ट्राइसोमी 21 को निम्न में से किस नाम से जाना जाता है?
- (1)इवांस सिंड्रोम
- (2)एडवर्ड्स सिंड्रोम
- (3)डाउन सिंड्रोम
- (4)ग्रे बेबी सिंड्रोम
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), डाउन सिंड्रोम.
NCERT की कक्षा 12 जीवविज्ञान पाठ्यपुस्तक का अध्याय वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत (Principles of Inheritance and Variation) बताता है कि इस आनुवंशिक विकार का कारण गुणसूत्र संख्या 21 की एक अतिरिक्त प्रति की उपस्थिति (21 की ट्राइसोमी) है। वह जिस विकार का वर्णन करता है, वह डाउन सिंड्रोम है।
ट्राइसोमी (त्रिगुणसूत्रता) का अर्थ है कि कोई गुणसूत्र सामान्य जोड़ी के बजाय तीन प्रतियों में उपस्थित है। NCERT आगे बताता है कि गुणसूत्र 21 की अतिरिक्त प्रति के कारण गुणसूत्रों की कुल संख्या 46 के बजाय 47 हो जाती है।
इसलिए ट्राइसोमी 21 को डाउन सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है।
याद रखने योग्य बात: ट्राइसोमी 21 डाउन सिंड्रोम है; ट्राइसोमी 18 एडवर्ड्स सिंड्रोम है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)इवांस सिंड्रोम — इवांस सिंड्रोम स्वप्रतिरक्षी (ऑटोइम्यून) रोग है, गुणसूत्रीय नहीं। विकिपीडिया का लेख (सितम्बर 2021 का संस्करण) इसे ऐसा रोग बताता है जिसमें व्यक्ति का प्रतिरक्षा तंत्र उसकी अपनी लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स पर आक्रमण करता है।
यह स्वप्रतिरक्षी हीमोलिटिक एनीमिया और प्रतिरक्षी थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पर्प्यूरा के संयोजन जैसा होता है। इसमें कोई अतिरिक्त गुणसूत्र शामिल नहीं है।
- (2)एडवर्ड्स सिंड्रोम — एडवर्ड्स सिंड्रोम भी एक ट्राइसोमी है, पर गुणसूत्र 18 की। विकिपीडिया का लेख (अक्टूबर 2021 का संस्करण) इसे ट्राइसोमी 18 कहता है, जो पूरे या आंशिक गुणसूत्र 18 की तीसरी प्रति से होता है।
वही लेख इसे जन्म के समय तीसरे गुणसूत्र के कारण होने वाली, डाउन सिंड्रोम के बाद दूसरी सबसे सामान्य स्थिति बताता है। संख्या, 18 या 21, ही दोनों को अलग करती है।
- (4)ग्रे बेबी सिंड्रोम — ग्रे बेबी सिंड्रोम आनुवंशिक विकार नहीं, दवा का दुष्प्रभाव है। विकिपीडिया का लेख (अगस्त 2021 का संस्करण) इसे नवजात शिशुओं, विशेषकर समय-पूर्व जन्मे शिशुओं, में प्रतिजैविक क्लोरैम्फेनिकॉल के जमा होने के बाद होने वाला दुर्लभ पर गंभीर प्रभाव बताता है।
लेख एक कारण यह देता है: शिशुओं में, विशेषकर समय-पूर्व जन्मे शिशुओं में, इस दवा को संसाधित करने वाला यकृत का एंज़ाइम तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता।
अवधारणा
NCERT बताता है कि मनुष्य की सामान्य कोशिका में 23 जोड़ियों में 46 गुणसूत्र होते हैं: 22 जोड़ी अलिंगसूत्र (ऑटोसोम) और एक जोड़ी लिंग गुणसूत्र।
यदि कोशिका विभाजन के दौरान क्रोमैटिड अलग न हो पाएँ, तो कोशिका में एक गुणसूत्र बढ़ या घट सकता है; NCERT इसे असुगुणिता (aneuploidy) कहता है। किसी एक गुणसूत्र की अतिरिक्त प्रति ट्राइसोमी है; एक गुणसूत्र का कम होना मोनोसोमी है।
