सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक पदार्थों को तोड़ने की प्रक्रिया कहलाती है
- (a)प्रकाश संश्लेषण
- (b)श्वसन
- (c)किण्वन
- (d)अपघटन
सही — (d) अपघटन। अपघटन की परिभाषा है मृत जटिल कार्बनिक पदार्थ — गिरी हुई पत्तियों, मृत जड़ों, छाल, जंतु-अवशेषों तथा मल के अपरद — का अपघटकों द्वारा सरल अकार्बनिक पदार्थों में टूटना, और ये अपघटक मुख्यतः जीवाणु तथा कवक होते हैं जिन्हें सामूहिक रूप से मृतजीवी (सैप्रोट्रॉफ़) कहते हैं। प्रश्न शब्दशः यही कहता है: कार्बनिक पदार्थ, तोड़ना, सूक्ष्मजीवों द्वारा। पारिस्थितिकी इसे एक घटना नहीं, पाँच चरणों का क्रम मानती है। खंडन, जिसमें केंचुए जैसे अपरदभक्षी अपरद को छोटे टुकड़ों में तोड़कर उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल बहुत बढ़ा देते हैं; निक्षालन, जिसमें जल में घुलनशील पोषक तत्व मिट्टी में रिसकर कूड़े-आवरण से निकल जाते हैं; अपचय, जिसमें जीवाणुओं और कवकों के एंज़ाइम इन टुकड़ों को सरल यौगिकों में तोड़ते हैं; ह्यूमसीकरण, जिससे गहरे रंग का, कोलॉइडी और अत्यंत प्रतिरोधी पदार्थ ह्यूमस जमा होता है, जो मिट्टी के पोषक-भंडार का काम करता है; और खनिजीकरण, जिसमें अंततः ह्यूमस टूटकर अकार्बनिक पोषक — नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस, पोटैशियम — फिर मिट्टी में छोड़ देता है ताकि पौधे उन्हें दोबारा ले सकें। पूरी प्रक्रिया ऑक्सीजन माँगती है और उसकी दर तापमान, मृदा-नमी तथा कूड़े-आवरण की रासायनिक गुणवत्ता से तय होती है: गर्म और नम परिस्थितियाँ इसे तेज़ करती हैं, जबकि लिग्निन- और काइटिन-बहुल अपरद इसे धीमा कर देता है और नाइट्रोजन-बहुल, शर्करा-बहुल पदार्थ इसे तेज़। इस चरण के बिना कार्बन और नाइट्रोजन चक्र बस रुक जाते, क्योंकि मृत ऊतक में बंद हर पोषक वहीं बंद रह जाता।
- (a)प्रकाश संश्लेषण — वर्णित प्रक्रिया का ठीक उल्टा। हरे पौधे प्रकाश ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड और जल से कार्बनिक पदार्थ बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं — यह संश्लेषण है, विघटन नहीं, और इसे स्वपोषी करते हैं, मृत पदार्थ पर काम करने वाले सूक्ष्मजीव नहीं।
- (b)श्वसन — यह भी एक विघटन है, इसीलिए लुभाता है, पर यह किसी जीवित जीव की अपनी कोशिकाओं के भीतर होता है, जहाँ वह अपने ही भोजन का ऑक्सीकरण करके ए० टी० पी० के रूप में ऊर्जा छोड़ता है। अपघटन मृत पदार्थ पर, अपघटक के शरीर के बाहर, उसके स्रावित एंज़ाइमों के ज़रिये होता है। श्वसन अपघटन के भीतर एक चरण है, उसका पर्याय नहीं।
- (c)किण्वन — यह एक विशिष्ट अवायवीय सूक्ष्मजैविक मार्ग है — यीस्ट का शर्करा को इथेनॉल तथा कार्बन डाइऑक्साइड में बदलना, या लैक्टिक अम्ल जीवाणुओं का दूध को जमाकर दही बनाना। यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीवों द्वारा एक विशेष प्रकार के पदार्थ को तोड़ने का एक सँकरा रास्ता है, कार्बनिक पदार्थ के टूटने का सामान्य नाम नहीं।
