ओजोन दिवस कब मनाया जाता है ?
- (a)16 सितंबर
- (b)5 जून
- (c)21 अप्रैल
- (d)5 दिसंबर
सही — A, 16 सितंबर। इस दिवस का पूरा नाम है ‘ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’, और तिथि सुविधा देखकर नहीं चुनी गई : संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1994 में संकल्प 49/114 के द्वारा इसकी घोषणा विशेष रूप से इसलिए की कि 16 सितंबर 1987 को ओजोन क्षयकारी पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर हुए थे। उस हस्ताक्षर के पीछे की शृंखला को एक ही कड़ी की तरह पकड़े रखना उपयोगी है। ओजोन परत के पतले पड़ने की वैज्ञानिक पुष्टि ने सरकारों को सहयोग की व्यवस्था बनाने को बाध्य किया, जिसने ओजोन परत के संरक्षण के लिए वियना अभिसमय का रूप लिया — 22 मार्च 1985 को 28 देशों ने उसे अंगीकृत किया और उस पर हस्ताक्षर किए; वह अभिसमय एक ढाँचा-संधि है, जो पक्षकारों को सहयोग तथा निगरानी के लिए बाध्य करती है पर कोई बाध्यकारी कटौती तय नहीं करती। बाध्यकारी दस्तावेज़ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल है, जो सितंबर 1987 में तैयार हुआ और 1 जनवरी 1989 से प्रभावी हुआ, और जो लगभग 100 रसायनों को नियंत्रित करता है — क्लोरोफ़्लोरोकार्बन, हैलॉन, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मिथाइल क्लोरोफ़ॉर्म, मिथाइल ब्रोमाइड और संक्रमणकालीन विकल्प के रूप में लाए गए हाइड्रोक्लोरोफ़्लोरोकार्बन — हर समूह की अपनी चरणबद्ध समाप्ति-समयसारणी के साथ, और ‘उपभोग’ की परिभाषा उत्पादन जोड़ आयात घटा निर्यात, तथा उसमें से सत्यापित विनाश घटाकर की गई है। जहाँ कोई विकल्प काम नहीं करता वहाँ कुछ अनिवार्य-उपयोग छूटें अब भी बची हैं, विशेषकर दमे के लिए मीटर्ड-डोज़ इन्हेलर और पनडुब्बियों तथा वायुयानों में हैलॉन अग्निशमन प्रणालियाँ। प्रोटोकॉल में बार-बार संशोधन हुए हैं : लंदन 1990, कोपेनहेगन 1992, वियना 1995, मॉन्ट्रियल 1997, बीजिंग 1999, मॉन्ट्रियल 2007, किगाली 2016 और क्वीटो 2018। यही तिथि एक दूसरी वर्षगाँठ भी ढोती है, जो परीक्षकों को पसंद है — 16 सितंबर 2009 को वियना अभिसमय और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल संयुक्त राष्ट्र के इतिहास की पहली ऐसी संधियाँ बनीं जिन्हें सार्वभौमिक अनुसमर्थन प्राप्त हुआ। 2025 का आयोजन इस प्रश्नपत्र के लिखे जाने के तीन दिन बाद पड़ा, ‘विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक’ विषय के साथ, और वियना अभिसमय के चालीस वर्ष पूरे होने के अवसर पर; विश्व मौसम विज्ञान संगठन का आकलन है कि ओजोन परत की पुनर्प्राप्ति पटरी पर है और ये ओजोन संधियाँ अतिरिक्त रूप से लगभग 0.5 °C वैश्विक तापन टालने में सहायक हैं।
- (b)5 जून — 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस है, संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख पर्यावरणीय जन-संपर्क दिवस, जिसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम चलाता है और जो 1970 के दशक से मनाया जा रहा है। यह सबसे प्रबल भ्रामक विकल्प ठीक इसीलिए है कि पर्यावरण की यही एक तिथि लगभग हर अभ्यर्थी को पता होती है, इसलिए जल्दबाज़ पाठक उसे प्रतिवर्त की तरह चुन लेता है। पर उसका विषय समग्र पर्यावरण है — प्लास्टिक, वायु प्रदूषण, पारितंत्र — और ओजोन परत या मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल से उसका कोई सम्बन्ध नहीं है।
