सिटिजन चार्टर का उद्देश्य नहीं है –
- (1)गुणात्मक और समयबद्ध सेवा प्रदान करना
- (2)नागरिक उन्मुखी शासन
- (3)उत्तरदायी सरकार
- (4)जनता की माँगों की प्रभावी सुनवाई का तंत्र सृजित करना
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), जनता की माँगों की प्रभावी सुनवाई का तंत्र सृजित करना.
प्रश्न पूछता है कि सिटिजन चार्टर का उद्देश्य क्या नहीं है, इसलिए तीन विकल्प उसके उद्देश्य होंगे और एक किसी अलग साधन का काम।
सिटिजन चार्टर किसी विभाग की सार्वजनिक घोषणा है: वह कौन-सी सेवाएँ देता है, हर सेवा के लिए किस स्तर और समय-सीमा का वचन देता है, और वचन पूरा न होने पर नागरिक कहाँ शिकायत कर सकता है।
इसलिए गुणात्मक और समयबद्ध सेवा (विकल्प (1)), नागरिक उन्मुखी शासन (विकल्प (2)) और उत्तरदायी सरकार (विकल्प (3)) उसके उद्देश्य हैं।
विकल्प (4), जनता की माँगों की प्रभावी सुनवाई का तंत्र सृजित करना, एक अलग व्यवस्था बनाने की बात है — ऐसे अधिकारी जो लोगों की माँगें और शिकायतें तय समय में सुनें और उन पर निर्णय दें। चार्टर नागरिक को शिकायत निवारण का रास्ता बताता है; वह सुनवाई का तंत्र नहीं बनाता।
राजस्थान ने यह तंत्र एक अलग कानून से बनाया: राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012, जिसमें लोक सुनवाई अधिकारी और अपील की व्यवस्था है।
याद रखने की बात: चार्टर मानक घोषित करता है; सुनवाई का कानून मंच बनाता है। DARPG का सेवोत्तम मॉडल भी इन्हें अलग रखता है, जिसमें सिटिजन चार्टर और लोक शिकायत निवारण अलग-अलग मॉड्यूल हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)गुणात्मक और समयबद्ध सेवा प्रदान करना — यह चार्टर का मूल है, इसलिए यह "उद्देश्य नहीं है" वाला विकल्प नहीं हो सकता।
1997 में भारत ने जब चार्टर अपनाए, तो हर चार्टर में सेवा के मानक और सेवा देने की समय-सीमा बतानी थी। चार्टर नागरिक को बताता है कि किस गुणवत्ता की सेवा की और कब तक अपेक्षा करे — यही यह विकल्प बताता है।
- (2)नागरिक उन्मुखी शासन — चार्टर नागरिक के लिए लिखा जाता है। उसमें सेवाओं की सूची, विभाग की नागरिकों से अपेक्षाएँ और किससे संपर्क करें, यह दिया होता है, ताकि विभाग से काम लेना कम अस्पष्ट हो।
इसलिए नागरिक उन्मुखी, नागरिक-केंद्रित प्रशासन चार्टर का उद्देश्य है, उससे बाहर की कोई चीज़ नहीं।
- (3)उत्तरदायी सरकार — मानक प्रकाशित करने से एक पैमाना बनता है। जब कोई विभाग समय-सीमा और गुणवत्ता का स्तर घोषित कर देता है, तो उसके कामकाज को उस वचन के सामने जाँचा जा सकता है।
इसीलिए उत्तरदायित्व चार्टर का उद्देश्य है। चार्टर शिकायत निवारण का रास्ता भी बताता है, जिसके माध्यम से विभाग को उसके वचन के प्रति जवाबदेह ठहराया जाता है।
अवधारणा
सिटिजन चार्टर वह दस्तावेज़ है जिसमें कोई सार्वजनिक संगठन अपनी सेवाओं के मानकों के प्रति सार्वजनिक रूप से वचनबद्ध होता है। उसमें सामान्यतः दी जाने वाली सेवाएँ, हर सेवा का मानक और समय-सीमा, संगठन की नागरिकों से अपेक्षाएँ, और मानक पूरा न होने पर शिकायत का स्थान बताया जाता है।
यह विचार 1991 में यूनाइटेड किंगडम में प्रधानमंत्री जॉन मेजर के समय शुरू हुआ। भारत ने इसे 1997 में अपनाया, और प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) भारत सरकार के लिए चार्टरों का समन्वय करता है।
चार्टर अपने-आप में एक घोषणा है, ऐसा कानून नहीं जिसे नागरिक लागू करवा सके। लागू करवाए जा सकने वाले अधिकार अलग कानूनों से आए।
राजस्थान ने समयबद्ध सेवाओं के लिए राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011 और शिकायतों पर समयबद्ध सुनवाई के लिए राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012 पारित किया।
RPSC के 2024 के प्रारंभिक पाठ्यक्रम में "राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था" के अंतर्गत "लोक नीति एवं अधिकार" शीर्षक में "लोक नीति, विधिक अधिकार एवं नागरिक अधिकार–पत्र" सूचीबद्ध है।
इससे तीन साधन साथ-साथ आते हैं: चार्टर, जो मानक घोषित करता है; सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, जो सरकारी अभिलेख खोलता है; और राजस्थान के सेवा-गारंटी तथा सुनवाई वाले कानून, जो नागरिकों को लागू करवाए जा सकने वाले अधिकार देते हैं।