हर पारितंत्र ऊर्जा के एकतरफ़ा प्रवाह और पोषक तत्वों के बंद चक्र पर चलता है, और पोषक-चक्र को बंद करने वाला काम अपघटन ही करता है। उत्पादक ऊर्जा स्थिर करते हैं, उपभोक्ता उसे खाद्य शृंखला में आगे बढ़ाते हैं, और अपघटक पदार्थ लौटा देते हैं। यह काम करने वाले जीव मृतजीवी हैं — कवक, जो अम्लीय, काष्ठीय और लिग्निन-बहुल कूड़े-आवरण में हावी रहते हैं, तथा जीवाणु, जो नाइट्रोजन-बहुल और अधिक नम माध्यमों में हावी रहते हैं — और दोनों मृत पदार्थ पर एंज़ाइम छोड़कर घुले हुए उत्पाद सोख लेते हैं, जिसे बाह्यकोशिकीय पाचन कहते हैं। इनके साथ-साथ केंचुए, दीमक और गोजर जैसे अपरदभक्षी काम करते हैं, जो रासायनिक अपघटन नहीं करते बल्कि कूड़े को टुकड़ों में तोड़कर सूक्ष्मजीवों का काम तेज़ कर देते हैं; केंचुए की इसी भूमिका के कारण डार्विन ने उसे प्रकृति का हल कहा था। व्यवहार में दर ही सब कुछ है: गर्म, नम उष्णकटिबंधीय वन में कूड़ा-आवरण एक वर्ष के भीतर ग़ायब हो सकता है, जबकि ठंडी या जलमग्न, ऑक्सीजन-विहीन परिस्थितियों में अपघटन इतना धीमा पड़ जाता है कि कार्बनिक पदार्थ जमा होने लगता है — इसी तरह पीट दलदल बनते हैं और इसी तरह कोयले की परतें बननी शुरू हुईं।
यह परिभाषा वाला प्रश्न है जिसमें तीन निकट-संबंधी प्रक्रियाएँ भटकाने के लिए रखी हैं, और सुरक्षित विधि यह है कि हर विकल्प को प्रश्न की दो विशेषताओं पर एक साथ परखा जाए: वह विघटन होना चाहिए, और उसे सूक्ष्मजीवों द्वारा ऐसे कार्बनिक पदार्थ पर किया जाना चाहिए जो उनका अपना शरीर न हो। प्रकाश संश्लेषण पहली कसौटी पर विफल है — वह तोड़ता नहीं, बनाता है। श्वसन विघटन वाली कसौटी पार कर लेता है पर दूसरी पर विफल है, क्योंकि जीव अपना भोजन अपनी ही कोशिकाओं के भीतर श्वसित करता है। किण्वन दोनों कसौटियाँ पार करता है पर बहुत सँकरा है: वह सामान्य प्रक्रिया के बजाय एक अवायवीय मार्ग का नाम है, और परीक्षक का व्यापक वाक्यांश 'कार्बनिक पदार्थ' यही संकेत देता है कि व्यापक पद ही चाहिए। प्रश्न जो कुछ कहता है, उस सब पर केवल अपघटन खरा उतरता है। यही आदत — प्रश्न को केवल कुंजी-शब्दों के लिए नहीं, उसके दायरे के लिए पढ़ना — उस अभ्यर्थी को अलग करती है जो सामान्य पद और विशेष स्थिति में भेद कर सकता है, और जीव विज्ञान के परिभाषा-प्रश्न सबसे अधिक इसी तरह गढ़े जाते हैं।
- अपघटन मृत कार्बनिक पदार्थ, जिसे अपरद कहते हैं, का अपघटकों — जीवाणु और कवक, सामूहिक रूप से मृतजीवी — द्वारा सरल अकार्बनिक पदार्थों में टूटना है
- इसके पाँच चरण हैं खंडन, निक्षालन, अपचय, ह्यूमसीकरण और खनिजीकरण
- ह्यूमस, ह्यूमसीकरण का गहरे रंग का, कोलॉइडी और अत्यंत प्रतिरोधी उत्पाद है और मिट्टी के पोषक-भंडार का काम करता है; खनिजीकरण अंततः उन्हें अकार्बनिक आयनों के रूप में छोड़ता है
- अपघटन ऑक्सीजन माँगने वाली प्रक्रिया है; गर्मी और नमी इसे तेज़ करती हैं तथा लिग्निन- और काइटिन-बहुल कूड़ा-आवरण इसे धीमा करता है, जबकि नाइट्रोजन-बहुल अपरद तेज़ी से अपघटित होता है
- केंचुए, दीमक और गोजर जैसे अपरदभक्षी कूड़े को टुकड़ों में तोड़कर सूक्ष्मजैविक क्रिया तेज़ करते हैं, पर रासायनिक विघटन स्वयं जीवाणु और कवक करते हैं
- श्वसन किसी जीव के अपने भोजन का अंतःकोशिकीय ऑक्सीकरण है; किण्वन एक विशिष्ट अवायवीय मार्ग है, जैसे यीस्ट द्वारा शर्करा का इथेनॉल तथा कार्बन डाइऑक्साइड में बदलना

- श्वसन इसलिए चुन लेना कि वह भी विघटन है — वह जीवित कोशिका के भीतर जीव के अपने भोजन पर होता है
- किण्वन चुन लेना, जो सामान्य प्रक्रिया के बजाय एक अवायवीय मार्ग है जबकि प्रश्न सामान्य प्रक्रिया का वर्णन कर रहा है
- केंचुए जैसे अपरदभक्षियों को अपघटक मान लेना; वे कूड़ा तोड़ते हैं, जबकि रासायनिक काम जीवाणु और कवक करते हैं
