भारत का प्रथम कृषि आधारित ”कुसुम” सौर ऊर्जा संयंत्र परियोजना को राजस्थान के किस गाँव में प्रारंन किया गया?
- (1)चितलवाना
- (2)चाणौद
- (3)रानी
- (4)भालोजी
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), भालोजी.
गुरुवार, 1 अप्रैल 2021 को राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL) ने पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत एक कृषि-आधारित सौर ऊर्जा परियोजना चालू की। PTI के अनुसार यह जयपुर के कोटपूतली के भालोजी गाँव में 3.5 एकड़ कृषि भूमि पर स्थापित की गई। स्थल भालोजी है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने इसे कुसुम योजना के अंतर्गत देश की पहली कृषि-आधारित सौर ऊर्जा परियोजना बताया। ऊर्जा मंत्री बी.डी. कल्ला ने कहा कि राजस्थान ऐसी परियोजना चालू करने वाला पहला राज्य बन गया है।
संयंत्र की क्षमता 1 MW है। राज्य में योजना के पहले चरण में RRECL द्वारा 722 MW के लिए चुनी गई 623 कृषि-आधारित सौर परियोजनाओं में यह पहली थी।
याद रखने की बात: पहला कृषि-आधारित पीएम-कुसुम सौर संयंत्र = भालोजी गाँव, कोटपूतली (तब जयपुर ज़िले में), 1 MW, 1 अप्रैल 2021 को चालू।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)चितलवाना — चितलवाना वह गाँव नहीं है जिसका नाम परियोजना चालू होने की रिपोर्टों में आया। PTI और टाइम्स ऑफ़ इंडिया, दोनों पहली कृषि-आधारित कुसुम परियोजना को कोटपूतली में बताते हैं, और PTI गाँव का नाम भालोजी देता है।
वहाँ की परियोजना RRECL ने 1 अप्रैल 2021 को चालू की।
- (2)चाणौद — चाणौद वह स्थल नहीं है जिसका नाम रिपोर्टों में आया। PTI के अनुसार 1 अप्रैल 2021 को चालू हुआ 1 MW का संयंत्र कोटपूतली के भालोजी गाँव में 3.5 एकड़ कृषि भूमि पर है।
यह भूमि किसान देवकरण यादव की है, जिन्होंने RRECL के साथ 25 वर्ष का अनुबंध किया।
- (3)रानी — रानी वह स्थल नहीं है जिसका नाम रिपोर्टों में आया। पीएम-कुसुम के अंतर्गत पहला कृषि-आधारित सौर संयंत्र कोटपूतली के भालोजी गाँव में चालू हुआ, जो तब जयपुर ज़िले का हिस्सा था।
PTI और टाइम्स ऑफ़ इंडिया, दोनों परियोजना चालू होने की तिथि 1 अप्रैल 2021 बताते हैं।
अवधारणा
पीएम-कुसुम नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) का प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान है। MNRE के कार्यान्वयन दिशानिर्देश इसके तीन घटक बताते हैं।
घटक A: किसानों, किसान समूहों, सहकारी समितियों या पंचायतों आदि द्वारा लगाए गए विकेंद्रीकृत, ग्रिड से जुड़े सौर या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र; दिशानिर्देश संयंत्र का आकार 500 kW से 2 MW बताते हैं। घटक B: स्टैंड-अलोन सौर कृषि पंप। घटक C: ग्रिड से जुड़े मौजूदा कृषि पंपों का सौरीकरण।
रिपोर्टें भालोजी संयंत्र को कृषि-आधारित परियोजना कहती हैं। 1 MW क्षमता, किसान की भूमि पर स्थित और बिजली वितरण कंपनी को बेचने वाला होने से यह घटक A के विवरण पर खरा उतरता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "समसामयिक घटनाएं" के अंतर्गत "राजस्थान, भारतीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय महत्व की प्रमुख समसामयिक घटनाएं एवं मुद्दे" सूचीबद्ध हैं।
दिशानिर्देशों के अनुसार ऐसे संयंत्रों से किसान बंजर या अकृष्य भूमि पर बिजली बनाकर और उसे वितरण कंपनियों को बेचकर आय कमा सकते हैं। भालोजी में RRECL के सुबोध अग्रवाल ने बताया कि संयंत्र से हर वर्ष 17 लाख यूनिट बिजली बनने की अपेक्षा है, जिसे वितरण कंपनी ₹3.14 प्रति यूनिट पर खरीदेगी।
PTI के अनुसार राज्य ने इस योजना के अंतर्गत 2,600 MW विकसित करने का निर्णय लिया था।