हर साधन का काम अलग है: चार्टर मानक और शिकायत का रास्ता बताता है, सूचना का अधिकार अभिलेखों तक पहुँच देता है, और सेवा-गारंटी तथा सुनवाई के कानून समयबद्ध सेवा और सुनवाई को कानूनी अधिकार बनाते हैं।
मुख्य तथ्य
- सिटिजन चार्टर का विचार 1991 में यूनाइटेड किंगडम में प्रधानमंत्री जॉन मेजर के समय शुरू हुआ।
- भारत ने 24 मई 1997 को मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में, प्रभावी और संवेदनशील सरकार के लिए कार्य योजना के अंतर्गत, सिटिजन चार्टर अपनाए।
- चार्टरों में सेवा के मानक, सेवा देने की समय-सीमा और शिकायत निवारण के रास्ते शामिल होने थे।
- DARPG के सेवोत्तम मॉडल के तीन मॉड्यूल हैं: सिटिजन चार्टर, लोक शिकायत निवारण, और सेवा प्रदान करने की क्षमता।
- राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012 (2012 का अधिनियम संख्या 22) को 21 मई 2012 को राज्यपाल की अनुमति मिली; यह शिकायतों पर निर्धारित समय-सीमा में सुनवाई का प्रावधान करता है।
विकल्प (4) सुनवाई के कानून का काम बताता है, चार्टर का नहीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- चार्टर शिकायत निवारण का रास्ता बताता है, इसलिए विकल्प (4) उद्देश्य जैसा लग सकता है। शिकायत का स्थान बताना जनता की माँगों की सुनवाई का तंत्र बनाने के समान नहीं है।
- चार्टर एक घोषणा है, लागू करवाया जा सकने वाला कानून नहीं। सेवा या सुनवाई के लागू करवाए जा सकने वाले अधिकार राजस्थान के 2011 और 2012 के अधिनियमों जैसे अलग कानूनों से आते हैं।
- "नहीं" वाले प्रश्न में तीन विकल्प विषय पर सही बैठते हैं। सबसे कम परिचित लगने वाला विकल्प चुनने के बजाय, हर विकल्प को चार्टर के अपने काम के सामने परखें।
सिटिजन चार्टर पर प्रश्न वह उद्देश्य, तत्व या विशेषता पूछ सकता है जो उससे संबंधित नहीं है।
प्रश्न पड़ोसी कानूनों पर भी जा सकता है — शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार कौन-सा अधिनियम देता है, या सेवाओं की समयबद्ध प्रदायगी की गारंटी कौन-सा साधन देता है — और सूचना का अधिकार अधिनियम के उद्देश्यों पर भी।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 और 2016 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सिटिजन चार्टर तैयार करने का निर्णय कहाँ लिया गया था?
- (a)मई 1997 में हुए मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में
- (b)1966 में गठित प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग में
- (c)1991 में राष्ट्रीय विकास परिषद् की एक बैठक में
- (d)2005 में हुए मुख्य सचिवों के सम्मेलन में
उत्तर(1) — 24 मई 1997 को मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन ने प्रभावी और संवेदनशील सरकार के लिए कार्य योजना अपनाई, जिसमें सिटिजन चार्टर शामिल थे।विकल्प (2) गलत है, क्योंकि चार्टर का विचार यूनाइटेड किंगडम में 1991 में ही शुरू हुआ, 1966 के बहुत बाद। विकल्प (3) गलत है, क्योंकि भारत का निर्णय 1997 में आया, 1991 में नहीं। विकल्प (4) गलत है, क्योंकि चार्टर 1997 से ही, 2005 से काफ़ी पहले, बनने लगे थे।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012 नागरिक को क्या देता है?
- (a)लोक प्राधिकारियों के पास उपलब्ध सूचना तक पहुँच
- (b)निर्धारित समय-सीमा में किसी शिकायत पर सुनवाई का अवसर
- (c)निश्चित समय में अधिसूचित लोक सेवाओं की प्रदायगी
- (d)सेवानिवृत्त लोक सेवकों के सेवा संबंधी मामलों पर सुनवाई
उत्तर(2) — अधिनियम सुनवाई के अधिकार को निर्धारित समय-सीमा में किसी शिकायत पर सुनवाई के अवसर के रूप में परिभाषित करता है।विकल्प (1) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का विषय है। विकल्प (3) राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011 का विषय है। विकल्प (4) गलत है, क्योंकि अधिनियम में शिकायत की परिभाषा लोक सेवकों — सेवारत या सेवानिवृत्त — के सेवा संबंधी मामलों को बाहर रखती है।