जी.एस.टी. के “इनपुट कर जमा तंत्र” के लाभ के सम्बन्ध में निम्न में से कौन सा कथन सही है ?
- (1)यह दोहरे करारोपण को रोकता है ।
- (2)यह उत्पादन पर कर से बचाता है ।
- (3)यह स्टार्ट–अप को कर से राहत प्रदान करता है ।
- (4)यहाँ उत्पादकों को रिकॉर्ड रखनें की जरूरत नहीं होती है ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), यह दोहरे करारोपण को रोकता है ।
इनपुट कर जमा से पंजीकृत व्यवसाय अपनी खरीद पर पहले से चुकाया गया जी.एस.टी., अपनी बिक्री पर वसूले गए जी.एस.टी. में से घटा सकता है। वह सरकार के पास केवल अंतर जमा करता है।
इस समायोजन के बिना पिछले चरण पर चुकाया गया कर लागत का हिस्सा बन जाता है, और अगला चरण ऐसी कीमत पर कर लगाता है जिसमें पहले से कर शामिल है। यही कर पर कर है — कैस्केडिंग प्रभाव या दोहरा करारोपण, जिसका नाम विकल्प (1) लेता है।
एक उदाहरण से यह स्पष्ट होता है। एक निर्माता ₹100 का कच्चा माल खरीदता है और 18% की दर से ₹18 जी.एस.टी. चुकाता है। वह उत्पाद ₹150 में बेचता है और ₹27 जी.एस.टी. वसूलता है।
इनपुट कर जमा के साथ वह ₹27 − ₹18 = ₹9 चुकाता है, जो उसके द्वारा जोड़े गए ₹50 मूल्य का 18% है। पूरी शृंखला में कुल कर ₹27 है, जो अंतिम मूल्य का ठीक 18% है।
इनपुट कर जमा के बिना ₹150 के उत्पाद पर शृंखला में ₹18 + ₹27 = ₹45 कर लगता।
याद रखने की बात: इनपुट कर जमा जी.एस.टी. को हर चरण पर जोड़े गए मूल्य पर लगने वाला कर बना देता है, और पूरा भार केवल अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)यह उत्पादन पर कर से बचाता है । — इनपुट कर जमा किसी भी चरण से कर नहीं हटाता। शृंखला में निर्माता अब भी जी.एस.टी. चुकाता है — पहले से चुकाए गए कर को समायोजित करने के बाद, केवल अपने जोड़े गए मूल्य पर।
जी.एस.टी. वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगने वाला गंतव्य-आधारित कर है, और इसका भार अंतिम उपभोक्ता तक जाता है। दोहरे करारोपण से बचना, उत्पादन पर कर से बचना नहीं है।
- (3)यह स्टार्ट–अप को कर से राहत प्रदान करता है । — इनपुट कर जमा सामान्य रूप से पंजीकृत व्यक्तियों के लिए है, सी.जी.एस.टी. अधिनियम, 2017 की धारा 16 की शर्तों के अधीन। यह स्टार्ट-अप के लिए कोई रियायत नहीं है और फर्म की आयु के आधार पर कोई भेद नहीं करता।
स्टार्ट-अप के लिए कर राहत अन्य कानूनों से आती है, जैसे पात्र स्टार्ट-अप के लिए आयकर अधिनियम की धारा 80-IAC के अंतर्गत आयकर कटौती।
- (4)यहाँ उत्पादकों को रिकॉर्ड रखनें की जरूरत नहीं होती है । — यह इनपुट कर जमा के काम करने के तरीके का उलटा है। जमा का दावा केवल दस्तावेज़ों के साथ किया जा सकता है: प्राप्तकर्ता के पास कर बीजक या डेबिट नोट होना चाहिए, उसे वस्तुएँ या सेवाएँ मिल चुकी हों, और आपूर्तिकर्ता ने वास्तव में कर चुकाया हो।
सी.जी.एस.टी. अधिनियम हर पंजीकृत व्यक्ति से लेखे रखने की भी अपेक्षा करता है, जिनमें लिया गया इनपुट कर जमा भी शामिल है।
अवधारणा
वस्तु एवं सेवा कर वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगने वाला कर है, जो कच्चे माल से खुदरा बिक्री तक शृंखला के हर चरण पर वसूला जाता है। भारत ने इसे संविधान (एक सौ एकवाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 के बाद 1 जुलाई 2017 को लागू किया।
इनपुट कर जमा तंत्र ही बहु-चरणीय कर को चढ़ते जाने से रोकता है। हर पंजीकृत व्यवसाय अपनी खरीद पर जी.एस.टी. चुकाता है, अपनी बिक्री पर जी.एस.टी. वसूलता है, और सरकार को केवल अंतर देता है।
इस तरह हर चरण पर केवल जोड़े गए मूल्य पर कर लगता है, और कुल कर अंतिम कीमत पर लागू दर के बराबर होता है। जी.एस.टी. से पहले कई कर अलग-अलग खानों में थे, और एक कर का जमा हमेशा दूसरे के सामने समायोजित नहीं हो पाता था — यही वह कैस्केडिंग प्रभाव है जिसे घटाने के लिए जी.एस.टी. बनाया गया।
जमा कागज़ात पर निर्भर है। इसकी शर्तों में वैध बीजक, आपूर्ति की प्राप्ति, आपूर्तिकर्ता द्वारा वास्तव में कर का भुगतान, और प्राप्तकर्ता द्वारा विवरणी (रिटर्न) दाखिल करना शामिल हैं।
