आम में हम जो भाग खाते हैं वह है :
- (a)बाह्यफलभित्ति
- (b)मध्यफलभित्ति
- (c)अंत:फलभित्ति
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं
सही — B, मध्यफलभित्ति। आम, Mangifera indica, वनस्पति-विज्ञान की दृष्टि से दृपेट (drupe) अर्थात् गुठलीदार फल है, और हम जो भाग खाते हैं वह उसकी फलभित्ति की बीच वाली परत है। निषेचन के बाद फूल की अंडाशय-भित्ति पककर फलभित्ति (pericarp) बनती है, और गूदेदार फल में वही फलभित्ति तीन संकेंद्री परतों में विभेदित होती है : बाहर बाह्यफलभित्ति, बीच में मध्यफलभित्ति और सबसे भीतर अंतःफलभित्ति। आम को लंबाई में काटिए और तीनों एक साथ दिख जाती हैं — जो पतला छिलका आप उतारते हैं वह बाह्यफलभित्ति है, जो मोटा पीला, रसीला, मीठा गूदा है वह मध्यफलभित्ति है, और बीच में जो चपटी काष्ठीय गुठली है वह अंतःफलभित्ति है। खाई मध्यफलभित्ति ही जाती है — पकी हुई फल और गूदे के रूप में, कच्ची अचार, चटनी और अमचूर के रूप में। दो संरचनात्मक ब्योरे इस पहचान को केवल संभावित नहीं, निश्चित बना देते हैं। पहला, दृपेट का परिभाषक लक्षण यह है कि उसकी कठोर, काष्ठीय, लिग्निनयुक्त गुठली स्वयं अंडाशय-भित्ति से बनती है, इसलिए गुठली फल का ऊतक है, बीजावरण नहीं — उत्तर भारत की रसोई जिसे ‘गुठली’ कहती है वह अंतःफलभित्ति और उसके भीतर का बीज है, और आम में वह काष्ठीय अंतःफलभित्ति 4–7 सेंटीमीटर लंबे एक अकेले बीज के चारों ओर मात्र लगभग 1–2 मिलीमीटर मोटी होती है। दूसरा, दृपेट अस्फुटनशील होता है और सामान्यतः एक ही अंडप से बनता है, इसीलिए उसमें ठीक एक गुठली और एक बीज होता है, न कि बेरी की तरह गूदे में ढेर सारे बीज बिखरे हुए। यही तीन-परत वाली बनावट हर दृपेट में चलती है — कॉफ़ी, जैतून, बेर, खजूर, पिस्ता, काजू, और बादाम-खुबानी से लेकर आड़ू, आलूबुख़ारा और चेरी तक पूरा Prunus वंश — और फल-दर-फल केवल यह बदलता है कि गूदेदार कौन-सी परत होती है। आम में वह परत मध्यफलभित्ति है, और पेड़ लगाया ही इसीलिए जाता है। आम भारत, पाकिस्तान और फ़िलीपींस का राष्ट्रीय फल है; और आम का वृक्ष बांग्लादेश का राष्ट्रीय वृक्ष है।
- (a)बाह्यफलभित्ति — बाह्यफलभित्ति आम का पतला बाहरी छिलका है — हरा, और क़िस्म के अनुसार पकते-पकते पीला, लाल या क्रिमसन — और उसे छीलकर फेंक दिया जाता है, खाया नहीं जाता। वह निष्क्रिय भी नहीं है : आम के छिलके, दूध और पत्तियों के तेलों का संपर्क पादप-त्वचाशोथ (dermatitis) का सुपरिचित कारण है, और जो लोग पॉइज़न आइवी या पॉइज़न ओक के यूरुशिओल के प्रति पहले से संवेदनशील हो चुके हैं उनमें प्रति-अभिक्रिया हो सकती है, क्योंकि आम भी काजू और पिस्ता वाले उसी कुल Anacardiaceae का है।