मुख्य तथ्य
- 1 अप्रैल 2021: RRECL ने कोटपूतली के भालोजी गाँव में पीएम-कुसुम के अंतर्गत पहली कृषि-आधारित सौर ऊर्जा परियोजना चालू की।
- रिपोर्टों में कोटपूतली को उस समय जयपुर ज़िले में बताया गया।
- क्षमता 1 MW, 3.5 एकड़ पर; अपेक्षित उत्पादन 17 लाख यूनिट प्रति वर्ष, ₹3.14 प्रति यूनिट पर बिक्री।
- पहले चरण में 722 MW के लिए RRECL द्वारा चुनी गई 623 कृषि-आधारित परियोजनाओं में यह पहली थी।
- कृषि भूमि के स्वामी देवकरण यादव का RRECL के साथ 25 वर्ष का अनुबंध है।
स्रोत: MNRE, पीएम-कुसुम के कार्यान्वयन के दिशानिर्देश; PTI और टाइम्स ऑफ़ इंडिया की 1–2 अप्रैल 2021 की रिपोर्टें।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- गाँव बनाम कस्बा: गाँव भालोजी है; कोटपूतली वह स्थान है जिसका नाम टाइम्स ऑफ़ इंडिया के शीर्षक में है।
- ज़िलों के नाम बदलते हैं: अप्रैल 2021 में कोटपूतली को जयपुर ज़िले में बताया गया था, और तब से राजस्थान का ज़िला-मानचित्र फिर से बना है, इसलिए ज़िले को उसी तिथि से जोड़ें।
- घटक A बनाम पंप: भालोजी परियोजना बिजली बेचने वाला ऊर्जा संयंत्र है, सिंचाई के लिए सौर पंप नहीं।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि किसी योजना की पहली परियोजना किस गाँव या स्थान पर चालू हुई।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि उसे किस एजेंसी ने चालू किया, उसकी क्षमता क्या है, या वह पीएम-कुसुम के किस घटक में आती है।
संबंधित PYQ
राजस्थान में किस एजेंसी को पी.एम.–कुसुम योजना (कम्पोनेंट A) के क्रियान्वयन के जिम्मेदारी दी गई है, जिसमें 0.5 मेगावॉट से 2 मेगावॉट क्षमता तक के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किये जाने हैं ?
- (1) ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिऐंसी
- (2) राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड
- (3) राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड
- (4) राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम
उत्तर(2)
दोनों राजस्थान में पी.एम.–कुसुम योजना से जुड़े हैं। वह प्रश्न पूछता है कि इसके कम्पोनेंट A के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किस एजेंसी को दी गई है (RPSC की कुंजी: राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड); यह प्रश्न वह गाँव पूछता है जहाँ योजना के अंतर्गत पहली कृषि-आधारित परियोजना चालू हुई।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अप्रैल 2021 में राजस्थान के भालोजी गाँव में पीएम-कुसुम के अंतर्गत भारत की पहली कृषि-आधारित सौर ऊर्जा परियोजना किस एजेंसी ने चालू की?
- (a)राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड
- (b)सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया
- (c)NTPC लिमिटेड
- (d)राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड
उत्तर(1) — PTI और टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार RRECL ने 1 अप्रैल 2021 को परियोजना चालू की। विकल्प (2), (3) और (4) ऊर्जा क्षेत्र की अन्य संस्थाएँ हैं, परियोजना चालू करने वाली के रूप में नामित संस्था नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1 अप्रैल 2021 को कोटपूतली के भालोजी गाँव में चालू हुए कृषि-आधारित पीएम-कुसुम सौर ऊर्जा संयंत्र की क्षमता कितनी है?
- (a)500 kW
- (b)1 MW
- (c)2 MW
- (d)5 MW
उत्तर(2) — टाइम्स ऑफ़ इंडिया 3.5 एकड़ पर 1 मेगावाट क्षमता बताता है। विकल्प (1) घटक A संयंत्रों के लिए MNRE दिशानिर्देशों में दिया गया निचला आकार है और विकल्प (3) ऊपरी आकार; विकल्प (4) उस सीमा से बड़ा है।