- (c)21 अप्रैल — 21 अप्रैल भारत में राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है और उसमें पर्यावरण की कोई सामग्री है ही नहीं। ख़तरनाक इसे यह बनाता है कि वह ऐसी तिथि से केवल एक दिन दूर बैठा है जिसमें है : पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को है, जो पहली बार 22 अप्रैल 1970 को मनाया गया और अब 193 से अधिक देशों में समन्वित होता है। जिस अभ्यर्थी को आधा-अधूरा याद है कि ‘अप्रैल के अंत में कुछ पर्यावरण वाला है’, वह एक दिन की चूक को एक अंक की हानि और साथ में ऋणात्मक अंकन में बदल सकता है।
- (d)5 दिसंबर — 5 दिसंबर विश्व मृदा दिवस है, जिसे खाद्य एवं कृषि संगठन तथा संयुक्त राष्ट्र महासभा का समर्थन प्राप्त है और जो 2014 से ही आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है, थाईलैंड राजशाही के नेतृत्व में स्थापित — और इसीलिए उसका मुख्य सम्मान ‘किंग भूमिबोल विश्व मृदा दिवस पुरस्कार’ है। उसका सरोकार मृदा स्वास्थ्य, निम्नीकरण और खाद्य सुरक्षा से है : ज़मीन से, समतापमंडल से नहीं।
ओजोन O₃ है, और पृथ्वी की लगभग नब्बे प्रतिशत ओजोन समतापमंडल में बैठी है, लगभग 15 से 35 किलोमीटर ऊपर एक विरल पट्टी में, जहाँ वह उस पराबैंगनी-B विकिरण को सोख लेती है जो अन्यथा सतह तक पहुँचकर त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद तथा फसलों और प्लवक को क्षति पहुँचाता। उसकी मोटाई डॉबसन इकाइयों में बताई जाती है, और अंटार्कटिक का ‘ओजोन छिद्र’ परिपाटी से वह क्षेत्र है जहाँ स्तंभ 220 DU से नीचे चला जाता है। क्षति की क्रियाविधि उत्प्रेरकीय है। क्लोरोफ़्लोरोकार्बन निचले वायुमंडल में रासायनिक रूप से निष्क्रिय हैं, और ठीक इसीलिए उन्हें प्रशीतक, ऐरोसोल नोदक और फोम बनाने वाले कारक के रूप में अपनाया गया था; निष्क्रिय होने के कारण वे इतने लंबे समय तक टिके रहते हैं कि समतापमंडल तक बह जाएँ, जहाँ लघु-तरंग पराबैंगनी प्रकाश अंततः उन्हें तोड़कर क्लोरीन परमाणु मुक्त कर देता है। हर मुक्त परमाणु ओजोन को नष्ट करता है और फिर से बन जाता है, इसलिए एक ही परमाणु इस अभिक्रिया के अनेक चक्कर लगाता है। हैलॉन तथा मिथाइल ब्रोमाइड से निकलने वाला ब्रोमीन प्रति परमाणु क्लोरीन से भी अधिक विनाशकारी है। छिद्र अंटार्कटिक और मौसमी इसलिए है कि शीतकालीन ध्रुवीय भँवर वहाँ की वायु को अलग-थलग कर देता है और ध्रुवीय समतापमंडलीय बादलों को बनने देता है, जिनकी सतहें भंडार-रूप में पड़ी अक्रिय क्लोरीन को उन रूपों में बदल देती हैं जो वसंत का सूर्य लौटते ही ओजोन पर हमला करते हैं। परीक्षा के लिए दो भेद महत्त्वपूर्ण हैं। समतापमंडलीय ओजोन रक्षक है जबकि धरातल-स्तर की ओजोन प्रकाश-रासायनिक धूम-कोहरे में बनने वाला हानिकारक द्वितीयक प्रदूषक है। और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन क्षय से निपटता है, जबकि क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन से — वायुमंडल की जुड़ी हुई समस्याएँ, पर संधियाँ बिलकुल अलग।
चारों विकल्प असली आयोजन हैं, इसलिए किसी को ‘गढ़ा हुआ’ कहकर हटाया नहीं जा सकता; प्रश्न पूरी तरह इस पर है कि आपने हर तिथि को उसके विषय से जोड़ रखा है या नहीं। भरोसेमंद तरीक़ा यह है कि तिथि को कैलेंडर से नहीं, किसी घटना से बाँधिए : मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर हुए, महासभा ने 1994 में संकल्प 49/114 से उसी हस्ताक्षर की स्मृति में यह दिवस बनाया, इसलिए दिवस 16 सितंबर ही होगा। यही एक कड़ी निर्णायक तथ्य है, और वही आपको प्रश्न के बदले हुए रूप से भी बचाती है — जैसे यह कि दिवस किस संधि की स्मृति में है, या उसकी घोषणा किस वर्ष हुई। भ्रामक विकल्पों को भी इसी तरह साधिए और हर एक अनुमान के बजाय अलग तथ्य बन जाएगा : 5 जून समग्र पर्यावरण का