भारत छोड़ो आँदोलन के दौरान बहुत से स्थानों पर 'राष्ट्रीय सरकारें' स्थापित की गई । निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है ?
- (a)प्रति सरकार – सतारा (महाराष्ट्र)
- (b)रैयती सरकार – खेड़ा (गुजरात)
- (c)जातीय सरकार – ताम्लुक (बंगाल)
- (d)प्रजा मण्डल – तालछड़ (उड़ीसा)
सही — B, रैयती सरकार – खेड़ा (गुजरात)। प्रश्न वह युग्म पूछता है जो सही नहीं है, इसलिए काम यह है कि शेष तीन की पुष्टि की जाए और फिर देखा जाए कि क्या बचता है। सतारा, ताम्लुक और तालचर उन स्थानों में से तीन हैं जिन्हें मानक विवरण भारत छोड़ो आंदोलन में समांतर सत्ता खड़ी होने के स्थल बताते हैं — बलिया एक और है — और इस प्रश्न में उनसे जुड़े तीनों नाम वही हैं जो वे विवरण देते हैं। खेड़ा बेमेल है। राष्ट्रीय आंदोलन में खेड़ा का स्थान 1918 का लगान सत्याग्रह है, जब फ़सल नष्ट हो जाने के बाद गांधी और वल्लभभाई पटेल ने किसानों का नेतृत्व करते हुए भू-राजस्व रोक लेने को कहा था — भारत छोड़ो से चौबीस वर्ष पहले, एक भिन्न प्रकार का अभियान, और ऐसा जिसने कोई समांतर प्रशासन खड़ा किया ही नहीं। 1942 में खेड़ा में किसी 'रैयती सरकार' का कोई अभिलेख नहीं है। नाम स्वयं इस गढ़ंत का सुराग है : रैयती का अर्थ बस 'काश्तकार से संबंधित' है, जो भू-राजस्व विधि का शब्द है और ठीक 1918 के खेड़ा आंदोलन की शब्दावली है, 1942 की किसी राष्ट्रीय सरकार की नहीं। जिस अभ्यर्थी को आधा-अधूरा याद है कि 'खेड़ा' और 'किसान' साथ आते हैं, उसे इस युग्म को स्वीकार करने की ओर धकेला जा सकता है, और यह विकल्प बना ही इसीलिए है। एक ईमानदार सावधानी : प्रश्नपत्र की कम मज़बूती से प्रलेखित मदों में से यह एक है। तीनों असली युग्म मानक साहित्य में पुष्ट किए जा सकते हैं; 'रैयती सरकार' पद कहीं भी बहुत कम प्रमाणित है, और जहाँ मिलता भी है वहाँ वह खेड़ा के बजाय बारडोली से जुड़ा दिखता है। यही कि यह नाम खेड़ा से नहीं बाँधा जा सकता, इसे बेमेल बनाता है, पर विद्यार्थी को यह जानना चाहिए कि यह मद (b) के विरुद्ध प्रमाण की अनुपस्थिति पर टिकी है, कहीं और किसी रैयती सरकार के सकारात्मक अभिलेख पर नहीं।
- (a)प्रति सरकार – सतारा (महाराष्ट्र) — सही सुमेलित है, इसलिए उत्तर नहीं। क्रांतिसिंह नाना पाटील (1900-1976) ने प्रति सरकार — शब्दशः 'प्रतिकारी सरकार' — की स्थापना की और सतारा ज़िले में समांतर प्रशासन चलाया। वे 1942 से 44 महीने भूमिगत रहे और मुख्यतः तासगाँव, खानापुर, वालवा तथा दक्षिण कराड तालुकों में काम किया; बाद में वे सतारा से लोकसभा में पहुँचे।
- (c)जातीय सरकार – ताम्लुक (बंगाल) — सही सुमेलित है, इसलिए उत्तर नहीं। ताम्रलिप्त जातीय सरकार 17 दिसम्बर 1942 को मिदनापुर के ताम्लुक और कांथी अनुमंडलों में बनी, जिसके सर्वाधिनायक सतीश चंद्र सामंत थे। उसने थाने, न्यायालय और एक राजस्व व्यवस्था चलाई, 'बिप्लबी' नाम का पत्र निकाला, विद्युत् वाहिनी नामक सशस्त्र शाखा खड़ी की, और 8 अगस्त 1944 को स्वयं गांधी के अनुरोध पर वह भंग कर दी गई।
- (d)प्रजा मण्डल – तालछड़ (उड़ीसा) — सही सुमेलित है, इसलिए उत्तर नहीं। तालचर एक देशी रियासत थी, और रियासती भारत में लोकप्रिय राजनीतिक संगठन काँग्रेस समिति के बजाय प्रजा मंडल कहलाता था। 1942 के आंदोलन में जहाँ-जहाँ मौजूदा प्रशासन हटा, उन विवरणों में तालचर का नाम सतारा और मिदनापुर के साथ आता है, और वहाँ यह काम प्रजा मंडल के माध्यम से हुआ।
