लोक वाद्ययंत्र ‘चौतारा’ के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प चुनिए : A. यह चार तारों वाला वाद्ययंत्र है । B. यह सामान्यतः रामदेवजी के भजन गाने में प्रयुक्त होता है ।
- (1)केवल A सत्य है ।
- (2)केवल B सत्य है ।
- (3)A और B दोनों सत्य हैं ।
- (4)A और B दोनों असत्य हैं ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), A और B दोनों सत्य हैं ।
कथन A सत्य है। के.एस. कोठारी की सूची ‘इंडियन फ़ोक म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स’ (संगीत नाटक अकादेमी, 1968) राजस्थानी चौतारा में स्टील के चार तार बताती है, जो लगभग 115 सेमी लंबे, अत्यधिक अलंकृत लकड़ी के ढाँचे पर खूँटियों से बँधे होते हैं।
नाम भी यही गिनती बताता है: चौ यानी चार और तार यानी तार।
कथन B सत्य है। कोठारी दर्ज करते हैं कि कामड़ समुदाय भक्ति-गायन के साथ लयबद्ध संगत के लिए चौतारा का प्रयोग करता है। नागौर ज़िला गज़ेटियर (1975) बताता है कि कामड़ अपने आराध्य रामदेव के सामने रात्रि-जागरण में गाते और नाचते हैं।
दोनों कथन टिकते हैं, इसलिए कूट विकल्प (3) है, A और B दोनों सत्य हैं।
याद रखने की बात: चौतारा = चौ (चार) + तार; इसे कामड़ बजाते हैं, जो रामदेवजी के सामने गाते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)केवल A सत्य है । — यह कूट कथन B को नकारता है, पर B सत्य है। कोठारी चौतारा को भक्ति-गायन में कामड़ समुदाय की संगत के रूप में दर्ज करते हैं, और नागौर ज़िला गज़ेटियर कामड़ों के गायन को रामदेव के सामने रात्रि-जागरण में रखता है।
केवल A सत्य है तब उत्तर होता जब B इस वाद्य को किसी अन्य परम्परा से जोड़ता, जैसे पाबूजी की पड़। वहाँ, उसी गज़ेटियर के अनुसार, भोपा रावणहत्था बजाता है।
- (2)केवल B सत्य है । — यह कूट कथन A को नकारता है, पर A सत्य है। कोठारी स्टील के चार तार गिनाते हैं, और चौ-तारा नाम का अर्थ ही चार तार है।
केवल B सत्य है तब उत्तर होता जब A इस वाद्य को एक तार वाला बताता। वह इकतारे (इक यानी एक) का वर्णन है, चौतारे का नहीं।
- (4)A और B दोनों असत्य हैं । — दोनों कथन स्रोतों से मेल खाते हैं: चार तार (कोठारी, और स्वयं नाम) तथा कामड़ों द्वारा प्रयोग, जो रामदेव के सामने गाते हैं (कोठारी और नागौर गज़ेटियर)।
दोनों असत्य तब उत्तर होता जब दोनों कथन रावणहत्थे के बारे में होते। कोठारी इसे गज़ से बजने वाला वाद्य बताते हैं, जिसमें दो तार होते हैं — एक बालों का और एक बटे हुए स्टील के तार का — और साथ में 3 से 16 सहायक तार; इसे पाबूजी की गाथा गाने वाले भोपे बजाते हैं।
अवधारणा
लोक तार वाद्यों को इस आधार पर छाँटा जा सकता है कि वे कैसे बजाए जाते हैं और किसकी संगत करते हैं।
कोठारी चौतारा का प्रयोग दर्ज करते हैं: कामड़ समुदाय इसे भक्ति-गायन के साथ लयबद्ध संगत के लिए बजाता है। इसका अलंकृत लकड़ी का ढाँचा और पेट दो अलग भागों में होते हैं, और इसमें अलग खूँटी-पेटी नहीं होती; इसके चार तार ऊपरी भाग की खूँटियों से बँधे होते हैं।
रावणहत्था अलग है। कोठारी इसे खुले तारों वाला, गज़ से बजने वाला वाद्य बताते हैं, जिसमें बालों का एक मुख्य तार, बटे हुए स्टील के तारों का दूसरा तार, और 3 से 16 सहायक तार होते हैं।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "प्रदर्शन कला" में "लोक संगीत एवं वाद्य" और "धार्मिक जीवन" में "राजस्थान के लोक देवी–देवता" सूचीबद्ध हैं। चौतारा वहाँ आता है जहाँ ये दोनों मिलते हैं।