RPSC के 2024 के प्रारंभिक पाठ्यक्रम में "आर्थिक अवधारणाएँ एवं भारतीय अर्थव्यवस्था" के अंतर्गत "अर्थशास्त्र की मूलभूत अवधारणाएं" में "वस्तु एवं सेवा कर" नाम से शामिल है: "बजट निर्माण, बैंकिंग, लोक–वित्त, वस्तु एवं सेवा कर, राष्ट्रीय आय, संवृद्धि एवं विकास का आधारभूत ज्ञान"।
इनपुट कर जमा तंत्र के कारण ही जी.एस.टी. को मूल्य-वर्धित कर कहा जाता है। यह स्पष्ट हो जाए तो कई जुड़ी बातें समझ आती हैं: जी.एस.टी. से बाहर रखी गई वस्तुएँ जमा की शृंखला क्यों तोड़ती हैं, कंपोज़िशन योजना वाला व्यापारी जमा आगे क्यों नहीं दे सकता, और बीजकों का मिलान क्यों मायने रखता है।
तंत्र का उद्देश्य और जी.एस.टी. की सीमाएँ, दोनों एक ही चित्र पर टिके हैं: आपूर्ति शृंखला में आगे बढ़ता कर।
मुख्य तथ्य
- भारत में जी.एस.टी. संविधान (एक सौ एकवाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 के बाद 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ।
- इनपुट कर जमा पंजीकृत व्यक्ति को खरीद पर चुकाए गए जी.एस.टी. को बिक्री पर देय जी.एस.टी. के सामने समायोजित करने देता है।
- सी.जी.एस.टी. अधिनियम, 2017 की धारा 16(2) की शर्तों में शामिल हैं: कर बीजक या डेबिट नोट होना, आपूर्ति प्राप्त होना, आपूर्तिकर्ता द्वारा कर का भुगतान, और विवरणी दाखिल करना।
- इनपुट कर जमा के साथ हर चरण केवल अपने जोड़े गए मूल्य पर कर देता है, इसलिए कुल कर अंतिम कीमत पर लागू दर के बराबर होता है।
- मानव उपभोग के लिए मदिरा जी.एस.टी. से बाहर है; फरवरी 2025 तक पेट्रोलियम क्रूड, डीज़ल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस और विमानन टरबाइन ईंधन पर जी.एस.टी. परिषद् की सिफ़ारिश की प्रतीक्षा थी।
उदाहरण के लिए आँकड़े। जमा के कारण हर चरण केवल अपने मूल्य-वर्धन पर कर देता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यहाँ "दोहरा करारोपण" का अर्थ एक ही आपूर्ति शृंखला में कर पर कर है, किसी व्यक्ति पर दो देशों द्वारा कर लगना नहीं। इस शब्द को इनपुट कर जमा के संदर्भ में पढ़ें।
- इनपुट कर जमा व्यवसाय द्वारा जमा किया जाने वाला कर घटाता है; वह उत्पादन को कर-मुक्त नहीं बनाता। अंतिम उपभोक्ता पूरे मूल्य पर जी.एस.टी. वहन करता है।
- इनपुट कर जमा दस्तावेज़ों पर चलता है। रिकॉर्ड की जरूरत न होने की बात कहने वाला विकल्प उन बीजक और विवरणी वाली शर्तों के विरुद्ध है जिन पर जमा टिका है।
जी.एस.टी. पर प्रश्न किसी विशेषता (जैसे इनपुट कर जमा या गंतव्य सिद्धांत) का उद्देश्य, जी.एस.टी. से बाहर रखी गई वस्तुएँ, इसके पीछे की संस्थाएँ (जी.एस.टी. परिषद्, संविधान संशोधन), या वृद्धि और कीमतों पर इसका अपेक्षित प्रभाव पूछ सकता है।
प्रश्न केवल उद्देश्य की परख भी कर सकता है, जैसा यह प्रश्न करता है: इसके विकल्पों में वास्तविक लाभ के साथ उसकी गलत व्याख्या, एक असंबंधित रियायत और रिकॉर्ड के बारे में एक गलत दावा रखे गए हैं।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक व्यापारी ₹200 का माल खरीदता है और 12% की दर से ₹24 जी.एस.टी. चुकाता है। वह उसे ₹300 में बेचता है और 12% की दर से जी.एस.टी. वसूलता है। इनपुट कर जमा का उपयोग करने पर उसे सरकार के पास कितना जी.एस.टी. जमा करना होगा?
- (a)₹36
- (b)₹24
- (c)₹12
- (d)₹60
उत्तर(3) — बिक्री पर जी.एस.टी. = ₹300 का 12% = ₹36। इनपुट कर जमा = ₹24। देय कर = ₹36 − ₹24 = ₹12, जो जोड़े गए ₹100 मूल्य का 12% है।विकल्प (1) जमा को अनदेखा करता है। विकल्प (2) खरीद पर पहले से चुकाया गया कर है। विकल्प (4) खरीद और बिक्री के कर को जोड़ता है — वही कैस्केडिंग जिसे इनपुट कर जमा रोकता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
संविधान में वस्तु एवं सेवा कर की परिभाषा के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा जी.एस.टी. के दायरे से बाहर है?
- (a)घी
- (b)मानव उपभोग के लिए मादक मदिरा
- (c)ब्रांडेड पैकेज्ड खाद्य पदार्थ
- (d)रेस्तराँ सेवाएँ
उत्तर(2) — अनुच्छेद 366(12क) वस्तु एवं सेवा कर को आपूर्ति पर लगने वाले कर के रूप में परिभाषित करता है, मानव उपभोग के लिए मादक मदिरा की आपूर्ति को छोड़कर। विकल्प (1), (3) और (4) ऐसी आपूर्तियाँ हैं जो जी.एस.टी. के दायरे में आती हैं, उन पर दर या छूट जो भी लागू हो।