”नाबी एमजी” है –
- (1)मक्का की एक किस्म
- (2)जौ की एक किस्म
- (3)बाजरा की एक किस्म
- (4)गेहूँ की एक किस्म
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), गेहूँ की एक किस्म.
नाबी एमजी (NABI MG) वह काला गेहूँ है जो जैव प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव-प्रौद्योगिकी संस्थान (NABI), मोहाली, पंजाब में विकसित किया गया।
एंथोसायनिन से जैव-संवर्धित रंगीन गेहूँ पर NABI का अपना नोट बताता है कि वहाँ रंगीन गेहूँ, बैंगनी और काला, जापान से लाए गए विदेशी जननद्रव्य EC866732 का अधिक उपज वाली गेहूँ किस्म PBW621 से संकरण कराकर विकसित किया गया। दाने का रंग उसमें मौजूद एंथोसायनिन से आता है।
उस काले गेहूँ का नाम नाबी एमजी बाद की एक रिपोर्ट में मिलता है: 101Reporters की रिपोर्ट, जो 2 फ़रवरी 2024 को द हंस इंडिया में प्रकाशित हुई; इसके अनुसार एक किसान ने 2018 में NABI से नाबी एमजी के बीज लिए थे।
रिपोर्ट NABI की वैज्ञानिक डॉ. मोनिका गर्ग के हवाले से बताती है कि नाबी एमजी तक पहुँचने में उन्हें सात वर्ष का अनुसंधान और विकास लगा।
याद रखने की बात: नाबी एमजी = NABI का एंथोसायनिन-समृद्ध काला गेहूँ, जापानी वंशक्रम को PBW621 से संकरित कर विकसित।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)मक्का की एक किस्म — नाबी एमजी मक्का नहीं है। NABI अपने रंगीन अनाज को गेहूँ बताता है, जो गेहूँ की किस्म PBW621 से विकसित किया गया।
न्यूट्रास्यूटिकल रंगीन गेहूँ पर NABI के तकनीकी नोट में मक्का का उल्लेख है, पर केवल यह बताने के लिए कि रंगीन दानों वाली मक्का की किस्मों को ऊँचे दाम मिलने की बात ज्ञात है, यानी रंगीन गेहूँ के बाज़ार की ओर संकेत के रूप में।
- (2)जौ की एक किस्म — नाबी एमजी जौ नहीं है। NABI जिस जनक किस्म का नाम देता है, PBW621, वह अधिक उपज वाली गेहूँ किस्म है, और उत्पाद को रंगीन गेहूँ बताया गया है।
जौ एक अलग अनाज है; NABI में विकसित बैंगनी और काला अनाज गेहूँ है।
- (3)बाजरा की एक किस्म — नाबी एमजी बाजरा नहीं है। NABI का नोट अपने उत्पाद को एंथोसायनिन से जैव-संवर्धित रंगीन गेहूँ कहता है, और बताता है कि इसे सात वर्ष के अनुसंधान के बाद सामान्य पादप-प्रजनन से विकसित किया गया।
बाजरा जैसे मिलेट अनाजों का एक अलग समूह हैं; बाजरा गेहूँ नहीं है।
अवधारणा
जैव-संवर्धन (बायोफ़ोर्टिफ़िकेशन) किसी फसल में ही पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाता है। NABI का रंगीन गेहूँ एंथोसायनिन से जैव-संवर्धित है; एंथोसायनिन प्रतिऑक्सीकारक (एंटीऑक्सीडेंट) गुण वाले प्राकृतिक वर्णक हैं, जो दाने को बैंगनी, नीला या काला बना देते हैं।
न्यूट्रास्यूटिकल रंगीन गेहूँ पर NABI का तकनीकी नोट रंगों को इस तरह समझाता है: बैंगनी रंग फलभित्ति (पेरीकार्प) के एक उत्परिवर्तन से जुड़ा है, नीला रंग वाइड इंट्रोग्रेशन से आता है, और काले रंग में दोनों मिलते हैं।
NABI के अनुसार यह रंगीन गेहूँ आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) नहीं है: इसे सामान्य पादप-प्रजनन से विकसित किया गया, और इसके वंशक्रम राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR) में पंजीकृत हैं।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "कृषि–विज्ञान, उद्यान–विज्ञान, वानिकी एवं पशुपालन राजस्थान के विशेष संदर्भ में" और "आहार एवं पोषण, रक्त समूह एवं Rh कारक" सूचीबद्ध हैं।