भारत छोड़ो आंदोलन 9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ, बंबई में अखिल भारतीय काँग्रेस समिति द्वारा भारत छोड़ो संकल्प पारित करने के अगले ही दिन, और कुछ ही घंटों में पूरा काँग्रेस नेतृत्व जेल में था। यही सिर कलम कर देना आगे जो हुआ उसकी कुंजी है : किसी केंद्रीय दिशा-निर्देश के बिना आंदोलन तीव्र स्थानीय विद्रोहों की एक शृंखला बन गया, और गिनी-चुनी जगहों पर विद्रोहियों ने ब्रिटिश प्रशासन में केवल बाधा नहीं डाली, उसे हटाकर उसकी जगह ले ली। समांतर सरकार का अर्थ वास्तविक कार्य थे — राजस्व वसूलना, न्यायालय चलाना, पुलिस-व्यवस्था देखना, विवाद निपटाना, और कभी-कभी एक सशस्त्र स्वयंसेवक बल रखना। राज्य की प्रतिक्रिया का पैमाना बताता है कि यह कितना गंभीर था : व्यवस्था बहाल करने के लिए भारत सरकार ने सेना की सत्तावन बटालियनें झोंकीं, वे सैनिक जिनकी युद्ध में सख़्त ज़रूरत थी। उल्लेखनीय है कि इस विद्रोह में हिंसा का सर्वाधिक स्तर बिहार में देखा गया।
'सही सुमेलित नहीं है' वाले प्रश्न को खोजबीन के बजाय पुष्टि से हल कीजिए। इन चार में से तीन युग्म मानक पाठ्यपुस्तकीय सामग्री हैं और जल्दी निपटाए जा सकते हैं — सतारा के साथ नाना पाटील की प्रति सरकार, ताम्लुक के साथ जातीय सरकार, तालचर के साथ प्रजा मंडल। जो बचे वही उत्तर है, और यहाँ बचता है खेड़ा। निर्णायक कसौटी कालक्रम की है : पूछिए कि हर नामित स्थान किसके लिए प्रसिद्ध है और किस दशक में। सतारा, ताम्लुक, तालचर और बलिया सब 1942 के हैं। खेड़ा 1918 का है, चंपारण 1917 का, बारडोली 1928 का — वे महान किसान सत्याग्रह, जो पाठ्यक्रम का बिलकुल अलग अध्याय हैं। भारत छोड़ो का जो भी प्रश्न सूची में कोई सत्याग्रह-ज़िला घुसा देता है वह ठीक इसी प्रत्युत्तर की परीक्षा ले रहा होता है, और खेड़ा इसके लिए सबसे अधिक इस्तेमाल होता है, क्योंकि 'किसानों की शिकायत' का जुड़ाव सहज लगता है।
- भारत छोड़ो 9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ, बंबई में AICC के भारत छोड़ो संकल्प के अगले दिन; काँग्रेस नेतृत्व तत्काल गिरफ़्तार कर लिया गया, जिससे आंदोलन नेतृत्वहीन और स्थानीय हो गया।
- ताम्रलिप्त जातीय सरकार : 17 दिसम्बर 1942 को मिदनापुर के ताम्लुक और कांथी अनुमंडलों में सतीश चंद्र सामंत के नेतृत्व में गठित; 8 अगस्त 1944 को गांधी के अनुरोध पर भंग।
- सतारा की प्रति सरकार क्रांतिसिंह नाना पाटील ने स्थापित की, जो 1942 के बाद 44 महीने भूमिगत रहे और बाद में लोकसभा में सतारा का प्रतिनिधित्व किया।
- भारत सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए सेना की 57 बटालियनें तैनात कीं, और हिंसा का सर्वाधिक स्तर बिहार में रहा।
- खेड़ा का संबंध 1918 के उस लगान सत्याग्रह से है जिसका नेतृत्व गांधी और वल्लभभाई पटेल ने किया, 1942 की किसी समांतर सरकार से नहीं।

- खेड़ा को भारत छोड़ो का केंद्र मान लेना; वह 1918 का है, और दोनों अध्यायों के बीच लगभग चौथाई सदी का अंतर है
- जिस युग्म की पुष्टि हो सके उसे उत्तर बना देना, उसके बजाय जिसकी न हो सके — 'सही सुमेलित नहीं' वाला प्रश्न उन्मूलन से हल होता है, और जो बचे वही उत्तर है
- यह मान लेना कि हर समांतर सरकार काँग्रेस चला रही थी; तालचर रियासत में यह काम प्रजा मंडल के माध्यम से हुआ, जो रियासतों का अपना लोकप्रिय संगठन-रूप था
BPSC को 1942 की समांतर सरकारों के लिए 'कौन-सा सही सुमेलित नहीं है' वाला प्रारूप पसंद है, और वह उसमें प्रायः कोई प्रसिद्ध सत्याग्रह-ज़िला बो देता है जिसका 1942 से कोई लेना-देना नहीं। UPSC इनका सुमेलन कम कराता है; वह पूछता है कि किसी नामित विद्रोह का नेतृत्व किसने किया, कोई नेता किसके लिए याद किया जाता है, या आंदोलन के बारे में कौन-सा कथन सही है — इसलिए वहाँ नाम से अधिक व्यक्ति-स्थान-वर्ष की त्रयी मायने रखती है।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अरुणा आसफ़ अली किस आंदोलन में भूमिगत गतिविधियों की एक प्रमुख महिला संगठक थीं ?
