निम्नलिखित में से किस मुख्यमंत्री ने अधिकतम बार राजस्थान में राष्ट्रपति शासन का सामना किया ?
- (1)हरिदेव जोशी
- (2)भैरोंसिंह शेखावत
- (3)जयनारायण व्यास
- (4)शिवचरण माथुर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), भैरोंसिंह शेखावत.
राजस्थान विधान सभा के सदन-कार्यकाल अभिलेख में राज्य में राष्ट्रपति शासन की चार अवधियाँ दर्ज हैं: 1967, 1977, 1980 और 1992–93। उत्तर का तरीका यह है कि हर अवधि को उस मुख्यमंत्री से जोड़ें जिसका कार्यकाल उससे बाधित हुआ।
1967 की अवधि मोहनलाल सुखाड़िया के दो कार्यकालों के बीच आई। 1977 की अवधि ने हरिदेव जोशी की सरकार की जगह ली। 17 फरवरी 1980 और 15 दिसंबर 1992 से शुरू हुई दोनों अवधियों ने भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व वाली सरकारों को समाप्त किया।
इस तरह विकल्पों में केवल शेखावत का नाम दो अवधियों से जुड़ता है। जोशी एक से जुड़ते हैं। चारों में से कोई अवधि जयनारायण व्यास या शिवचरण माथुर के कार्यकाल में नहीं आती।
दूसरी अवधि के बाद शेखावत फिर पद पर लौटे। दसवीं विधान सभा 4 दिसंबर 1993 को गठित हुई, और वे उस सदन में 1998 तक मुख्यमंत्री रहे।
हर अवधि को उसके शुरू होने के समय पद पर रहे मुख्यमंत्री के सामने गिनिए — चार अवधियाँ, तीन मुख्यमंत्री, और केवल शेखावत दो बार आते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)हरिदेव जोशी — जोशी वे मुख्यमंत्री हैं जिनकी सरकार की जगह 1977 में राष्ट्रपति शासन लगा, 30 अप्रैल से 21 जून 1977 तक, जब केंद्र में जनता पार्टी सत्ता में आ चुकी थी।
वे तीन बार मुख्यमंत्री रहे (1973–77, 1985–88 और 1989–90), जिससे वे सबसे संभावित उत्तर लग सकते हैं। पर केवल उनका पहला कार्यकाल राष्ट्रपति शासन पर समाप्त हुआ, इसलिए उन्होंने इसका सामना एक बार किया।
- (3)जयनारायण व्यास — व्यास 1950 के दशक की आरंभिक निर्वाचित सरकारों से जुड़े हैं। विधान सभा के लोकतांत्रिक सरकारों वाले अभिलेख में वे 26 अप्रैल 1951 से 2 मार्च 1952 तक मुख्यमंत्री दर्ज हैं, और पहली विधान सभा (1952–57) के दौरान वे फिर इस पद पर रहे।
राजस्थान में पहला राष्ट्रपति शासन मार्च 1967 में लगा, उनके कार्यकालों के एक दशक से अधिक बाद, इसलिए मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने कभी इसका सामना नहीं किया।
- (4)शिवचरण माथुर — माथुर दो बार मुख्यमंत्री रहे, 1981–85 और 1988–89 में। दोनों कार्यकाल 1980 और 1992 की अवधियों के बीच आते हैं, इसलिए कोई भी राष्ट्रपति शासन पर समाप्त नहीं हुआ।
वे दूसरे संदर्भ में एक ज्ञात उत्तर हैं: RPSC की 2018 की कुंजी उन्हें, अशोक गहलोत के साथ, उन मुख्यमंत्रियों में रखती है जो राजस्थान विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष नहीं रहे थे।
अवधारणा
राष्ट्रपति शासन संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत लगाया जाता है। जब राष्ट्रपति को राज्यपाल के प्रतिवेदन पर या अन्यथा यह समाधान हो जाए कि राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता, तो राष्ट्रपति राज्य के कार्यपालिका कार्य अपने हाथ में ले सकता है।
तब राज्य विधान सभा या तो निलंबित की जाती है या भंग। उद्घोषणा जारी रहने के लिए संसद को दो महीने के भीतर उसका अनुमोदन करना होता है।
व्यवहार में राज्यपाल राष्ट्रपति की ओर से राज्य चलाता है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली निर्वाचित मंत्रिपरिषद् नई सरकार बनने तक पद से बाहर रहती है।
एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 356 की उद्घोषणा न्यायिक पुनरावलोकन के अधीन है, और सरकार के बहुमत की परख का स्थान सदन का पटल है।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था" के अंतर्गत राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में "राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद्, विधानसभा, उच्च न्यायालय" शामिल हैं। इसके अंतर्गत प्रश्न राज्य के अपने राजनीतिक अभिलेख पर आधारित हो सकते हैं: कब कौन पद पर था, और सरकारें कैसे बनीं और कैसे समाप्त हुईं।
