय्या और भुजंग राव के अनुसार तेलुगु साहित्य को संरक्षण देने के कारण कृष्णदेवराय आन्ध्र भोज के नाम से जाने जाते हैं। अल्लसानी पेड्डना (1) की उपाधि आन्ध्र कविता पितामहुडु थी। अच्युत राय (4) कृष्णदेवराय के उत्तराधिकारी थे, और तेनाली रामकृष्ण (3) कवि थे, वह राजा नहीं जिसे यह उपाधि सम्मानित करती है।