माता गर्भस्थ शिशु Rh रक्त प्रकार विसंगति की समस्या उत्पन्न हो सकती है, यदि माता ...................... है एवं उसका गर्भस्थ शिशु..................................है।
- (1)Rh सहिंत; Rh हीन
- (2)Rh हीन; Rh सहित
- (3)Rh हीन; Rh हीन
- (4)Rh सहित; Rh सहित
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), Rh हीन; Rh सहित.
प्रश्न की विसंगति वही बेमेल है जिसे NCERT Rh असंगतता (incompatibility) कहता है। NCERT की कक्षा 11 जीवविज्ञान पाठ्यपुस्तक का अध्याय शरीर द्रव तथा परिसंचरण (Body Fluids and Circulation) Rh असंगतता की एक विशेष स्थिति बताता है, जो गर्भवती माता के Rh-ve (Rh हीन) रक्त और गर्भस्थ शिशु के Rh+ve (Rh सहित) रक्त के बीच होती है।
बेमेल के लिए दोनों पक्ष आवश्यक हैं। NCERT के अनुसार Rh+ve रक्त के संपर्क में आने पर Rh-ve व्यक्ति Rh प्रतिजन के विरुद्ध प्रतिरक्षी बनाता है। Rh हीन माता में यह प्रतिजन नहीं होता; Rh सहित गर्भस्थ शिशु की लाल रक्त कोशिकाओं पर यह होता है।
इसलिए जोड़ी है Rh हीन माता; Rh सहित गर्भस्थ शिशु।
याद रखने योग्य बात: खतरा तब उत्पन्न होता है जब Rh हीन (Rh-ve) माता के गर्भ में Rh सहित (Rh+ve) शिशु हो।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)Rh सहिंत; Rh हीन — यह जोड़ी को उलट देता है। NCERT की Rh असंगतता की स्थिति Rh-ve माता और Rh+ve गर्भस्थ शिशु की है।
NCERT के विवरण में प्रतिरक्षी वह Rh-ve व्यक्ति बनाता है जो Rh+ve रक्त के संपर्क में आया हो, और ये प्रतिरक्षी Rh+ve लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। Rh हीन गर्भस्थ शिशु की कोशिकाओं पर ऐसा कोई Rh प्रतिजन नहीं होता जिस पर ये प्रतिरक्षी आक्रमण करें।
- (3)Rh हीन; Rh हीन — यहाँ किसी के भी रक्त में Rh प्रतिजन नहीं है। गर्भस्थ शिशु की लाल रक्त कोशिकाओं पर यह प्रतिजन नहीं होता, इसलिए उसका रक्त माता में Rh-विरोधी प्रतिरक्षी नहीं बनवा सकता।
NCERT जिस बेमेल का वर्णन करता है, उसके लिए Rh+ve रक्त वाला गर्भस्थ शिशु आवश्यक है, जिस पर माता के प्रतिरक्षी क्रिया करते हैं।
- (4)Rh सहित; Rh सहित — यहाँ दोनों में Rh प्रतिजन है, इसलिए कोई बेमेल नहीं है। माता की अपनी लाल रक्त कोशिकाओं पर पहले से यह प्रतिजन है।
NCERT का विवरण एक Rh-ve माता से शुरू होता है जो उन Rh प्रतिजनों के विरुद्ध प्रतिरक्षी बनाती है जो उसमें नहीं हैं; Rh+ve माता इस वर्णन में नहीं आती।
अवधारणा
NCERT बताता है कि रीसस बंदरों में पाए जाने वाले प्रतिजन जैसा Rh प्रतिजन लगभग 80 प्रतिशत मनुष्यों की लाल रक्त कोशिकाओं पर होता है। जिनमें यह होता है वे Rh धनात्मक (Rh+ve) हैं; जिनमें नहीं होता वे Rh ऋणात्मक (Rh-ve)।
Rh+ve रक्त के संपर्क में आने पर Rh-ve व्यक्ति Rh प्रतिजन के विरुद्ध प्रतिरक्षी बनाता है; इसीलिए रक्ताधान से पहले Rh समूह का भी मिलान किया जाना चाहिए।
यही प्रतिक्रिया गर्भावस्था में भी हो सकती है, जब Rh-ve माता के गर्भ में Rh+ve शिशु हो।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "आहार एवं पोषण, रक्त समूह एवं Rh कारक" सूचीबद्ध है।
NCERT इसका क्रम बताता है। पहली गर्भावस्था में अपरा (प्लेसेंटा) दोनों रक्तों को अलग रखती है। उस प्रसव के दौरान गर्भस्थ शिशु का थोड़ा Rh+ve रक्त माता तक पहुँच सकता है, जिससे माता Rh-विरोधी प्रतिरक्षी बनाना शुरू कर देती है।
बाद की गर्भावस्थाओं में ये प्रतिरक्षी Rh+ve गर्भस्थ शिशु के रक्त में रिसकर उसकी लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर सकते हैं। NCERT इसे एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस (erythroblastosis foetalis) कहता है।