- (c)अंत:फलभित्ति — अंतःफलभित्ति बीच में स्थित कठोर, रेशेदार, काष्ठीय गुठली है — आम में लगभग 1–2 मिलीमीटर मोटा लिग्निनयुक्त कवच, जो 4–7 सेंटीमीटर लंबे एक अकेले बीज को लपेटे रहता है। दृपेट में पथरीला होना ही अंतःफलभित्ति की परिभाषा है, इसलिए वह दृपेट की खाने योग्य परत कभी हो ही नहीं सकती। अभ्यर्थी इसे तब चुनते हैं जब वे इस फल को नीबू-वर्ग (citrus) से गड्डमड्ड कर देते हैं, जहाँ रसीला खाद्य गूदा सचमुच अंतःफलभित्ति के ऊतक से, रस-पुटिकाओं के रूप में, बनता है।
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं — यह विकल्प केवल उन फलों के लिए सही है जिनका खाद्य भाग फलभित्ति है ही नहीं — सेब या नाशपाती का गूदा, जो पुष्पासन (thalamus) है; लीची का पारभासी सफ़ेद गूदा, जो बीजचोल (aril) है; नारियल की सफ़ेद गिरी, जो भ्रूणपोष है; या काजू का ‘सेब’, जो फूला हुआ पुष्पवृंत है। आम इन अपवादों में नहीं है। उसका खाद्य गूदा सीधे-सीधे फलभित्ति की बीच वाली परत है, इसलिए नामित परत सही बैठती है और सर्व-समावेशी विकल्प विफल हो जाता है।
वनस्पति-विज्ञान में फल पके हुए अंडाशय से अधिक कुछ नहीं है, और बीज पका हुआ बीजांड। निषेचन हो जाने पर अंडाशय-भित्ति मोटी होकर फलभित्ति बन जाती है, जो पूरी फल-भित्ति है, और गूदेदार फलों में वही फलभित्ति तीन परतों में बँट जाती है — बाहर से भीतर की ओर बाह्यफलभित्ति, मध्यफलभित्ति और अंतःफलभित्ति। इन तीनों में से कौन-सी रसीली बनती है, यही एक गूदेदार फल-प्रकार को दूसरे से अलग करता है, और परीक्षा-प्रश्नों के एक बड़े वर्ग की पूरी सामग्री यही है। आम, नारियल या बेर जैसे दृपेट में मध्यफलभित्ति गूदेदार या रेशेदार होती है और अंतःफलभित्ति पथरीली, जिसके भीतर एक बीज। टमाटर, अंगूर, बैंगन या केले जैसी बेरी में मध्यफलभित्ति और अंतःफलभित्ति दोनों कोमल होती हैं और बीज गूदे में स्वतंत्र पड़े रहते हैं। हेस्पेरिडियम में — संतरा, नीबू, मौसमी — खाने योग्य रस-थैलियाँ अंतःफलभित्ति की वृद्धियाँ हैं, और छिलका बाह्यफलभित्ति तथा तेल-ग्रंथियों वाली मध्यफलभित्ति है। सेब या नाशपाती जैसे पोम में अंडाशय स्वयं छोटा रहता है और गूदा पुष्पासन से आता है, जिससे पोम कूट फल बन जाता है। फलभित्ति से बिलकुल बाहर के विशेष प्रसंग भी हैं : बीज के चारों ओर उगने वाला बीजचोल वही है जो लीची में खाया जाता है; भ्रूणपोष, अर्थात् बीज का अपना भोजन-भंडार, वही है जो नारियल में खाया जाता है; और काजू में गूदेदार ‘सेब’ फूला हुआ पुष्पवृंत है, जिसकी नोक पर असली फल, यानी नट, लगा रहता है।
चार में से तीन विकल्प तो बस फलभित्ति की तीन परतें हैं, बाहर से भीतर के क्रम में गिनाई हुईं, इसलिए प्रश्न घटकर इतना रह जाता है कि आम को बीच से काटने पर जो भाग आपके हाथ में होगा उसका नाम बताइए। मन ही मन यह कीजिए और क्रम असंदिग्ध है : छिलका, गूदा, गुठली — बाह्यफलभित्ति, मध्यफलभित्ति, अंतःफलभित्ति। भेद करने वाला अकेला तथ्य दृपेट की परिभाषा है : दृपेट में अंतःफलभित्ति परिभाषा से ही कठोर तथा लिग्निनयुक्त होती है, इसलिए आम को दृपेट मान लेते ही अंतःफलभित्ति अपने आप बाहर हो जाती है, बाह्यफलभित्ति स्पष्टतः फेंका जाने वाला छिलका है, और