उपयुक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
नीतिका हमारे लिए सामाजिक मानदंड उपस्थित करती है क्योंकि यह उचित और अनुचित का ज्ञान कराती है। नीतिक नियमों में चरित्र-निर्माण की महत्ता पर ज़ोर दिया जाता है और वे मानवीय कर्त्तव्य की भावना से प्रेरित होकर व्यवहार कराते हैं। नीतिका महत्त्व इसलिए नहीं मानी जाती कि पूर्वज भी ऐसा मानते आए हैं, बल्कि वह इसलिए मानी जाती है क्योंकि इसके पीछे न्याय, पवित्रता, विवेकता एवं दया होती है। नीतिका आत्म-सेवा से प्रेरित होती है। यह धर्मों की दार्शनिक नहीं होती, किंतु नैतिकता का आधार मनुष्य के जीवन-मूल्य होते हैं जिनके अनुसार वे कर्मों का निर्माण कर लेते हैं। नैतिकता स्त्रियों व जनजातियों की अपेक्ष स्थायित्व लिए रहती है। नैतिकता का एक और अर्थ हो सकता है, जिसका संबंध किसी समूह-विशेष से होता है, जैसे डॉक्टरों की नैतिकता, प्राध्यापकों की नैतिकता आदि। यह आचार-शास्त्र के निकट है। धर्म अक्सर नैतिक सिद्धांतों का समर्थन करता है। नैतिक सिद्धांतों का परिलक्षण धर्म के भय के कारण होता है, क्योंकि बहुत से नीति-नियमों की उत्पत्ति धर्म से बतलाई गई है। भारत में कर्म, पुनर्जन्म एवं स्वर्ग-नर्क की अवधारणाएँ धर्म द्वारा प्रतिपादित हैं। ये अवधारणाएँ सुव्यवस्थित सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होती हैं। यदि व्यक्ति नैतिकता का पालन नहीं करता है तो उसे अपराधी माना जाता है, जबकि धर्म का पालन न करने पर वह पाप का भागी बनता है। आवश्यक नहीं कि सभी प्रकार के नैतिक व्यवहारों की प्रकृति धार्मिक हो।