सूची–I एवं सूची–II को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर चुनिए – सूची–I (लोक वाद्य यंत्र) (A) भपंग (B) नड़ (C) अलगोज़ा (D) खड़ताल सूची–II (प्रख्यात कलाकार) (i) सदीक खाँ (ii) ज़हूर खाँ (iii) कर्णा भील (iv) रामनाथ चौधरी कूट –
- (1)A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i)
- (2)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i)
- (3)A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv)
- (4)A-(ii), B-(i), C-(iii), D-(iv)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), A-(ii), B-(iii), C-(iv), D-(i).
दो युग्मों की जाँच प्रकाशित स्रोतों में हो सकती है, और ये दोनों मिलकर कूट तय कर देते हैं।
A-(ii), भपंग–ज़हूर खाँ। राजस्थानी में लिखी राजनारायण व्यास की लोक रंग लोक रूप ज़हूर खाँ और गफरूदीन को भपंग के नामी कलाकार बताती है।
B-(iii), नड़–कर्णा भील। न्यूमैन, चौधरी और कोठारी की बार्ड्स, बैलड्स एंड बाउंड्रीज़ (2006) कर्णा भील को नड़ का वह प्रसिद्ध वादक बताती है जिसका नाम सदा इस वाद्य से जुड़ा रहता है। एक फ़्रांसीसी एलपी रिकॉर्ड, फ़्लूत दु राजस्थान, में जोधपुर में रिकॉर्ड की गई कर्णा राम भील की नड़ पर तीन धुनें हैं।
केवल विकल्प (1) में A-(ii) और B-(iii) दोनों हैं: विकल्प (4) नड़ को सदीक खाँ से जोड़ता है, और विकल्प (2) और (3) भपंग किसी और को देते हैं।
विकल्प (1) के बाकी दो युग्म, अलगोज़ा–रामनाथ चौधरी और खड़ताल–सदीक खाँ, केवल RPSC की कुंजी पर आधारित हैं; उनके लिए कोई प्रकाशित स्रोत जाँचा नहीं जा सका।
याद रखने की बात: भपंग–ज़हूर खाँ और नड़–कर्णा भील, दोनों प्रकाशित स्रोतों में जाँचे गए, विकल्प (1) चुनने के लिए पर्याप्त हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i) — इस कूट में नड़–कर्णा भील सही है, और इसका खड़ताल–सदीक खाँ युग्म भी कुंजी वाला ही है, पर यह बाकी दो कलाकारों को आपस में बदल देता है।
यह भपंग रामनाथ चौधरी को और अलगोज़ा ज़हूर खाँ को देता है। लोक रंग लोक रूप ज़हूर खाँ को भपंग का नामी कलाकार बताती है, इसलिए A-(iv) गलत है।
- (3)A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv) — यह कूट सूचियों को बस छपे हुए क्रम में जोड़ देता है, और इसका कोई भी युग्म कुंजी वाला नहीं है।
यह भपंग सदीक खाँ को और नड़ ज़हूर खाँ को देता है। लोक रंग लोक रूप भपंग के लिए ज़हूर खाँ का नाम देती है, और बार्ड्स, बैलड्स एंड बाउंड्रीज़ कर्णा भील को नड़ का प्रसिद्ध वादक बताती है।
- (4)A-(ii), B-(i), C-(iii), D-(iv) — यह कूट भपंग–ज़हूर खाँ सही देता है, पर B से आगे गलत हो जाता है।
यह नड़ सदीक खाँ को और अलगोज़ा कर्णा भील को देता है। कर्णा भील का वाद्य नड़ था: बार्ड्स, बैलड्स एंड बाउंड्रीज़ उन्हें इसका प्रसिद्ध वादक बताती है, और फ़्लूत दु राजस्थान एलपी में उनका नड़-वादन रिकॉर्ड है।
अवधारणा
चारों वाद्य अलग-अलग ढंग से बने और बजाए जाते हैं। संगीत नाटक अकादमी से प्रकाशित के. एस. कोठारी की इंडियन फ़ोक म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स (1968) राजस्थान के नड़ को कंगोरे की लकड़ी की, दोनों सिरों पर खुली, चार छेदों वाली, सिरे से फूँकी जाने वाली बाँसुरी बताती है।
कोठारी के अनुसार नड़ बजाते समय कंठ से निकाली गई ध्वनि उसे आधार-स्वर (ड्रोन) देती है, और पश्चिमी मरुस्थल के चरवाहे इसे बजाते हैं।
कोठारी के विवरण में अलगोज़ा सीटी से फूँकी जाने वाली दोहरी बाँसुरी है: लकड़ी की लगभग 48 सेमी की बराबर लंबाई वाली दो नलियाँ, हर एक में छह छेद, जिन्हें एक साथ फूँका जाता है। वे कहते हैं कि अलवर ज़िले के मेवों में यह संगत का वाद्य है।
खड़ताल (करताल) लकड़ी के दो टुकड़ों की जोड़ी है जिनमें पीतल की झांझें लगी होती हैं, और जिसे एक हाथ में पकड़कर बजाया जाता है।
लोक रंग लोक रूप भपंग को ऐसे तूंबे के रूप में बताती है जिस पर चमड़ा मढ़ा होता है और एक तांत का तार होता है, जिसका स्वर तार पर लगे लकड़ी के गुटके को खींचने और ढीला करने से ऊँचा-नीचा होता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत के अंतर्गत "प्रदर्शन कला : शास्त्रीय संगीत एवं शास्त्रीय नृत्य; लोक संगीत एवं वाद्य; लोक नृत्य एवं नाट्य।" सूचीबद्ध है।
लोक वाद्य समुदायों और कलाकारों से जुड़े हैं। कोठारी नड़ को मरुस्थल के चरवाहों से और अलगोज़ा को अलवर के मेवों से जोड़ते हैं, और लोक रंग लोक रूप अलगोज़ा, नड़ और पूंगी को राजस्थान के फूँक से बजने वाले वाद्यों में गिनाती है।