है, 5 दिसंबर मृदा का, और 21 अप्रैल भारत की सिविल सेवाओं का। जाल की दो तहें हैं। स्पष्ट तह 5 जून है, क्योंकि पर्यावरण की यही तिथि अभ्यर्थी सबसे पहले मिलते हैं और वह सचमुच संयुक्त राष्ट्र का पर्यावरणीय आयोजन है, इसलिए जिसने ओजोन की तिथि अलग से नहीं सहेजी उसे वह सही लगती है। सूक्ष्म तह 21 अप्रैल है, जो 22 अप्रैल के पृथ्वी दिवस से केवल एक दिन पीछे बैठा है — इस तरह की ‘बाल-बाल चूकने वाली’ तिथियाँ राज्य लोक सेवा आयोगों के प्रश्नपत्रों की स्थायी विशेषता हैं, और सही उत्तर पर +1 तथा इसी पुस्तिका के निर्देश 9 के अनुसार ग़लत पर −1/3 के साथ, आत्मविश्वास से लगाया गया ग़लत अनुमान प्रश्न छोड़ देने से अधिक महँगा पड़ता है।
- 16 सितंबर ‘ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ है, जिसकी घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1994 में संकल्प 49/114 के द्वारा 16 सितंबर 1987 को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हुए हस्ताक्षर की स्मृति में की। इस परीक्षा के तीन दिन बाद पड़े 2025 के आयोजन का विषय था ‘विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक’।
- ओजोन परत के संरक्षण के लिए वियना अभिसमय 22 मार्च 1985 को 28 देशों द्वारा अंगीकृत तथा हस्ताक्षरित हुआ और वह केवल ढाँचा-संधि है; बाध्यकारी कटौतियाँ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के साथ आईं, जो 16 सितंबर 1987 को तय हुआ और 1 जनवरी 1989 से प्रभावी हुआ, और जो अनुबंध-वार चरणबद्ध समाप्ति-समयसारणियों के अंतर्गत लगभग 100 रसायनों को नियंत्रित करता है।
- 16 सितंबर 2009 को वियना अभिसमय और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल संयुक्त राष्ट्र के इतिहास की पहली ऐसी संधियाँ बनीं जिन्हें सार्वभौमिक अनुसमर्थन मिला — यही वह तथ्य है जिसके आधार पर प्रोटोकॉल को प्रायः अब तक का सबसे सफल पर्यावरणीय समझौता कहा जाता है।
- किगाली संशोधन पक्षकारों की 28वीं बैठक में 15 अक्टूबर 2016 को किगाली, रवांडा में तय हुआ और वह हाइड्रोफ़्लोरोकार्बन का चरणबद्ध ह्रास करता है — ऐसे विकल्प जो ओजोन का क्षय बिलकुल नहीं करते पर शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं। संशोधनों का प्रकाशित क्रम है लंदन 1990, कोपेनहेगन 1992, वियना 1995, मॉन्ट्रियल 1997, बीजिंग 1999, मॉन्ट्रियल 2007, किगाली 2016 और क्वीटो 2018 — अर्थात् क्वीटो किगाली के बाद आता है, पहले नहीं।
- HCFC की चरणबद्ध समाप्ति की अनुसूची 1992 में लाई गई और 2007 में तेज़ की गई : विकासशील देशों ने 2015 में उपभोग स्थिर किया, और पूर्ण समाप्ति विकसित देशों में 2030 तक तथा विकासशील देशों में 2040 तक होनी है। दमे के मीटर्ड-डोज़ इन्हेलर तथा पनडुब्बियों और वायुयानों में हैलॉन अग्निशमन के लिए अनिवार्य-उपयोग छूटें बनी हुई हैं।
उभारी गई पंक्ति ही उत्तर है। यह दिवस इसलिए है कि 16 सितंबर 1987 को जो हुआ वह हुआ, इसलिए जिसे संधि याद है उसे तिथि अलग से कभी याद नहीं रखनी पड़ती — और यही कड़ी इस प्रश्न के कठिन रूपों का भी उत्तर देती है कि पहले कौन-सा अभिसमय आया, प्रोटोकॉल कब प्रभावी हुआ, और किगाली असल में किसे नियंत्रित करता है।
- 5 जून इसलिए चुन लेना कि पर्यावरण की यही तिथि सबको पता है — विश्व पर्यावरण दिवस समग्र पर्यावरण का है और उसका ओजोन परत से कोई लेना-देना नहीं
- 21 अप्रैल को 22 अप्रैल से गड्डमड्ड कर देना, जो पृथ्वी दिवस है; एक दिन के अंतर वाली ‘बाल-बाल चूकने वाली’ तिथियाँ राज्य लोक सेवा आयोगों के प्रश्नपत्रों की स्थायी विशेषता हैं