NABI का वही नोट NBPGR पंजीकरण संख्याएँ INGR17001, INGR17002 और INGR17003 दर्ज करता है, और भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) से मानव उपभोग की स्वीकृति भी।
नोट यह भी बताता है कि NABI के काले गेहूँ की उपज अधिक उपज वाली किस्मों से 20% कम है।
मुख्य तथ्य
- 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार नाबी एमजी राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव-प्रौद्योगिकी संस्थान (NABI), मोहाली, पंजाब में विकसित काला गेहूँ है।
- इसे जापान से लाए गए विदेशी जननद्रव्य EC866732 का अधिक उपज वाली गेहूँ किस्म PBW621 से संकरण कराकर विकसित किया गया।
- इसका रंग एंथोसायनिन से आता है; NABI का नोट अपने रंगीन गेहूँ में 40–140 ppm एंथोसायनिन बताता है।
- NABI के अनुसार यह रंगीन गेहूँ गैर-GM है और NBPGR में पंजीकृत है (INGR17001–17003)।
- 2021 में NABI जैव प्रौद्योगिकी विभाग का एक स्वायत्त संस्थान था।
स्रोत: एंथोसायनिन से जैव-संवर्धित रंगीन गेहूँ पर NABI का नोट (तिथि-रहित); नाबी एमजी नाम के लिए द हंस इंडिया (2 फ़रवरी 2024) में प्रकाशित 101Reporters की रिपोर्ट।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- संस्थान का नाम बनाम फसल: NABI एक कृषि-खाद्य जैव-प्रौद्योगिकी संस्थान है, कोई फसल नहीं, इसलिए केवल नाम से फसल का पता नहीं चलता; फसल गेहूँ है।
- दूसरी फसलों में रंगीन दाने: NABI का तकनीकी नोट रंगीन दानों वाली मक्का का उल्लेख करता है, पर नाबी एमजी गेहूँ है।
- जैव-संवर्धित का अर्थ आनुवंशिक रूप से संशोधित नहीं: NABI के अनुसार उसका रंगीन गेहूँ सामान्य पादप-प्रजनन से तैयार हुआ।
कोई प्रश्न किसी नई फसल-किस्म का नाम देकर पूछ सकता है कि वह किस फसल की है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि उसे किस संस्थान ने विकसित किया, उसमें किस पोषक तत्व की मात्रा बढ़ाई गई है, या वह पारंपरिक प्रजनन से बनी है या आनुवंशिक संशोधन से।
संबंधित PYQ
माही कंचन तथा आर सी बी 911 संकर किस्में हैं
- (1) क्रमशः मक्का तथा जौ की
- (2) क्रमशः मक्का तथा चावल की
- (3) क्रमशः मक्का तथा बाजरे की
- (4) क्रमशः बाजरा तथा मक्का की
उत्तर(3)
वही काम: किस्म का नाम देकर उसकी फसल पूछी गई है। वह प्रश्न माही कंचन तथा आर सी बी 911 देता है (RPSC की कुंजी: क्रमशः मक्का तथा बाजरे की); यह प्रश्न नाबी एमजी देता है, जो एक रंगीन गेहूँ है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
NABI, मोहाली में विकसित रंगीन (काले और बैंगनी) गेहूँ का रंग मुख्य रूप से किन वर्णकों के कारण है?
- (a)कैरोटिनॉयड
- (b)एंथोसायनिन
- (c)क्लोरोफ़िल
- (d)मेलेनिन
उत्तर(2) — NABI के अनुसार उसके गेहूँ के दाने का रंग एंथोसायनिन के कारण है, जिनमें प्रतिऑक्सीकारक गुण होते हैं। विकल्प (1), (3) और (4) अन्य वर्णक हैं, NABI द्वारा बताए गए नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
NABI के अनुसार उसका रंगीन गेहूँ जापान के एक विदेशी वंशक्रम का किस भारतीय गेहूँ किस्म से संकरण कराकर विकसित किया गया?
- (a)HD 2967
- (b)PBW621
- (c)राज 3765
- (d)लोक 1
उत्तर(2) — रंगीन गेहूँ पर NABI का नोट अधिक उपज वाली, रोग-प्रतिरोधी किस्म PBW621 को वह जनक बताता है जिसका जापान से लाए जननद्रव्य EC866732 से संकरण कराया गया। विकल्प (1), (3) और (4) गेहूँ की अन्य किस्में हैं, NABI द्वारा बताया गया जनक नहीं।