रामदेवजी का भक्ति-संगीत कामड़ जैसे समुदायों द्वारा आगे बढ़ाया जाता है। नागौर ज़िला गज़ेटियर कामड़ों की दो पुरुषों और दो स्त्रियों वाली मंडलियों का वर्णन करता है: पुरुष गाते और इकतारा बजाते हैं, और स्त्रियाँ पूरे शरीर पर बँधे मंजीरे बजाती हैं। दूसरी ओर, कोठारी चार तारों वाले चौतारे को कामड़ समुदाय का वाद्य बताते हैं।
वह डीडवाना के और कुचेरा के पास जुंजाला के कामड़ों को तेरहताली के लिए प्रसिद्ध बताता है।
मुख्य तथ्य
- के.एस. कोठारी की ‘इंडियन फ़ोक म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स’ (संगीत नाटक अकादेमी, 1968) राजस्थानी चौतारा का वर्णन स्टील के चार तारों और लगभग 115 सेमी लंबे ढाँचे के साथ करती है।
- नागौर ज़िला गज़ेटियर (1975) बताता है कि कामड़ अपने आराध्य रामदेव के सामने रात्रि-जागरण में गाते और नाचते हैं।
- कोठारी दर्ज करते हैं कि कामड़ समुदाय भक्ति-गायन के साथ लयबद्ध संगत के लिए चौतारा का प्रयोग करता है।
- कोठारी राजस्थानी जंतर का, जिसमें हड्डी के 14 पर्दे और स्टील के दो मुख्य तार होते हैं, वर्णन बगड़ावतों की गाथा के लिए भोपों के वाद्य के रूप में करते हैं।
- नागौर ज़िला गज़ेटियर डीडवाना के और कुचेरा के पास जुंजाला के कामड़ों को तेरहताली के लिए प्रसिद्ध बताता है।
स्रोत: के.एस. कोठारी (1968); नागौर ज़िला गज़ेटियर (1975)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- चौतारे को इकतारे से मिला देना: कोठारी की सूची में चौतारे के चार तार हैं और इकतारे का एक, जैसा संख्या-शब्द चौ और इक संकेत करते हैं।
- गलत देवता से जोड़ देना: चौतारा रामदेवजी के भजनों के साथ जाता है, जबकि रावणहत्था भोपों की पाबूजी की पड़ की संगत करता है।
- ‘सामान्यतः प्रयुक्त’ को ‘केवल प्रयुक्त’ पढ़ लेना: कथन B एक सामान्य उपयोग का दावा करता है, इसलिए अन्य संगीत में इस वाद्य के आने से B असत्य नहीं होता।
कोई प्रश्न कोई वाद्य देकर उसके तारों की संख्या या वह परम्परा पूछ सकता है जिसकी वह संगत करता है, या वाद्यों को देवताओं, समुदायों या कलाकारों से सुमेलित करवा सकता है।
कोई प्रश्न कामड़ जैसे किसी समुदाय का नाम देकर उसका नृत्य या उसका वाद्य भी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
के.एस. कोठारी की सूची ‘इंडियन फ़ोक म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स’ के अनुसार, भोपे रावणहत्थे का प्रयोग किस लोक नायक के जीवन पर आधारित गाथा की संगत के लिए करते हैं ?
- (a)पाबूजी
- (b)बगड़ावत
- (c)रामदेवजी
- (d)तेजाजी
उत्तर(1) — कोठारी की रावणहत्था प्रविष्टि पाबूजी की गाथा का नाम लेती है। विकल्प (2) उस गाथा के नायक हैं जिसे कोठारी जंतर से जोड़ते हैं; विकल्प (3) वे देवता हैं जिनके सामने, नागौर गज़ेटियर के अनुसार, कामड़ गाते हैं; और विकल्प (4) का नाम कोठारी की रावणहत्था प्रविष्टि में नहीं है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
तेरहताली के लिए प्रसिद्ध राजस्थान का कौन-सा समुदाय रामदेवजी के सामने रात्रि-जागरण में गाता और नाचता है ?
- (a)कामड़
- (b)कालबेलिया
- (c)गरासिया
- (d)सहरिया
उत्तर(1) — नागौर ज़िला गज़ेटियर कामड़ों का रामदेव के सामने प्रस्तुति देते हुए वर्णन करता है और डीडवाना तथा जुंजाला के कामड़ों को तेरहताली के लिए प्रसिद्ध बताता है। RPSC की कुंजियों में विकल्प (2) शंकरिया नृत्य से और विकल्प (3) लूर नृत्य से जुड़ा है; और विकल्प (4) वह समुदाय नहीं है जिसका नाम ये स्रोत तेरहताली के लिए लेते हैं।