NCERT के उदाहरण: डाउन सिंड्रोम (अतिरिक्त गुणसूत्र 21), क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (47, XXY) और टर्नर सिंड्रोम (45, XO)।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "स्वास्थ्य देखभाल; संक्रामक, असंक्रामक एवं पशुजन्य रोग" सूचीबद्ध है। गुणसूत्रीय विकार असंक्रामक होते हैं: ये किसी से लगते नहीं।
NCERT के अनुसार डाउन सिंड्रोम का पहला वर्णन लैंगडन डाउन ने 1866 में किया। वह इसके लक्षणों में छोटा कद, छोटा गोल सिर, खाँचेदार जीभ, आंशिक रूप से खुला मुँह, और विशिष्ट सिलवट वाली चौड़ी हथेली गिनाता है।
NCERT यह भी बताता है कि ऐसे गुणसूत्रीय विकारों का अध्ययन कैरियोटाइप के विश्लेषण से किया जा सकता है।
मुख्य तथ्य
- NCERT: डाउन सिंड्रोम गुणसूत्र 21 की एक अतिरिक्त प्रति (21 की ट्राइसोमी) से होता है, जिससे गुणसूत्र 47 हो जाते हैं।
- NCERT: डाउन सिंड्रोम का पहला वर्णन लैंगडन डाउन ने 1866 में किया।
- NCERT: क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम 47, XXY है; टर्नर सिंड्रोम 45, XO है, जिसमें स्त्रियों में एक X गुणसूत्र कम होता है।
- विकिपीडिया: एडवर्ड्स सिंड्रोम ट्राइसोमी 18 है, जो जन्म के समय डाउन सिंड्रोम के बाद दूसरी सबसे सामान्य ट्राइसोमी है।
- विकिपीडिया: इवांस सिंड्रोम लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स पर स्वप्रतिरक्षी आक्रमण है; ग्रे बेबी सिंड्रोम नवजात शिशुओं में क्लोरैम्फेनिकॉल के जमा होने के बाद होता है।
गुणसूत्रीय विकार NCERT कक्षा 12 जीवविज्ञान से; एडवर्ड्स, इवांस और ग्रे बेबी सिंड्रोम विकिपीडिया (2021 के संस्करण) से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- ट्राइसोमी 21 बनाम ट्राइसोमी 18: डाउन सिंड्रोम गुणसूत्र 21 का है; एडवर्ड्स सिंड्रोम गुणसूत्र 18 का।
- हर 'सिंड्रोम' गुणसूत्रीय नहीं होता: इवांस सिंड्रोम स्वप्रतिरक्षी है और ग्रे बेबी सिंड्रोम दवा का दुष्प्रभाव।
- अतिरिक्त अलिंगसूत्र बनाम अतिरिक्त लिंग गुणसूत्र: डाउन सिंड्रोम में एक गुणसूत्र 21 बढ़ता है, जबकि क्लाइनफेल्टर (47, XXY) में एक X।
कोई प्रश्न ट्राइसोमी 21 या 47, XXY जैसी गुणसूत्र संख्या या कैरियोटाइप देकर सिंड्रोम का नाम पूछ सकता है।
कोई प्रश्न किसी सिंड्रोम का नाम देकर यह भी पूछ सकता है कि वह गुणसूत्रीय है, स्वप्रतिरक्षी है या किसी दवा से होता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
NCERT के अनुसार, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम वाले व्यक्ति का कैरियोटाइप है –
- (a)45, XO
- (b)47, XXY
- (c)अतिरिक्त गुणसूत्र 21 के साथ 47
- (d)46, XY
उत्तर(2) — NCERT के अनुसार क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम X गुणसूत्र की एक अतिरिक्त प्रति से होता है, जिससे कैरियोटाइप 47, XXY बनता है। विकल्प (1) टर्नर सिंड्रोम है, विकल्प (3) डाउन सिंड्रोम है, और विकल्प (4) में कोई गुणसूत्र न अतिरिक्त है, न कम। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
नवजात शिशुओं में ग्रे बेबी सिंड्रोम किस प्रतिजैविक के जमा होने के बाद होता है ?
- (a)पेनिसिलिन
- (b)क्लोरैम्फेनिकॉल
- (c)स्ट्रेप्टोमाइसिन
- (d)टेट्रासाइक्लिन
उत्तर(2) — विकिपीडिया ग्रे बेबी सिंड्रोम को नवजात शिशुओं में क्लोरैम्फेनिकॉल के जमा होने के बाद होने वाला दुष्प्रभाव बताता है। विकल्प (1), (3) और (4) वह प्रतिजैविक नहीं हैं जिसका नाम लेख देता है।