मुख्य तथ्य
- NCERT: Rh असंगतता गर्भवती माता के Rh-ve रक्त और गर्भस्थ शिशु के Rh+ve रक्त के बीच देखी जाती है।
- NCERT: Rh प्रतिजन लगभग 80 प्रतिशत मनुष्यों (Rh+ve) की लाल रक्त कोशिकाओं पर होता है।
- NCERT: पहली गर्भावस्था में गर्भस्थ शिशु के Rh प्रतिजन माता के Rh-ve रक्त तक नहीं पहुँचते, क्योंकि अपरा दोनों रक्तों को भली-भाँति अलग रखती है।
- NCERT: बाद की गर्भावस्थाओं में माता के प्रतिरक्षी गर्भस्थ शिशु की लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर सकते हैं, जिससे गंभीर रक्ताल्पता और पीलिया, या मृत्यु हो सकती है; यही एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस है।
- NCERT: पहले शिशु के प्रसव के तुरंत बाद माता को Rh-विरोधी प्रतिरक्षी देकर इससे बचा जा सकता है।
NCERT कक्षा 11 जीवविज्ञान, शरीर द्रव तथा परिसंचरण से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- क्रम मायने रखता है: जोखिम वाली जोड़ी Rh हीन माता और Rh सहित गर्भस्थ शिशु की है, उलटी नहीं।
- पहला शिशु बनाम बाद के शिशु: NCERT के विवरण में अपरा पहली गर्भावस्था की रक्षा करती है; माता पहले प्रसव के दौरान संपर्क में आती है, और बाद के Rh+ve गर्भस्थ शिशुओं को हानि होती है।
- रोकथाम माता को दी जाती है, शिशु को नहीं: NCERT के अनुसार पहले प्रसव के तुरंत बाद Rh-विरोधी प्रतिरक्षी माता को दिए जाते हैं।
कोई प्रश्न माता और गर्भस्थ शिशु के Rh समूह देकर पूछ सकता है कि असंगतता कब उत्पन्न होती है, या इससे होने वाली स्थिति का नाम पूछ सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि इस स्थिति की रोकथाम कैसे होती है, या NCERT के विवरण में पहली गर्भावस्था क्यों सुरक्षित रहती है।
संबंधित PYQ
ब्लड ग्रुप (रक्त समूह) ‘O’ वाले व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं में निहित समूहजन (एग्लूटीनोजन) है :
- (1) A (ए) तथा B (बी) दोनों
- (2) केवल B (बी)
- (3) न तो A (ए) न ही B (बी)
- (4) केवल A (ए)
उत्तर(3)
लाल रक्त कोशिकाओं पर प्रतिजनों का वही विचार, ABO तंत्र के लिए। वह प्रश्न पूछता है कि रक्त समूह ‘O’ वाले व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं में कौन से समूहजन (एग्लूटीनोजन) निहित हैं (RPSC की कुंजी: विकल्प (3), न तो A (ए) न ही B (बी)); यहाँ का प्रश्न Rh प्रतिजन पर टिका है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटेलिस से बचाव के लिए Rh-विरोधी प्रतिरक्षी किसे दिए जाते हैं ?
- (a)पिता को, गर्भधारण से पहले
- (b)माता को, पहले शिशु के प्रसव के तुरंत बाद
- (c)पहले शिशु को, जन्म के तुरंत बाद
- (d)माता को, केवल दूसरे शिशु के जन्म के बाद
उत्तर(2) — NCERT के अनुसार पहले शिशु के प्रसव के तुरंत बाद माता को Rh-विरोधी प्रतिरक्षी देकर इस स्थिति से बचा जा सकता है। विकल्प (1) और (3) गलत व्यक्ति का उपचार करते हैं, और विकल्प (4) उस गर्भावस्था के बाद आता है जिसकी रक्षा उसे करनी थी। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
NCERT के अनुसार, लगभग कितने प्रतिशत मनुष्यों की लाल रक्त कोशिकाओं पर Rh प्रतिजन होता है ?
- (a)20 प्रतिशत
- (b)50 प्रतिशत
- (c)80 प्रतिशत
- (d)99 प्रतिशत
उत्तर(3) — NCERT के अनुसार Rh प्रतिजन अधिकांश, लगभग 80 प्रतिशत, मनुष्यों की लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर देखा जाता है। विकल्प (1) मोटे तौर पर उन लोगों का हिस्सा है जिनमें यह नहीं होता; विकल्प (2) और (4) NCERT के आँकड़े नहीं हैं।