ब्लड ग्रुप (रक्त समूह) ‘O’ वाले व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं में निहित समूहजन (एग्लूटीनोजन) है :
- (1)A (ए) तथा B (बी) दोनों
- (2)केवल B (बी)
- (3)न तो A (ए) न ही B (बी)
- (4)केवल A (ए)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), न तो A (ए) न ही B (बी).
समूहजन (एग्लूटीनोजन) लाल रक्त कोशिका की सतह पर स्थित एक प्रतिजन है। जब सीरम के प्रतिरक्षी उससे जुड़ते हैं, तो लाल रक्त कोशिकाएँ आपस में चिपककर गुच्छे बना लेती हैं, यानी उनका समूहन होता है। ABO तंत्र में समूहजन A और B प्रतिजन हैं।
NCBI Bookshelf की संदर्भ पुस्तक Blood Groups and Red Cell Antigens (लॉरा डीन, 2005) बताती है कि सामान्य रक्त प्रकार O वाले लोगों की कोशिकाओं पर न A प्रतिजन होता है, न B। इसलिए समूह O वाले व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं में न तो A (ए) न ही B (बी) होता है।
समूह का नाम भी यही दर्ज करता है। लैंडस्टाइनर के वर्गीकरण में एक तीसरे समूह की लाल कोशिकाओं ने ऐसी प्रतिक्रिया दी मानो उनमें A और B के गुण न हों। बाद में इसे जर्मन शब्द "Ohne" (अर्थ: बिना) के आधार पर "O" कहा गया।
समूह O के रक्त में जो होता है, वह सीरम में है: एंटी-A और एंटी-B, दोनों प्रतिरक्षी। प्रतिजन कोशिकाओं पर होते हैं; प्रतिरक्षी सीरम में।
याद रखने योग्य बात: समूह O की लाल कोशिकाओं पर न A प्रतिजन है न B, और समूह O के सीरम में एंटी-A और एंटी-B दोनों हैं; समूह AB इसका उलटा है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)A (ए) तथा B (बी) दोनों — जिन लाल कोशिकाओं पर A और B दोनों प्रतिजन हों, वे रक्त समूह AB की होती हैं, O की नहीं। डीन की संदर्भ पुस्तक AB समूह को ऐसी लाल कोशिकाओं वाला बताती है जिन पर A और B दोनों प्रतिजन होते हैं।
सीरम का स्वरूप भी उलटा है: समूह AB वाले व्यक्तियों के सीरम में न एंटी-A होता है न एंटी-B, जबकि समूह O के सीरम में दोनों होते हैं।
- (2)केवल B (बी) — केवल B प्रतिजन वाली लाल कोशिकाएँ रक्त समूह B की होती हैं।
प्रतिरक्षा तंत्र उन ABO प्रतिजनों के विरुद्ध प्रतिरक्षी बनाता है जो व्यक्ति की अपनी लाल कोशिकाओं पर नहीं होते। इसलिए समूह B वाले व्यक्ति के सीरम में एंटी-A प्रतिरक्षी होते हैं। समूह O वाले व्यक्ति की लाल कोशिकाओं पर A प्रतिजन की तरह B प्रतिजन भी नहीं होता।
- (4)केवल A (ए) — केवल A प्रतिजन वाली लाल कोशिकाएँ रक्त समूह A की होती हैं।
इसी नियम से समूह A वाले व्यक्ति के सीरम में एंटी-B प्रतिरक्षी होते हैं। समूह A के भी दो मुख्य लक्षणप्ररूप हैं, A1 और A2; डीन की संदर्भ पुस्तक के अनुसार A1 लाल कोशिकाओं पर A2 लाल कोशिकाओं से लगभग 5 गुना अधिक A प्रतिजन होता है। समूह O की कोशिकाओं पर A प्रतिजन बिल्कुल नहीं होता।
अवधारणा
ABO रक्त समूह कार्बोहाइड्रेट प्रतिजनों से तय होता है, जो लाल कोशिका की सतह से ऊपर निकली शृंखलाओं से जुड़े होते हैं। व्यक्ति का समूह इस पर निर्भर करता है कि उसकी लाल कोशिकाओं पर A और B में से कौन-से प्रतिजन हैं।
एक जीन, ABO लोकस, के तीन मुख्य युग्मविकल्पी हैं: A, B और O। A और B युग्मविकल्पी एक-एक एंजाइम बनाते हैं जो A या B प्रतिजन को पूरा करता है। O युग्मविकल्पी निष्क्रिय एंजाइम बनाता है, जिससे पूर्ववर्ती, यानी H प्रतिजन, अपरिवर्तित रह जाता है।