बी० पी० एस० सी० विद्यालयी स्तर के जीव विज्ञान को एक-पंक्ति की परिभाषा के रूप में पूछता है और भटकाने के लिए तीन निकट-संबंधी प्रक्रियाएँ रख देता है, इसलिए काम आने वाला अनुशासन यह है कि हर पद को एक सटीक वाक्य में कह पाना आए, केवल धुँधले ढंग से पहचान लेना नहीं। यू० पी० एस० सी० उसी सामग्री को पारिस्थितिकी में आगे ले जाता है — किस प्रकार के जीव अपघटक गिने जाते हैं, जैव-शौचालय में कार्बनिक पदार्थ का क्या होता है, उत्प्रवाह समुद्री उत्पादकता क्यों बढ़ाता है — इसलिए यह संकल्पना केवल नाम नहीं, प्रयोग-योग्य होनी चाहिए।
पारितंत्रों में खाद्य शृंखलाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस प्रकार के जीव को अपघटक जीव कहा जाता है? 1. विषाणु 2. कवक 3. जीवाणु नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(b) केवल 2 और 3
वही प्रक्रिया उसके कर्ताओं के रास्ते — कवक और जीवाणु ही अपघटक हैं, और विषाणु इसलिए बाहर हैं कि उनका अपना कोई उपापचय ही नहीं जिससे वे कुछ पचा सकें।
भारतीय रेल द्वारा प्रयुक्त जैव-शौचालयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैव-शौचालयों में मानव अपशिष्ट का अपघटन एक कवकीय निवेश (इनॉकुलम) से आरंभ होता है। 2. इस अपघटन में केवल अमोनिया और जलवाष्प ही अंतिम उत्पाद हैं, जो वायुमंडल में छोड़े जाते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1, न ही 2
उत्तर(d) न तो 1, न ही 2
अपघटन को अभियांत्रिकी में काम पर लगाया गया, और यह उन्हीं भेदों पर टिका है: पाचन वास्तव में कौन-से सूक्ष्मजीव करते हैं, और कार्बनिक पदार्थ के टूटने से निकलता क्या है।
माइकोराइज़ा सहजीवन में पौधे को लाभ है :
- (a) सुरक्षा
- (b) भोजन
- (c) (A) और (B) दोनों
- (d) खनिज अवशोषण में वृद्धि तथा रोगों से सुरक्षा
उत्तर(d) खनिज अवशोषण में वृद्धि तथा रोगों से सुरक्षा
मृदा-कवक जो करते हैं उसका दूसरा पक्ष — यहाँ वे मृत पदार्थ से पोषक तत्व छोड़ते हैं, वहाँ वे उन्हीं पोषकों को जीवित जड़ों तक पहुँचाते हैं, और बी० पी० एस० सी० ने दूसरा आधा हिस्सा ठीक अगले प्रश्नपत्र में पूछ लिया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अपघटन के चरणों का सही अनुक्रम निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
- (a)अपचय → खंडन → निक्षालन → ह्यूमसीकरण → खनिजीकरण
- (b)खंडन → निक्षालन → अपचय → ह्यूमसीकरण → खनिजीकरण
- (c)निक्षालन → खंडन → ह्यूमसीकरण → अपचय → खनिजीकरण
- (d)खंडन → अपचय → खनिजीकरण → निक्षालन → ह्यूमसीकरण
उत्तर(b) खंडन → निक्षालन → अपचय → ह्यूमसीकरण → खनिजीकरण — पहले अपरद छोटे टुकड़ों में टूटता है, घुलनशील पोषक नीचे बह जाते हैं, शेष को एंज़ाइम तोड़ते हैं, ह्यूमस जमा होता है और अंत में उसका खनिजीकरण होकर अकार्बनिक पोषक निकलते हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी पारितंत्र में अपघटन निम्नलिखित में से किन परिस्थितियों में सबसे धीमा होता है ?
- (a)गर्म और नम
- (b)ठंडी और जलमग्न
- (c)गर्म और अच्छी तरह वायुयुक्त
- (d)नाइट्रोजन और शर्करा से भरपूर कूड़ा-आवरण
उत्तर(b) ठंडी और जलमग्न — कम तापमान और ऑक्सीजन की कमी, दोनों सूक्ष्मजैविक क्रिया दबा देते हैं, और इसीलिए ऐसी जगहों पर कार्बनिक पदार्थ पीट के रूप में जमा होता जाता है।