कलाकार इन परंपराओं को आगे ले जाते हैं। वर्ष 2018 की संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सूची में खड़ताल पर लोक संगीत के लिए राजस्थान के गाज़ी खाँ बरना का नाम है।
कर्णा भील संगीत के बाहर भी जाने गए: बार्ड्स, बैलड्स एंड बाउंड्रीज़ की एक टिप्पणी के अनुसार विश्व की सबसे लंबी मूँछों का गिनीज़ रिकॉर्ड उनके नाम था।
मुख्य तथ्य
- लोक रंग लोक रूप (राजनारायण व्यास) ज़हूर खाँ और गफरूदीन को भपंग के नामी कलाकार बताती है।
- बार्ड्स, बैलड्स एंड बाउंड्रीज़ (2006) कर्णा भील को नड़ का वह प्रसिद्ध वादक बताती है जिसका नाम सदा इस वाद्य से जुड़ा रहता है।
- कोठारी (1968): राजस्थानी नड़ कंगोरे की लकड़ी की, चार छेदों वाली, दोनों सिरों पर खुली, सिरे से फूँकी जाने वाली बाँसुरी है।
- कोठारी (1968): राजस्थानी अलगोज़ा सीटी से फूँकी जाने वाली दोहरी बाँसुरी है, जिसमें लकड़ी की 48 सेमी की दो नलियाँ और हर एक में छह छेद हैं।
- कोठारी (1968): राजस्थान की करताल पीतल की झांझों वाले लकड़ी के दो टुकड़ों की जोड़ी है, जो एक हाथ से बजाई जाती है।
प्रकाशित स्रोतों में जाँचे गए दो चिह्नित युग्म ही विकल्प (1) चुन लेते हैं; बाकी दो RPSC की कुंजी के अनुसार हैं। स्रोत: लोक रंग लोक रूप; न्यूमैन और अन्य (2006); कोठारी (1968)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दोनों बाँसुरियों को आपस में मिला देना। नड़ सिरे से फूँकी जाने वाली एक बाँसुरी है; अलगोज़ा दोहरी बाँसुरी है जिसकी दोनों नलियाँ एक साथ फूँकी जाती हैं।
- भपंग को फूँक से बजने वाला वाद्य समझ लेना। लोक रंग लोक रूप इसे एक तांत के तार वाला तूंबा बताती है जिसे मिज़राब से बजाया जाता है; कोठारी इसे तूंबे के अनुनादक वाले उन वाद्यों में रखते हैं जिनका काम ताल देना है।
- सूचियों में स्थान के आधार पर जोड़ देना। विकल्प (3) A को (i) से, B को (ii) से, और इसी तरह आगे जोड़ता है; प्रकाशित स्रोतों में जाँचे गए दोनों युग्म, A-(ii) और B-(iii), इसे बाहर कर देते हैं।
कोई प्रश्न लोक वाद्यों को उनके लिए जाने जाने वाले कलाकारों से सुमेलित करवा सकता है, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न किसी कलाकार का नाम देकर वाद्य भी पूछ सकता है, या पूछ सकता है कि सूची के कौन से वाद्य फूँक से बजने वाले हैं।
संबंधित PYQ
लोक वाद्ययंत्र ‘चौतारा’ के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प चुनिए : A. यह चार तारों वाला वाद्ययंत्र है । B. यह सामान्यतः रामदेवजी के भजन गाने में प्रयुक्त होता है ।
- (1) केवल A सत्य है ।
- (2) केवल B सत्य है ।
- (3) A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4) A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर(3)
वही क्षेत्र, लोक वाद्य: वह प्रश्न पूछता है कि क्या लोक वाद्ययंत्र 'चौतारा' चार तारों वाला वाद्ययंत्र है और क्या यह सामान्यतः रामदेवजी के भजन गाने में प्रयुक्त होता है (RPSC की कुंजी: विकल्प (3), A और B दोनों सत्य हैं)। यह प्रश्न चार वाद्यों को कलाकारों से सुमेलित करवाता है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
के. एस. कोठारी की इंडियन फ़ोक म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स (1968) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा राजस्थान का चार छेदों वाला, सिरे से फूँका जाने वाला बाँसुरी वाद्य है?
- (a)अलगोज़ा
- (b)नड़
- (c)खड़ताल
- (d)भपंग
उत्तर(2) — कोठारी नड़ को कंगोरे की लकड़ी का, चार छेदों वाला, सिरे से फूँका जाने वाला वाद्य बताते हैं। अलगोज़ा (1) हर नली में छह छेदों वाली दोहरी बाँसुरी है, खड़ताल (3) लकड़ी के टुकड़ों की जोड़ी है, और भपंग (4) तांत के तार वाला तूंबा वाद्य है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान के कर्णा भील किस लोक वाद्य के वादक के रूप में जाने जाते हैं?
- (a)नड़
- (b)रावणहत्था
- (c)भपंग
- (d)मोरचंग
उत्तर(1) — बार्ड्स, बैलड्स एंड बाउंड्रीज़ (2006) कर्णा भील को नड़ का प्रसिद्ध वादक बताती है, और फ़्लूत दु राजस्थान एलपी में उनका नड़-वादन रिकॉर्ड है। भपंग (3) वह वाद्य है जिसे लोक रंग लोक रूप ज़हूर खाँ से जोड़ती है; रावणहत्था (2) और मोरचंग (4) वे वाद्य नहीं हैं जो ये स्रोत उनके लिए बताते हैं।