मध्यफलभित्ति बिना किसी और स्मरण के अपने आप बच जाती है। जाल दूसरे फलों से की गई उपमाओं में हैं। जिस अभ्यर्थी ने पाठ्यपुस्तक का मानक दृपेट, यानी नारियल, रट रखा है, उसे याद आता है कि उसकी मध्यफलभित्ति वही सूखी रेशेदार जटा है जिससे कॉयर बनता है और जिसे कोई नहीं खाता, और वह झिझक जाता है। जिसे लीची याद आती है, उसे याद आता है कि वहाँ खाद्य गूदा बीजचोल है और तीनों परतों में से कोई सही नहीं होगी, जिससे विकल्प (d) परिष्कृत लगने लगता है। दोनों उपमाएँ ग़लत फल के बारे में सच्चे कथन हैं। सुरक्षित आदत यह है कि ‘हम कौन-सा भाग खाते हैं’ वाले प्रश्नों का उत्तर किसी सामान्य नियम से नहीं, उसी फल की संरचना से दिया जाए, क्योंकि खाद्य भाग की वानस्पतिक पहचान प्रजाति-दर-प्रजाति बदलती है : आलू में तना-कंद, गाजर और शकरकंद में जड़, सेब में पुष्पासन, लीची में बीजचोल, नारियल में भ्रूणपोष, और आम में मध्यफलभित्ति।
- आम Anacardiaceae कुल का Mangifera indica है, वही कुल जिसमें काजू और पिस्ता भी हैं, और उसका फल दृपेट है : बाह्यफलभित्ति = छिलका, मध्यफलभित्ति = खाद्य गूदा, अंतःफलभित्ति = गुठली। आम भारत, पाकिस्तान और फ़िलीपींस का राष्ट्रीय फल है, और आम का वृक्ष बांग्लादेश का राष्ट्रीय वृक्ष।
- दृपेट का परिभाषक लक्षण यह है कि कठोर, काष्ठीय, लिग्निनयुक्त गुठली अंडाशय-भित्ति से बनती है — इसलिए गुठली फल का ऊतक है, बीजावरण नहीं। दृपेट अस्फुटनशील होते हैं और अधिकतर एक ही अंडप से बनते हैं; आम में काष्ठीय अंतःफलभित्ति लगभग 1–2 मिमी मोटी होती है और उसके भीतर का अकेला बीज 4–7 सेंटीमीटर लंबा।
- अन्य दृपेटों में कॉफ़ी, बेर, जैतून, खजूर तथा अधिकांश अन्य ताड़, पिस्ता, काजू और पूरा Prunus वंश — बादाम, खुबानी, चेरी, डैमसन, आड़ू, नेक्टरीन तथा आलूबुख़ारा — आते हैं। ब्लैकबेरी और रसभरी अनेक स्वतंत्र अंडपों वाले एक ही फूल से बने छोटे-छोटे दृपेटिकाओं के पुंज हैं।
- नारियल भी दृपेट है, पर उसकी मध्यफलभित्ति वही सूखी रेशेदार जटा है जिससे कॉयर मिलता है और उसकी अंतःफलभित्ति कठोर खोल है, इसलिए जो सफ़ेद गिरी खाई जाती है वह भ्रूणपोष है, फलभित्ति है ही नहीं — ‘दृपेट में हम मध्यफलभित्ति खाते हैं’ जैसे सरलीकृत नियम का यही मानक प्रति-उदाहरण है।
- आम की पत्तियों, तनों, दूध और छिलके के तेलों का संपर्क संवेदनशील लोगों में त्वचाशोथ पैदा कर सकता है, और जो पहले से यूरुशिओल — पॉइज़न आइवी, पॉइज़न ओक तथा पॉइज़न सुमैक का प्रत्यूर्जक — के प्रति संवेदनशील हो चुके हैं, उनमें प्रति-अभिक्रिया हो सकती है; इसमें मैंगिफ़ेरिन नामक यौगिक की भी भूमिका बताई जाती है। यह बाह्यफलभित्ति का रसायन है, और उसे छीलने का एक व्यावहारिक कारण भी।

- नारियल के, यानी पाठ्यपुस्तक वाले दृपेट के, आधार पर तर्क करना — उसकी मध्यफलभित्ति कॉयर देने वाली रेशेदार जटा है और उसकी खाद्य गिरी भ्रूणपोष है, इसलिए नारियल की उपमा आम के लिए सीधे ग़लत उत्तर तक ले जाती है
- ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ की ओर उन फलों के कारण बढ़ जाना जिनमें खाद्य भाग सचमुच फलभित्ति से बाहर होता है — लीची का बीजचोल, सेब का पुष्पासन, काजू-सेब का पुष्पवृंत
- आम की गुठली को ‘बीज’ मान लेना — गुठली अंतःफलभित्ति और बीज दोनों है, और दृपेट में वह गुठली अंडाशय-भित्ति से बना फल-ऊतक होती है
BPSC इसे एक सपाट पंक्ति के रूप में पूछता है, जिसमें विकल्प फलभित्ति की तीन परतें और चौथा सर्व-समावेशी होता है, इसलिए अंक पूरी तरह इस पर टिका है कि आप कटे हुए फल पर नाम चस्पाँ कर सकते हैं या नहीं; और वही साँचा आम की जगह नारियल, सेब तथा लीची रखकर लौटता रहता है। UPSC किसी ऊतक-परत का नाम कम ही पूछता है; वह वही विचार किसी असली पौधे पर पूछता है और अपेक्षा करता है कि आप अंग पहचानें — केसर पौधे के किस भाग से मिलता है (वर्तिकाग्र, 2009), या इनमें से कौन रूपांतरित तना है (आलू, 1996) — इसलिए खाद्य भागों को परिभाषा के बजाय पौधा-दर-पौधा तालिका के रूप में दोहराइए।
केसर मसाला बनाने में पौधे के निम्नलिखित में से किस भाग का उपयोग किया जाता है ?
- (a) पत्ती
- (b) दल (पंखुड़ी)
- (c) बाह्यदल
- (d) वर्तिकाग्र
उत्तर(d) वर्तिकाग्र
वही कौशल, दूसरे पौधे पर : उस वानस्पतिक भाग का नाम बताइए जो असल में काटा और उपयोग में लाया जाता है। केसर Crocus sativus के फूल का सूखा वर्तिकाग्र है, ठीक वैसे ही जैसे आम का खाया जाने वाला भाग उसकी फल-भित्ति की मध्यफलभित्ति है, और दोनों में ग़लत विकल्प उसी संरचना के पड़ोसी भाग हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक रूपांतरित तना है ?
- (a) गाजर
- (b) शकरकंद
- (c) नारियल
- (d) आलू
उत्तर(d) आलू
खाद्य पादप-भागों और उनकी असली पहचान पर यह साथी प्रश्न है — आलू रूपांतरित तना है जबकि गाजर और शकरकंद जड़ें हैं, और BPSC का यह पद ठीक उसी आदत पर अंक देता है : यह जानना कि हम जो भाग खाते हैं वह वनस्पति-विज्ञान की दृष्टि से है क्या, न कि थाली में वह दिखता कैसा है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
नारियल का खाद्य भाग क्या है ?
- (a)मध्यफलभित्ति
- (b)अंतःफलभित्ति
- (c)भ्रूणपोष
- (d)बाह्यफलभित्ति
उत्तर(c) भ्रूणपोष — नारियल दृपेट है जिसकी मध्यफलभित्ति वह सूखी रेशेदार जटा है जिससे कॉयर मिलता है और जिसकी अंतःफलभित्ति कठोर खोल है; भीतर की सफ़ेद गिरी तथा नारियल पानी भ्रूणपोष हैं, अर्थात् बीज का अपना भोजन-भंडार, फल-भित्ति का हिस्सा नहीं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
लीची में फल का जो रसीला सफ़ेद भाग खाया जाता है, वह है
- (a)मध्यफलभित्ति
- (b)बीजचोल (aril)
- (c)पुष्पासन
- (d)भ्रूणपोष
उत्तर(b) बीजचोल (aril) — Sapindaceae कुल की Litchi chinensis में गूदेदार पारभासी खाद्य भाग एक बीजचोल है जो अकेले गहरे भूरे अखाद्य बीज को घेरे रहता है; यह बीज से जुड़ी वृद्धि है, फलभित्ति की कोई परत नहीं।