- संधियों को आपस में मिला देना — मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन क्षयकारी पदार्थों के बारे में है, जबकि क्योटो प्रोटोकॉल तथा पेरिस समझौता जलवायु के दस्तावेज़ हैं, और किगाली संशोधन दोनों के बीच का पुल है
BPSC आयोजन-तिथियाँ कोरे एक-पंक्ति स्मरण की तरह पूछता है, चार तिथियाँ और एक अंक, इसलिए किसी गहरे अध्ययन के बजाय पूरे पर्यावरणीय कैलेंडर की एक तिथि-से-विषय तालिका ही कुशल दोहराव-इकाई है। UPSC ने यही तथ्य पूछा है, पर लपेटकर : 2001 में वह चार महत्त्वपूर्ण दिवसों को चार तिथियों से जोड़ने वाले मिलान-समूह के भीतर आया, और अपने आधुनिक रूप में UPSC तिथि को हटा ही देता है और उसकी जगह सार परखता है — कौन-सा समझौता ओजोन क्षयकारी पदार्थों को नियंत्रित करता है (2015), या अंटार्कटिका के ऊपर छिद्र क्यों बनता है (2011)।
सूची I को सूची II के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए : सूची I (महत्त्वपूर्ण दिवस) I. विश्व पर्यावरण दिवस II. विश्व वानिकी दिवस III. विश्व पर्यावास दिवस IV. विश्व ओजोन दिवस सूची II (तिथि) A) 20 मार्च B) 5 जून C) 16 सितंबर D) 3 अक्टूबर E) 10 दिसंबर
- (a) I-B, II-A, III-D, IV-E
- (b) I-A, II-B, III-D, IV-C
- (c) I-A, II-B, III-C, IV-D
- (d) I-B, II-A, III-D, IV-C
उत्तर(d) I-B, II-A, III-D, IV-C
वही तथ्य एक मिलान-समूह के भीतर — मद IV विश्व ओजोन दिवस को 16 सितंबर से जोड़ता है, ठीक वही जो BPSC का यह प्रश्न सीधे पूछता है, और वह समूह 5 जून वाले भ्रामक विकल्प को भी अपनी विश्व पर्यावरण दिवस वाली प्रविष्टि के रूप में साथ लिए चलता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा एक ओजोन क्षयकारी पदार्थों के उपयोग के नियंत्रण तथा चरणबद्ध समाप्ति के मुद्दे से सम्बद्ध है ?
- (a) ब्रेटन वुड्स सम्मेलन
- (b) मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
- (c) क्योटो प्रोटोकॉल
- (d) नागोया प्रोटोकॉल
उत्तर(b) मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
तिथि 16 सितंबर क्यों है, यही बात दूसरे सिरे से पूछी गई : UPSC यह परखता है कि ओजोन क्षयकारी पदार्थों को कौन-सा समझौता नियंत्रित और चरणबद्ध रूप से समाप्त करता है, और उसी प्रोटोकॉल पर 16 सितंबर 1987 को हुए हस्ताक्षर की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
ओजोन क्षयकारी पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल किस वर्ष प्रभावी हुआ ?
- (a)1985
- (b)1987
- (c)1989
- (d)1994
उत्तर(c) 1989 — प्रोटोकॉल पर 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर हुए और वह 1 जनवरी 1989 को प्रभावी हुआ। 1985 वियना अभिसमय का वर्ष है, और 1994 वह वर्ष जब महासभा ने ‘ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ की घोषणा की।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
2016 में अंगीकृत किगाली संशोधन ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की नियंत्रण-व्यवस्था में पदार्थों का कौन-सा समूह जोड़ा ?
- (a)क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC)
- (b)हाइड्रोक्लोरोफ़्लोरोकार्बन (HCFC)
- (c)हाइड्रोफ़्लोरोकार्बन (HFC)
- (d)हैलॉन
उत्तर(c) हाइड्रोफ़्लोरोकार्बन (HFC) — पक्षकारों की 28वीं बैठक में 15 अक्टूबर 2016 को किगाली, रवांडा में यह तय हुआ। HFC ओजोन का क्षय बिलकुल नहीं करते; उन्हें इसलिए लाया गया कि वे शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं और उन्हें CFC तथा HCFC के विकल्प के रूप में अपनाया गया था, जिन दोनों को प्रोटोकॉल पहले से नियंत्रित करता था।