राजस्थान में राष्ट्रपति शासन पर प्रश्न अवधियों की संख्या पूछ सकता है (2013 का प्रश्नपत्र; 2016 के प्रश्नपत्र ने इसे 30 जून 2016 की तिथि पर टिकाया), या यह कि कोई अवधि किस मुख्यमंत्री या किस वर्ष से जुड़ी है, जैसा यह प्रश्न पूछता है।
दोनों का उत्तर चार अवधियों की उसी छोटी सूची से मिलता है। हर तिथि के साथ पद छोड़ने वाले मुख्यमंत्री का नाम याद रखने से दोनों तरह के प्रश्न सध जाते हैं।
बाद की अवधियों के पीछे की तीन राष्ट्रीय घटनाएँ भारतीय राजव्यवस्था से भी जुड़ती हैं: 1977 और 1980 में केंद्र में सरकार का बदलना, और दिसंबर 1992 की घटनाएँ।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान विधान सभा के अभिलेख में राज्य में राष्ट्रपति शासन की चार अवधियाँ दर्ज हैं: 1967, 1977, 1980 और 1992–93।
- राष्ट्रपति शासन 13 मार्च से 26 अप्रैल 1967 तक रहा, मोहनलाल सुखाड़िया के दो कार्यकालों के बीच।
- राष्ट्रपति शासन 30 अप्रैल से 21 जून 1977 तक रहा, हरिदेव जोशी की सरकार के बाद।
- भैरोंसिंह शेखावत की सरकारों के बाद 17 फरवरी से 5 जून 1980 तक और 15 दिसंबर 1992 से 3 दिसंबर 1993 तक राष्ट्रपति शासन रहा।
- लगभग एक वर्ष चली 1992–93 की अवधि चारों में सबसे लंबी थी।
तिथियाँ राजस्थान विधान सभा के अभिलेख के अनुसार। दो अवधियों से जुड़ने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री शेखावत हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- राष्ट्रपति शासन का "सामना करने" का अर्थ है वह मुख्यमंत्री जिसका कार्यकाल इससे बाधित हुआ, न कि वह जो इसके समाप्त होने पर पद पर आया। जगन्नाथ पहाड़िया 1980 की अवधि के बाद मुख्यमंत्री बने; उन्होंने इसका सामना नहीं किया।
- कई कार्यकालों वाला मुख्यमंत्री अपने-आप सबसे अधिक अवधियों वाला नहीं हो जाता। हरिदेव जोशी तीन बार पद पर रहे, पर केवल एक अवधि से जुड़े हैं।
- 1967 की अवधि गिनती से छूट सकती है, क्योंकि उसके पहले और बाद दोनों समय सुखाड़िया मुख्यमंत्री थे। इसे छोड़ने पर चार की जगह तीन अवधियाँ बनती हैं।
राष्ट्रपति शासन की अवधियों की सूची कई रूपों में पूछी जा सकती है। प्रश्न पूछ सकता है कि किसी निश्चित तिथि तक यह कितनी बार लगा, कोई अवधि किस मुख्यमंत्री की सरकार के बाद आई, या कौन-सी अवधि सबसे लंबी थी।
यह राजस्थान के मुख्यमंत्रियों पर कथनों के किसी समूह में एक कथन के रूप में भी आ सकती है, जहाँ बाकी कथन कार्यकाल और "पहले" होने वाले तथ्यों की परख करते हैं।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023, 2016 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जनवरी 2025 तक राजस्थान में कितनी बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया था?
- (a)3
- (b)4
- (c)5
- (d)6
उत्तर(2) — राजस्थान विधान सभा चार अवधियाँ दर्ज करती है: 1967, 1977, 1980 और 1992–93। विकल्प (1) चारों में से एक छोड़ देता है, जैसे 1967 की छोटी अवधि। विकल्प (3) और (4) ऐसी अवधियाँ गिनते हैं जो विधान सभा की सूची में नहीं हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जून 1980 में राष्ट्रपति शासन समाप्त होने पर राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन बना?
- (a)शिवचरण माथुर
- (b)जगन्नाथ पहाड़िया
- (c)हरिदेव जोशी
- (d)हीरालाल देवपुरा
उत्तर(2) — सातवीं विधान सभा 6 जून 1980 को गठित हुई और जगन्नाथ पहाड़िया उसके पहले मुख्यमंत्री थे। विकल्प (1), शिवचरण माथुर, 1981 में पहाड़िया के बाद आए। विकल्प (4), हीरालाल देवपुरा, 1985 में थोड़े समय के लिए पद पर रहे। विकल्प (3), हरिदेव जोशी, 1985 में मुख्यमंत्री के रूप में लौटे, 1980 में नहीं।