राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक समिति की सिफ़ारिश पर की जाती है । निम्नलिखित में से कौन इस समिति का सदस्य नहीं होता है ?
- (1)मुख्यमंत्री
- (2)राज्य विधान सभा में विपक्ष का नेता
- (3)मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत केबिनेट मंत्री
- (4)उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश.
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15(3) यह नियुक्ति नियंत्रित करती है। राज्यपाल राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति की सिफारिश पर करता है।
उस समिति के तीन सदस्य हैं: मुख्यमंत्री, जो इसके अध्यक्ष होते हैं; विधान सभा में विपक्ष का नेता; और मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत एक केबिनेट मंत्री।
विकल्प (1), (2) और (3) ठीक यही तीन हैं। उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश इस समिति का सदस्य नहीं होता, इसलिए विकल्प (4) उत्तर है।
अधिनियम उस स्थिति का भी प्रावधान करता है जब विधान सभा में विपक्ष का कोई मान्यता प्राप्त नेता न हो। उसका स्पष्टीकरण ऐसे में विपक्ष के सबसे बड़े एकल समूह के नेता को इस प्रयोजन के लिए विपक्ष का नेता मानता है।
RTI चयन समिति में मुख्यमंत्री, विपक्ष का नेता और एक केबिनेट मंत्री होते हैं — इसमें कोई न्यायिक सदस्य नहीं है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)मुख्यमंत्री — मुख्यमंत्री सदस्य हैं — बल्कि RTI अधिनियम की धारा 15(3)(i) के अंतर्गत समिति के अध्यक्ष हैं।
समिति का तीसरा सदस्य, केबिनेट मंत्री, भी मुख्यमंत्री ही चुनते हैं। इसलिए यह विकल्प समिति के अध्यक्ष का नाम लेता है, समिति से बाहर के किसी व्यक्ति का नहीं।
- (2)राज्य विधान सभा में विपक्ष का नेता — विधान सभा में विपक्ष का नेता धारा 15(3)(ii) के अंतर्गत दूसरा सदस्य है। यह स्थान सूचना आयुक्तों के चयन में विपक्ष को आवाज़ देता है।
यदि विपक्ष का कोई नेता मान्यता प्राप्त न हो, तो विपक्ष के सबसे बड़े एकल समूह का नेता यह स्थान लेता है। दोनों ही स्थितियों में यह पद समिति का हिस्सा है।
- (3)मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत केबिनेट मंत्री — यह धारा 15(3)(iii) के अंतर्गत तीसरा सदस्य है: मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत एक केबिनेट मंत्री।
मुख्यमंत्री और इस मंत्री को मिलाकर समिति के तीन में से दो सदस्य सरकार पक्ष से आते हैं। यह सदस्य समिति का हिस्सा है, इसलिए यह विकल्प उत्तर नहीं है।
अवधारणा
RTI अधिनियम, 2005 केन्द्रीय सूचना आयोग के साथ-साथ हर राज्य में राज्य सूचना आयोग का प्रावधान करता है। यह आयोग अधिनियम के अंतर्गत शिकायतें और द्वितीय अपीलें सुनता है।
राज्य आयोग में एक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस राज्य सूचना आयुक्त होते हैं। उन्हें सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित व्यक्ति होना चाहिए, जिन्हें विधि, समाज सेवा, पत्रकारिता या प्रशासन जैसे क्षेत्रों का अनुभव हो।
वे संसद या किसी विधानमंडल के सदस्य नहीं हो सकते, कोई अन्य लाभ का पद नहीं रख सकते, किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हो सकते, और कोई कारोबार या पेशा नहीं कर सकते।
RTI (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने केंद्र सरकार को उनका कार्यकाल तय करने का अधिकार दिया; RTI नियम, 2019 ने इसे तीन वर्ष रखा। सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर हटाने के लिए राज्यपाल द्वारा भेजे गए संदर्भ पर उच्चतम न्यायालय की जाँच आवश्यक है।
पाठ्यक्रम का शीर्षक "राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था" "संस्थाएं" के अंतर्गत "राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग" सूचीबद्ध करता है। इनमें हर संस्था की नियुक्ति का अपना नियम है।
राजस्थान में लोकायुक्त की नियुक्ति करते समय राज्यपाल राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 3 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करता है। RTI अधिनियम मुख्य न्यायाधीश को कोई भूमिका नहीं देता।
केंद्र में यही ढाँचा एक स्तर ऊपर दोहराया जाता है: प्रधानमंत्री, लोक सभा में विपक्ष का नेता और एक केंद्रीय केबिनेट मंत्री।
मुख्य तथ्य
- RTI अधिनियम, 2005 की धारा 15(3) के अंतर्गत राज्यपाल राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति की सिफारिश पर करता है।
- समिति में मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधान सभा में विपक्ष का नेता और मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत एक केबिनेट मंत्री होते हैं।
- राज्य सूचना आयोग में एक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस राज्य सूचना आयुक्त होते हैं।
- RTI (संशोधन) अधिनियम, 2019 के बाद 24 अक्टूबर 2019 को अधिसूचित RTI नियम, 2019 ने सूचना आयुक्तों का कार्यकाल तीन वर्ष तय किया।
- राजस्थान के लोकायुक्त की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता से परामर्श करके करता है।
उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश लोकायुक्त वाले नियम में आता है, RTI समिति में नहीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि हर चयन समिति में कोई न्यायाधीश होता है। RTI समिति में मुख्यमंत्री, विपक्ष का नेता और एक केबिनेट मंत्री होते हैं।
- लोकायुक्त वाला नियम यहाँ लगा देना। राजस्थान में लोकायुक्त की नियुक्ति से पहले राज्यपाल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करता है, पर यह एक अलग अधिनियम से आता है।
- राज्य और केंद्र की समितियाँ मिला देना। केंद्र में सदस्य प्रधानमंत्री, लोक सभा में विपक्ष का नेता और एक केंद्रीय केबिनेट मंत्री हैं, और नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
नियुक्ति पर प्रश्न किसी चयन समिति के संभावित सदस्यों की सूची देकर पूछ सकता है कि कौन शामिल है या कौन बाहर, या यह कि आयुक्त को कौन नियुक्त करता है और कौन हटा सकता है।
इससे जुड़ा प्रश्न सूचना आयोगों की तुलना मानवाधिकार आयोगों और लोकायुक्त से कर सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 और 2021 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राज्य सूचना आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के अतिरिक्त अधिकतम कितने राज्य सूचना आयुक्त हो सकते हैं?
- (a)पाँच
- (b)सात
- (c)दस
- (d)बारह
उत्तर(3) — धारा 15(2)(b) अधिकतम दस राज्य सूचना आयुक्तों की अनुमति देती है। पाँच (1), सात (2) और बारह (4) अधिनियम से मेल नहीं खाते। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
RTI अधिनियम, 2005 की धारा 17 के अंतर्गत राज्यपाल राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर किसकी जाँच के बाद हटा सकता है?
- (a)राज्य का उच्च न्यायालय
- (b)उच्चतम न्यायालय
- (c)राज्य विधान सभा
- (d)मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति
उत्तर(2) — धारा 17(1) के अनुसार राज्यपाल के संदर्भ पर उच्चतम न्यायालय जाँच करके प्रतिवेदन देता है। उच्च न्यायालय (1) और विधान सभा (3) की ऐसी कोई भूमिका नहीं है, और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति (4) नियुक्ति की सिफारिश करती है, हटाने की नहीं।