डीन की संदर्भ पुस्तक A और B को O पर सहप्रभावी रूप से वंशागत बताती है। बच्चे को प्रत्येक माता-पिता से तीन में से एक युग्मविकल्पी मिलता है, जिससे छह संभव जीनप्ररूप और चार रक्त समूह बनते हैं: A, B, AB और O।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "आहार एवं पोषण, रक्त समूह एवं Rh कारक" शामिल है। उस पंक्ति में नामित ABO और Rh, दोनों अलग-अलग रक्त समूह तंत्र हैं।
डीन की संदर्भ पुस्तक ABO प्रतिजनों को आधान चिकित्सा (ट्रांसफ्यूज़न मेडिसिन) में सर्वाधिक महत्व का बताती है। वह ABO प्रतिजनों को सभी रक्त समूह प्रतिजनों में सबसे अधिक प्रतिरक्षाजनक कहती है, और बताती है कि रक्ताधान से होने वाली अधिकांश मौतें ABO-असंगत रक्त चढ़ाने से होती हैं।
इस खोज की तिथि और श्रेय दोनों तय हैं। 1930 का शरीरक्रिया विज्ञान या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार कार्ल लैंडस्टाइनर को मानव रक्त समूहों की खोज के लिए मिला।
मुख्य तथ्य
- समूह O की लाल कोशिकाओं पर न A प्रतिजन होता है, न B (डीन, Blood Groups and Red Cell Antigens, NCBI, 2005)।
- एंटी-A समूह O और B वाले लोगों के सीरम में मिलता है; एंटी-B समूह O और A वाले लोगों के सीरम में।
- समूह AB की लाल कोशिकाओं पर A और B दोनों प्रतिजन होते हैं, और समूह AB के सीरम में न एंटी-A होता है न एंटी-B।
- O युग्मविकल्पी एक निष्क्रिय एंजाइम बनाता है जो पूर्ववर्ती H प्रतिजन को अपरिवर्तित छोड़ देता है; A और B, O पर सहप्रभावी रूप से वंशागत होते हैं।
- कार्ल लैंडस्टाइनर को मानव रक्त समूहों की खोज के लिए 1930 का शरीरक्रिया विज्ञान या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला।
स्रोत: एल. डीन, Blood Groups and Red Cell Antigens, NCBI Bookshelf (2005)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रतिजन और प्रतिरक्षी उलटी दिशा में चलते हैं। समूह O की लाल कोशिकाओं पर न A प्रतिजन है न B, पर समूह O के सीरम में एंटी-A और एंटी-B दोनों हैं। देखें कि प्रश्न कोशिकाओं के बारे में है या सीरम के।
- समूह AB, समूह O का दर्पण प्रतिबिंब है: कोशिकाओं पर दोनों प्रतिजन, सीरम में कोई प्रतिरक्षी नहीं।
- "O" कोई तीसरा प्रतिजन नहीं है। यह नाम जर्मन शब्द "Ohne" से आया है, जिसका अर्थ है बिना; O कोशिकाओं पर A या B की जगह अपरिवर्तित H पूर्ववर्ती होता है।
कोई प्रश्न किसी रक्त समूह का नाम देकर पूछ सकता है कि उसकी लाल कोशिकाओं पर कौन-से प्रतिजन हैं, जैसा यह प्रश्न करता है, या उसके सीरम में कौन-से प्रतिरक्षी हैं।
कोई प्रश्न दाता और ग्राही के समूह देकर यह भी पूछ सकता है कि रक्ताधान संगत है या नहीं।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
रक्त समूह 'O' वाले व्यक्ति के सीरम में होता है :
- (a)केवल एंटी-A
- (b)केवल एंटी-B
- (c)एंटी-A और एंटी-B दोनों
- (d)न एंटी-A न एंटी-B
उत्तर(3) — एंटी-A समूह O और B के सीरम में मिलता है, और एंटी-B समूह O और A के सीरम में, इसलिए समूह O के सीरम में दोनों होते हैं। विकल्प (1) समूह B पर, विकल्प (2) समूह A पर, और विकल्प (4) समूह AB पर लागू होता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं पर A और B दोनों प्रतिजन हैं, और उसके सीरम में न एंटी-A है न एंटी-B। उसका रक्त समूह है :
- (a)O
- (b)AB
- (c)A
- (d)B
उत्तर(2) — समूह AB की लाल कोशिकाओं पर A और B दोनों प्रतिजन होते हैं, और समूह AB के सीरम में कोई भी प्रतिरक्षी नहीं होता। समूह O की कोशिकाओं पर कोई प्रतिजन नहीं होता, समूह A की कोशिकाओं पर केवल A, और समूह B की कोशिकाओं पर केवल B।