- (a) सविनय अवज्ञा आंदोलन
- (b) असहयोग आंदोलन
- (c) भारत छोड़ो आंदोलन
- (d) स्वदेशी आंदोलन
उत्तर(c) भारत छोड़ो आंदोलन
1942 का वही लक्षण दूसरे छोर से — 9 अगस्त को पूरा नेतृत्व जेल में चले जाने पर आंदोलन भूमिगत संगठकों और स्थानीय समितियों के हाथ आ गया, और यही वह रिक्तता है जिसने सतारा, ताम्लुक तथा तालचर को अपनी सरकारें खड़ी करने दिया।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : भारत छोड़ो आंदोलन शुरू करने की पूर्वसंध्या पर महात्मा गांधी ने 1. सरकारी कर्मचारियों से त्यागपत्र देने को कहा। 2. सैनिकों से अपने पद छोड़ देने को कहा। 3. देशी रियासतों के राजाओं से अपनी ही प्रजा की प्रभुसत्ता स्वीकार करने को कहा। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) 1 और 2
- (b) 2 और 3
- (c) केवल 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(c) केवल 3
राजाओं से अपनी ही प्रजा की प्रभुसत्ता स्वीकार करने का गांधी का आह्वान वही सूत्र है जो तालचर तक जाता है — एक देशी रियासत, जहाँ 1942 में प्रशासन काँग्रेस समिति ने नहीं, प्रजा मंडल ने सँभाला।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार के नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बिहार के कौन-से प्रमुख नेता 'बिहार केसरी' के नाम से जाने जाते थे और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए ?
- (a) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- (b) श्रीकृष्ण सिंह
- (c) अनुग्रह नारायण सिन्हा
- (d) राममनोहर लोहिया
उत्तर(b) श्रीकृष्ण सिंह
आयोग ने एक वर्ष पहले उसी आंदोलन पर बिहार वाले छोर से प्रश्न पूछा था — यह याद दिलाता है कि जिस प्रांत में 1942 का विद्रोह सर्वाधिक हिंसक रहा, BPSC उसी को विस्तार से जानने की अपेक्षा रखता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत छोड़ो आंदोलन की समांतर सरकार, ताम्रलिप्त जातीय सरकार, किस क्षेत्र में कार्यरत थी ?
- (a)बंबई प्रेसीडेंसी का सतारा ज़िला
- (b)मिदनापुर के ताम्लुक और कांथी अनुमंडल
- (c)संयुक्त प्रांत का बलिया ज़िला
- (d)उड़ीसा की तालचर रियासत
उत्तर(b) मिदनापुर के ताम्लुक और कांथी अनुमंडल — 17 दिसम्बर 1942 को सतीश चंद्र सामंत के नेतृत्व में गठित और 8 अगस्त 1944 को गांधी के अनुरोध पर भंग।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1918 का खेड़ा सत्याग्रह किस मुद्दे पर चलाया गया था ?
- (a)नील बागान मालिकों की तिनकठिया व्यवस्था
- (b)फ़सल नष्ट हो जाने के बाद भू-राजस्व में छूट की माँग
- (c)भू-राजस्व निर्धारण में 22 प्रतिशत की वृद्धि
- (d)युद्ध-प्रयास के लिए किसानों की भर्ती
उत्तर(b) फ़सल नष्ट हो जाने के बाद भू-राजस्व में छूट की माँग — गांधी और वल्लभभाई पटेल ने खेड़ा के किसानों का नेतृत्व किया; (a) चंपारण 1917 का वर्णन है और (c) बारडोली 1928 का।