निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर निर्देशानुसार उत्तर लिखिए—
"विज्ञानियों का मानना है कि रसायनों ने भाषा को बहुत देर तक दबा कर रखा है; शब्दों ने अपने सही अर्थ खो दिये थे – पत्थर, लोहा, चमड़ा, कागज़, ताम्र, अधिकार, शासन, समय जैसे शब्द अपना असली अर्थ खोकर दरबे में छुपे थे। जब भरे हुए अनुभव का स्पर्श उन्हें छूता है, शब्द भरे हुए अथवा या उनका कोई भी बड़ा स्वरूप करता है, तब अपना असल अर्थ उन्हें दे देता है, तब वह दरबार में चला जाता है। भाषा का प्रश्न, अर्थात सामाजिक मनोवृत्ति फूलों का प्रश्न है। समाज को बिना किसी प्रकार की मधुरता भाषा को छोड़ दे तो उसका अर्थ नहीं रह जायेगा, भाषा नष्ट कर दी जायेगी तो उन अनुभवों की पुनरावृत्ति के अवसर उस कवि तक नहीं पहुँच पायेंगे, जिन्हें उसके अनन्त अर्थ खोजने होते थे। यह मनुष्य का सबसे बड़ा कर्म है कि वह विचार करे और सही संप्रेषण के लिये गढ़े; और अन्ततः इसीलिये कि आगे बढ़कर मनुष्य का कर्म भी भाषा के मूल अर्थ का काम नहीं देखकर छल रूप ले लेता है। क्या हम भाषा को भ्रान्त हरण की परिणिति राजनीतिक और सामाजिक जीवन के सच रूप में नहीं देख रहे?" (गद्यांश संक्षिप्त)।
(क) प्रस्तुत गद्यांश के लिये उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ख) उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर भाषा की भूमिका पर प्रकाश डालिये।
(ग) उपर्युक्त गद्यांश का संक्षेपण कीजिये।